मुख्य सुर्खियां
COVID-19 की दूसरी लहरः गुवाहाटी हाईकोर्ट ने उन विदेशी बंदियों को रिहा करने का निर्देश दिया, जिन्होंने हिरासत में दो साल पूरे किए
गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने राज्य में COVID-19 की स्थिति पर पिछले साल स्वतः संज्ञान याचिका पर दिए आदेश में संशोधन किया है और अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे उन विदेशी बंदियों को 5,000 रुपए के बांड और COVID-19 की दूसरी लहर मद्देनजर, दो जमानत के बजाय एक जमानत पर रिहा करें, जिन्होंने दो साल की हिरासत की अवधि पूरी कर ली है।चीफ जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस मनीष रंजन पाठक की खंडपीठ ने आदेश दिया, "वास्तव में, हमें यह निश्चित रूप से दोहराना चाहिए कि WP (C) (Suo Moto) No 1/2020 में 15.04.2020 को...
दिल्ली हाईकोर्ट ने आम आदमी पार्टी विधायक इमरान हुसैन के खिलाफ ऑक्सीजन सिलेंडर की जमाखोरी के आरोप को खारिज किया
दिल्ली हाईकोर्ट को एमिकस क्यूरी सीनियर एडवोकेट राजशेखर राव ने बताया कि,"आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक इमरान हुसैन ने दिल्ली कोटे से ऑक्सीजन की जमाखोरी नहीं की। इन्होंने व्यक्तिगत खर्चों से किराए पर सिलिंडर खरीदी है।"दिल्ली हाईकोर्ट ने आज आम आदमी पार्टी (आप) के कैबिनेट मंत्री इमरान हुसैन के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें हुसैन द्वारा राजनीतिक लाभ के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर की जमाखोरी और वितरण का आरोप लगाया गया था।COVID-19 को लेकर दायर याचिका में अदालत की सहायता करने वाले एमिकस...
बिहार न्यायिक अकादमी ने COVID-19 से जान गंवाने वाले 5 न्यायिक अधिकारियों की याद में ऑनलाइन शोक सभा का आयोजन किया
बिहार न्यायिक अकादमी ने मंगलवार को COVID-19 से जान गंवाने वाले निम्नलिखित पांच न्यायिक अधिकारियों की याद में एक ऑनलाइन शोक सभा का आयोजन किया,1) स्वर्गीय दुर्गेश मणि त्रिपाठी, तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, मुजफ्फरपुर।2) स्वर्गीय पीयूष कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन एडीजे, सासाराम में रोहतास।3) स्वर्गीय अमित कुमार तिवारी, तत्कालीन उप न्यायाधीश एसीजेएम पटना।4) स्वर्गीय मनीष कुमार, रेलवे मजिस्ट्रेट, किउल।5) स्वर्गीय दीपक कुमार, तत्कालीन न्यायिक मजिस्ट्रेट, खगड़िया।बैठक की अध्यक्षता पटना...
'यह निजता के अधिकार का उल्लंघन है': चंडीगढ़ लोक अदालत ने डीएनडी सर्विस लेने के बाद भी प्रमोशनल मैसेज न रोकने के मामले में बीएसएनएल पर 37,000 रुपये जुर्माना लगाया
चंडीगढ़ की एक स्थायी लोक अदालत ने भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) को निर्देश दिया है कि वह अपने एक उपयोगकर्ता को मुआवजे का भुगतान करें क्योंकि इस उपयोगकर्ता द्वारा डीएनडी सेवा का लाभ लेने के बावजूद भी उसके नंबर पर भेजे जा रहे प्रमोशनल मैसेज को रोका नहीं गया। अदालत ने कहा, ''यह आवेदक की निजता के अधिकार के उल्लंघन का मामला है, जिसने कॉल सर्विस द्वारा किए जाने वाले अवांछित कमर्शियल कॉल को रोकने के लिए अपने मोबाइल नंबर को डीएनडी के रूप में दर्ज किया था।'' चंडीगढ़ के एक एडवोकेट, मनोज कुमार ने...
'कैसे राजनेता और सेलिब्रिटी COVID-19 की दवाओं का वितरण कर रहे हैं जबकि राज्य में इन दवाओं की कमी है?': बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य को अंतरिम आवेदन पर जवाब देने के लिए कहा, जिसमें पूछा गया है कि कैसे राजनेताओं और मशहूर हस्तियों द्वारा रेमडेसिविर इंजेक्शन और टोसिलिजुमैब जैसी जांच दवाओं को खरीदा और वितरित किया जा रहा है जबकि राज्य इन दवाओं की आधिकारिक आपूर्ति में कमी के बारे में शिकायत कर रहा है।मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जीएस कुलकर्णी की पीठ COVID -19 प्रबंधन के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। मामले में अधिवक्ता राजेश इनामदार ने कहा कि मरीजों ने ट्विटर के माध्यम से बॉलीवुड...
जस्टिस चंद्रचूड़ COVID-19 पॉजीटिव हुए, सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई टाली
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ के COVID-19 पॉजीटिव हो जाने के बाद कोर्ट ने कोरोनावायरस मुद्दों पर लिए स्वतः संज्ञान मामलों पर सुनवाई को स्थगित कर दिया है। जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस एस रवींद्र भट की खंडपीठ ने गुरुवार को महामारी के मामले में स्वतः संज्ञान केस इन री डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ एसेंशियल सप्लाइज एंड सर्विसेस को सुनने के लिए सूचीबद्ध किया गया था।सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट में प्रकाशित एक नोटिस में कहा गया है कि बेंच के न्यायाधीशों में से...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने COVID-19 से जान गंवाने वाले न्यायमूर्ति वी. के. श्रीवास्तव के उपचार संबंधित जांच के लिए समिति का गठन किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार (11 मई) को दिवंगत न्यायमूर्ति वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव को दिए गए उपचार संबंधित जांच के लिए एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी का गठन किया। न्यायमूर्ति वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव की पिछले महीने COVID-19 से मौत हो गई थी। यह कमेटी हाईकोर्ट को अगले दो सप्ताह में अपनी रिपोर्ट सौपेंगी।इससे पहले, 4 मई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्यायमूर्ति वी. के. श्रीवास्तव का उपचार करने वाले राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों से जवाब मांगा था।11 मई को जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अजीत कुमार की पीठ ने...
COVID19-''अपनी पूरी ताकत झोंक दो और अपने लोगों की सुरक्षा के लिए खुद को समर्पित करो'': उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा
भारत के संविधान के आर्टिकल 21 के तहत लोगों के जीवन की रक्षा करना राज्य का सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य है, यह रेखांकित करते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सोमवार (10 मई) को राज्य सरकार को COVID प्रबंधन के लिए कई विशेष और सामान्य दिशा-निर्देश जारी किए।कोर्ट ने कोरोना महामारी की दूसरी लहर से निपटने के लिए अच्छे से तैयारी न करने के मामले में राज्य सरकार की खिंचाई भी की। मुख्य न्यायाधीश राघवेन्द्र सिंह चौहान और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने यह कहा कि,''इस तथ्य के बावजूद कि जनवरी 2021 में...
प्रोमोशनल मैसेज प्राप्त न करने के अनुरोध के बावजूद आ रहे थे गैर जरूरी एसएमएस, लोक अदालत ने टेलीकॉम कंपनी पर जुर्माना लगाया
प्रोमोशनल मैसेज प्राप्त न करने के अनुरोध के बावजूद आने वाले गैर जरूरी एसएमएस से परेशान होकर एडवोकेट मनोज कुमार रोहिल्ला ने परमानेंट लोक अदालत में टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल और मैसेज भेजने वाले खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया।कोर्ट ने दोनों पक्षों के सुनने के बाद बीएसएनएल व मैसेज भेजने वाली कंपनी पर भारी जुर्माना लगाया। कोर्ट ने वादी को होने वाली मानसिक परेशानी, कोर्ट में उसके आने-जाने पर हुए और दूसरे खर्चों को लेकर लेकर उत्तरदाताओं पर ₹37000 का जुर्माना लगाया।कई बार लोगों को अपने फ़ोन में आवंछित मार्केटिंग...
पुलिस को लॉकडाउन उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ अधिक बल का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस को लॉकडाउन उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ अधिक बल का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।मुख्य न्यायाधीश अभय एस ओका और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की एक पीठ के सामने एमिकस क्यूरी एडवोकेट विक्रम हुइगोल ने लॉकडाउन नियमों के उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ पुलिस लाठीचार्ज के बारे में रिपोर्ट दी।उन्होंने 30 मार्च, 2020 को अदालत द्वारा जारी आदेश के बारे में अदालत को सूचित किया, जिसके द्वारा पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया गया था कि लॉकडाउन को लागू करने के लिए अधिक का उपयोग न करने के लिए एक...
'23 साल की एक लड़की/महिला सही या गलत का फैसला करना जानती है': दिल्ली हाईकोर्ट ने बलात्कार, अश्लील वीडियो बनाने के आरोपी को जमानत दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने बलात्कार और अश्लील वीडियो बनाने और इसके बाद लड़की को वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी देने के आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि,"वर्ष 2019 से तीन वर्ष पहले अभियोजन पक्ष की आयु 23 वर्ष रही होगी और इस न्यायालय की राय में 23 साल में एक लड़की / महिला यह जानती है कि उसके लिए क्या सही है और क्या गलत।न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत की एकल पीठ ने कहा कि,"मुख्य रूप से विचाराधीन एफआईआर वर्ष 2019 में दर्ज की गई है और अभियोजन पक्ष की आयु 26 वर्ष बताई गई है। एफआईआर के अनुसाल अभियोजन पक्ष ने 2016...
अगर एंटीजन टेस्ट के बाद किसी व्यक्ति को COVID संक्रमण का संदिग्ध माना गया है तो अस्पताल उसकी मौत को NON-COVID नहीं दर्शा सकते : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को निर्देश दिया है कि उन व्यक्तियों की मृत्यु की गणना रिकॉर्ड बनाए रखने और शवों के दाह-संस्कार के उद्देश्य से COVID मृत्यु के रूप में मानी जाए,जिनको एंटीजन टेस्ट के बाद COVID19 वायरस से प्रभावित होने वाला संदिग्ध माना गया था।न्यायालय ने उल्लेख किया कि राज्य में टेस्ट की संख्या में कमी आई है और यह भी स्वभाविक है कि कोरोना जैसे लक्षणों का अनुभव करने वाले लोग अक्सर आरटी-पीसीआर या अन्य सत्यापित COVID-टेस्ट नहीं करवाते हैं और उनकी मृत्यु को कोरोना से होने वाली मौत नहीं...
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को COVID-19 के 250 बेड वाले अस्पताल पर गलत जानकारी देने के लिए फटकार लगाई
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में COVID-19 प्रबंधन संबंधित मुद्दों पर सुनवाई कर रही दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रेखा पल्ली की खंडपीठ ने नई दिल्ली के द्वारका में इंदिरा गांधी अस्पताल में COVID-19 सुविधा से सज्जित 250 बेड के प्रबंध को लेकर गलत जानकारी देने के लिए आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार की खिंचाई की। कोर्ट ने COVID-19 और उनकी देखभाल के कारण अनाथ बच्चों के साथ काम करने और राजस्थान राज्य में पकड़े गए टैंकरों पर भी ध्यान दिया।दिल्ली सरकार ने शनिवार को इस मामले की...
गुजरात हाईकोर्ट के पूर्व कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति विजय मनोहर सहाय का निधन
गुजरात हाईकोर्ट के पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति विजय मनोहर सहाय का बुधवार (11 मई) को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 68 वर्ष के थे।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीश रह चुके न्यायमूर्ति सहाय ने 1975 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से कानून में स्नातक किया और जनवरी, 1976 में एक वकील के रूप में काम करना शुरू किया।उन्होंने अपने पिता आर.एम. के चैंबर में प्रैक्टिस शुरू की।न्यायमूर्ति सहाय के पिता आरएम सहाय...
दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायिक अधिकारियों, न्यायालय कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों के लिए कैशलेस इलाज की मांग को लेकर याचिका दायर
दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायिक अधिकारियों, कोर्ट स्टाफ और उनके परिवार के सदस्यों के इलाज के लिए पहले से ही चल रहे इलाज के खर्च की प्रतिपूर्ति प्रदान करने के लिए कैशलेस इलाज की मांग को लेकर याचिका दायर की गई है।दायर याचिका में अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर द्वारा तत्काल आवेदन दिया गया है, जिसमें हाईकोर्ट द्वारा बुधवार को नोटिस जारी किया गया था। इसमें कोरोना वायरस के चलते अपनी जान गंवाने वाले न्यायिक अधिकारियों, कोर्ट स्टाफ और उनके परिवार के सदस्यों के लिए 1 करोड़ 50 लाख की अनुग्रह राशि का भुगतान करने की...
'राज्य COVID-19 की दूसरी डोज कैसे देगा'? कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य में कोरोना वैक्सीन की कमी पर चिंता जताई
कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलवार को राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह राज्य में हर नागरिक को कोरोना वैक्सीन कैसे प्रदान करेगा, इसके लिए गुरुवार तक एक रोड मैप को रिकॉर्ड पर रखे।मुख्य न्यायाधीश अभय ओका और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की खंडपीठ ने कहा,"हम राज्य सरकार को निर्देश देते हैं कि वह रोड मैप को रिकॉर्ड में दिखाए और बताए वह लाभार्थियों को कैसे वैक्सीन प्रदान करने जा रहा है। खासतौर से उन लोगों को जिन्होंने पहली खुराक ली है और अब दूसरी खुराक का इंतजार कर रहे हैं? राज्य सरकार कैसे उन लोगों को दूसरी...
'Covid-19 महामारी के कारण मौत की आशंका, अग्रिम जमानत दिए जाने के लिए एक वैध आधार है': इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को आपराधिक अपराध के आरोपी के जीवन के अधिकार से संबंधित एक बहुत ही महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि COVID-19 महामारी के कारण मौत की आशंका अग्रिम जमानत दिए जाने के लिए एक वैध आधार है।न्यायमूर्ति सिद्धार्थ की एकल पीठ द्वारा यह आदेश राज्य में अपर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं को देखते हुए पारित किया गया है, जो सामान्य समय में सामान्य प्रक्रिया के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपी व्यक्तियों के COVID19 के कारण जीवन के खतरे को देखते हुए अग्रिम जमानत देना चाहिए।सिंगल बेंच प्रतीक जैन की...
'जेलों से तुरंत भीड़ कम करना समय की मांग': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाई पावर्ड कमेटी को दिशा-निर्देश जारी किए
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार (10 मई) को इस तथ्य के मद्देनजर कि मध्यप्रदेश की सभी जेलें में उनकी क्षमता से दोगुनी तादाद में कैदी है, उनकी तादाद को तुंरत कम करने का निर्देश दिया।मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन की खंडपीठ ने इस मामले में दायर एक रिट याचिका दायर पर दिशा-निर्देश जारी किए।यह याचिका देश और मध्य प्रदेश में COVID-19 की दूसरी लहर के बाद जेलों की अमानवीय स्थिति को देखते हुए दायर की गई थी।हाईकोर्ट ने राज्य में COVID-19 की असाधारण स्थिति को देखते और इस मामले पर 23...
'यह हमारे सभी आदेशों की अवमानना है': गुजरात उच्च न्यायलय ने भरूच COVID अस्पताल में आग लगने की घटना पर गुजरात सरकार को फटकार लगाई
गुजरात हाईकोर्ट ने मंगलवार को राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई।न्यायालय ने किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए सरकार को सभी अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा के मानदंडों के अनुपालन के न्यायिक आदेशों को लागू करने में विफल पाया और सरकार के रवैये पर कठोर टिप्पणियां की।हाल ही में भरूच अस्पताल में आग लगने से हुई 18 मौतों के मद्देनजर जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस भार्गव डी करिया की खंडपीठ ने कहा कि सतर्कता नहीं बरतने पर राज्य की ओर से यह अवमानना है।जस्टिस करिया ने कहा, "आपकी हर कार्रवाई कागज पर होती है। आप...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को चुनाव ड्यूटी के दौरान COVID-19 के कारण मतदान अधिकारियों की हुई मौत के लिए कम-से-कम 1 करोड़ रूपये मुआवजा देने के लिए कहा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार को यूपी पंचायत चुनावों के दौरान COVID-19 के कारण मतदान अधिकारियों की हुई मौत के लिए उनके परिवार वालों को कम-से-कम 1 करोड़ रूपया मुआवजे के रूप में देना चाहिए।जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अजीत कुमार की डिवीजन बेंच ने कहा कि,"यह ऐसा मामला नहीं है कि किसी ने चुनाव के दौरान अपनी सेवाएं देने के लिए स्वेच्छा से काम किया। चुनाव के दौरान कर्तव्यों को निभाने के लिए नियुक्त किए गए लोगों को अनिवार्य रूप से काम कराया गया, जबकि वे लोगों ने इसके प्रति...



















