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शरीर के महत्वपूर्ण हिस्से में चोट हत्या के लिए पर्याप्त है: उड़ीसा हाईकोर्ट ने रिश्तेदार की हत्या के लिए कपल की सजा की पुष्टि की
उड़ीसा हाईकोर्ट (Orissa High Court) ने हाल ही में माना कि मानव शरीर के किसी भी महत्वपूर्ण हिस्से में एक भी चोट मौत का कारण बन सकती है और ऐसी मृत्यु का कारण बनना, जिसके सबसे संभावित परिणाम का ज्ञान हो, हत्या है।मुख्य न्यायाधीश डॉ. एस. मुरलीधर और न्यायमूर्ति राधा कृष्ण पटनायक की खंडपीठ vs रिश्तेदार की हत्या के लिए दोषी ठहराए जाने के खिलाफ दंपति की अपील को खारिज करते हुए कहा,"पीड़ित को चोट लगी थी, लेकिन यह एक महत्वपूर्ण हिस्से पर थी। अगर यह पीड़ित के शरीर के किसी अन्य हिस्से पर चोट होती और मौत का...
आरोप तय होने की स्थिति में आरोपी के बरी होने की संभावना पर विचार नहीं, बल्कि यह देखना होगा कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि चिकित्सा साक्ष्य पर संदेह नहीं किया जा सकता है, वह भी आरोप तय करने के चरण में, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित कानून के अनुसार, आरोपी व्यक्ति के बरी होने की संभावना पर विचार नहीं किया जाता है, बल्कि यह देखा जाता है कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं।सीआरपीसी की धारा 397 (धारा 401 के साथ पठित) के तहत मौजूदा आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को वर्तमान अभियुक्त-याचिकाकर्ता के विरुद्ध आईपीसी की धारा 308, 447, 427, 341, 323 और 325 (धारा 34 के साथ पठित) के तहत आरोप तय...
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को 11वीं शताब्दी के माता मृकुला देवी मंदिर में मरम्मत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट (Himachal Pradesh High Court) ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को 11 वीं शताब्दी में निर्मित मंदिर माता मृकुला देवी का निरीक्षण करने और आवश्यक मरम्मत शुरू करने के लिए एक विशेष टीम का गठन करने का आदेश दिया है। यह मंदिर लाहौल जिले में स्थित है।गौरतलब है कि कोर्ट ने वर्ष 2020 में सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कुल्लू द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए माता मृकुला देवी मंदिर की खराब स्थिति का विवरण प्रस्तुत करते हुए स्वत: संज्ञान लेते हुए मुकदमा शुरू किया था।अब...
गवाह के एग्जामिनेशन-इन-चीफ के आधार पर भी अदालत अभियुक्तों को सीआरपीसी की धारा 319 के तहत समन कर सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अदालत किसी व्यक्ति को दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी), 1973 की धारा 319 के तहत केवल गवाह के मुख्य परीक्षण (examination-in-chief) के आधार पर समन कर सकती है और अदालत को ऐसे गवाह के साक्ष्य की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है।उल्लेखनीय है कि सीआरपीसी की धारा 319 के अनुसार, किसी भी जांच या अपराध के मुकदमे के दौरान न्यायालय को अपराध के दोषी प्रतीत होने वाले अन्य व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने की शक्ति है।जस्टिस शेखर कुमार यादव की खंडपीठ ने आगे कहा कि सीआरपीसी की धारा...
कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना घर नहीं गिराएंगे, एमपी सरकार ने खरगोन दंगों के आरोपी की पत्नी की याचिका पर हाईकोर्ट में कहा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, इंदौर खंडपीठ में हाल ही में मध्य प्रदेश राज्य ने आश्वासन दिया है कि अधिकारी कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना याचिकाकर्ता के घर को तोड़ने के लिए आगे नहीं बढ़ेंगे। याचिकाकर्ता महिला का पति खरगोन दंगा मामले में आरोपी है। .याचिकाकर्ता को कथित तौर पर राज्य द्वारा उसके पति की गिरफ्तारी के कारण उसके घर को ढहाने का अल्टीमेटम देने की धमकी दी जा रही थी।याचिकाकर्ता और राज्य द्वारा की गई दलीलों को ध्यान में रखते हुए जस्टिस वीके शुक्ला ने कहा, प्रतिवादी/राज्य के विद्वान...
गुजरात हाईकोर्ट ने महिला को तीन साल तक किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में नहीं बैठने देने का प्रतिबंध हटाया
गुजरात हाईकोर्ट ने एक 29 वर्षीय महिला को अपनी बीमार मां की जिम्मेदारी के साथ-साथ अपना करियर बनाने की कोशिश कर रही महिला को बड़ी राहत देते हुए राज्य अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड द्वारा उस पर लगाए गया प्रतिबंध हटा दिया। बोर्ड ने उक्त महिला को तीन साल के लिए किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में बैठने पर प्रतिबंध लगाया था। बोर्ड द्वारा आयोजित एक परीक्षा में मोबाइल फोन ले जाने के पर महिला के खिलाफ उक्त प्रतिबंध लगाया गया था।जस्टिस बीरेन वैष्णव की खंडपीठ ने आश्चर्य जताया,"... क्या मोबाइल फोन ले जाने का यह एक...
रेप पीड़िताओं पर किए जाने वाले टू-फिंगर टेस्ट पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए : मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य को निर्देश दिया
मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि चिकित्सा पेशेवरों द्वारा यौन अपराधों की पीड़िताओं पर किए जाने वाले टू-फिंगर टेस्ट की प्रथा पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए। जस्टिस आर. सुब्रमण्यम और जस्टि एन. सतीश कुमार की पीठ ने यह निर्देश जारी किया है क्योंकि पीठ ने यह नोट किया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी टू-फिंगर टेस्ट का उपयोग यौन अपराधों से जुड़े मामलों में किया जा रहा है, विशेष रूप से नाबालिग पीड़ितों के मामले में,जबकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि यह टेस्ट ...
पिता ने बेटी को नेपाल ले जाकर कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया : दिल्ली हाईकोर्ट ने माता की याचिका पर सीबीआई को रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने का निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को अमेरिकी नागरिक पिता के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है, जो अपनी पत्नी के साथ चल रहे चाइल्ड कस्टडी के वाद के बावजूद अदालत के आदेशों का उल्लंघन करके अपनी आठ वर्षीय बेटी को नेपाल ले गया।जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस रजनीश भटनागर की खंडपीठ मां द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका पर सुनवाई कर रही थी। खंडपीठ ने पिता के निरंतर अवमाननापूर्ण आचरण को देखते हुए सीबीआई को उसके खिलाफ ओपन एंडेड...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (18 अप्रैल, 2022 से 22 अप्रैल, 2022) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।मामूली विरोधाभास या मामूली सुधार साक्ष्य को पूरी तरह से खारिज करने का आधार नहीं बनाया जा सकता: पटना हाईकोर्टपटना हाईकोर्ट (Patna High Court) ने हाल ही में कहा कि गवाह द्वारा मामूली विरोधाभास, असंगति या तुच्छ बिंदुओं में सुधार को साक्ष्य को पूरी तरह से खारिज करने का आधार नहीं बनाया जा सकता है।जस्टिस...
एससी कॉलेजियम ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति सत्येन वैद्य को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति सत्येन वैद्य को हाईकोर्ट के स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मंज़ूर कर लिया है।सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 19 अप्रैल, 2022 को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी दी।सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी बयान इस प्रकार है:"सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 19 अप्रैल, 2022 को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश जस्टिस सत्येन वैद्य की उसी हाईकोर्ट के...
मां को पांच साल से कम उम्र के बच्चे को अपने पास रखने का अधिकार, लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान बच्चे के भलाई पर होना चाहिए: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने तीन साल के बच्चे की मां की याचिका खारिज कर दी, जिसमें महिला ने अपने नाबालिग बेटे को उसके पति और ससुराल वालों के कथित अवैध कस्टडी से अपने पास रखने की अनुमति के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) रिट जारी करने की मांग की गई थी।कोर्ट ने कहा," एक प्राकृतिक अभिभावक के रूप में पिता की कस्टडी को अवैध या गैरकानूनी नहीं कहा जा सकता और इसलिए बंदी प्रत्यक्षीकरण का रिट जारी करना उचित नहीं होगा।"जस्टिस संत प्रकाश की पीठ ने आगे कहा कि नाबालिगों के अभिभावक...
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कलकत्ता हाईकोर्ट के पांच अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कलकत्ता हाईकोर्ट के पांच अतिरिक्त न्यायाधीशों को न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कलकत्ता हाईकोर्ट के पांच अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी-1. जस्टिस केसांग डोमा भूटिया,2. जस्टिस रवींद्रनाथ सामंत,3. जस्टिस सुगातो मजूमदार,4. जस्टिस बिवास पटनायक, और5. जस्टिस आनंद कुमार मुखर्जीउपरोक्त अनुमोदन 19 अप्रैल, 2022 को दिया गया था।कॉलेजियम स्टेटमेंट...
'पीड़िता के आचरण के निष्कर्ष पर पुनर्विचार की आवश्यकता हो सकती है': बॉम्बे हाईकोर्ट ने तरुण तेजपाल को बरी करने के खिलाफ राज्य को अपील करने की अनुमति दी
बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने यह देखते हुए कि बलात्कार पीड़िता के आचरण के बारे में ट्रायल जज द्वारा कुछ टिप्पणियों पर फिर से विचार करने की आवश्यकता है, 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में पत्रकार तरुण तेजपाल को बरी करने के फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए गोवा राज्य को अनुमति दी।कोर्ट ने राज्य की अपील की अनुमति के खिलाफ तेजपाल की प्रारंभिक आपत्तियां खारिज कर दी थीं।जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस आरएन लड्ढा की खंडपीठ ने यह भी कहा कि कानूनी परामर्श के संबंध में पीड़िता के बारे में निष्कर्षों पर भी गौर...
ऐसे सुधारात्मक उपाय करें ताकि आरोपी जमानत लेने के लिए खराब चिकित्सा सुविधाओं का हवाला न दे सके: बॉम्बे हाईकोर्ट ने वरवर राव की याचिका खारिज करते हुए जेल अधिकारियों से कहा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने जेल की स्थिति और उसमें चिकित्सा सुविधाओं में सुधार के लिए कुछ निर्देश जारी किए, ताकि भीमा कोरेगांव के आरोपी वरवर राव के साथ-साथ अन्य जेल कैदियों द्वारा की गई शिकायतों का समाधान किया जा सके और भविष्य में वे जेल की खराब चिकित्सा स्थिति के एकमात्र आधार पर ज़मानत न मांगें। सिर्फ मेडिकल आधार पर स्थायी जमानत देने से इनकार करते हुए कोर्ट ने अपने आदेश में कहा,"यदि मामले पर सख्त रुख नहीं अपनाया जाता है और कमियों को दूर करने के लिए उचित निर्देश जारी नहीं किए जाते हैं तो सभी विचाराधीन...
"अप्रूवर को अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता": झारखंड हाईकोर्ट ने तीन साल से जेल में बंद व्यक्ति को सीआरपीसी की धारा 482 के तहत प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करके जमानत दी
झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में इस बात पर जोर दिया कि एक वादा माफ गवाह (अप्रूवर) को अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रहने दिया जा सकता है। कोर्ट ने साथ ही सीआरपीसी की धारा 482 के तहत अपनी शक्ति का इस्तेमाल करके तीन साल से जेल में बंद एक अप्रूवर-याचिकाकर्ता को रिहा करने का आदेश दिया।न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने कहा कि असाधारण और उचित मामलों में, हाईकोर्ट के पास सीआरपीसी की धारा 482 के तहत अप्रूवर को जमानत पर छोड़ने की शक्ति है या ऐसी परिस्थितियों में भी, जहां ऐसा प्रतीत होता...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी लॉटरी ऑफर, फोन कॉल घोटाले आदि के मामलों पर अंकुश लगाने के लिए यूपी डीजीपी को व्यक्तिगत हलफनामा देने का निर्देश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बार फिर राज्य के पुलिस महानिदेशक से धोखाधड़ी की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए की गई कार्रवाई के संदर्भ में व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। इन धोखाधड़ी की गतिविधियों में धोखेबाज़ लोग/संगठन आम लोगों की गाढ़ी कमाई को लूटने के लिए लॉटरी और पुरस्कार के फर्जी प्रस्तावों को लेकर उन्हें फोन करते हैं।जस्टिस जे जे मुनीर की खंडपीठ ने 30 जून, 2021 को जारी न्यायालय के आदेश के अनुसार डीजीपी द्वारा दायर एक हलफनामे पर अपनी नाराजगी व्यक्त की।उसी आदेश में न्यायालय ने निम्नलिखित आदेश जारी...
POCSO केस चार साल से लंबित, आरोपी विलंब करने वाले हथकंडे अपना रहाः मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को दिन-प्रतिदिन सुनवाई करने का निर्देश दिया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ट्रायल कोर्ट को एक पॉक्सो मामले में दिन-प्रतिदिन के आधार पर जितनी जल्दी हो सके सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला 4 साल से लंबित है और आरोपी इसे लंबा खींचने के लिए समय व्यर्थ करने वाले (विलंब करने वाले) हथकंडे अपना रहा है। जस्टिस आनंद पाठक ने कहा, ''मामले की वास्तविक स्थिति और कानूनी स्थिति को देखते हुए यह आवश्यक है कि पॉक्सो अधिनियम की धारा 35(1) और (2) के मद्देनजर दिन-प्रतिदिन के आधार पर यथासंभव शीघ्रता से सुनवाई की जाए। ...
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने 2011 के शाहजहांपुर बलात्कार मामला रद्द करने के लिए दायर स्वामी चिन्मयानंद की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस राजीव गुप्ता ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता स्वामी चिन्मयानंद द्वारा उनके खिलाफ वर्ष 2011 में दर्ज एक बलात्कार मामले के संबंध में दायर एक आपराधिक मामला खारिज करने वाली याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। बेंच के समक्ष जब मामला सुनवाई के लिए आया तो बेंच ने टिप्पणी की," मामला यहां से रिलीज़ किया जाता है। माननीय मुख्य न्यायाधीश / वरिष्ठ न्यायाधीश से नामांकन लेने के बाद यदि संभव हो तो 05.05.2022 को इस मामले को किसी अन्य बेंच के समक्ष सूचीबद्ध करें।"स्वामी...
किसी स्मारक को राष्ट्रीय महत्व का घोषित करने के लिए सरकार को निर्देश नहीं दे सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि न्यायालय किसी भी स्मारक को राष्ट्रीय महत्व का घोषित करने वाली अधिसूचना जारी करने के उद्देश्य से सरकार को निर्देश जारी नहीं कर सकता।मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने एक मो. मोइन कुरैशी ने राज्य सरकार को खान-ए-दौरान की हवेली, मौजा बसई मुस्तकिल (ताजगंज), जिला आगरा के प्राचीन स्मारकों को राष्ट्रीय महत्व का घोषित करने के संबंध में अंतिम अधिसूचना जारी करने का निर्देश देने की मांग की।याचिका में यह प्रस्तुत किया गया था कि 23 अप्रैल, 2015...
ड्राइवर के पास वैध लाइसेंस नहीं होने पर भी बीमा कंपनी मुआवजे का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी, बाद में वाहन मालिक से वसूली कर सकती हैः मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में माना है कि जब मोटर वाहन अधिनियम के तहत दावा प्रस्तुत किया जाता है, तो बीमा कंपनी मुआवजे का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होती है, भले ही वाहन के ड्राइवर के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस न हो। कोर्ट ने यह भी कहा है कि बाद में वाहन के मालिक से इस राशि की वसूली की जा सकती है।जस्टिस टीका रमन की (मदुरै) पीठ के समक्ष मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल, पेरियाकुलम द्वारा पारित आदेश के खिलाफ दुर्घटना में शामिल वाहन के मालिक थानिकोडी ने एक आवेदन दायर किया था,जिस पर पीठ ने उपरोक्त...



















