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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
गोद लिए गए बच्चे को अचानक जैविक माता-पिता को नहीं सौंप सकते, उसके मनोविज्ञान को प्रभावित कर सकता हैः मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कस्टडी के लिए दायर हैबियस कार्पस याचिका खारिज की

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, इंदौर खंडपीठ ने हाल ही में एक बच्चे की कस्टडी से संबंधित मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा है कि एक गोद लिए गए बच्चे को तब तक उसके जैविक माता-पिता को नहीं सौंपा जा सकता है, जब तक यह पता न लगाया जाए कि बच्चे को उसके माता-पिता के बारे में कोई जानकारी है या नहीं? कोर्ट ने आगे यह भी कहा कि फैमिली कोर्ट ऐसी पूछताछ/जांच करने के लिए उपयुक्त मंच हैं क्योंकि वे इसके लिए अच्छी तरह से सुसज्जित हैं। जस्टिस विवेक रूसिया इस मामले में एक हैबियस कार्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण)...

बंदी प्रत्यक्षीकरण : राजस्थान हाईकोर्ट ने यूआईडीएआई को सात दिनों के भीतर संदिग्ध और नाबालिग लड़की के आधार विवरण को जांच अधिकारी के साथ साझा करने का निर्देश दिया
बंदी प्रत्यक्षीकरण : राजस्थान हाईकोर्ट ने यूआईडीएआई को सात दिनों के भीतर संदिग्ध और नाबालिग लड़की के आधार विवरण को जांच अधिकारी के साथ साझा करने का निर्देश दिया

राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) के अधिकारियों को जांच अधिकारी को संदिग्ध और एक नाबालिग बच्चे के आधार विवरण प्रदान करने की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया।अदालत ने आगे निर्देश दिया कि उपरोक्त विवरण सात दिनों के भीतर साझा किया जाएगा।जस्टिस विनोद कुमार भरवानी और जस्टिस संदीप मेहता ने कहा,"इसलिए, हम निर्देश देते हैं कि यूआईडीएआई के अधिकारी जांच अधिकारी को संदिग्ध के आधार विवरण और कॉर्पस प्रदान करने की प्रक्रिया में तेजी लाएंगे और इसे आज से सात दिनों के...

हाईकोर्ट ऑफ कर्नाटक
किसी व्यक्ति की जाति जन्म से निर्धारित होती है, विवाहित महिलाएं दुर्लभ परिस्थितियों में पति की जाति का दर्जा हासिल करती हैं: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) ने एक ग्राम पंचायत सदस्य अर्चना एमजी द्वारा दायर याचिका खारिज किया, जिसमें सिविल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसने उसे सामाजिक स्थिति की कमी के आधार पर खारिज कर दिया था।जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित की सिंगल जज बेंच ने कहा,"इस बात पर कोई विवाद नहीं है कि याचिकाकर्ता जन्म से अनुसूचित जनजाति से संबंधित नहीं है। हालांकि वह अनुसूचित जनजाति के एक सदस्य से शादी करके उक्त सामाजिक स्थिति हासिल करने का दावा करती है। आमतौर पर, जाति का निर्धारण जन्म से होता है और...

दिल्ली हाईकोर्ट
'प्राइवेट डिटेक्टिव्स' की गतिविधियों को विनियमित करने के लिए कानून बनाने की व्यवहार्यता की जांच करें: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा

दिल्ली हाईकोर्ट ने आज प्राइवेट डिटेक्टिव्स और उनकी एजेंसियों की गतिविधियों के नियमन की मांग वाली एक जनहित याचिका का निपटारा किया।एक्टिंग चीफ जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस नवीन चावला की खंडपीठ ने विषय में दिशानिर्देश जारी करने से इनकार करते हुए कहा,"यह अदालत कानून नहीं बना सकती है। इस संबंध में कोई परमादेश जारी नहीं किया जा सकता है।"हालांकि, इसने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह याचिका पर एक प्रतिनिधित्व के रूप में विचार करे और इस पहलू की जांच करे कि क्या निजी पहचान की गतिविधि के नियमन के लिए...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
"लालच, कटुता और छल": बॉम्बे हाईकोर्ट ने संपत्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट से धोखाधड़ी/ मिलीभगत से आदेश प्राप्त करने वाले व्यक्ति की अवमानना याचिका खारिज की

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने संपत्ति विवाद मामले में बेटे द्वारा अपने माता-पिता के खिलाफ दायर अवमानना याचिका खारिज किया और उसे अपने माता-पिता को 50,000 रुपये जुर्माने के रूप में भुगतान करने का निर्देश दिया।कोर्ट ने कहा कि "लालच, कटुता और छल" बेटे के आचरण से स्पष्ट है। याचिकाकर्ता बेटे मनोज कुमार डालमिया ने कथित तौर पर अपने माता-पिता के साथ सहमति की शर्तों का पालन न करने का आरोप लगाया, जिससे उन्हें दंपति के सांताक्रूज फ्लैट में अपने हिस्से से अधिक दिया गया, जबकि उनके परिवार को वहां...

राजस्थान बार ने अधिवक्ता की लापता बेटियों का पता लगाने में राज्य की विफलता के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया
राजस्थान बार ने अधिवक्ता की लापता बेटियों का पता लगाने में राज्य की विफलता के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया

राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर ने जिला बार एसोसिएशन, जयपुर के साथ मिलकर एक अधिवक्ता की दो नाबालिग बेटियों को खोजने में राज्य प्रशासन की विफलता का विरोध किया। उक्त नाबालिग 45 दिनों से अधिक समय से लापता हैं।जयपुर स्थित एडवोकेट अवधेश कुमार पुरोहित की दो नाबालिग बेटियां लाई सी.एम. सीनियर सेकेंडरी स्कूल करतारपुरा, जयपुर से 3 फरवरी 2022 से लापता हैं। उसी दिन एफआईआर भी दर्ज कराई गई। नाबालिग लड़कियों की लास्ट लोकेशन लखनऊ में बताई गई।राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने लड़कियों के बारे में जानकारी...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
[जुवेनाइल जस्टिस एक्ट] जघन्य अपराध करने पर भी बच्चे पर अपने आप वयस्क के रूप में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने हाल ही में एक आपराधिक पुनरीक्षण आवेदन में इस सवाल का निपटारा किया कि कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चे (सीसीएल) पर कब एक वयस्क के रूप में मुकदमा चलाया जा सकता है।एकल पीठ जज जस्टिस एम.जी. सेवलीकर ने कहा कि किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 15 के तहत जघन्य अपराधों का आकलन करना होता है ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि सीसीएल पर वयस्क के रूप में मुकदमा चलाया जाना है या नहीं।महाराष्ट्र राज्य द्वारा प्रभारी अधिकारी, आतंकवाद विरोधी...

दिल्ली हाईकोर्ट
"जघन्य अपराध": दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग की तस्करी करने वाली महिला को जमानत से इनकार किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने 14 साल की नाबालिग आदिवासी लड़की की तस्करी की आरोपी महिला को जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कम उम्र की एक मासूम लड़की को जघन्य अपराधों का शिकार बनाया गया और कई लोगों द्वारा गंभीर रूप से दुर्व्यवहार, शोषण और प्रताड़ित किया गया।जस्टिस चंद्र धारी सिंह ने कहा,"भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 370 और धारा 376 के तहत अपराध गंभीर प्रकृति के हैं और इसके प्रतिकूल सामाजिक प्रभाव हैं। याचिकाकर्ता पर एक नाबालिग लड़की की तस्करी का आरोप लगाया गया है,...

कम आय वाले युवा वकीलों के लिए सरकारी कोटे में आवास आवंटन के लिए योजना तैयार करें: मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया
कम आय वाले युवा वकीलों के लिए सरकारी कोटे में आवास आवंटन के लिए योजना तैयार करें: मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया

मद्रास हाईकोर्ट ने कम आय वाले युवा वकालत करने वाले वकीलों की दुर्दशा को ध्यान में रखते हुए उनके लिए किराये पर सरकारी कोटे में घरों के आवंटन के लिए एक योजना तैयार करने का प्रस्ताव रखा।जस्टिस कृष्णन रामासामी ने तमिलनाडु हाउसिंग बोर्ड और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह निर्धारित आयु तक प्रैक्टिस करने वाले युवा वकीलों को सरकारी कोटे में आवासीय आवासों का एक निश्चित प्रतिशत आरक्षित करते हुए तमिलनाडु और पुडुचेरी बार काउंसिल के परामर्श से योजना तैयार करें। एक विकल्प यह होगा कि संबंधित अधिवक्ता की...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
तलाक के सभी रूप अवैध नहीं, केवल तीन तलाक अपराध: मुस्लिम पुरुष ने गिरफ्तारी पूर्व जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

एक मुस्लिम पुरुष ने अग्रिम जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अपनी याचिका में उसने कहा है कि तलाक के सभी रूपों को अवैध घोष‌ित नहीं किया गया है, जिसे अपराध बनाया गया है वह "तलाक-ए-बिद्दत" (तीन तलाक) है। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने झारखंड हाईकोर्ट के 17 जनवरी, 2022 के आदेश के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका पर नोटिस जारी किया है।हाईकोर्ट ने आक्षेपित फैसले में अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। याचिकाकर्ता के खिलाफ मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का...

केरल हाईकोर्ट
पुलिस शिकायत प्राधिकरण में मुख्य जांच अधिकारी की नियुक्ति में देरी का स्पष्टीकरण दें: केरल हाईकोर्ट ने राज्य से कहा

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में राज्य से राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण में मुख्य जांच अधिकारी की नियुक्ति में हुए विलंब का स्पष्टीकरण मांगा। चीफ जस्टिस एस मणिकुमार और जस्टिस शाजी पी चाली की खंडपीठ ने राज्य की इस दलील से असहमति जताई कि उसने इस मामले में अदालत के पिछले निर्देशों को लागू करने के लिए त्वरित कदम उठाए हैं।कोर्ट ने कहा,"हालांकि श्री वी मनु, विद्वान वरिष्ठ सरकारी वकील ने प्रस्तुत किया कि इस न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों को लागू करने के लिए त्वरित कदम उठाए गए हैं, हम इस कारण से उक्त...

पुलिस इस तथ्य से प्रभावित हो गई कि याचिकाकर्ता एक विशेष समुदाय से संबंधित हैं: गुजरात हाईकोर्ट ने हिरासत में यातना की जांच के आदेश दिए
'पुलिस इस तथ्य से प्रभावित हो गई कि याचिकाकर्ता एक विशेष समुदाय से संबंधित हैं': गुजरात हाईकोर्ट ने हिरासत में यातना की जांच के आदेश दिए

गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस को एक मामले में कड़ी फटकार लगाई है। पुलिस आईपीसी की धारा 328 और 394 के तहत चोरी और अन्य गलतियों की जांच करने की प्रक्रिया में "इस तथ्य से प्रभावित हुई कि याचिकाकर्ता एक विशेष समुदाय से संबंधित हैं"। कोर्ट ने पुलिस विशेषकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की "उदासीनता" पर निराशा व्यक्त की।जस्टिस निखिल करील याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर एक विशेष आपराधिक आवेदन पर सुनवाई कर रहे थे। आवदेन पुलिस अधिकारियों की "ज्यादतियों" के संबंध में था, जिसमें डीएसपी और एसपी स्तर के वरिष्ठ...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
जैविक पिता का रिकॉर्ड उपलब्ध न होने पर भी दत्तक पुत्र दत्तक माता की जाति पाने का हकदार: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह देखते हुए कि गोद लिया हुआ बच्चा हर तरीके से अपने दत्तक माता-पिता के परिवार का सदस्य बन जाता है, अधिकारियों को उसकी मां की अनुसूचित जाति की पहचान के आधार पर 18 वर्षीय बेटे को जाति प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया।जस्टिस सुनील शुक्रे और जस्टिस जीए सनप की बेंच ने कहा कि एक गोद लिया हुआ बच्चा अपनी दत्तक मां की जातिगत पहचान पाने का हकदार होगा, इसके बावजूद अधिकारियों ने बच्चे के जैविक पिता के रिकॉर्ड उपलब्ध कराने पर जोर दिया।पीठ ने कहा कि मामले में राहत नहीं देने का...

मद्रास हाईकोर्ट
दोषियों की समय से पहले रिहाई के लिए जेल प्राधिकरण की सिफारिश राज्य के लिए बाध्यकारी नहीं: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने समय पूर्व रिहाई के लिए जॉन डेविड के मामले पर पुनर्व‌िचार करने से इनकार कर दिया है। उल्लेखनीय है कि जॉन डेविड 1996 में हुए पोन नवरसु हत्या मामले में दोषी है। जस्टिस पीएन प्रकाश और जस्टिस एए नक्कीरन ने कहा कि राज्य सरकार और राज्यपाल जेल अधिकारियों द्वारा जॉन डेविड के पक्ष में की गई सिफारिश से बाध्य नहीं हैं। अदालत ने कहा कि केवल राज्यपाल ही संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत किसी कैदी को समय से पहले रिहा करने के लिए दी गई शक्ति का राज्य मंत्रिमंडल की सलाह पर कर सकते हैं। मद्रास...

जब अन्य दंड कानून स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त हों तो निवारक नजरबंदी मान्य नहीं है: गुजरात हाईकोर्ट
जब अन्य दंड कानून स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त हों तो निवारक नजरबंदी मान्य नहीं है: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा, "जब तक कि यह मामला बनाने के लिए सामग्री न हो कि व्यक्ति समाज के लिए खतरा बन गया है, जिससे पूरा समाज परेशान हो रहा है और जिससे सामाजिक तंत्र खतरे में है, यह नहीं कहा जा सकता कि आरोपी गुजरात एंटी सोशल एक्टिविटीज एक्ट, 1985 की धारा 2 (बी) के अर्थ में ऐसा व्यक्ति है।"जस्टिस राजेंद्र सरीन की पीठ अधिनियम की धारा 3 (2) के तहत याचिकाकर्ता के खिलाफ दिसंबर 2021 के नजरबंदी के आदेश के खिलाफ एक विशेष दीवानी आवेदन पर सुनवाई कर रही थी।याचिकाकर्ता ने प्रस्तुत किया कि...

Gujarat High Court
कंपाउंडेबल अपराध के लिए समझौता सिर्फ इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता क्योंकि आरोपी पर एससी/एसटी एक्ट के तहत भी आरोप लगा था, लेकिन बरी कर दिया गया: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने हाल ही में आईपीसी की धारा 323 के तहत अपराध के कंपाउंडिंग की अनुमति दी, भले ही आरोपी पर मूल रूप से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत आरोप लगाया गया था।जस्टिस अशोक कुमार जोशी की खंडपीठ ने कहा कि निचली अदालत ने याचिकाकर्ताओं-आरोपियों को आईपीसी की धारा 504, 506 (2), 427 के साथ पठित 114 और एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3 (1) (x) के तहत बरी कर दिया था। और इस तरह के दोषमुक्ति के खिलाफ शिकायतकर्ता / राज्य द्वारा कोई अपील नहीं की...

कलकत्ता हाईकोर्ट में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उड़ान में हवा में अशांति की जांच की मांग वाली जनहित याचिका दायर, केंद्र से जवाब मांगा
कलकत्ता हाईकोर्ट में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उड़ान में हवा में अशांति की जांच की मांग वाली जनहित याचिका दायर, केंद्र से जवाब मांगा

कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने सोमवार को एक जनहित याचिका (पीआईएल) याचिका में भारत सरकार के साथ-साथ राज्य सरकार से जवाब मांगा, जिसमें 4 मार्च को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चार्टर्ड उड़ान के दौरान हवा में अशांति की घटना की जांच की मांग की गई थी।चार मार्च को बनर्जी चुनाव प्रचार के बाद वाराणसी से कोलकाता लौट रही थीं। वो एक चार्टर्ड फ्लाइट में सवार हुईं, लेकिन नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने से ठीक पहले उन्हें हवाई अशांति का सामना करना पड़ा।कथित तौर पर इस घटना के...

कर्नाटक हाईकोर्ट ने ड्रीम 11 के सह-संस्थापकों के खिलाफ एफआईआर रद्द की
कर्नाटक हाईकोर्ट ने ड्रीम 11 के सह-संस्थापकों के खिलाफ एफआईआर रद्द की

कर्नाटक हाईकोर्ट ने स्पोर्टा टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक और निदेशक भावित शेठ और हर्ष जैन के खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही को रद्द कर दिया। उक्त कंपनी 'ड्रीम 11' गेमिंग ऐप को बढ़ावा देती है।दोनों ने कर्नाटक पुलिस (संशोधन) अधिनियम, 2021 के तहत पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। यह अधिनियम राज्य में ऑनलाइन गेमिंग और जुए पर प्रतिबंध लगाता है।जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने अपने आदेश में कहा,"कर्नाटक पुलिस अधिनियम में संशोधन कई रिट याचिकाओं...