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'कोरोनोवायरस संक्रमित कार चालक के मुंह से निकलीं बूंदें घंटों बाद भी कार में बैठने वाले व्यक्ति को संक्रमित कर सकती हैं': दिल्ली हाईकोर्ट ने अकेले वाहन चलाते समय भी मास्क पहनना अनिवार्य किया

LiveLaw News Network
8 April 2021 4:48 AM GMT
कोरोनोवायरस संक्रमित कार चालक के मुंह से निकलीं बूंदें घंटों बाद भी कार में बैठने वाले व्यक्ति को संक्रमित कर सकती हैं: दिल्ली हाईकोर्ट ने अकेले वाहन चलाते समय भी मास्क पहनना अनिवार्य किया
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दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि जब कोई व्यक्ति अकेले कार चला रहा हो तब भी फेस मास्क पहनना अनिवार्य है क्योंकि कोरोनोवायरस संक्रमित कार चालक के मुंह से निकलीं बूंदें घंटों बाद भी कार में बैठने वाले व्यक्ति को संक्रमित कर सकती हैं।

कोर्ट ने वाहन चलाते समय फेस मास्क नहीं लगाने पर दिल्ली के अधिकारियों द्वारा लगाए गए जुर्माने को चुनौती देने वाले विभिन्न अधिवक्ताओं द्वारा दायर चार याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि एक निजी कार COVID-19 नियंत्रण के उद्देश्य से एक सार्वजनिक स्थान हो सकती है।

कोर्ट ने कहा कि मामले में मूट का सवाल था कि क्या चलती कार या वाहन में अकेले यात्रा करने वाला व्यक्ति अन्य व्यक्तियों के संपर्क में आ सकता है और यदि इस बात का उत्तर किसी पुष्टि में दिया जाता है, तो वर्तमान मामले के उद्देश्य के लिए कार या निजी वाहन एक सार्वजनिक स्थान होगा ।

कोर्ट ने इस संबंध में कहा कि कार में अकेले यात्रा करना केवल एक अस्थायी फेज होता है और वाहन चालक किसी भी समय विभिन्न व्यक्तियों के सीधे संपर्क में आ सकता है - उदाहरण के लिए ट्रैफिक सिग्नल पर कोई खरीदारी करते समय, वृद्ध परिवार के सदस्यों, बच्चों या सहकर्मियों को कार द्वारा दूसरे स्छान तक पहुंचाना या वहां से बिठाकर घर छोड़ना आदि।

इसलिए यदि कार में बैठने वाला यात्री मास्क नहीं पहनता है तो उसे भी कोरोना हो सकता है। कोरोनोवायरस संक्रमित व्यक्ति के मुंह से निकलीं बूंदें घंटों बाद भी कार में बैठने वाले व्यक्ति को संक्रमित कर सकती हैं।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह द्वारा दिए गए लिखित निर्णय की प्रासंगिक टिप्पणियां इस प्रकार हैं;

"वाहन या कार में यात्रा करने वाला व्यक्ति भले ही वह अकेला हो वह भी विभिन्न वजहों से वायरस के संपर्क में आ सकता है। व्यक्ति कार या वाहन में बैठने से पहले बाजार या कार्यस्थल या अस्पताल या किसी व्यस्त सड़क पर गया हो सकता है। ऐसे व्यक्ति को वेंटिलेशन के लिए खिड़कियों को खुला रखते हैं। वाहन को ट्रैफ़िक सिग्नल पर रोकने पड़ता है और व्यक्ति खिड़की से लटककर किसी भी चीज को खरीदने लग जाता है। इस प्रकार कार चालक व्यक्ति सड़क किनारे सामान बेचने वाले लोगों के संपर्क में आता है।"

कोर्ट ने आगे कहा कि,

"यदि कोई व्यक्ति अकेले कार में यात्रा कर रहा है, तो यह स्थिति स्थायी नहीं है। यह केवल एक अस्थायी फेज है। इस फेज से पहले या बाद में कार में अन्य लोग भी बैठ चुके होंगे या बैठते हैं। इस बीच परिवार के बुजुर्ग सदस्य भी कार बैठते हैं या स्कूल से बच्चे को घर लाया जाता है या दोस्त या सहकर्मी भी कार में यात्रा कर सकते हैं। यदि ऐसे व्यक्ति मास्क नहीं पहनते हैं तो इन्हें भी कोरोना हो सकता है। कोरोनोवायरस संक्रमित व्यक्ति के मुंह से निकलीं बूंदें घंटों बाद भी कार में बैठने वाले व्यक्ति को संक्रमित कर सकती हैं। ऐसी कई संभावनाएं हैं जिनमें कार में अकेले बैठा व्यक्ति बाहरी लोगों के संपर्क में आता है। इस प्रकार, यह नहीं कहा जा सकता है कि व्यक्ति कार में अकेले यात्रा कर रहा है तो कार सार्वजनिक स्थान नहीं होगी।"

कोर्ट ने कहा कि निजी स्थान पर चलने वाला निजी वाहन भले ही उस कार में केवल एक व्यक्ति बैठा हो, COVID-19 नियंत्रण के उद्देश्यों से वह सार्वजनिक स्थान है।

कोर्ट ने कहा कि,

"एक वाहन जो पूरे शहर में घूम रहा है भले ही एक समय पर एक ही व्यक्ति बैठा हो लेकिन एक सार्वजनिक स्थान होगा जो अलग-अलग परिस्थितियों में अन्य व्यक्तियों के संपर्क में आने के तत्काल जोखिम का कारण होगा। यदि कार में केवल एक व्यक्ति बैठता है तो भी वह सार्वजनिक स्थान होगा और उसमें मास्क पहनना अनिवार्य होगा। COVID-19 महामारी के बीच किसी वाहन में मास्क या फेस कवर पहनना अनिवार्य है चाहे उस कार में एक व्यक्ति बैठा हो या एक से अधिक व्यक्ति बैठा हो।"

अकेले निजी वाहन चलाते समय मास्क न पहनने के चालान को चुनौती देने वाले विभिन्न वकीलों द्वारा दायर चार याचिकाओं पर फैसला सुनाया गया। फैसला 17 फरवरी को सुरक्षित रखा गया था।

कोर्ट ने फैसले में कहा कि वकीलों का सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का पालन करना एक कर्तव्य है।

कोर्ट ने आगे कहा कि,

" न्यायालय यह भी जोड़ना चाहेगा कि इस मामले में सभी चार याचिकाकर्ताओं, अधिवक्ताओं द्वारा सवाल करने के बजाय महामारी को रोकने के उपायों को लागू करना और सहायता करना चाहिए। एक वर्ग के रूप में अधिवक्ताओं को प्राप्त लीगल ट्रेनिंग के माध्यम से महामारी जैसी परिस्थितियों में अपने कर्तव्यों का अनुपालन करना है। मास्क पहनना एक अहंकार का मुद्दा नहीं बनाया जा सकता है।"

कोर्ट ने आगे कहा कि,

"अधिवक्ताओं द्वारा आम जनता को मास्क पहनने के के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। अधिवक्ताओं के कर्तव्यों का विशेष रूप से महामारी अधिनियम 1897 और आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत जारी किए गए निर्देशों, उपायों और दिशानिर्देशों के पालन में महत्व बढ़ गया है।"

जजमेंट की कॉपी की यहां पढ़ें:



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