मुख्य सुर्खियां

केरल हाईकोर्ट
पति की चेतावनी के बावजूद, मौका देखकर देर रात पत्नी का बार-बार दूसरे आदमी को फोन करना वैवाहिक क्रूरता : केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक जोड़े को तलाक की डिक्री मंज़ूर करते हुए कहा है कि पति की चेतावनी को अनदेखा करते हुए एक पत्नी द्वारा किसी दूसरे पुरुष को गुप्त फोन कॉल करना, वैवाहिक क्रूरता के समान है।जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने अपने आदेश में यह भी कहा कि जब तक वैवाहिक जीवन को बहाल नहीं किया जाता है, तब तक केवल समझौता करना क्रूरता की माफी के समान नहीं होगा।''पति की चेतावनी की अवहेलना करते हुए पत्नी द्वारा किसी अन्य पुरुष को बार-बार अवसर देखकर फोन कॉल करना, वह भी देर रात में वैवाहिक क्रूरता के...

दीवानी वाद में वादी को अपने बल पर अपना पक्ष सिद्ध करना होता है, वह दूसरे पक्ष के दस्तावेजों से अपना पक्ष मजबूत नहीं कर सकताः गुवाहाटी हाईकोर्ट
दीवानी वाद में वादी को अपने बल पर अपना पक्ष सिद्ध करना होता है, वह दूसरे पक्ष के दस्तावेजों से अपना पक्ष मजबूत नहीं कर सकताः गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दीवानी वाद में वादी को अपने बल पर अपना पक्ष सिद्ध करना होता है। वह दूसरे पक्ष के दस्तावेजों से अपना पक्ष मजबूत नहीं कर सकता। इन ‌टिप्‍पणियों के साथ‌ जस्टिस पार्थिवज्योति सैकिया ने संपत्ति स्वाम‌ित्व संबंधित एक मामले में निचली अदालतों के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।उन्होंने कहा," अपीलकर्ता (निचली अदालत में वादी) बिक्री विलेख को साबित करने में विफल रहा, इसलिए वह वाद भूमि पर अपना अधिकार साबित करने में विफल रहा। उपरोक्त कारणों से, इस अदालत ने पाया...

दोषी करार ‌दिए जाने से पहले सजा के अप्रत्यक्ष तरीके के रूप में जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता: उड़ीसा हाईकोर्ट
दोषी करार ‌दिए जाने से पहले सजा के अप्रत्यक्ष तरीके के रूप में जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता: उड़ीसा हाईकोर्ट

उड़ीसा हाईकोर्ट ने माना है कि जमानत से इनकार का इस्तेमाल आरोप‌ियों को सजा से पहले दंडित करने के लिए अप्रत्यक्ष तरीके के रूप में नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने जमानत से इनकार के लिए अपराधों को विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत करने के विचार का भी विरोध किया।याचिकाकर्ताओं को जमानत देते हुए जस्टिस संजीव कुमार पाणिग्रही की पीठ ने कहा,"जमानत, जैसा कि कई निर्णयों में कहा गया है, सजा के रूप में रोकी नहीं जानी चाहिए। आरोपी को दोषी ठहराए जाने से पहले उसे दंडित करने के अप्रत्यक्ष तरीके के रूप में जमानत से...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
[सीआरपीसी की धारा 372] पीड़ित को 31 दिसंबर, 2009 से पहले पारित बरी करने के आदेश के खिलाफ अपील करने का अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 372 के तहत एक पीड़ित/शिकायतकर्ता 31 दिसंबर, 2009 (जिस दिन सीआरपीसी की धारा 372 में एक प्रावधान जोड़ा गया) से पहले पारित बरी करने /अपराध की कम सजा/अपर्याप्त मुआवजे के आदेश के खिलाफ अपील नहीं कर सकता।उल्लेखनीय है कि सीआरपीसी की धारा 372 के प्रावधान में कहा गया कि पीड़ित/शिकायतकर्ता को अदालत द्वारा दिए गए किसी आरोपी को बरी करने, अपराध के लिए कम सज़ा देने या अपर्याप्त मुआवजा लगाने के आदेश के खिलाफ अपील करने का अधिकार है। जस्टिस विवेक कुमार बिड़ला और...

दिल्ली हाईकोर्ट, दिल्ली
धारा 53A संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम - अपंजीकृत दस्तावेज पर कब्जे की रक्षा के लिए भरोसा नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम की धारा 53 ए का लाभ देने के लिए, जिस दस्तावेज पर भरोसा किया गया है, वह एक पंजीकृत दस्तावेज होना चाहिए।जस्टिस सुब्रमनियम प्रसाद ने कहा,"किसी भी अपंजीकृत दस्तावेज की जांच अदालत नहीं कर सकता है और पंजीकरण अधिनियम की धारा 49 सहपठित धारा 17(1ए) के मद्देनजर उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता है या साक्ष्य के रूप में नहीं लिया जा सकता।"पृष्ठभूमियाचिकाकर्ता का मामले यह था कि उसने एक भवन के भूतल पर एक दुकान 7,20,000 रुपये में खरीदने के लिए रविंदर कुमार...

यहां तक कि शिक्षकों को भी नहीं बख्शा गया: वकील ने हिजाब प्रतिबंध मामले में हाईकोर्ट के आदेश का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया; महाधिवक्ता ने लिखित शिकायत देने पर गौर करने का आश्वासन दिया
'यहां तक कि शिक्षकों को भी नहीं बख्शा गया': वकील ने हिजाब प्रतिबंध मामले में हाईकोर्ट के आदेश का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया; महाधिवक्ता ने लिखित शिकायत देने पर गौर करने का आश्वासन दिया

कर्नाटक में कक्षाओं में धार्मिक कपड़े पहनने पर लगी रोक को राज्य के सभी स्‍कूलों और कॉलेजों पर लागू कर दिया गया है, जबकि पहले आदेश केवल उन कॉलेजों तक सीमित था, जहां कॉलेज विकास समिति (सीडीसी) ने यूनिफॉर्म निर्धारित किया था।कर्नाटक हाईकोर्ट को शुक्रवार को बताया गया कि 10 फरवरी को जारी अंतरिम आदेश, जिसमें सभी स्टूडेंट्स को, धर्म या अस्‍था पर विचार किए बिना, कक्षा के भीतर धार्मिक कपड़े पहनने से रोक दिया गया है, उसे राज्य के सभी स्कूलों कॉलेजों तक विस्तारित किया जा रहा है।एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश...

मतदान के दौरान सांप्रदायिक सद्भाव को प्रभावित करने के लिए प्रायोजित मुकदमेबाजी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंदिर-मस्जिद में लाउडस्पीकर को लेकर अवमानना याचिका खारिज की
"मतदान के दौरान सांप्रदायिक सद्भाव को प्रभावित करने के लिए प्रायोजित मुकदमेबाजी": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंदिर-मस्जिद में लाउडस्पीकर को लेकर अवमानना याचिका खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंदिर और मस्जिद में लाउडस्पीकर के प्रयोग के संबंध में दायर अवमानना याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि यह एक प्रायोजित मुकदमा है ताकि राज्य के चुनावों को ध्यान में रखते हुए राज्य के सांप्रदायिक सद्भाव को प्रभावित किया जा सके।न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की खंडपीठ इस्लामुद्दीन द्वारा रवींद्र कुमार मंदर, डी.एम. रामपुरा के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी।याचिका में आरोप लगाया गया है कि वह 2015 की जनहित याचिका (पीआईएल) में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश...

[आपत्तिजनक टिप्पणी] अपमान करने का कोई इरादा नहीं, लेकिन अपमानजनक अर्थ में प्रयुक्त शब्द: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने युवराज सिंह को आंशिक राहत दी
[आपत्तिजनक टिप्पणी] "अपमान करने का कोई इरादा नहीं, लेकिन अपमानजनक अर्थ में प्रयुक्त शब्द": पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने युवराज सिंह को आंशिक राहत दी

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुवार को क्रिकेटर युवराज सिंह को उनकी कथित आपत्तिजनक जातिवादी टिप्पणी के लिए दर्ज एक मामले में आंशिक राहत दी। अदालत ने उनकी एफआईआर को खारिज करने की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153-ए और 153-बी के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया।जस्टिस अमोल रतन सिंह की खंडपीठ ने हालांकि स्पष्ट किया कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण), अधिनियम, 1989 की धारा 3 (1) (यू) के तहत अपराध के लिए उनके खिलाफ मामला /...

[रईस की प्रमोशन के दौरान भगदड़] शाहरुख खान से माफी मांगने के लिए कहेंगे, इस मामले को खत्म करें: गुजरात हाईकोर्ट ने मामले में शाहरुख खान की याचिका पर कहा
[रईस की प्रमोशन के दौरान भगदड़] "शाहरुख खान से माफी मांगने के लिए कहेंगे, इस मामले को खत्म करें": गुजरात हाईकोर्ट ने मामले में शाहरुख खान की याचिका पर कहा

गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने गुरुवार को अभिनेता शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उनके खिलाफ वडोदरा रेलवे स्टेशन पर वर्ष 2017 में उनकी फिल्म रईस के प्रचार के दौरान हुई भगदड़ के लिए एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया था।न्यायमूर्ति निखिल एस. करील की खंडपीठ ने कहा कि यह एक बेहतर विकल्प होगा यदि शाहरुख खान को मामले में मुकदमे का सामना करने के लिए कहने के बजाय माफी मांगने के लिए कहा जाए।पूरा मामलाप्राथमिकी के अनुसार, शाहरुख खान मुंबई से दिल्ली के लिए एक...

केरल हाईकोर्ट
"एडवोकेट क्लर्क बार और बेंच के बीच के संबंधों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं": केरल हाईकोर्ट में एडवोकेट क्लर्कों को ई-फाइलिंग प्रक्रिया में शामिल करने की मांग वाली याचिका दायर

केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) में याचिका दायर कर अधिवक्ता क्लर्कों को अदालतों के लिए इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग नियमों (केरल), 2021 और डिजिटल प्रक्रियाओं के नए शासन में शामिल करने की मांग की गई है।न्यायमूर्ति एन. नागरेश ने शुक्रवार को मामले को स्वीकार किया।याचिकाकर्ता एक अधिवक्ता क्लर्क हैं। उन्होंने ने आरोप लगाया है कि राज्य भर की अदालतों में ई-फाइलिंग प्रक्रिया की शुरूआत ने संविधान के अनुच्छेद 14, 19 (1) जी और 21 के तहत गारंटीकृत क्लर्कों के मौलिक अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।याचिकाकर्ता...

स्कूल
स्कूलों को 16 फरवरी से फिजिकल क्लासेस के लिए पूरी फीस लेने की अनुमति; 31 मार्च तक भुगतान में चूक के लिए कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने शुक्रवार को कहा कि COVID-19 मामलों में गिरावट और राज्य के स्कूलों को फिर से खोलने पर विचार करते हुए निजी स्कूलों द्वारा शारीरिक कक्षाओं के संबंध में ली जाने वाली फीस में 20 प्रतिशत की कटौती का उसका पूर्व निर्देश 16 फरवरी, 2022 से समाप्त हो जाएगा।कोर्ट ने कहा कि स्कूलों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों को 16 फरवरी, 2022 से छात्रों के साथ उनकी नीति और व्यवस्था के अनुसार फीस लेने की अनुमति दी जाएगी।न्यायमूर्ति आईपी मुखर्जी और न्यायमूर्ति मौसमी भट्टाचार्य की...

लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने केएसएलयू के कुलपति के कथित तौर पर निर्धारित आयु सीमा के बाद भी पद पर रहने के खिलाफ कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने केएसएलयू के कुलपति के कथित तौर पर निर्धारित आयु सीमा के बाद भी पद पर रहने के खिलाफ कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

एक गैर-लाभकारी संगठन, लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने कर्नाटक राज्य लॉ यूनिवर्सिटी (केएसएलयू) के कुलपति के रूप में कथित तौर पर 65 वर्ष की निर्धारित आयु सीमा के बाद भी अपने पद पर बने रहने वाले प्रो. (डॉ.) पी. ईश्वर भा पर सवाल उठाते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।याचिकाकर्ताओं की ओर से शुक्रवार को पेश हुए एडवोकेट विट्टल बी आर ने कहा कि केएसएलयू अधिनियम, 2009 की धारा 14 में कुलपति के कार्यकाल का स्पष्ट रूप से उल्लेख है। वर्तमान कुलपति के जन्म का वर्ष जैसा कि विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में कहा गया...

एजी ने कहा, हिजाब इस्लाम की अनिवार्य प्रथा नहीं, कर्नाटक हाईकोर्ट ने टिप्पणी की, सरकारी आदेश में ऐसा कहने की क्या जरूरत थी?
एजी ने कहा, हिजाब इस्लाम की अनिवार्य प्रथा नहीं, कर्नाटक हाईकोर्ट ने टिप्पणी की, सरकारी आदेश में ऐसा कहने की क्या जरूरत थी?

कर्नाटक हाईकोर्ट की एक पूर्ण पीठ ने शुक्रवार को मुस्लिम छात्राओं द्वारा दायर याचिकाओं पर राज्य की ओर से महाधिवक्ता प्रभुलिंग नवदगी (एडवोकेट जनरल) को सुना। छात्राओं ने हिजाब (हेडस्कार्फ़) पहनने पर उन्हें एक सरकारी कॉलेज में प्रवेश करने से इनकार करने कार्रवाई को कोर्ट में चुनौती दी है।मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी, जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित और जस्टिस जेएम खाजी की खंडपीठ से एजी नवादगी ने कहा कि वह मुख्य रूप से निम्नलिखित आधारों पर बहस करेंगे:(i) हिजाब पहनना इस्लाम की आवश्यक धार्मिक प्रथा के...

धार्मिक संस्थानों की संपत्तियों को गलत दावों से बचाना, उनकी रक्षा करना अदालतों का कर्तव्य: केरल हाईकोर्ट
धार्मिक संस्थानों की संपत्तियों को गलत दावों से बचाना, उनकी रक्षा करना अदालतों का कर्तव्य: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने बुधवार को कहा कि धार्मिक और चैरिटेबल संस्थानों की संपत्तियों को गलत दावों या हेराफेरी से बचाना और उनकी रक्षा करना अदालतों का कर्तव्य है।न्यायमूर्ति अनिल के नरेंद्रन और न्यायमूर्ति पीजी अजितकुमार की खंडपीठ ने त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड द्वारा दिल्ली के एक ट्रस्ट को पंबा क्षेत्र में नौ दिवसीय 'रामकथा' पाठ कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति वापस ले ली।पीठ ने कहा, "उदाहरण कई ऐसे हैं जहां मंदिरों, देवताओं और देवस्वम बोर्डों की संपत्तियों के प्रबंधन और सुरक्षा का...

Unfortunate That The Properties Of Religious And Charitable Institutions Are Being Usurped By Criminals
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दृष्टिहीन व्यक्तियों के लिए कुछ पदों को 'अनिवार्य' करने के यूपी सरकार के फैसले के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक जनहित याचिका (पीआईएल) याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया। इस याचिका में सरकार के नेत्रहीन व्यक्तियों को कई सरकारी पदों के लिए आवेदन करने के लिए अयोग्य बनाने के फैसले को चुनौती दी गई है।अधिवक्ता श्वेताभ सिंह के माध्यम से ऑल इंडिया कन्फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड एंड नेशनल एसोसिएशन ऑफ द विजुअली हैंडीकैप द्वारा याचिका दायर की गई। इसमें कहा गया कि कई पद, जो पहले से ही नेत्रहीन व्यक्तियों के लिए चिन्हित थे और ऐसे व्यक्ति पहले से ही ऐसे पदों पर प्रभावी ढंग से...

कलकत्ता हाईकोर्ट
'बच्चे के जीवित रहने या सामान्य जीवन जीने की संभावना बहुत कम': कलकत्ता हाईकोर्ट ने लगभग 35 सप्ताह के भ्रूण के मेडिकल टर्मिनेशन की अनुमति दी

कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक महिला को उसके 34 सप्ताह व 6 दिन के भ्रूण को समाप्त करवाने की अनुमति दी। कोर्ट ने यह अनुमति इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए दी है कि बच्चे के जीवित रहने या सामान्य जीवन जीने की संभावना बहुत कम है। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि अगर गर्भावस्था को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करवाने की अनुमति नहीं दी जाती है तो इससे मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम होगा। जस्टिस राजशेखर मंथा की पीठ इस मामले में याचिकाकर्ता की तरफ से दायर उस याचिका पर अपना फैसला सुना रही...

दिल्ली हाईकोर्ट, दिल्ली
मृत व्यक्ति के खिलाफ आयकर अधिनियम, 1861 की धारा 148 के तहत जारी पुनर्मूल्यांकन नोटिस अमान्यः दिल्‍ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि मृत व्यक्ति के खिलाफ आयकर अधिनियम, 1861 की धारा 148 के तहत जारी पुनर्मूल्यांकन नोटिस अमान्य (null and void) है।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने सविता कपिला बनाम सहायक आयकर आयुक्त के मामले पर एक मृत व्यक्ति के खिलाफ नोटिस और परिणामी कार्यवाही की वैधता के सवाल का जवाब देने के लिए भरोसा किया।उक्त मामले में यह निर्धारित किया गया था कि,"एक आकलन को फिर से खोलने के लिए अधिकार क्षेत्र प्राप्त करने की अनिवार्यता यह है कि धारा 148 के तहत नोटिस एक सही...

झारखंड हाईकोर्ट
जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 12 के तहत जुवेनाइल को जमानत देते समय जमानती और गैर-जमानती अपराध में कोई अंतर नहीं: उत्तराखंड हाईकोर्ट

किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम (JJ Act), 2015 की धारा 12 के आलोक में उत्तराखंड हाईकोर्ट (Uttarakhand High Court) ने कहा कि कोई भी व्यक्ति, जो स्पष्ट रूप से एक बच्चा है, जमानतदार पेश करने की शर्त या बिना शर्त के जमानत पर रिहा होने का हकदार है या इसको एक परिवीक्षा अधिकारी की देखरेख में या किसी योग्य व्यक्ति की देखरेख में रखा जाएगा।न्यायमूर्ति आर.सी. खुल्बे ने कहा कि एक किशोर के संबंध में जमानती या गैर-जमानती अपराध के बीच का अंतर समाप्त कर दिया गया है।आगे कहा, "दूसरे शब्दों...