संपादकीय

2 करोड़ रुपये तक के एमएसएमई ऋण और व्यक्तिगत ऋणों के लिए चक्रवृद्धि ब्याज माफ किया जा सकता है : केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
2 करोड़ रुपये तक के एमएसएमई ऋण और व्यक्तिगत ऋणों के लिए चक्रवृद्धि ब्याज माफ किया जा सकता है : केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को छह महीने की अधिस्थगन अवधि के दौरान 2 करोड़ रुपये तक के एमएसएमई ऋण और व्यक्तिगत ऋणों के लिए चक्रवृद्धि ब्याज माफ करने के अपने फैसले से सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया। भारत संघ ने प्रस्तुत किया कि "छोटे उधारकर्ताओं को संभालने की परंपरा" को जारी रखने का निर्णय लिया गया है और इसलिए, उसने "उधारकर्ताओं की सबसे कमजोर श्रेणी" के लिए उक्त अवधि के लिए ब्याज माफ कर दिया है ...• 2 करोड़रुपये तक का एमएसएमई ऋण• 2 करोड़ रुपये तक के शिक्षा ऋण• 2 करोड़ रुपये तक के आवास ऋण।• 2 करोड़...

हाथरस केस: बलात्कार को साबित करने के लिए पी‌ड़िता के शरीर में वीर्य की मौजूदगी आवश्यक नहीं, उत्तर प्रदेश पुलिस का दावा कानून के विपरीत
हाथरस केस: बलात्कार को साबित करने के लिए पी‌ड़िता के शरीर में वीर्य की मौजूदगी आवश्यक नहीं, उत्तर प्रदेश पुलिस का दावा कानून के विपरीत

उत्तर प्रदेश पुलिस ने दावा किया है कि हाथरस की 19 वर्षीय दलित युवती के साथ बलात्कार नहीं हुआ। उल्लेखनीय है कि वारदात में आई चोटों के कारण युवती की हाल ही मौत हो गई ‌थी।उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के परिणाम में मृतक युवती के शरीर पर वीर्य के नमूनों की मौजूदगी नहीं दिखी है।एडीजी (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने कहा, "एफएसएल की रिपोर्ट भी आ चुकी है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि नमूनों में वीर्य नहीं थे। यह स्पष्ट करता है कि कोई बलात्कार या...

आईपीसी 306 के तहत दुराशय के होने का अनुमान नहीं बल्कि इसे स्पष्ट और विशिष्ट होना चाहिए, SC ने पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने में दोषी करार पति को बरी किया
आईपीसी 306 के तहत दुराशय के होने का अनुमान नहीं बल्कि इसे स्पष्ट और विशिष्ट होना चाहिए, SC ने पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने में दोषी करार पति को बरी किया

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आत्महत्या के लिए उकसाने [धारा 306 आईपीसी] की सामग्री को जाहिर तौर पर होने के अनुमान के तहत नहीं माना जा सकता बल्कि इसे स्पष्ट और विशिष्ट होना चाहिए। जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ ने एक ऐसे पति की दोषसिद्धि को रद्द कर दिया है, जिस पर पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप था।गुरचरण सिंह को अपनी पत्नी की आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी ठहराया गया था। सिंह पर उनके माता-पिता के साथ आईपीसी की धारा 34 के तहत पढ़ी गई धारा 304 बी और 498 ए...

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया सदोष हत्या का प्रयास, जिसमें हत्या न हुई हो [Section 308 IPC] और स्वेच्छा से खतरनाक हथियारों से चोट पहुंचाना [ Section 324 IPC] के बीच अंतर
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया सदोष हत्या का प्रयास, जिसमें हत्या न हुई हो [Section 308 IPC] और स्वेच्छा से खतरनाक हथियारों से चोट पहुंचाना [ Section 324 IPC] के बीच अंतर

एक आपराधिक अपील में पिछले महीने पारित एक आदेश में, सुप्रीम कोर्ट ने सदोष हत्या के प्रयास, जिसमें हत्या न हुई हो [धारा 308 आईपीसी] और जानबूझ़-कर तेज धारदार हथियार से घायल करने [ धारा 324 आईपीसी] के बीच 'सूक्ष्म और बारीक' अंतर समझाया।तीन जजों की पीठ ने कहा, धारा 308 के तहत, चोटें ऐसी होनी चाहिए जिनसे मौत हो सकती हो, जबकि धारा 324 के तहत चोटें जीवन को खतरे में डाल सकती या नहीं डाल सकती है।अदालत एक अभियुक्त को भारतीय दंड संहिता की धारा 308 के तहत दी गई सजा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही...

अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला बार और भाषण की स्वतंत्रता पर मौलिक हमला है: प्रशांत भूषण ने बीसीडी को उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करने का आग्रह किया
अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला बार और भाषण की स्वतंत्रता पर मौलिक हमला है: प्रशांत भूषण ने बीसीडी को उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करने का आग्रह किया

"मैं प्रस्तुत करता हूं कि बार काउंसिल को कानूनी पेशे के सदस्यों के अधिकारों के साथ एकजुटता में खड़ा होना चाहिए, और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का संज्ञान नहीं लेना चाहिए, जिसने बार सदस्यों और सामान्य नागरिकों की स्वतंत्रता, अधिकारों और गरिमा को गंभीर रूप से बाधित और निरस्त किया है।"उक्त टिप्पणी एडवोकेट प्रशांत भूषण ने दिल्ली बार काउंसिल ‌की ओर से भेजे गए पत्र के जवाब में की है। पत्र में पूछा गया था कि स्वतः संज्ञान अवमानना मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद प्रशांत भूषण के खिलाफ कार्यवाही क्यों न...

[ब्रेकिंग] COVID-19 सार्वजनिक आपातकाल नहीं : SC ने बिना ओवरटाइम फैक्टरी एक्ट के तहत श्रमिकों के काम के घंटे बढ़ाने की अधिसूचना रद्द की
[ब्रेकिंग] COVID-19 सार्वजनिक आपातकाल नहीं : SC ने बिना ओवरटाइम फैक्टरी एक्ट के तहत श्रमिकों के काम के घंटे बढ़ाने की अधिसूचना रद्द की

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात श्रम और रोजगार विभाग द्वारा गुजरात में सभी कारखानों को फैक्ट्रियों अधिनियम, 1948 की धारा 59 के प्रावधानों से छूट प्रदान करने से संबंधित उस अधिसूचना को रद्द कर दिया है, जिसमें दैनिक कामकाज के घंटे, साप्ताहिक काम के घंटे, आराम के लिए अंतराल और वयस्क श्रमिकों के विस्तार के अलावा दोगुनी दरों पर ओवरटाइम मज़दूरी के भुगतान से छूट दी गई थी। जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​की पीठ ने कहा है कि महामारी की स्थिति वैधानिक प्रावधानों को दूर...

[CrPC 406] साक्ष्य देने से पहले ही न्यायिक अधिकार क्षेत्र की कमी के आधार पर आपराधिक मामले को ट्रांसफर करने का आदेश नहीं दिया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट
[CrPC 406] साक्ष्य देने से पहले ही न्यायिक अधिकार क्षेत्र की कमी के आधार पर आपराधिक मामले को ट्रांसफर करने का आदेश नहीं दिया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 406 के तहत साक्ष्य देने से पहले ही न्यायिक अधिकार क्षेत्र की कमी के आधार पर आपराधिक मामले को ट्रांसफर करने का आदेश नहीं दिया जा सकता है। न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमण्यन ने कहा (i) कि न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का मुद्दा "अपराध" या "अपराधी" के साथ-साथ ट्रायल के क्षेत्राधिकार का मुद्दा साक्ष्य के माध्यम से स्थापित तथ्यों पर निर्भर करता है, (ii) यदि एक मुद्दा प्रादेशिक क्षेत्राधिकार के अनुसार है, संहिता की 177 से 184 की धारा में उल्लिखित...

हाथरस गैंगरेप केस : सुप्रीम कोर्ट में CBI/SIT से जांच की याचिका, केस को हाथरस से ट्रांसफर करने की मांग
हाथरस गैंगरेप केस : सुप्रीम कोर्ट में CBI/SIT से जांच की याचिका, केस को हाथरस से ट्रांसफर करने की मांग

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक याचिका दायर की गई है जिसमें कथित तौर पर उत्तर प्रदेश के हाथरस में उच्च-जाति के चार पुरुषों द्वारा 19 वर्षीय दलित लड़की के साथ क्रूर बलात्कार और हत्या की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो या एक विशेष जांच दल द्वारा की मांग की गई है। याचिका में आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने में राज्य सरकार की विफलता आरोप लगाया गया है और केस को उत्तर प्रदेश से दिल्ली स्थानांतरित करने के लिए कहा गया है। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, 14 सितंबर को, एक 19 वर्षीय दलित लड़की का अपहरण कर लिया...

 सिविल सर्विस परीक्षा स्थगित नहीं हो सकती : सुप्रीम कोर्ट ने UPSC को अंतिम प्रयास वाले परीक्षार्थियों को अतिरिक्त मौका देने पर विचार करने को कहा
" सिविल सर्विस परीक्षा स्थगित नहीं हो सकती" : सुप्रीम कोर्ट ने UPSC को अंतिम प्रयास वाले परीक्षार्थियों को अतिरिक्त मौका देने पर विचार करने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने COVID-19 महामारी के मद्देनज़र संघ लोक सेवा परीक्षा (UPSC) 2020 को स्थगित करने की याचिका खारिज कर दी है। परीक्षा 4 अक्टूबर, 2020 के लिए निर्धारित है।जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने परीक्षा को स्थगित करने से इनकार कर दिया और UPSC और साथ ही केंद्र को निर्देश जारी किया कि वे विचार करें कि जो उम्मीदवार अपने अंतिम प्रयास में हैं, उन्हें एक और मौका, ऊपरी आयु-सीमा का विस्तार किए बिना दिया जाएगा।अदालत ने आगे उल्लेख किया कि जैसा कि हाल ही में...

रिकॉर्ड पर कोई मेडिकल साक्ष्य नहीं है, जिससे यह दिखे कि आरोपी ड्रग एडिक्ट है: दिल्ली हाईकोर्ट ने NDPS एक्ट के तहत आरोपी को जमानत दी
रिकॉर्ड पर कोई मेडिकल साक्ष्य नहीं है, जिससे यह दिखे कि आरोपी ड्रग एडिक्ट है: दिल्ली हाईकोर्ट ने NDPS एक्ट के तहत आरोपी को जमानत दी

दिल्ली हाईकोर्ट ने नार्कोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सबस्टांस एक्ट की धारा 20 और 29 के तहत आरोपित एक व्यक्ति को जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा है कि अभियोजन पक्ष अपने बयान कि आरोपी एक ड्रग एडिक्ट है, के समर्थन में कोई भी मेडिकल सबूत दिखाने में विफल रहा।जमानत के फैसले में जस्टिस विभु बाखरू की एकल पीठ ने कहा कि यह मानने के लिए उचित आधार हैं कि अभियुक्त को उन अपराधों से बरी किया जा सकता है, जिनका उस पर आरोप लगाया गया है।मौजूदा मामले में, कथित रूप से चरस की व्यावसायिक मात्रा की तस्करी के आरोप में...

कब तक हिरासत चलती रहेगी : SC ने एसजी से महबूबा मुफ्ती की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर निर्देश लाने को कहा
"कब तक हिरासत चलती रहेगी" : SC ने एसजी से महबूबा मुफ्ती की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर निर्देश लाने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सॉलिसिटर जनरल को जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री, महबूबा मुफ्ती की बेटी, इल्तिजा द्वारा दायर याचिका पर निर्देश प्राप्त करने के लिए कहा, जिन्हें सार्वजनिक सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लेने को चुनौती दी गई है। जस्टिस एसके कौल और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ मुफ्ती की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में मांगी गई प्रार्थनाओं में संशोधन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो वर्तमान में लंबित है।"आवेदन में, उन्होंने (याचिकाकर्ता) कहा है कि वे आवेदन दाखिल कर रहे हैं क्योंकि कोई...

हिंदू विधि भाग 19 : कोई हिंदू व्यक्ति अपनी साहदायिकी संपत्ति सहित कोई भी संपत्ति कहीं भी वसीयत कर सकता है
हिंदू विधि भाग 19 : कोई हिंदू व्यक्ति अपनी साहदायिकी संपत्ति सहित कोई भी संपत्ति कहीं भी वसीयत कर सकता है

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 किसी निर्वसीयती मरने वाले हिंदुओं की संपत्ति के उत्तराधिकार के संबंध में वारिसान की व्यवस्था करता है। इस अधिनियम के अंतर्गत हिंदू पुरुष और हिंदू नारी दोनों की संपत्ति के उत्तराधिकार की व्यवस्था की गई है पर यह अधिनियम केवल तब ही लागू होता है जब कोई हिंदू व्यक्ति अपने उत्तराधिकार के संबंध में कोई वसीयत कर कर नहीं मृत हुआ है। इस अधिनियम की धारा 30 महत्वपूर्ण धाराओं में से एक धारा है। इस धारा के अंतर्गत किसी हिंदू व्यक्ति को यह अधिकार दिया गया है कि वह अपनी संपत्ति को...

[ झीरम घाटी नक्सली हमला] सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार की न्यायिक आयोग को अतिरिक्त गवाहों की जांच के आदेश की अर्जी खारिज की
[ झीरम घाटी नक्सली हमला] सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार की न्यायिक आयोग को अतिरिक्त गवाहों की जांच के आदेश की अर्जी खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें 2013 के झीरम घाटी नक्सली हमले में अतिरिक्त गवाहों की जांच करने के लिए विशेष न्यायिक जांच आयोग को निर्देश देने की याचिका खारिज कर दी गई थी। इस हमले में 29 लोग मारे गए थे।जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एम आर शाह की पीठ ने राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ अभिषेक मनु सिंघवी की याचिका पर विचार करने के बाद याचिका खारिज कर दी।आज, डॉ सिंघवी ने प्रस्तुत किया कि...