संपादकीय

हाथरस केसः पीड़िता के परिजनों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर की याचिका, उत्तर प्रदेश पुलिस की अवैध हिरासत से रिहा किए जाने की मांग
हाथरस केसः पीड़िता के परिजनों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर की याचिका, उत्तर प्रदेश पुलिस की अवैध हिरासत से रिहा किए जाने की मांग

हाथरस मामले में पीड़िता के परिजनों ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कथित अवैध हिरासत के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है। अधिवक्ता काशिफ अब्बास रिजवी और जौन अब्बास के माध्यम से अखिल भारतीय वाल्मीकि महापंचायत ने हिरासत में लिए गए परिवार की ओर से रिट याचिका दायर की है।मामले जस्टिस को प्रीतिंकर दिवाकर और प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था, जिस पर उन्होंने फैसला सुरक्षित रखा । आरोप है कि मृतक पीड़िता के करीबी परिजनों यानी पिता, मां, दो भाइयों,...

अपराध के समय आरोपी किशोर था: सुप्रीम कोर्ट ने चार दशक पुराने केस में आरोपी के आजीवन कारावास को रद्द किया
"अपराध के समय आरोपी किशोर था": सुप्रीम कोर्ट ने चार दशक पुराने केस में आरोपी के आजीवन कारावास को रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट ने 1981 के हत्या के मामले में आरोपी एक व्यक्ति पर लगाया गया आजीवन कारावास की सजा को रद्द कर दिया है, जिसमें कहा गया है कि अपराध की तारीख पर उसकी आयु 18 वर्ष से कम थी। न्यायमूर्ति एस अब्दुल नज़ीर और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने हालांकि किशोर न्याय अधिनियम, 2000 अधिनियम के तहत दोषी ठहराया और किशोर न्याय बोर्ड को हिरासत और कस्टडी के संबंध में आदेश पारित करने का निर्देश दिया।दरअसल सत्य देव और अन्य को ट्रायल कोर्ट द्वारा दोषी ठहराया गया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इलाहाबाद...

(COVID19), लोगों को इस गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए कि स्थिति में सुधार हुआ है और जीवन सामान्य हो सकता है : त्रिपुरा हाईकोर्ट
(COVID19), लोगों को इस गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए कि स्थिति में सुधार हुआ है और जीवन सामान्य हो सकता है : त्रिपुरा हाईकोर्ट

त्रिपुरा हाईकोर्ट ने मंगलवार (06 अक्टूबर) को कहा है कि राज्य के लोगों को इस गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए कि कोरोना वायरस प्रसार में आकस्मिक सुधार हुआ है और अब जीवन सामान्य हो सकता है। मुख्य न्यायाधीश अकिल कुरैशी और न्यायमूर्ति सुभाषिश तालपात्रा की खंडपीठ ने एक याचिका पर (हाईकोर्ट द्वारा लिए गए स्वत संज्ञान के बाद जनहित याचिका की प्रकृति में) सुनवाई करते हुए त्रिपुरा राज्य में कोरोनावायरस के प्रसार की स्थिति और संबंधित मुद्दों पर विचार किया था। न्यायालय ने 11 सितम्बर 2020, 18 सितम्बर 2020 और 28...

जमानत के लिए असंगत शर्तों को लगाकर आरोपी के अधिकार को भ्रामक नहीं बनाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
जमानत के लिए असंगत शर्तों को लगाकर आरोपी के अधिकार को भ्रामक नहीं बनाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

अदालत द्वारा जमानत देने के लिए लगाई जाने वाली शर्तों में अभियुक्तों के अधिकारों के साथ आपराधिक न्याय के प्रवर्तन में जनहित को संतुलित किया जाना चाहिए, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी की पीठ ने कहा कि न्याय के प्रशासन को सुविधाजनक बनाने, अभियुक्तों की उपस्थिति को सुरक्षित करने और अभियुक्त की स्वतंत्रता का जांच, गवाहों को रोकने या न्याय में बाधा डालने में दुरुपयोग ना हो, ये सुनिश्चित किया जाना चाहिए।अदालत बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील पर...

सार्वजनिक स्थानों पर अनिश्चित काल तक कब्जा नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग धरने पर कहा
सार्वजनिक स्थानों पर अनिश्चित काल तक कब्जा नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग धरने पर कहा

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को माना कि सार्वजनिक स्थानों पर अनिश्चित काल तक कब्जा नहीं किया जा सकता है। "असहमति और लोकतंत्र हाथोंहाथ चलता है, लेकिन निर्धारित क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन किया जाना चाहिए," न्यायमूर्ति एसके कौल, न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने विरोध करने के अधिकार के दायरे में ये निर्णय सुनाया कि क्या इस तरह के अधिकार पर कोई सीमाएं हो सकती हैं।अदालत ने कहा कि "सोशल मीडिया चैनल अक्सर खतरे से भरे होते हैं" और वे अत्यधिक ध्रुवीकरण वाले वातावरण की ओर ले...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को NDPS मामले में जमानत दी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को NDPS मामले में जमानत दी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती, सैमुअल मिरांडा और दीपेश सावंत को जमानत दे दी है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने इन सभी के खिलाफ केस पंजीकृत किया था, जिसमें आरोप था कि इन्होंने दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत को ड्रग्स खरीदने में मदद की थी।हालांकि, पीठ ने रिया के भाई शोविक चक्रवर्ती और अब्देल बसिथ परिहार की जमानत याचिका खारिज कर दी। जस्टिस सारंग वी कोतवाल की एकल पीठ ने लंबी सुनवाई के बाद 29 सितंबर को जमानत के आदेशों को सुरक्षित रख लिया था। आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक...

हाथरस जा रहे पत्रकार की गिरफ्तारी : केरल पत्रकार यूनियन ने सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की
हाथरस जा रहे पत्रकार की गिरफ्तारी : केरल पत्रकार यूनियन ने सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की

केरल यूनियन ऑफ़ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (KUWJ) ने केरल के पत्रकार, सिद्धिक कप्पन को यूपी पुलिस द्वारा गिरफ़्तार करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है, जब वह हाथरस में 19 साल की दलित लड़की से बलात्कार और हत्या की घटना को कवर करने के लिए जा रहे थे। गिरफ्तारी को गैरकानूनी और असंवैधानिक करार देते हुए, KUWJ ने याचिका दायर की है कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उनको तत्काल प्रस्तुत करें और "अवैध हिरासत" से मुक्त किया जाए। याचिका में कहा गया है कि गिरफ्तारी डी के बसु बनाम पश्चिम...

हाथरस कांड : सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से गवाह संरक्षण योजना मांगी, पक्षकारों से इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई का दायरा विस्तृत करने पर सुझाव मांगा
हाथरस कांड : सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से गवाह संरक्षण योजना मांगी, पक्षकारों से इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई का दायरा विस्तृत करने पर सुझाव मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश राज्य को निर्देश दिया कि वह उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में उच्च जाति के चार पुरुषों द्वारा कथित रूप से सामूहिक बलात्कार की शिकार 19 वर्षीय लड़की के परिवार के लिए गवाह संरक्षण योजना का एक हलफनामा दायर करे।मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस, ए एस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यन की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल से भी कहा कि वह यूपी राज्य से यह पता लगाए कि पीड़ित परिवार ने प्रतिनिधित्व के लिए वकील चुना है या नहीं।पीठ ने आगे कहा कि सभी पक्षकारों को इलाहाबाद...

Accused Apologized For His Phone Being Misused, Showed Respect & Esteem To UP CM Yogi Adityanath
यूपी सरकार की छवि खराब करने का "योजनाबद्ध प्रयास": यूपी सरकार ने SC से हाथरस मामले को सीबीआई को सौंपने की मांग की

यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से हाथरस गैंग रेप मामले की सीबीआई जांच का आदेश देने को कहा है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि एक केंद्रीय एजेंसी द्वारा निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच हो "जो राज्य प्रशासन के प्रशासनिक नियंत्रण में नहीं है।" यह प्रस्तुति सामाजिक कार्यकर्ता सत्यम दुबे की ओर से अधिवक्ता संजीव मल्होत्रा ​​द्वारा दायर जनहित याचिका में आई है, जिसमें मामले की जांच के लिए सीबीआई जांच या एसआईटी की नियुक्ति की मांग की गई है। याचिका में मामले को उत्तर प्रदेश से दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग की है...

हाथरस केसः संयुक्त राष्ट्र ने भारत में महिलाओं के खिलाफ लगातार हो रहे यौन हिंसा के मामलों पर चिंता व्यक्त की
हाथरस केसः संयुक्त राष्ट्र ने भारत में महिलाओं के खिलाफ लगातार हो रहे यौन हिंसा के मामलों पर चिंता व्यक्त की

संयुक्त राष्ट्र ने भारत में महिलाओं के खिलाफ लगातार हो रहे यौन हिंसा के मामलों पर चिंता व्यक्त की है।हाथरस और बलरामपुर की घटनाओं के मद्देनजर जारी एक बयान में, संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि ये मामले याद दिलाते हैं कि वंचित समूहों की महिलाओं और लड़कियों को लिंग आधारित हिंसा का अधिक खतरा है।यूएन के भारत स्‍थ‌ित रेजिडेंट कोऑर्ड‌िनेटर ने कहा है, "हाथरस और बलरामपुर में कथित बलात्कार और हत्या के हालिया मामले याद दिलाते हैं कि कई सामाजिक संकेतकों पर की गई प्रभावशाली प्रगति के बावजूद, वंचित सामाजिक समूहों...

संविदा विधि (Law of Contract ) भाग 1 : संविदा विधि का अर्थ और उससे संबंधित महत्वपूर्ण बातें
संविदा विधि (Law of Contract ) भाग 1 : संविदा विधि का अर्थ और उससे संबंधित महत्वपूर्ण बातें

यह सीरीज संविदा विधि से संबंधित आलेखों को लेकर प्रारंभ की जा रही है। इस सीरीज के अंतर्गत संविदा विधि से संबंधित समस्त महत्वपूर्ण प्रावधानों को टीका टिप्पणी सहित सारगर्भित आलेखों में समावेश किया जा रहा है। इस सीरीज का उद्देश्य विधि के छात्रों और कानूनी जानकारी प्राप्त करने के इच्छुक व्यक्तियों को सरल से सरलतम भाषा में संविदा विधि की सभी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराना है। यह इस सीरीज का प्रथम आलेख है जिसके माध्यम से संविदा विधि के अर्थ और उस पर संबंधित महत्वपूर्ण बातों पर चर्चा की जा रही है...

[ ऋण स्थगन]  केंद्र के हलफनामे में वो विवरण नहीं जो अदालत ने मांगा था : सुप्रीम ने केंद्र और आरबीआई से उचित हलफनामा मांगा
[ ऋण स्थगन] " केंद्र के हलफनामे में वो विवरण नहीं जो अदालत ने मांगा था" : सुप्रीम ने केंद्र और आरबीआई से उचित हलफनामा मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार, आरबीआई, भारतीय बैंक संघ और व्यक्तिगत बैंकों को अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया, जिसमें ऋण स्थगन को लेकर नीतिगत फैसले, समय सीमा, परिपत्र और सभी शिकायतों पर प्रतिक्रिया दर्ज करनी होगी।न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने रिट याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं पर ध्यान दिया कि 2 अक्टूबर का केंद्रका हलफनामा कई मुद्दों से नहीं निपटता है।यद्यपि इसके अनुच्छेद 18 में, हलफनामे में सरकार द्वारा 8 श्रेणियों के उधारकर्ताओं के संबंध में 2...

[बच्चे की कस्टडी पर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका] सबसे महत्वपूर्ण विचार बच्चे की भलाई है, सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया
[बच्चे की कस्टडी पर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका] सबसे महत्वपूर्ण विचार बच्चे की भलाई है, सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया

नाबालिग बच्चे की कस्टडी के मामले के संबंध में बंदी प्रत्यक्षीकरण की रिट जारी करते समय सबसे महत्वपूर्ण विचार, बच्चे की भलाई, सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया है। शीर्ष अदालत एक पिता द्वारा हाईकोर्ट की लगाई गईं शर्तों के खिलाफ अपील पर विचार कर रही थी जो उसे बच्चे को वापस संयुक्त राज्य अमेरिका ले जाने की अनुमति देते समय लगाई गई थीं। शर्त (ए) के लिए उसे बेंगलुरु के जिला स्वास्थ्य अधिकारी के रैंक के एक अधिकारी से एक प्रमाण पत्र प्राप्त करने की आवश्यकता है जो यह प्रमाणित करे कि "यह देश", भारत COVID -19...

कोर्ट अभियुक्त के वादे से मुकर जाने के कारण मेरिट के आधार पर उसकी जमानत याचिका सुनने से इनकार नहीं कर सकता : सुप्रीम कोर्ट
कोर्ट अभियुक्त के वादे से मुकर जाने के कारण मेरिट के आधार पर उसकी जमानत याचिका सुनने से इनकार नहीं कर सकता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई कोर्ट एक अभियुक्त की जमानत याचिका मेरिट के आधार पर सुनने से सिर्फ इसलिए इनकार नहीं कर सकता कि वह वाद निपटारे के लिए पूर्व में किये गये प्रस्ताव पर अमल करने में विफल रहा था। न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले को दरकिनार कर दिया, जिसमें अभियुक्त की जमानत याचिका इस आधार पर खारिज कर दी गयी थी कि वह वाद निपटारे के लिए किया गया अपना वायदा पूरा करने में विफल रहा था।यह मामला (जी. सेल्वकुमार बनाम...

[तब्लीगी जमात] सभी मामलों को उत्तर प्रदेश के तीन जिलों में स्‍थानातं‌रित किया जाए, और आठ सप्ताह के भीतर ‌निस्तारण किया जाएः इलाहाबाद हाईकोर्ट
[तब्लीगी जमात] सभी मामलों को उत्तर प्रदेश के तीन जिलों में स्‍थानातं‌रित किया जाए, और आठ सप्ताह के भीतर ‌निस्तारण किया जाएः इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार (30 सितंबर) को निर्देश दिया कि कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, वाराणसी और लखनऊ जोन में तब्लीगी जमात के सदस्यों के खिलाफ लंबित मामलों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, लखनऊ को हस्तांतरित कर दिया जाए।इसी प्रकार, आगरा और मेरठ जोन में लंबित मामलों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, मेरठ को स्थानांतरित किया जाना चाहिए। बरेली जोन में लंबित मामलों को मुख्य न्यायिक (10) मजिस्ट्रेट, बरेली को स्थानांतरित किया जाना चाहिए। उपरोक्त जोन के अंतर्गत आने वाले जिलों के नाम जजमेंट में दिए गए...

CLAT UG के तीन और CLAT PG का एक प्रश्न हटाया गया, UG के चार प्रश्नों के उत्तर बदले गएः कंसोर्टियम ऑफ नेशनल लॉ यूनिवसर्टीज़
CLAT UG के तीन और CLAT PG का एक प्रश्न हटाया गया, UG के चार प्रश्नों के उत्तर बदले गएः कंसोर्टियम ऑफ नेशनल लॉ यूनिवसर्टीज़

कंसोर्टियम ऑफ नेशनल लॉ यूनिवसर्टीज़ ने बताया है कि CLAT UG परीक्षा के तीन प्रश्न और CLAT PG परीक्षाओं के एक प्रश्न को विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के बाद हटा दिया गया है।इसके अलावा यूजी परीक्षा में, चार उत्तर कुंजियां बदली जा रही हैं, जिसमें एक-एक अंग्रेजी और करंट अफेयर्स जीके सहित, और दो क्वांटिटेटिव टेक्नीक्स की हैं। विशेषज्ञ समिति ने लीगल रीजनिंग और लॉजिकल रीजनिंग में किसी भी बदलाव की सिफारिश नहीं की। इसी प्रकार, पीजी परीक्षा कुंजी में कोई बदलाव नहीं होगा।पूरी प्रेस विज्ञप्ति का पढ़ें16 सितंबर,...

हाथरस केसः पीड़िता के परिजनों का नार्को टेस्ट कराने के उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में य‌ाचिका
हाथरस केसः पीड़िता के परिजनों का नार्को टेस्ट कराने के उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में य‌ाचिका

एक्टिविस्ट साकेत गोखले ने हाथरस गैंगरेप मामले में पीड़िता के परिजनों का नार्को-एनालिसिस टेस्ट कराने के उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले पर रोक लगाने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में पत्र याचिका दायर की है। गोखले ने कहा है उत्तर प्रदेश सरकार का निर्णय न केवल गैरकानूनी है, बल्‍कि हाईकोर्ट द्वारा रि: सभ्य और गरिमामय अंतिम संस्कार/दाह संस्कार का अधिकार के रूप में पंजीकृत स्वतः संज्ञान मामले में 12 अक्टूबर 2020 को न्यायालय के समक्ष गवाही देने से परिवार को रोकने का प्रयास है।या‌चिका में कहा गया है, "पीड़िता के...