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वचन दें तब हटेगा अवमानना का आरोप: कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अदालत का बहिष्कार करने वाले बार एसोसिएशनों के पदाधिकारियों से कहा
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने गुरुवार को राज्य के बार संघों के पदाधिकारियों को निर्देश दिया, जिन्होंने अपने सदस्यों को अदालत के काम से अलग रहने का आह्वान किया था, को ताजा अंडरटेकिंग दायर करने को कहा था।अंडरटेकिंग में स्पष्ट रूप से कहा जाए कि वे सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित कानून का पालन करेंगे, जो अधिवक्ताओं द्वारा अदालत का बहिष्कार करने के कार्य को अवैध मानता है। तब तक इसने आरोपियों के खिलाफ कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई अवमानना कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।कथित...
COVID-19: 'आम आदमी को भूल जाओ, अगर मैं अपने लिए कहूं तो मेरे लिए भी बेड उपलब्ध नहीं होगा': दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस विपिन सांघी ने कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी दिल्ली में COVID-19 रोगियों के इलाज के लिए अस्पतालों में बेड की कमी को लेकर चिंता व्यक्त की।न्यायमूर्ति विपिन सांघी ने दिल्ली के COVID-19 अस्पतालों में बेड की कमी को लेकर कहा कि, "आम आदमी को भूल जाओ, अगर मैं अपने लिए बेड के लिए कहूं तो मेरे लिए भी बेड उपलब्ध नहीं होगा।"न्यायमूर्ति विपिन सांघी ने जोर देकर कहा कि लोगों की जरूरतों को तत्काल पूरा किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि केंद्र COVID बेड की आवश्यकताओं पर ध्यान देगा और बेड की...
पश्चिम बंगाल चुनावः सिर्फ सर्कुलर जारी करने और बैठकें आयोजित करने से आपकी जिम्मेदारियां पूरी नहीं होती: कलकत्ता हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा
COVID संकट के बीच पश्चिम बंगाल में चुनाव कराने की तरीके को लेकर गुरुवार (22 अप्रैल) को चुनाव आयोग को कलकत्ता हाईकोर्ट की सख़्ती का सामना करना पड़ा।मुख्य न्यायाधीश थोथाथिल बी. राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने चुनाव आयोग के तरीके पर टिप्पणी की,"हम इस तथ्य को स्वीकार में असमर्थ हैं कि भारतीय निर्वाचन आयोग हमें अपडेट नहीं कर पा रहा है कि सर्कुलरों के प्रवर्तन के माध्यम से क्या कार्रवाई की गई है।"इसके अलावा, न्यायालय ने रेखांकित किया कि सर्कुलर जारी करना और स्वयं बैठकें आयोजित...
COVID के मद्देनजर बिना राशन कार्ड वाले लोगों को तत्काल राशन और खाद्य आपूर्ति करने की मांग, दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका
दिल्ली रोजी-रोटी अधिकार अभियान ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर गुहार लगाई है कि दिल्ली सरकार को निर्देश दिया जाए कि सरकार मुख्यमंत्री कोरोना सहायता योजना (एमएमसीएसवाई) या गरीब और जरूरतमंद व्यक्तियों के लिए बनाई किसी अन्य योजना के तहत सूखा राशन प्रदान करने की अपनी योजना को फिर से शुरू कर दे ताकि गरीब लोग राष्ट्रीय राजधानी में जारी किए गए ताजा प्रतिबंधों और कोरोना महामारी के कारण भूखे न रहे और उनको राशन मिल पाए। दिल्ली सरकार ने सोमवार (19 अप्रैल, 10 बजे) रात से सोमवार (26 अप्रैल, सुबह...
घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत रिकवरी की कार्यवाही केवल सहायक कार्यवाही, यह फैमिली कोर्ट को बाद में निर्णय लेने से रोकती नहीं: केरल उच्च न्यायालय
केरल उच्च न्यायालय ने माना है कि घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 20 के तहत गठित की गई रिकवरी की कार्यवाही इस मामले में फैमिली कोर्ट के लिए रोक के रूप में संचालित नहीं होगी। अदालत ने माना कि घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत कार्यवाही मुख्य जांच के लिए सहायक थी कि क्या महिला को घर में घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा था।इसलिए, जस्टिस ए मुहम्मद मुस्तकी और डॉ कौसर एडप्पागथ की पीठ ने कहा, "धारा 20 के तहत कार्यवाही में पर्याप्त मुद्दा घरेलू हिंसा का होना चाहिए। धारा 20 के तहत मौद्रिक दावों की राहत एक सहायक राहत...
'यह सुनिश्चित करें कि दिल्ली के लिए आक्सीजन टैंकरों के परिवहन में कोई बाधा नहीं आए': दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से कहा, स्थानीय अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की चेतावनी दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि यदि दिल्ली में मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति अवरुद्ध है तो इसके लिए जिम्मेदार स्थानीय अधिकारियों को आपराधिक रूप से उत्तरदायी माना जाएगा।कोर्ट ने कहा कि,"हम निर्देश देते हैं कि गैर-अनुपालन पर आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।"जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रेखा पल्ली की खंडपीठ रोहिणी के सरोज सुपर स्पेशलिटी अस्पताल द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में ऑक्सीजन की तत्काल आपूर्ति की मांग की गई। सुनवाई के दौरान एक अन्य अस्पताल खंडपीठ के सामने पेश हुआ और...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेने के बावजूद COVID-19 मुद्दों से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई बंद करने से इनकार किया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि वह COVID-19 मुद्दों पर जनहित याचिका पर सुनवाई जारी रखेगा, जब केंद्र के लिए सहायक सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को सूचित किया कि सुप्रीम कोर्ट ने इससे जुड़े मुद्दों पर स्वत: संज्ञान लेने का फैसला किया है।एएसजी अनिल सिंह द्वारा COVID-19 मुद्दों के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी खबरों का हवाला देकर मामले को सुनने से रोकने की कोशिश के बाद कहा।एएसजी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह हाईकोर्ट में लंबित मामलों को स्वयं में स्थानांतरित कर...
दिल्ली हाईकोर्ट में COVID-19 अस्पतालों के बाहर बेड की स्थिति को दिखाए जाने के लिए डिस्प्ले लगाए जाने की मांग करने वाली याचिका दायर, कहा- सरकारी एप गलत जानकारी देता है
दिल्ली हाईकोर्ट में ऑर्थोडोक्स क्रिश्चियन मेडिकल फैलोशिप की ओर से एक नर्सिंग अधिकारी ने एक याचिका दायर कर दिल्ली सरकार को निर्देश दिए जाने की मांग की है कि दिल्ली में सभी अस्पतालों को एक परिपत्र जारी करने के लिए निर्देश दिया जाए ताकि वे अपने परिसर के बाहर "बेड डिस्प्ले बोर्ड" लगाएं, जो COVID-19 माहमारी के इस भयावह दौर में अस्पताल में उपलब्ध बेड, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सिलेंडर आदि की जानकारी देते हो।याचिकाकर्ता का कहना है कि एक नर्सिंग अधिकारी के रूप में वह फ्रंट लाइन वर्कर के रूप से काम करता है...
केवल यह कथन कि शिकायतकर्ता के राजनीतिक समर्थन ने एक व्यक्ति को अनैतिक गतिविधि में शामिल होने के लिए प्रेरित किया, मानहानि का मामला नहीं: त्रिपुरा हाईकोर्ट
त्रिपुरा हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि केवल यह कथन कि एक व्यक्ति के किसी दूसरे व्यक्ति को राजनीतिक समर्थन ने उस व्यक्ति को अनैतिक गतिविधि में शामिल होने के लिए प्रेरित किया, यह भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 499 (मानहानि) के दायरे में नहीं आता है।न्यायमूर्ति अरिंदम लोध की खंडपीठ ने आगे कहा कि इस तरह के बयान को आईपीसी की धारा 499 के तहत मानहानि नहीं माना जा सकता है।कोर्ट के समक्ष मामलायाचिकाकर्ता सुबल कुमार डे स्यंदन पत्रिका का पब्लिशर और संपादक है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के...
वर्तमान महामारी में वरिष्ठ नागरिकों को समय पर सहायता और राहत सुनिश्चित करें: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को वर्तमान महामारी में जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों को समय पर सहायता और राहत सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।मुख्य न्यायाधीश अभय ओका और न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज की खंडपीठ ने कहा,"हम राज्य सरकार को सभी जिला मजिस्ट्रेटों को परिपत्र जारी करने का निर्देश देते हैं, जो कर्नाटक राज्य रखरखाव और कल्याण अधिनियम, 2009 की धारा 20 के उप खंड 2 के vi के तहत माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के प्रति अपने कर्तव्य का पालन करते हैं। वर्तमान महामारी में वरिष्ठ नागरिकों को समय पर सहायता...
दिल्ली हाईकोर्ट ने सीसीआई के व्हाट्सएप, फेसबुक की नई निजता नीति की जांच के आदेश की चुनौती खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति नवीन चावला की एकल न्यायाधीश पीठ ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of india) के आदेश के खिलाफ फेसबुक और इसकी सबसिडरी व्हाट्सएप की चुनौती खारिज की। दरअसल, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने व्हाट्सएप की नई निजता नीति को कथित रूप से प्रतिस्पर्धी विरोधी करार देते हुए जांच का आदेश दिया था।कोर्ट ने कहा कि याचिका में कोई भी मैरिट नहीं पाया गया और कोर्ट ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के जांच के आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया।पीठ ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग...
अगर टाटा अपने ऑक्सीजन को डाइवर्ट कर सकते हैं, तो दूसरे क्यों नहीं कर सकते? यह लालच की हद है?: दिल्ली हाईकोर्ट ने उद्योगों को COVID-19 आपातकाल के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति करने के लिए कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि इस्पात और पेट्रोलियम उद्योगों को अपने ऑक्सीजन स्टॉक को COVID-19 मामलों में वृद्धि के कारण राजधानी शहर में चिकित्सा आपातकाल के लिए डाइवर्ट करना चाहिए।जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रेखा पल्ली की खंडपीठ ने बुधवार रात 8 बजे मैक्स अस्पताल द्वारा दायर की गई एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें राजधानी में ऑक्सीजन की कमी को दर्शाया गया था।पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा,"हम केंद्र को नागरिकों के जीवन के अधिकार की रक्षा करने का निर्देश देते हैं, जो गंभीर रूप से बीमार हैं...
डोर टू डोर वैक्सीनेशन संभव नहींः केंद्र ने बॉम्बे हाईकोर्ट में बताया
बॉम्बे हाईकोर्ट को दिए एक हलफनामे में केंद्र सरकार ने बुजुर्गों के लिए डोर-टू-डोर वैक्सीनेशन न करने की कई वजहों का हवाला दिया है।मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जीएस कुलकर्णी की खंडपीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें 75 साल से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों, विशेष रूप से विकलांग व्यक्तियों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए डोर-टू-डोर वैक्सीनेशन की मांग की गई है।स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अवर सचिव, सत्येंद्र सिंह द्वारा दायर हलफनामे में याचिका का विरोध...
सांसदों, विधायकों के खिलाफ मामले: पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने 30 अप्रैल तक मामलों का विवरण मांगा
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने मंगलवार (20 अप्रैल) को केंद्र, पंजाब राज्य और पंजाब पुलिस को 10 दिन की समय सीमा दी और कहा कि वे पंजाब के मौजूदा और पूर्व सांसदों और विधायकों के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों को लेकर अपने हलफनामों को दायर करें। न्यायमूर्ति राजन गुप्ता और न्यायमूर्ति करमजीत सिंह की खंडपीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर-जनरल ऑफ इंडिया द्वारा पेश किए गए जवाब को ध्यान में रखते हुए यह आदेश दिया। दरअसल अतिरिक्त सॉलिसिटर-जनरल ऑफ इंडिया ने कहा था कि अदालत के पिछले आदेश (25 फरवरी)...
"ऑक्सीजन की भीख मांगो या चोरी करो, वरना ऑक्सीजन की कमी से हम हज़ारों ज़िंदगी खो देंगे" : दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से कहा
दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विपिन सांघी ने दिल्ली एनसीआर के मैक्स अस्पताल में ऑक्सीजन की तत्काल मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि नागरिक राज्य में दयनीय स्थिति में हैं। ऑक्सीजन की भीख मांगो या चोरी करो, वरना ऑक्सीजन की कमी से हम हज़ारों ज़िंदगी खो देंगे। मौलिक आपातकाल की सुरक्षा सुनिश्चित करना होगा।"न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की खंडपीठ बालाजी मेडिकल एंड रिसर्च सेंटर द्वारा दायर एक तत्काल याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में मैक्स हॉस्पिटल के विभिन्न ब्रांच जैसे...
टीकाकरण को प्राथमिकता दें और यह सुनिश्चित करें कि टीकाकरण केंद्र दिव्यांग लोगों के लिए सुलभ हों: मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया
मद्रास उच्च न्यायालय ने सोमवार (19 अप्रैल) को राज्य सरकार को दिव्यांग लोगों के जीवन की सुरक्षा के लिए टीकाकरण को उनके शीघ्रता से उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास करने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश संजीब बनर्जी और न्यायमूर्ति सेंथिलकुमार राममूर्ति की पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह दिव्यांग व्यक्ति को टीकाकरण में प्राथमिकता दे, भले ही ऐसे व्यक्ति 45 वर्ष से काम आयु के हों। हालांकि, अदालत ने सरकार को केंद्र के परामर्श पर, यदि आवश्यक हो, तो 3 दिनों के भीतर निर्णय लेने की...
'आवासीय प्रमाण पत्र नागरिकता का प्रमाण नहीं': कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि आवासीय प्रमाण पत्र (Residential Certificate) नागरिकता का प्रमाण नहीं है क्योंकि इसे किसी भी निवासी द्वारा प्राप्त किया जा सकता है। आगे कहा कि कोई भारतीय या विदेशी व्यक्ति किसी विशेष स्थान पर रह रहा है तो वह व्यक्ति आसानी से आवासीय प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकता है।न्यायमूर्ति बिबेक चौधरी की एकल पीठ ने यह टिप्पणी खदीजा बेगम की जमानत याचिका खारिज करते हुए की। दरअसल खदीजा बेगम के खिलाफ इस साल जनवरी में विदेशी अधिनियम (फॉरेनर्स एक्ट),1946 की धारा 14 और धारा 14C के...
दहेज मृत्यु - समाज को गलत संदेश गया कि ससुराल वाले यदि पीड़िता से अलग रहते हैं तो आसानी से बच सकते हैं : मद्रास हाईकोर्ट
आईपीसी की धारा 498-ए के तहत अपराध के लिए दोषी ठहराए गए दंपति को दी गई सजा को निलंबित करने से इनकार करते हुए, मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि माता-पिता की पहली और सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी अपने बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाना है।न्यायमूर्ति पी वेलमुरुगन की पीठ ने यह रेखांकित किया कि महिलाओं की आत्महत्या की घटनाएं दिन-प्रतिदिन बढ़ रही हैं (दहेज उत्पीड़न के कारण)। पीठ ने कहा कि पीड़ित महिला के ससुराल वाले यह कहते हुए अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं कि वे अपने बेटे के साथ नहीं रह रहे...
अवैध प्रवासियों के साथ कैसे निपटा जाएगा, यदि मूल देश उन्हें वापस लेने के लिए तैयार नहीं? पटना हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
राज्य में दो महिला बांग्लादेशी प्रवासियों के मानवाधिकारों पर जताई चिंता के मुद्दे पर विचार करते हुए पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में तीन वकीलों की एक टीम का गठन किया है ताकि वह यह जान सकें कि उन्हें आफ्टर केयर होम में किन परिस्थितियों में रखा गया है। साथ ही टीम को निर्देश दिया गया है कि वह एक सप्ताह के अंदर सीलबंद कवर में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें।न्यायमूर्ति शिवाजी पांडे और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी की खंडपीठ ने पाया कि इस मुद्दे पर राज्य सरकार की तरफ से कोई हलफनामा दायर नहीं किया है। इसलिए खंडपीठ...
"जनहित याचिका में राजनीतिक टिप्पणियां क्यों शामिल हैं? हम जानते हैं कि राजनेता क्या करते हैं?" बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिकाकर्ता से कहा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को अपनी जनहित याचिका में महाराष्ट्र में COVID-19 की स्थिति पर "कुप्रबंधन" को उजागर करने के लिए एक राजनेता के ट्वीट का हवाला देने पर एक युवा वकील की खिंचाई की।मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जीएस कुलकर्णी की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता एक वकील हैं और इसलिए उन्हें राजनीतिक टिप्पणी का हवाला नहीं देना चाहिए, इसके बजाय याचिका को अन्य न्यायालयों द्वारा पारित आदेशों तक सीमित रखा जाना चाहिए।जब आप जनहित याचिका दायर करते हैं, तो आप राजनीतिक टिप्पणियों को क्यों शामिल...

















