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बिहार में न्यायिक अवसंरचना विकास: पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से अनुपालन रिपोर्ट मांगी
पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) ने बिहार राज्य के भीतर विभिन्न अदालतों में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं के लिए बुनियादी ढांचा और सुविधाएं प्रदान करने में राज्य की ओर से उदासीनता को उजागर करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायिक अवसंरचना विकास पर राज्य सरकार से अनुपालन रिपोर्ट मांगी है।मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायमूर्ति एस कुमार की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि यह याचिका केवल राज्य में अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए ढांचागत जरूरतों तक ही सीमित है।कोर्ट की टिप्पणियां कोर्ट ने शुरू में...
विभागीय जांच के बिना, एफआईआर को संदर्भित कर दिया गया बर्खास्तगी आदेश दोषपूर्णः गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि पूर्ण विभागीय जांच किए बिना कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर और मामला दर्ज करने का संदर्भ देकर दिए गए बर्खास्तगी के आदेश का दोषपूर्ण होना तय है। जस्टिस बीरेन वैष्णव की खंडपीठ ने अनुच्छेद 226 के तहत एक याचिका पर यह टिप्पणी की, जिसमें याचिकाकर्ता की सेवाओं को समाप्त करने के लिए किए गए संचार को चुनौती दी गई थी। बेंच ने संचार को रद्द कर दिया।पृष्ठभूमियाचिकाकर्ता को गुजरात लाइवलीहुड प्रमोशन कंपनी लिमिटेड में तालुका प्रबंधक के रूप में अनुबंध पर नियुक्त किया गया था। 2018 में कुछ...
पूर्ण विभागीय जांच के बिना कर्मचारी को बर्खास्त नहीं किया जा सकता: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने याचिकाकर्ता की सेवाओं को समाप्त करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका की अनुमति देते हुए कहा कि नियोक्ता को काम पर रखने और नौकरी से निकालने की अनुमति नहीं है।कोर्ट ने आगे कहा कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुसार नियमित जांच किए बिना कर्मचारी को कदाचार के आधार पर एक झटके में नौकरी से नहीं निकाला जा सकता है। पूरा मामलायाचिकाकर्ता, एक जूनियर क्लर्क (प्रशासन), पांच साल के अनुबंध के आधार पर तालुका पंचायत में सेवाओं में लगा हुआ था। याचिकाकर्ता की...
एनडीपीएस अधिनियम की धारा 36 ए (4) के तहत आरोपी की 180 दिन से आगे हिरासत को उचित ठहराने के लिए लोक अभियोजक को स्वतंत्र रूप से रिपोर्ट दाखिल करनी चाहिए : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने माना है कि एनडीपीएस अधिनियम के तहत आरोपी को 180 दिनों की निर्धारित अवधि के भीतर जांच पूरी नहीं होने के बहाने डिफॉल्ट जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता है, जब तक कि लोक अभियोजक, स्वतंत्र रूप से अपना विवेक लगाने के बाद, जांच एजेंसी को जांच पूरी करने में सक्षम बनाने के लिए आरोपी को और हिरासत में रखने के औचित्य का खुलासा करते हुए एक रिपोर्ट दाखिल नहीं करता है।जस्टिस संत प्रकाश ने कहा कि कोई लोक अभियोजक केवल एक पोष्ट ऑफिस या फारवर्डिंग एजेंसी नहीं है। "समय के विस्तार की...
[41 साल पुराना मर्डर केस] एकमात्र चश्मदीद की गवाही विश्वसनीय नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोषी की उम्रकैद की सजा खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को 1980 के एक मामले में हत्या के दोषी की उम्रकैद की सजा को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मामले में एकमात्र चश्मदीद गवाह की गवाही विश्वसनीय नहीं है।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने मामले में जोड़े गए तथ्यों, परिस्थितियों और सबूतों के विश्लेषण में पाया कि घटना के एकमात्र चश्मदीद पीडब्ल्यू-1 की गवाही पर भरोसा करना सुरक्षित नहीं था, जिन्होंने घटना से ठीक पहले मृतक के साथ थे।तथ्यमामले में एफआईआर नबी बख्श (पीडब्ल्यू-1) ने दर्ज कराई थी, जिन्होंने आरोप...
"न्यायपालिका, न्यायाधीशों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों को हटा दिया गया है": ट्विटर ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट को सूचित किया
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट (Andhra Pradesh High Court) द्वारा 31 जनवरी, 2022 को पारित आदेश के अनुपालन में एक हलफनामा दायर करते हुए ट्विटर (Twitter) ने कोर्ट को सूचित किया है कि उसने न्यायपालिका, हाईकोर्ट के जज के खिलाफ पोस्ट की गई कई 'अपमानजनक' टिप्पणियों को हटाने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं।आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने पहले उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार न्यायपालिका और कुछ उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के खिलाफ पोस्ट की गई कई 'अपमानजनक' टिप्पणियों को हटाने में विफल रहने के लिए ट्विटर से स्पष्टीकरण...
गुजरात हाईकोर्ट ने शादी करने के इच्छुक युवा जोड़े को सुरक्षा प्रदान की
गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस सोनिया गोकानी और जस्टिस मौना भट्ट की खंडपीठ ने एक दूसरे से शादी करने के इच्छुक एक युवा जोड़े को सुरक्षा प्रदान करते हुए जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण, बनासकांठा की देखरेख से जयबेन श्रीमाली की रिहाई की मांग वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिका स्वीकार कर ली।अदालत ने पहले एक अवसर पर याचिकाकर्ता हितेशकुमार प्रजापति से शादी करने में रुचि रखने वाले कॉर्पस को सुरक्षा प्रदान की थी, लेकिन यह कहने के लिए दबाव डाला गया कि वह 21 वर्ष से कम आयु का था। याचिकाकर्ता के 07.02.2022 को 21 वर्ष...
बच्चों का गवाह के रूप में परीक्षण नहीं करना अभियोजन के मामले के लिए घातक नहीं है, जबकि वयस्क गवाह उपलब्ध हैं: तेलंगाना हाईकोर्ट
तेलंगाना हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसला में कहा कि बच्चों को अदालत में नहीं बुलाया जा सकता है और जब तक बहुत जरूरी नहीं है और मामले को साबित करने के लिए अन्य गवाह नहीं है, तब तक उन्हें गवाह के रूप में उद्धृत नहीं किया जा सकता है।कोर्ट ने कहा, कि जब वयस्क गवाह उपलब्ध हों तो बच्चों का परीक्षण नहीं करना अभियोजन के मामले के लिए घातक नहीं है।जस्टिस जी राधा रानी ने यह टिप्पणी निचली अदालत के आदेश के खिलाफ राज्य द्वारा दायर एक अपील पर सुनवाई के दरमियान की, जिसमें आईपीसी की धारा 448 (घर में घुसना), 354...
'पति बेरोजगारी की दलील देकर अपनी पत्नी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से नहीं बच सकता': दिल्ली कोर्ट ने भरण-पोषण के अंतरिम आदेश को बरकरार रखा
दिल्ली कोर्ट (Delhi Court) ने एक मामले में पति द्वारा पत्नी को 5,133 रुपये प्रति माह अंतरिम भरण-पोषण की मामूली राशि देने के आदेश को बरकरार रखा है।कोर्ट ने कहा कि केवल इस तथ्य को देखते हुए कि पति बेरोजगार है, वह अपनी पत्नी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बच नहीं सकता है। तीस हजारी कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजय शर्मा ने कहा कि पति बेरोजगारी की दलील देकर पत्नी के प्रति अंतरिम भरण पोषण के संबंध में अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता है।कोर्ट ने कहा, "केवल इस तथ्य को देखते हुए कि पति बेरोजगार है,...
कर्नाटक हाईकोर्ट ने उन ऑनलाइन गेमिंग पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून को रद्द किया, जिनमें दांव लगाया जाता है
कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोमवार को कर्नाटक पुलिस (संशोधन) अधिनियम 2021 के कुछ प्रावधानों को संविधान के परे (ultra vires) माना और उन्हें रद्द कर दिया। उन प्रावधानों के जरिए राज्य सरकार ने ऐसे ऑनलाइन गेम को प्रतिबंधित कर दिया था, जिनमें दांव लगाया जाता है।इस अधिनियम में प्रावधानों के उल्लंघन पर अधिकतम तीन साल की कैद और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।चीफ जस्टिस रितु राज अवस्थी और जस्टिस कृष्ण एस दीक्षित की खंडपीठ ने कहा, "उपरोक्त परिस्थितियों में ये रिट याचिकाएं सफल होती हैं। कर्नाटक पुलिस...
यूपी में अधीनस्थ न्यायालय आज से न्यायिक कार्य के लिए खुले रहेंगे: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिशानिर्देश जारी किए
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य में COVID-19 के घटते मामलों को देखते हुए अधीनस्थ न्यायालयों और न्यायाधिकरणों के कामकाज के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए। आज यानी 14 फरवरी से हाईकोर्ट के अधीनस्थ सभी न्यायालय (न्यायाधिकरण सहित) न्यायिक कार्य और प्रशासनिक मामलों को लेने के लिए खुले रहेंगे।शनिवार को जारी नवीनतम दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि न्यायालय परिसर में कोई भी COVID-19 पॉजिटिव मामला पाया जाता है तो अदालत को बंद नहीं किया जाएगा और यह जिला मजिस्ट्रेट, अन्य प्रशासनिक अधिकारियों और सीएमओ की मदद से...
'अखबारों की रिपोर्ट पर आधारित सामान्य आरोप जनहित में संज्ञान लेने का कारण नहीं होने चाहिए': राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि समाचार पत्रों की रिपोर्टों के आधार पर केवल सामान्य कथन/आरोप जनहित में संज्ञान लेने का कारण नहीं होने चाहिए।उक्त याचिका राज्य में सभी बोरवेल को कवर करने के लिए प्रतिवादियों को निर्देश देने की प्रार्थना के साथ दायर की गई थी ताकि दुर्घटना के माध्यम से मनुष्य या जानवर को कोई हताहत न हो।याचिका एयर ट्री फाउंडेशन सोसाइटी ने अपने सचिव मनीष शर्मा के माध्यम से दायर की थी।चीफ जस्टिस अकील कुरैशी और जस्टिस सुदेश बंसल ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा,"समाचार पत्रों की...
सार्वजनिक नीलामी में बेची गई जमीन के लिए कोई शर्त नहीं होने पर बिक्री के अधिकारों पर कोई बंधन नहीं: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने कहा कि "जब जमीन एक सार्वजनिक नीलामी में बेची गई और बिक्री के उक्त आदेश से जुड़ी कोई शर्त नहीं है, तो संबंधित व्यक्ति के संबंधित भूमि की बिक्री के अधिकारों पर कोई बंधन नहीं हो सकता है।"न्यायमूर्ति एपी ठाकर की खंडपीठ ने विशेष सचिव (अपील) राजस्व विभाग ('एसएसआरडी') द्वारा याचिकाकर्ता की जमीन को सरकार को सौंपने के आदेश को चुनौती देने वाली एक याचिका में यह टिप्पणी की।जब भूमि को सार्वजनिक नीलामी में बेचा गया और बिक्री के उक्त आदेश से जुड़ी कोई शर्त नहीं है,...
बिहार में डीआरटी काम नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट ने संपत्ति की ई-नीलामी पर रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बिहार राज्य में ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) के कार्यात्मक नहीं होने पर विचार करने के बाद बिहार में एक व्यक्ति के आवास की ई-नीलामी पर रोक लगा दी।जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्य कांत की पीठ ने पटना हाईकोर्ट के 30 नवंबर, 2021 के आदेश ("आक्षेपित आदेश") को चुनौती देने वाली एक विशेष अनुमति याचिका पर विचार करते हुए राहत दी।हाईकोर्ट ने उक्त आदेश में याचिकाकर्ता को भारतीय स्टेट बैंक के साथ खाते के निपटान के लिए समय देते हुए, निपटान के लिए विफल होने की स्थिति में उसे...
लिंगानुपात में गिरावट का परिणाम अधिक से अधिक 'विनिमय विवाह': गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने पाया है कि गुजरात राज्य में लिंगानुपात में गिरावट के परिणामस्वरूप विनिमय विवाह (Exchange Marriage) के अधिक से अधिक मामले सामने आ रहे हैं।विनिमय विवाह (Exchange Marriage) में दो समूहों के बीच पति-पत्नी का एक व्यवस्थित और पारस्परिक आदान-प्रदान शामिल है। न्यायमूर्ति सोनिया गोकानी और न्यायमूर्ति मौना एम. भट्ट की खंडपीठ उस मामले की सुनवाई कर रहे थे जिसमें लड़की के पिता चाहते थे कि कपल तलाक देकर अलग हो जाएं और वह अपनी लड़की का विवाह विनिमय प्रथा के तहत कर...
जब आरोपों से सम्मानजनक रूप से बरी न हो, सेवा में फिर से बहाली अधिकार के रूप में प्रवाहमान नहीं हो सकती: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने पर सेवा से बर्खास्तगी को चुनौती देने वाली एक अकाउंटेंट की याचिका खारिज करते हुए कहा कि जब सरकारी कर्मचारी को सम्मानजनक तरीके से अपराध से बरी नहीं किया गया है तो नौकरी में उसकी पुनर्बहाली अधिकार के तौर पर प्रवाहित नहीं हो सकती।लेखाकार ग्रेड-I पद पर कार्यरत याचिकाकर्ता ने 19 मार्च, 2013 के उस आदेश को चुनौती देते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसके तहत उन्हें भ्रष्टाचार निवारण कानून, 1988 की धारा 7 और 15 के तहत दोषसिद्धि के आधार पर सीसीएस...
हिजाब विवाद: सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका, शैक्षणिक संस्थानों में कॉमन ड्रेस कोड लागू करने की मांग
कर्नाटक में कॉलेजों में हिजाब पर प्रतिबंध के खिलाफ विरोध की पृष्ठभूमि में कानून के एक छात्र ने केंद्र और राज्यों में रजिस्टर्ड और राज्य द्वारा मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों (Educational Institutions) में एक समान ड्रेस कोड (Common Dress Code) सख्ती से लागू करने के निर्देश देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। विधि छात्र ने अपनी याचिका में सामाजिक समानता सुरक्षित करने, गरिमा सुनिश्चित करने और बंधुत्व, एकता और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए दिशा निर्देश देने की मांग की है। अधिवक्ता...
मध्य प्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी ने जिला स्तर पर अधिवक्ताओं के लिए फाउंडेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किया
मध्यप्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी, जबलपुर द्वारा मध्यप्रदेश के 50 जिला मुख्यालयों पर पांच वर्ष से कम समय से प्रैक्टिस कर रहे नव नामांकित अधिवक्ताओं (newly enrolled advocates) के लिए दो दिवसीय ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन किया जा रहा है।भारत में आयोजित होने वाले इस तरह के पहले कार्यक्रम के रूप में पहचाने जाने वाले इस कार्यक्रम में साल भर में दो दिनों में कई सेशन होंगे। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रवि मलीमथ ने इस कार्यक्रम का ई-उद्घाटन किया।न्यायमूर्ति शील नागू, प्रशासनिक...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश पत्र पर हस्ताक्षर न करने पर एक सिविल न्यायाधीश को कारण बताओ नोटिस जारी किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को सिविल जज (जूनियर डिवीजन), दक्षिण, लखनऊ के न्यायालय के पीठासीन अधिकारी को एक कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा कि आदेश पत्र पर हस्ताक्षर नहीं करने के लिए क्यों नहींउनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की जाए।जस्टिस संगीता चंद्रा की खंडपीठ ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन), दक्षिण, लखनऊ, पीयूष भारती को लिस्टिंग की अगली तारीख यानी 28 मार्च, 2022 तक अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।संक्षेप में मामलादया अग्रवाल (आवेदक / वादी) ने प्रतिवादी के खिलाफ एक संपत्ति के...
सीआरपीसी की धारा 41-ए के तहत नोटिस जारी होने के बाद पुलिस मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर सकती: तेलंगाना हाईकोर्ट
तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा धारा 41-ए के तहत नोटिस जारी करने के बाद अगर पुलिस को लगता है कि आरोपी को गिरफ्तार करना है तो पुलिस को संबंधित मजिस्ट्रेट से अनुमति प्राप्त करनी होगी। नोटिस जारी होने के बाद संबंधित मजिस्ट्रेट की बिना अनुमति के पुलिस आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकती।जस्टिस ललिता कन्नेगंती की खंडपीठ ने इस प्रकार आईपीसी की धारा 406, धारा 420 के तहत दंडनीय अपराधों के तहत दर्ज एक मामले में आवेदक द्वारा दायर एक अग्रिम जमानत याचिका पर विचार किया।संक्षेप में मामलायाचिकाकर्ता के...





![[41 साल पुराना मर्डर केस] एकमात्र चश्मदीद की गवाही विश्वसनीय नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोषी की उम्रकैद की सजा खारिज की [41 साल पुराना मर्डर केस] एकमात्र चश्मदीद की गवाही विश्वसनीय नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोषी की उम्रकैद की सजा खारिज की](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2021/10/21/500x300_402691-allahabadhc.jpg)












