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नकली 'कजरिया टाइल' डीलरशिप: दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रेडमार्क और कॉपीराइट उल्लंघन मामले में अंतरिम राहत दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने कजारिया सेरामिक्स के पक्ष में प्रथम दृष्टया मामला पाते हुए सीपीसी के आदेश 39 के तहत एक अस्थायी निषेधाज्ञा जारी की। इसमें प्रतिवादी को टाइल निर्माता के पंजीकृत ट्रेडमार्क, कॉपीराइट, डोमेन नाम आदि का उल्लंघन करने से रोका गया है।जस्टिस अमित बंसल ने अंतरिम राहत देते हुए कहा,"प्रतिवादी नंबर पांच जनता को यह विश्वास दिलाकर धोखा दे रहा है कि वे वादी से जुड़े हुए हैं और वादी की ओर से डीलरशिप देने के लिए अधिकृत हैं। इस संबंध में प्रतिवादी नंबर पांच भी डीलरशिप के इच्छुकों से आधार कार्ड,...
दिल्ली की कोर्ट ने एएमयू, जामिया में दिए गए सीएए विरोधी भाषणों के मामले में शरजील इमाम के खिलाफ राजद्रोह के आरोप तय किए
दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और जामिया इलाके में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से संबंधित मामले में शरजील इमाम के खिलाफ आरोप तय किए।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने आईपीसी की धारा 124ए (राजद्रोह), 153ए (धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना), 153बी (आरोप, राष्ट्रीय-एकता के खिलाफ अभिकथन), 505 (सार्वजनिक दुर्भावना के लिए बयान) के साथ यूएपीए की धारा 13 (गैरकानूनी गतिविधियों के लिए सजा) के तहत आरोप तय किए।इमाम...
बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से लीक हो रहे ग्राहकों के डिटेल्स, जिससे हो रहे साइबर अपराध, पटना हाईकोर्ट ने पूरी जांच का निर्देश दिया
पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में एक साइबर अपराध मामले की उचित जांच का निर्देश दिया है। मामले में आईपीसी की धारा 419 सहपठित 420 और आईटी एक्ट की धारा 66 (बी) के तहत आरोप लगाए गए थे।जस्टिस संदीप कुमार ने कहा, "यह न्यायालय समझता है कि स्थानीय पुलिस साइबर धोखाधड़ी की जांच में अक्षम है और इसके लिए उसे जिले के अन्य पुलिस अधिकारियों की मदद लेनी पड़ती है। इस न्यायालय की राय में, साइबर अपराधियों द्वारा कोई भी साइबर धोखाधड़ी बैंक खाता विवरण, खाताधारकों के फोन नंबर आदि बैंक कर्मचारियों द्वारा लीक किए जाने...
साइबर क्राइम मामले में डिटेल्स लीक करने में बैंक अधिकारियों की संलिप्तता: पटना हाईकोर्ट ने अन्वेषण के निर्देश दिए
पटना हाईकोर्ट (High Court) ने साइबर अपराध (Cyber Crime) मामले में अन्वेषण के निर्देश दिए। मामले में आईपीसी की धारा 419 के साथ पठित 420 और आईटी की धारा 66 (बी) के तहत आरोप लगाए गए हैं।न्यायमूर्ति संदीप कुमार ने कहा,"यह कोर्ट समझता है कि स्थानीय पुलिस साइबर धोखाधड़ी की जांच में अक्षम है और इसके लिए उसे जिले के अन्य पुलिस अधिकारियों की मदद लेनी पड़ती है। इस न्यायालय की राय में, साइबर अपराधियों द्वारा कोई भी साइबर धोखाधड़ी बैंक अकाउंट डिटेल्स, खाताधारकों के फोन नंबर बैंक कर्मचारियों द्वारा लीक किए...
सार्वजनिक कंपनी के कर्मचारी नियुक्ति प्राधिकारी के अलावा अन्य अधिकारियों के समक्ष भी अनुशासनात्मक कार्यवाही के अधीन हो सकते हैं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि डिसिप्लिनरी आथॉरिटी, हालांकि अनिवार्य सेवानिवृत्ति, बर्खास्तगी और हटाने जैसे बड़े दंड लगाने के लिए सक्षम नहीं है, इसे लागू करने के लिए अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू कर सकता है। यह नोट किया गया कि यह सुझाव देने के लिए कुछ भी नहीं है कि अनुशासनात्मक/बड़ी दंड कार्यवाही शुरू करने के लिए केवल नियुक्ति प्राधिकारी ही सक्षम प्राधिकारी होगा।कोर्ट ने यह अवलोकन सीसीएस (सीसीए) नियम, 1965 के संबंध में किया।जस्टिस वी कामेश्वर राव ने कहा,"भले ही निदेशक (तकनीकी) डीओपी के संदर्भ में...
गैर-अनुसूचित जाति के व्यक्तियों द्वारा फर्जी जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करना एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(1)(x) के तहत अपराध नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी है कि यदि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति से संबंध न रखने वाले व्यक्ति फर्जी जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करते हैं, तो उन पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार की रोकथाम) अधिनियम की धारा 3(1)(x) के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है।न्यायमूर्ति श्रीनिवास हरीश कुमार की एकल पीठ ने दो आरोपित यमुना और विजया को आरोपमुक्त करते हुए कहा, ''यदि वैसे व्यक्ति द्वारा गलत सूचना के आधार पर फर्जी प्रमाण पत्र हासिल कर लिया जाता है जो अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति से संबंधित नहीं...
नोटरी संशोधन विधेयक: पूर्व पीएम देवेगौड़ा ने पीएम मोदी से नोटरी की अवधि को 15 साल तक सीमित करने के प्रस्ताव को वापस लेने का आग्रह किया
पूर्व प्रधान मंत्री एचडी देवेगौड़ा (Deve Gowda) ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) से नोटरी अधिनियम, 1952 की धारा 5 में प्रस्तावित संशोधन को वापस लेने का आग्रह किया।प्रस्तावित संशोधन विधेयक में नोटरी की सेवा की अधिकतम अवधि 15 वर्ष निर्धारित करने का प्रस्ताव है, जिसमें पांच साल के शुरुआती कार्यकाल के बाद पांच-पांच साल के ही दो रिन्यूअल विस्तार शामिल होंगे। मौजूदा कानून के अनुसार, नोटरी द्वारा नियुक्ति के विस्तार के लिए कितनी बार भी मांग की जा सकती है, इस पर कोई सीमा नहीं लगाता...
यदि कोई समझौता नहीं होता है तो लोक अदालत अपराधों से संबंधित विवादों का निर्णय नहीं कर सकती: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 और बिजली अधिनियम, 2003 के अन्योन्य प्रभावों की व्याख्या की है। कोर्ट ने कहा है, जहां स्थायी लोक अदालत के समक्ष पेश विवाद एक समाधेय (compoundable) अपराध के बराबर हो सकता है, सुलह और समझौते (conciliation and settlement) के उद्देश्य से स्थायी लोक अदालत इस पर विचार कर सकती है, हालांकि अगर सुलह विफल हो जाती है और अगर यह अपराध से संबंधित है तो, अपराध के समाधेय होने के बावजूद भी यह स्थायी लोक अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं है कि वह मामले को...
फैमिली कोर्ट से पक्षकारों के बीच समझौता कराने की अपेक्षा की जाती है,लेकिन कोर्ट का प्रयास न्याय की कीमत पर केवल मामलों को निपटाने का नहीं हो सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट से यह अपेक्षा की जाती है कि यदि संभव हो तो पक्षों के बीच एक समझौता हो सके, लेकिन कोर्ट का प्रयास न्याय की कीमत पर केवल मामलों को निपटाने का नहीं हो सकता है।न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने फैमिली कोर्ट द्वारा पारित आदेश को खारिज किया। इसमें कोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(ia) के तहत अपीलकर्ता पति द्वारा दायर तलाक की याचिका को खारिज कर दिया था।फैमिली कोर्ट ने आवेदन को यह देखने के बाद खारिज कर दिया कि अपीलकर्ता...
COVID-19: गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य में अधीनस्थ न्यायालयों के कामकाज के लिए 24 जनवरी से अगले आदेश तक एसओपी जारी किया
गुजरात हाईकोर्ट ने यह सुनिश्चित करने के लिए कि अदालत परिसर में भीड़ न हो और अदालत परिसरों में COVID-19 के प्रसार से बचने के लिए राज्य में अधीनस्थ अदालतों के कामकाज के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। उक्त एसओपी 24 जनवरी से अगले आदेश तक अधीनस्थ अदालतों में लागू रहेंगे।यह ध्यान दिया जा सकता है कि इस तथ्य को देखते हुए कि सभी जिलों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में COVID-19 के मामले आ रहे हैं, न्यायालय ने जिला और ट्रायल कोर्ट के कामकाज को फिर से शुरू कर दिया है।सात जनवरी, 2022 को कोर्ट ने...
COVID से मृत्यु की स्थिति में विवाहित बेटी भी अनुकंपा नियुक्ति की हकदारः आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस नीनाला जयसूर्या ने माना कि एक विवाहित बेटी भी अनुकंपा नियुक्ति की हकदार है। उन्होंने कहा कि विवाहित बेटी की वैवाहिक स्थिति कल्याणकारी योजनाओं में बाधक नहीं हो सकती। अपनी अनुकंपा नियुक्ति की प्रार्थना खारिज किए जाने से व्यथित होकर याचिकाकर्ता ने मौजूदा रिट याचिका दायर की थी। उसने प्रतिवादियों के आदेश को अवैध, मनमाना, अन्यायपूर्ण बताते हुए मांग की थी कि आदेश को रद्द किया जाए और उसे अनुकंपा के आधार पर किसी भी उपयुक्त पद पर नियुक्त करने के लिए परिणामी निर्देश जारी...
COVID-19: राजस्थान में अधीनस्थ न्यायालय, विशेष न्यायालय और न्यायाधिकरण 29 जनवरी तक वर्चुअल मोड से ही कार्य करेंगे
राजस्थान हाईकोर्ट ने COVID-19 के प्रसार को देखते हुए राज्य के सभी अधीनस्थ न्यायालयों, विशेष न्यायालयों और न्यायाधिकरणों के कामकाज को केवल वर्चुअल मोड के माध्यम से 29 जनवरी, 2022 तक जारी रखने का निर्णय लिया।हाईकोर्ट द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, उक्त कदम सभी संबंधितों की सुरक्षा के लिए उठाया गया है।सर्कुलर में कहा गया,"मौजूदा स्थिति और COVID-19 के प्रसार को देखते हुए सभी संबंधितों की सुरक्षा के लिए यह अधिसूचित किया जाता है कि सभी अधीनस्थ न्यायालय/विशेष न्यायालय/न्यायाधिकरण 29.01.2020 तक केवल...
मजिस्ट्रेट सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत शक्ति का प्रयोग करके अन्वेषण की निगरानी कर सकते हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने कहा कि मजिस्ट्रेट सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत शक्ति का प्रयोग करके अन्वेषण की निगरानी कर सकता है।न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की खंडपीठ ने सुधीर भास्करराव तांबे बनाम हेमंत यशवंत धागे, (2016) 6 एससीसी 277 मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2016 के फैसले का हवाला देते हुए यह टिप्पणी की। इसमें यह स्पष्ट रूप से कहा गया था कि किसी मामले में जिस तरह से जांच की जा रही है, उससे व्यथित व्यक्ति, सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत मजिस्ट्रेट...
हमारा एजेंडा पक्षकारों को न्याय दिलाना है, मामले का निपटारा करना नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने ट्रायल कोर्ट के जजों द्वारा ट्रायल को समाप्त करने के लिए समय बढ़ाने की मांग करने वाले दो अलग-अलग अनुरोधों पर निर्णय करते हुए कहा, "यहां तक कि अगर मुकदमे में थोड़ी-सी भी देरी है तो यह ठीक है। लेकिन अंत में मुकदमे के पक्षकारों को आश्वस्त होना चाहिए कि उनके मामले में न्याय हो गया है।"चीफ जस्टिस रवि मलीमथ और जस्टिस प्रणय वर्मा की खंडपीठ दो पुनर्विचार याचिकाओं पर सामूहिक रूप से विचार कर रही थी। इसमें दो निचली अदालत के न्यायाधीश हाईकोर्ट द्वारा दो अलग-अलग...
"फोरेंसिक रिपोर्ट को आरोपी के सामने नहीं रखा गया": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रेप-मर्डर केस में फिर से सुनवाई का आदेश दिया, मौत की सजा खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने शुक्रवार को रेप-मर्डर केस (Rape-Murder Case) में एक आरोपी को दी गई मौत की सजा की पुष्टि करने के लिए दिए गए संदर्भ को खारिज किया और सत्र न्यायालय को मामले में फिर से सुनवाई करने का निर्देश दिया।न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति समीर जैन की पीठ नजीरुद्दीन नाम के व्यक्ति की अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसे एक ही परिवार के 3 लोगों की हत्या और एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार करने का दोषी ठहराया गया था।हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने अपीलकर्ता को दोषी...
कोर्ट सीआरपीसी की धारा 482 के क्षेत्राधिकार के तहत विचार नहीं कर सकता कि क्या धारा 161 के तहत दर्ज बयान में बाद में सुधार किया गया था: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश कोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दायर एक याचिका में कोर्ट अपनी अंतर्निहित शक्तियों के प्रयोग में रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों की सराहना नहीं कर सकता है।चार्जशीट को रद्द करने के लिए सीआरपीसी, 1973 की धारा 482 के तहत आपराधिक याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता-आरोपी पर आईपीसी की धारा 498ए आर/डब्ल्यू 34 और दहेज निषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3 और 4 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए मुकदमा चलाया जा रहा है।याचिकाकर्ता का तर्क है कि प्राथमिकी में केवल यह कहा गया है कि...
राजस्थान हाईकोर्ट ने आईपीसी की धारा 498A के तहत दोषी 82 वर्षीय महिला की सजा कम की
राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने नरम रुख अपनाते हुए धारा 498ए आईपीसी के तहत दोषी 82 वर्षीय महिला को दी गई सजा को उसके द्वारा पहले से ही जेल में गुज़ारी गई अवधि तक कम कर दिया। महिला लगभग ढाई महीने तक जेल में रही और कोर्ट ने इसी अवधि तक उसकी सजा सीमित कर दी।न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति विनोद कुमार भरवानी ने कहा,"हमारा विचार है कि अपीलकर्ता सयारी पहले ही 82 वर्ष की आयु प्राप्त कर चुकी है, इसलिए उसे दी गई सजा को उसके द्वारा पहले ही जेल में गुज़ारी गई अवधि तक कम कर दिया जाए जो लगभग ढाई महीने...
'कोई गंभीर परिस्थिति नहीं': गुरुग्राम कोर्ट ने कथित तौर पर समय से पहले पैदा हुए 28 दिन के शिशु की स्तनपान कराने वाली मां को जमानत देने से इनकार किया
गुरुग्राम कोर्ट ने बुधवार को एक 28 दिन के शिशु की स्तनपान कराने वाली मां को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि उसके खिलाफ लगाए गए आरोप संगीन और गंभीर प्रकृति के हैं। कोर्ट के समक्ष तर्क दिया गया था कि आरोपी को जमानत देना महत्वपूर्ण है क्योंकि उसने प्री-मैच्योर शिशु को जन्म दिया है, जिसे महत्वपूर्ण चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ने कहा कि इस तर्क के समर्थन में कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया है कि मां या बच्चे को कोई चिकित्सीय समस्या है। कोर्ट ने यह भी कहा...
स्वास्थ्य का अधिकार - चिकित्सा उपचार प्रतिपूर्ति से संबंधित प्रावधानों को उदारतापूर्वक लागू किया जाए: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि सेल्फ प्रिजर्वेशन स्वास्थ्य के अधिकार का एक पहलू है, जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है।जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल ने चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए याचिकाकर्ता के अनुरोध पर विचार करने के लिए प्राधिकरण को निर्देश देते हुए कहा कि चिकित्सा उपचार की प्रतिपूर्ति से संबंधित प्रावधानों को उदारतापूर्वक समझा जाना चाहिए।न्यायालय ने माना कि "स्वास्थ्य के अधिकार" में "सस्ते उपचार का अधिकार" शामिल है और "चिकित्सा उपचार की प्रतिपूर्ति से संबंधित प्रावधानों को...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (17 जनवरी, 2022 से 21 जनवरी, 2022) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।ऑर्डर VII रूल्स 11 सीपीसी के तहत आवेदन पर विचार करते समय लिखित बयान में दी गई प्रतिवादी की दलील पूरी तरह अप्रासंगिक: मध्य प्रदेश हाईकोर्टमध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दीवानी न्यायालय के ऑर्डर के खिलाफ दीवानी पुनरीक्षण पर निर्णय करते हुए माना कि ऑर्डर VII रूल 11 सीपीसी के तहत प्रस्तुत आवेदन को अस्वीकार करना...




















