मुख्य सुर्खियां
किसी व्यक्ति को किसी स्थान विशेष पर पदस्थापन का निहित अधिकार नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को किसी विशेष स्थान पर नियुक्त होने का निहित अधिकार नहीं है। अदालत ने आगे कहा कि एक भर्ती के दूसरे ज़िला में ट्रांसफर के अनुरोध को स्वीकार करने से चेन रिएक्शन हो सकता है और कई बार काफी प्रशासनिक कठिनाइयां हो सकती हैं।चीफ जस्टिस अकील कुरैशी और जस्टिस मदन गोपाल व्यास ने आदेश दिया,"भर्ती के समय विशेष जिले, संभाग या अंचल में नियुक्ति या आमेलन का प्रश्न अनिवार्य रूप से चयनित उम्मीदवार की सुविधा के लिए है, लेकिन यह हमेशा प्रशासनिक अत्यावश्यकताओं के अधीन है।...
केंद्र ने 18 ऋण वसूली न्यायाधिकरणों में पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति को मंजूरी दी
कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने पूरे भारत में 18 ऋण वसूली न्यायाधिकरणों (डीआरटी) में पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति के लिए वित्तीय सेवा विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।नियुक्तियां 1,44,200 रुपए से 2,18 200 रुपए प्रति के वेतन स्तर पर माह चार वर्ष की अवधि के लिए या सत्तर वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, की गई हैं।नियुक्तियां इस प्रकार हैं,- डीआरटी, जबलपुर: राम निवास पटेल, सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश (मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा)- डीआरटी, हैदराबाद-1: गुम्मादी गोपीचंद,...
"विवाह प्रमाण पत्र बच्चा गोद लेने के लिए आवश्यक नहीं": इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चा गोद लेने के लिए विवाह प्रमाण पत्र अनिवार्य नहीं है। इसके साथ ही एक एकल माता-पिता भी हिंदू दत्तक और रखरखाव अधिनियम, 1956 के तहत बच्चा गोद ले सकते हैं।जस्टिस डॉ कौशल जयेंद्र ठाकर और जस्टिस विवेक वर्मा की खंडपीठ ने एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति और उसके पति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त टिप्पणी की। इस दंपत्ति ने अपनी याचिका में उप रजिस्ट्रार, हिंदू विवाह, जिला वाराणसी को ऑनलाइन आवेदन पर विचार करने और निर्णय लेने के लिए निर्देश देने की मांग की थी।मूलतः...
"अदालतें धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करने में धीमी हैं": जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने धार्मिक बलिदान के नाम पर जानवरों का वध के खिलाफ जनहित याचिका खारिज की
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट (J&K&L High Court) ने हाल ही में एक जनहित याचिका (PIL) याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें अंधविश्वास के आधार पर और धार्मिक बलिदान के नाम पर जानवरों के वध की अवैध प्रथा पर रोक लगाने की मांग की गई थी।मुख्य न्यायाधीश पंकज मिथल और न्यायमूर्ति सिंधु शर्मा की खंडपीठ ने यह भी कहा कि आमतौर पर अदालतें धार्मिक मामलों में या धर्म या किसी भी समुदाय की प्रथाओं पर आधारित भावनाओं के साथ हस्तक्षेप करने में हमेशा धीमी होती हैं।क्या है पूरा मामला?अनिवार्य रूप से, न्यायालय एक...
"पंजाब एक समृद्ध राज्य था, लेकिन अब ड्रग-तस्करी की चपेट में है": पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एनडीपीएस के एक आरोपी को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा, "पंजाब राज्य जो समृद्ध राज्यों में से एक के रूप में जाना जाता था, अब मादक पदार्थों की तस्करी की चपेट में है।"जस्टिस हरनरेश सिंह गिल की खंडपीठ ने एनडीपीएस अधिनियम, 1985 की धारा 21 और 29 के तहत दर्ज केस में हरभजन सिंह को कथित रूप से 19000 नशीले कैप्सूल 'रिडले' रखने के आरोप में जमानत देने से इनकार करते हुए उक्त टिप्पणी की।अभियोजन पक्ष के मामले के अनुसार, आरोपी/जमानत आवेदक सह-अभियुक्त के साथ कार में यात्रा कर रहा...
[सीआरपीसी की धारा 202] अगर आरोपी मजिस्ट्रेट के क्षेत्राधिकार से बाहर है तो प्रक्रिया जारी करने से पहले जांच/अन्वेषण अनिवार्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 202 (1) के अनुसार, यदि कोई आरोपी मजिस्ट्रेट के अधिकार क्षेत्र से बाहर रहता है तो सीआरपीसी की धारा 204 के तहत प्रक्रिया जारी करने से पहले ऐसे मजिस्ट्रेट के लिए यह अनिवार्य है कि वह या तो मामले की स्वयं जांच करे या जांच करने का निर्देश दे।न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की खंडपीठ ने आगे कहा कि सीआरपीसी की धारा 202 के प्रावधान के अनुसार। (23.06.2006 से प्रभावी रूप से संशोधित), आवश्यकता यह है कि उन मामलों में, जहां आरोपी उस क्षेत्र से...
पीड़ित के आघात की अभिव्यक्ति एक मौलिक अधिकार, केवल मानहानि, अवमानना आदि जैसी श्रेणियों के तहत कटौती की जा सकती: दिल्ली कोर्ट
दिल्ली की एक अदालत ने कहा कि किसी पीड़ित के आघात या अनुभव की अभिव्यक्ति उसका मौलिक अधिकार है, जिसे केवल चार व्यापक श्रेणियों के अंतर्गत आने पर ही रोका जा सकता है।अतिरिक्त सिविल जज प्रीति परेवा ने चार श्रेणियों को निम्नानुसार सूचीबद्ध किया:- मानहानि या बदनामी;- न्यायालय की अवमानना;- शालीनता या नैतिकता के खिलाफ अपराध, और- सुरक्षा को कमजोर करना या राज्य के खिलाफ प्रवृत्ति रखना।न्यायालय स्कूपव्हूप के सीईओ के खिलाफ समदीश भाटिया नामक एक कर्मचारी द्वारा कथित यौन उत्पीड़न के संबंध में एक मामले की सुनवाई...
जिस व्यक्ति से पूछताछ की जानी है, वह पूछताछ का स्थान तय नहीं कर सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को जांच एजेंसी और जांच अधिकारी के पास जांच की निरंकुश शक्ति पर जोर देते हुए कहा कि उस व्यक्ति के पास यह विकल्प नहीं है, जिससे पूछताछ की जानी है कि वह इस तरह की पूछताछ का स्थान तय कर सके। कोर्ट ने कहा कि जिस व्यक्ति से पूछताछ की जानी है, वह पूछताछ का स्थान तय नहीं कर सकता।जस्टिस अंजनी कुमार मिश्रा और जस्टिस दीपक वर्मा की खंडपीठ ने आगे कहा कि हाईकोर्ट को अनुच्छेद 226 के तहत अपनी शक्ति के प्रयोग के तहत जांच में हस्तक्षेप करने की कोई शक्ति नहीं है।मामले में एफआईआर...
ऐसी रिट याचिका रजिस्टर्ड न करें जो विशिष्ट आधार पर न हो : बॉम्बे हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री से कहा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को कोई रिट याचिका तब तक दर्ज नहीं करने का निर्देश दिया, जब तक कि वह विशिष्ट आधार निर्धारित न करे। इस संबंध में कोई चूक देखने पर विभाग को सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई।औरंगाबाद बेंच में बैठे चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एनबी सूर्यवंशी की खंडपीठ ने निर्देश दिया,"रजिस्ट्री यह सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में कोई रिट याचिका तब तक दर्ज नहीं की जाए जब तक कि उसमें विशिष्ट आधार निर्धारित न हो, जिस पर रिट याचिका को स्थानांतरित किया जाता है। इस संबंध में किसी भी...
पति की चेतावनी के बावजूद, मौका देखकर देर रात पत्नी का बार-बार दूसरे आदमी को फोन करना वैवाहिक क्रूरता : केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक जोड़े को तलाक की डिक्री मंज़ूर करते हुए कहा है कि पति की चेतावनी को अनदेखा करते हुए एक पत्नी द्वारा किसी दूसरे पुरुष को गुप्त फोन कॉल करना, वैवाहिक क्रूरता के समान है।जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने अपने आदेश में यह भी कहा कि जब तक वैवाहिक जीवन को बहाल नहीं किया जाता है, तब तक केवल समझौता करना क्रूरता की माफी के समान नहीं होगा।''पति की चेतावनी की अवहेलना करते हुए पत्नी द्वारा किसी अन्य पुरुष को बार-बार अवसर देखकर फोन कॉल करना, वह भी देर रात में वैवाहिक क्रूरता के...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (14 फरवरी, 2022 से लेकर 18 फरवरी, 2022) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।धार्मिक संस्थानों की संपत्तियों को गलत दावों से बचाना, उनकी रक्षा करना अदालतों का कर्तव्य: केरल हाईकोर्टकेरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने बुधवार को कहा कि धार्मिक और चैरिटेबल संस्थानों की संपत्तियों को गलत दावों या हेराफेरी से बचाना और उनकी रक्षा करना अदालतों का कर्तव्य है।न्यायमूर्ति अनिल के...
दीवानी वाद में वादी को अपने बल पर अपना पक्ष सिद्ध करना होता है, वह दूसरे पक्ष के दस्तावेजों से अपना पक्ष मजबूत नहीं कर सकताः गुवाहाटी हाईकोर्ट
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दीवानी वाद में वादी को अपने बल पर अपना पक्ष सिद्ध करना होता है। वह दूसरे पक्ष के दस्तावेजों से अपना पक्ष मजबूत नहीं कर सकता। इन टिप्पणियों के साथ जस्टिस पार्थिवज्योति सैकिया ने संपत्ति स्वामित्व संबंधित एक मामले में निचली अदालतों के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।उन्होंने कहा," अपीलकर्ता (निचली अदालत में वादी) बिक्री विलेख को साबित करने में विफल रहा, इसलिए वह वाद भूमि पर अपना अधिकार साबित करने में विफल रहा। उपरोक्त कारणों से, इस अदालत ने पाया...
वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा निर्विरोध बीसीआई चेयरमैन चुने गए
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने शनिवार को 06.02.2022 को आयोजित परिषद के पदाधिकारियों के चुनाव के परिणामों की घोषणा की। बार काउंसिल ऑफ इंडिया की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा को निर्विरोध बीसीआई चेयरमैन चुना गया है। वह लगातार छठी बार इस पद के लिए चुने गए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता एस प्रभाकरण लगातार दूसरी बार बार काउंसिल ऑफ इंडिया के वाइस चेयरमैन के रूप में निर्विरोध चुने गए हैं। नए पदाधिकारियों का कार्यकाल 17 अप्रैल से शुरू होगा और वे 16 अप्रैल 2025 तक अपने-अपने पद पर...
दोषी करार दिए जाने से पहले सजा के अप्रत्यक्ष तरीके के रूप में जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने माना है कि जमानत से इनकार का इस्तेमाल आरोपियों को सजा से पहले दंडित करने के लिए अप्रत्यक्ष तरीके के रूप में नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने जमानत से इनकार के लिए अपराधों को विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत करने के विचार का भी विरोध किया।याचिकाकर्ताओं को जमानत देते हुए जस्टिस संजीव कुमार पाणिग्रही की पीठ ने कहा,"जमानत, जैसा कि कई निर्णयों में कहा गया है, सजा के रूप में रोकी नहीं जानी चाहिए। आरोपी को दोषी ठहराए जाने से पहले उसे दंडित करने के अप्रत्यक्ष तरीके के रूप में जमानत से...
[सीआरपीसी की धारा 372] पीड़ित को 31 दिसंबर, 2009 से पहले पारित बरी करने के आदेश के खिलाफ अपील करने का अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 372 के तहत एक पीड़ित/शिकायतकर्ता 31 दिसंबर, 2009 (जिस दिन सीआरपीसी की धारा 372 में एक प्रावधान जोड़ा गया) से पहले पारित बरी करने /अपराध की कम सजा/अपर्याप्त मुआवजे के आदेश के खिलाफ अपील नहीं कर सकता।उल्लेखनीय है कि सीआरपीसी की धारा 372 के प्रावधान में कहा गया कि पीड़ित/शिकायतकर्ता को अदालत द्वारा दिए गए किसी आरोपी को बरी करने, अपराध के लिए कम सज़ा देने या अपर्याप्त मुआवजा लगाने के आदेश के खिलाफ अपील करने का अधिकार है। जस्टिस विवेक कुमार बिड़ला और...
धारा 53A संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम - अपंजीकृत दस्तावेज पर कब्जे की रक्षा के लिए भरोसा नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम की धारा 53 ए का लाभ देने के लिए, जिस दस्तावेज पर भरोसा किया गया है, वह एक पंजीकृत दस्तावेज होना चाहिए।जस्टिस सुब्रमनियम प्रसाद ने कहा,"किसी भी अपंजीकृत दस्तावेज की जांच अदालत नहीं कर सकता है और पंजीकरण अधिनियम की धारा 49 सहपठित धारा 17(1ए) के मद्देनजर उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता है या साक्ष्य के रूप में नहीं लिया जा सकता।"पृष्ठभूमियाचिकाकर्ता का मामले यह था कि उसने एक भवन के भूतल पर एक दुकान 7,20,000 रुपये में खरीदने के लिए रविंदर कुमार...
'यहां तक कि शिक्षकों को भी नहीं बख्शा गया': वकील ने हिजाब प्रतिबंध मामले में हाईकोर्ट के आदेश का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया; महाधिवक्ता ने लिखित शिकायत देने पर गौर करने का आश्वासन दिया
कर्नाटक में कक्षाओं में धार्मिक कपड़े पहनने पर लगी रोक को राज्य के सभी स्कूलों और कॉलेजों पर लागू कर दिया गया है, जबकि पहले आदेश केवल उन कॉलेजों तक सीमित था, जहां कॉलेज विकास समिति (सीडीसी) ने यूनिफॉर्म निर्धारित किया था।कर्नाटक हाईकोर्ट को शुक्रवार को बताया गया कि 10 फरवरी को जारी अंतरिम आदेश, जिसमें सभी स्टूडेंट्स को, धर्म या अस्था पर विचार किए बिना, कक्षा के भीतर धार्मिक कपड़े पहनने से रोक दिया गया है, उसे राज्य के सभी स्कूलों कॉलेजों तक विस्तारित किया जा रहा है।एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश...
"मतदान के दौरान सांप्रदायिक सद्भाव को प्रभावित करने के लिए प्रायोजित मुकदमेबाजी": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंदिर-मस्जिद में लाउडस्पीकर को लेकर अवमानना याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंदिर और मस्जिद में लाउडस्पीकर के प्रयोग के संबंध में दायर अवमानना याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि यह एक प्रायोजित मुकदमा है ताकि राज्य के चुनावों को ध्यान में रखते हुए राज्य के सांप्रदायिक सद्भाव को प्रभावित किया जा सके।न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की खंडपीठ इस्लामुद्दीन द्वारा रवींद्र कुमार मंदर, डी.एम. रामपुरा के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी।याचिका में आरोप लगाया गया है कि वह 2015 की जनहित याचिका (पीआईएल) में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश...
[आपत्तिजनक टिप्पणी] "अपमान करने का कोई इरादा नहीं, लेकिन अपमानजनक अर्थ में प्रयुक्त शब्द": पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने युवराज सिंह को आंशिक राहत दी
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुवार को क्रिकेटर युवराज सिंह को उनकी कथित आपत्तिजनक जातिवादी टिप्पणी के लिए दर्ज एक मामले में आंशिक राहत दी। अदालत ने उनकी एफआईआर को खारिज करने की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153-ए और 153-बी के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया।जस्टिस अमोल रतन सिंह की खंडपीठ ने हालांकि स्पष्ट किया कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण), अधिनियम, 1989 की धारा 3 (1) (यू) के तहत अपराध के लिए उनके खिलाफ मामला /...
[रईस की प्रमोशन के दौरान भगदड़] "शाहरुख खान से माफी मांगने के लिए कहेंगे, इस मामले को खत्म करें": गुजरात हाईकोर्ट ने मामले में शाहरुख खान की याचिका पर कहा
गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने गुरुवार को अभिनेता शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उनके खिलाफ वडोदरा रेलवे स्टेशन पर वर्ष 2017 में उनकी फिल्म रईस के प्रचार के दौरान हुई भगदड़ के लिए एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया था।न्यायमूर्ति निखिल एस. करील की खंडपीठ ने कहा कि यह एक बेहतर विकल्प होगा यदि शाहरुख खान को मामले में मुकदमे का सामना करने के लिए कहने के बजाय माफी मांगने के लिए कहा जाए।पूरा मामलाप्राथमिकी के अनुसार, शाहरुख खान मुंबई से दिल्ली के लिए एक...


















![[आपत्तिजनक टिप्पणी] अपमान करने का कोई इरादा नहीं, लेकिन अपमानजनक अर्थ में प्रयुक्त शब्द: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने युवराज सिंह को आंशिक राहत दी [आपत्तिजनक टिप्पणी] अपमान करने का कोई इरादा नहीं, लेकिन अपमानजनक अर्थ में प्रयुक्त शब्द: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने युवराज सिंह को आंशिक राहत दी](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2022/02/19/500x300_410110-yuvrajsinghandpunjabhc.jpg)
![[रईस की प्रमोशन के दौरान भगदड़] शाहरुख खान से माफी मांगने के लिए कहेंगे, इस मामले को खत्म करें: गुजरात हाईकोर्ट ने मामले में शाहरुख खान की याचिका पर कहा [रईस की प्रमोशन के दौरान भगदड़] शाहरुख खान से माफी मांगने के लिए कहेंगे, इस मामले को खत्म करें: गुजरात हाईकोर्ट ने मामले में शाहरुख खान की याचिका पर कहा](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2022/02/19/500x300_410101-410077-raees-and-gujarat-hc.jpg)