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कोर्ट के आदेशों की अवज्ञा स्पष्ट रूप से अवमानना है: पटना हाईकोर्ट ने पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की पुनर्नियुक्ति से संबंधित अवमानना मामले में दो शीर्ष अधिकारियों को फटकार लगाई
"कोर्ट के आदेशों की अवज्ञा स्पष्ट रूप से अवमानना है": पटना हाईकोर्ट ने पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की पुनर्नियुक्ति से संबंधित अवमानना मामले में दो शीर्ष अधिकारियों को फटकार लगाई

पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) सोमवार को बिहार के विधि सचिव प्रभारी ज्योति स्वरूप श्रीवास्तव और संयुक्त सचिव उमेश कुमार शर्मा के खिलाफ लोक अभियोजक (पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) की पुनर्नियुक्ति से संबंधित मामले में अपने आदेश की अवज्ञा के लिए अवमानना कार्यवाही शुरू की है।न्यायमूर्ति पीबी बजंथरी (Justice P.B.Bajanthri) की एकल पीठ ने कहा कि बिहार के विधि सचिव प्रभारी ज्योति स्वरूप श्रीवास्तव और संयुक्त सचिव उमेश कुमार शर्मा व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहेंगे।यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि इस कोर्ट के...

अगर जांच पूरी करने के लिए वैधानिक अवधि को 180 दिनों की समाप्ति से पहले धारा 36A(4) एनडीपीएस एक्ट के तहत बढ़ाया गया है तो कोई ‌डिफॉल्ट जमानत नहींः आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
अगर जांच पूरी करने के लिए वैधानिक अवधि को 180 दिनों की समाप्ति से पहले धारा 36A(4) एनडीपीएस एक्ट के तहत बढ़ाया गया है तो कोई ‌डिफॉल्ट जमानत नहींः आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में निर्धारित किया कि अगर गांजे की वाणिज्यिक मात्रा के अवैध कब्जे के मामले में जांच नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 की धारा 36 ए (4) के तहत काफी पहले से दिए गए विस्तार के आधार पर 180 दिनों की वैधानिक सीमा से परे लंबित है तो धारा 167 (2) सीआरपीसी के तहत डिफॉल्ट जमानत नहीं दी जा सकती।कोर्ट ने कहा, "एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों के अनुसार, आरोपी की गिरफ्तारी की तारीख से 180 दिनों के भीतर जांच पूरी करनी होती है। उक्त अवधि 11.12.2021 तक समाप्त हो...

राजस्थान हाईकोर्ट
पैन और अन्य दस्तावेजों पर कानूनी अभिभावक के रूप में केवल माता का नाम प्राप्त करने में कठिनाई: राजस्थान हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया

राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court), जयपुर ने हाल ही में पैन (PAN) और अन्य दस्तावेजों पर कानूनी अभिभावक के रूप में केवल अपनी मां का नाम प्राप्त करने में किसी व्यक्ति के सामने आने वाली कठिनाई को देखते हुए स्वत: संज्ञान लिया है।न्यायमूर्ति समीर जैन ने 08.03.2022 को द हिंदू में प्रकाशित एक रिपोर्ट के आधार पर स्वत: संज्ञान लिया है। न्यूज रिपोर्ट का शीर्षक था- "दस्तावेज़ों पर मां का नाम चाहिए? इसके लिए तैयार हो जाओ"। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस यानी 08.03.2022 को कोर्ट की फाइल पर मामला दर्ज किया...

उत्पीड़न के संबंध में अस्पष्ट आरोप प्रथम दृष्टया आईपीसी धारा 498ए के तहत अपराध नहीं बनता: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
उत्पीड़न के संबंध में अस्पष्ट आरोप प्रथम दृष्टया आईपीसी धारा 498ए के तहत अपराध नहीं बनता: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट (Andhra Pradesh High Court) ने हाल ही में फैसला सुनाया कि जब दहेज उत्पीड़न के मामले में पति के रिश्तेदारों के खिलाफ कोई विशेष आरोप नहीं लगाया जाता है, तो यह प्रथम दृष्टया भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए के तहत अपराध नहीं बनता है।क्या है पूरा मामला?याचिकाकर्ताओं के खिलाफ भारतीय दंड संहिता यानी 498A (पति या पति के रिश्तेदार को क्रूरता के अधीन करने के लिए सजा), 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना), 34 (सामान्य इरादा) के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था।याचिकाकर्ताओं को उनकी...

दिल्ली हाईकोर्ट ने नकली उत्पादों की जब्ती पर ट्रेडमार्क BOAT के मालिक को ₹15 लाख का हर्जाना देने का निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने नकली उत्पादों की जब्ती पर ट्रेडमार्क 'BOAT' के मालिक को ₹15 लाख का हर्जाना देने का निर्देश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने कोर्ट द्वारा नियुक्त स्थानीय आयुक्तों द्वारा किए गए निरीक्षण के आधार पर विभिन्न नकली उत्पादों की जब्ती पर ट्रेडमार्क 'BOAT' के मालिक को 15 लाख रुपये का हर्जाना देने का निर्देश दिया।जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि प्रतिवादियों ने ट्रेडमार्क और लोगो के साथ-साथ वादी के उत्पादों की पैकेजिंग का भी खुले तौर पर उल्लंघन किया।जब्त किए गए नकली उत्पादों की मात्रा को देखते हुए अदालत ने दो प्रतिवादियों एक और छह के खिलाफ मुकदमा चलाने का फैसला किया। जबकि प्रतिवादी नंबर एक के खिलाफ पांच लाख...

Gujarat High Court
गुजरात हाईकोर्ट ने 'लोक व्यवस्था' और 'कानून और व्यवस्था' के बीच के अंतर को समझाया; एनडीपीएस एक्ट के तहत बंदियों को रिहा किया

गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने कहा कि जब तक यह मामला बनाने के लिए सामग्री न हो कि व्यक्ति समाज के लिए खतरा बन गया है और सामाजिक व्यवस्था को बिगाड़ सकते हैं और सभी सामाजिक तंत्र को खतरे में डाल सकता है तब तक ऐसे व्यक्ति के बारे में यह नहीं कहा जा सकता है कि बंदी अधिनियम की धारा 3(1) के अर्थ में एक व्यक्ति है।न्यायमूर्ति एपी ठाकर नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट 1988 में अवैध तस्करी की रोकथाम की धारा 3 (2) के तहत प्रतिवादी अधिकारियों द्वारा याचिकाकर्ता को हिरासत में लिए जाने...

दिल्ली हाईकोर्ट ने फ्लाइट चेक-इन बैगेज में ज़िंदा कारतूस ले जाने के लिए आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत दर्ज एफआईआर रद्द की
दिल्ली हाईकोर्ट ने फ्लाइट चेक-इन बैगेज में ज़िंदा कारतूस ले जाने के लिए आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत दर्ज एफआईआर रद्द की

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक एनआरआई के खिलाफ शस्त्र अधिनियम के तहत दर्ज एफआईआर रद्द कर दी। उक्त आरोपी इस साल फरवरी में दिल्ली से दुबई की यात्रा कर रहा था, जब फ्लाइट चेक-इन के दौरान उसके बैग में दो ज़िंदा कारतूस पाए गए।जस्टिस आशा मेनन ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 और 227 सीआरपीसी की धारा 482 के तहत याचिकाकर्ता-आरोपी द्वारा दायर याचिका की अनुमति देते हुए कहा,"इस बात का कोई प्रथम दृष्टया सबूत नहीं है कि गोला-बारूद रखने में उसकी कोई दुर्भावना रही हो। यात्रियों की सुरक्षा को कोई खतरा नहीं था।...

केरल हाईकोर्ट
'अन्याय का एक स्पष्ट मामला': केरल हाईकोर्ट ने डाकघर को घरेलू सहायिका की जमा राशि पूरे ब्याज के साथ देने का निर्देश दिया, पांच हजार जुर्माना भी लगाया

केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को डाकघर के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वह एक महीने के भीतर सावधि जमा योजना के अंतर्गत एक घरेलू सहायिका द्वारा जमा की गई राशि को निकासी की तिथि तक पूर्ण ब्याज के साथ दे।हाईकोर्ट ने यह निर्देश देते हुए कहा कि,''गरीब पुरुष या महिला द्वारा पैसे बचाने का मतलब बीएमडब्ल्यू कार खरीदना या आलीशान इमारत खरीदना या शानदार जीवन जीना नहीं है। (यह) उसके छोटे-छोटे सपनों को पूरा करने के लिए है।''इसे अन्याय का एक मामला मानते हुए जस्टिस पी.वी. कुन्हीकृष्णन ने अधिकारियों पर मुकदमे की लागत...

दिल्ली हाईकोर्ट, दिल्ली
केंद्र सरकार ने न्यायिक अधिकारी पूनम ए. बंबा और स्वर्ण कांता शर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त किया

केंद्र सरकार ने न्यायिक अधिकारी पूनम ए. बंबा और स्वर्ण कांता शर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त किया।24 मार्च, 2022 को जारी आधिकारिक अधिसूचना में कहा गया:"भारतीय संविधान के अनुच्छेद 217 के खंड (1) द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति ने (i) श्रीमती पूनम ए. बंबा और (ii) स्वर्णा कांता शर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के रूप में नियुक्त किया है। उक्त नियुक्ति संबंधित कार्यालयों का कार्यभार ग्रहण करने से लागूं होंगी।"सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने एक फरवरी, 2022 की अपनी...

पटना हाईकोर्ट ने पीडीएस डीलर को नोटिस जारी किए बिना सम्पूर्ण रोजगार योजना के अनाज का पैसा वसूल किए जाने के मामले में बिहार सरकार से जवाब मांगा
पटना हाईकोर्ट ने पीडीएस डीलर को नोटिस जारी किए बिना सम्पूर्ण रोजगार योजना के अनाज का पैसा वसूल किए जाने के मामले में बिहार सरकार से जवाब मांगा

पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) ने पीडीएस डीलर को नोटिस जारी किए बिना उनसे सम्पूर्ण रोजगार योजना के अनाज का पैसा वसूल किए जाने के मामले में बिहार राज्य सरकार से जवाब मांगा है।न्यायमूर्ति राजन गुप्ता तथा न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह की खंडपीठ ने कहा कि ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव तीन सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करें और स्थिति स्पष्ट करें।बेंच ने पूछा,"बिना नोटिस जारी किए किसी के खिलाफ कैसे कार्रवाई कर सकते हैं।"कोर्ट के समक्ष एक लक्ष्मण राय की ओर से याचिका दायर की गई थी।याचिकाकर्ता...

पत्नी के साथ बलात्कार करने वाला पति, आईपीसी की धारा 376 के तहत सजा के लिए उत्तरदायी : वैवाहिक बलात्कार मामले पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा
पत्नी के साथ बलात्कार करने वाला पति, आईपीसी की धारा 376 के तहत सजा के लिए उत्तरदायी : वैवाहिक बलात्कार मामले पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा

कर्नाटक हाईकोर्ट ने बुधवार को एक पति द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत उसके खिलाफ लंबित बलात्कार के आरोपों को हटाने की मांग की थी। उसकी पत्नी की शिकायत पर उसके खिलाफ यह मामला दर्ज किया गया है। जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने इस बात पर जोर दिया कि एक पुरुष जो एक महिला से अच्छी तरह परिचित है और धारा 375 में संशोधन से पहले या बाद में पाए जाने वाले सभी अवयवों को पूरा करता है, उसके खिलाफ धारा 376 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए कार्रवाई की जा सकती...

[मोटर वाहन अधिनियम] दूसरी अनुसूची के तहत गुणक लागू होंगे, भले ही दुर्घटना के समय वे लागू न हों: उड़ीसा हाईकोर्ट
[मोटर वाहन अधिनियम] दूसरी अनुसूची के तहत गुणक लागू होंगे, भले ही दुर्घटना के समय वे लागू न हों: उड़ीसा हाईकोर्ट

उड़ीसा हाईकोर्ट (Orissa High Court) ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की दूसरी अनुसूची (Second Schedule) के तहत प्रदान किए गए 'गुणकों (Multipliers)' को उन मामलों में भी लागू किया जा सकता है भले ही दुर्घटना उस समय हुई हो जब अनुसूची लागू नहीं थी।मुख्य न्यायाधीश डॉ. एस. मुरलीधर और न्यायमूर्ति आर.के. पटनायक की खंडपीठ ने कहा, "एमवी एक्ट दुर्घटना पीड़ितों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से एक क़ानून होने के कारण, दुर्घटना पीड़ितों के लंबित मामलों में अनुसूची को लागू किया जाना चाहिए, भले ही दुर्घटना उस...

राजीव गांधी हत्याकांड के दोषी की समयपूर्व रिहाई के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ता ने मद्रास हाईकोर्ट का रुख किया
राजीव गांधी हत्याकांड के दोषी की समयपूर्व रिहाई के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ता ने मद्रास हाईकोर्ट का रुख किया

पूर्व प्रधान मंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में दोषी एस नलिनी की समयपूर्व रिहाई के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ता एम ए मुथलाकन ने याचिका दायर कर मद्रास हाईकोर्ट का रुख किया है।एम.ए. मुथलाकन दक्षिण चेन्नई सेंट्रल कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष हैं। उनके अनुसार, उनकी पैरवी आवश्यक है क्योंकि अन्यथा राज्य सरकार द्वारा कोई वास्तविक और सत्य तथ्य नहीं रखा जाएगा जो जमानत याचिका पर निर्णय लेने के लिए उचित और आवश्यक है।मुथलाकन ने कहा कि राजीव गांधी की हत्या और आरोपियों की गिरफ्तारी और दोषसिद्धि के बाद...

बॉम्बे हाईकोर्ट में जज के रूप में अंतिम कार्य दिवस पर जस्टिस शाहरुख कथावाला ने बुनियादी ढांचा परियोजना से प्रभावित 953 मछुआरों के परिवारों के लिए 10 करोड़ अंतरिम मुआवजे के आदेश दिए
बॉम्बे हाईकोर्ट में जज के रूप में अंतिम कार्य दिवस पर जस्टिस शाहरुख कथावाला ने बुनियादी ढांचा परियोजना से प्रभावित 953 मछुआरों के परिवारों के लिए 10 करोड़ अंतरिम मुआवजे के आदेश दिए

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) में जज के रूप में अपने अंतिम कार्य दिवस पर जस्टिस शाहरुख कथावाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने ठाणे में एक बुनियादी ढांचा परियोजना से प्रभावित 953 मछुआरों के परिवारों में से प्रत्येक को 1 लाख रुपये मुआवजे दिए जाने के आदेश दिए।पीठ ने अपने आदेश में कहा,"मछुआरे और उनके परिवारों के तब तक भूखे रहने की उम्मीद नहीं की जा सकती जब तक कि अधिकारी मुआवजे की मात्रा तय नहीं कर लेते।" यह नोट किया गया कि एक निर्माणाधीन पुल के कारण मछुआरों की मछली पकड़ने की आजीविका के नुकसान के...

राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़के का यौन शोषण करने के आरोप में न्यायिक अधिकारी और दो न्यायिक लिपिकों को जमानत दी
राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़के का यौन शोषण करने के आरोप में न्यायिक अधिकारी और दो न्यायिक लिपिकों को जमानत दी

राजस्थान हाईकोर्ट ने न्यायिक अधिकारी जितेंद्र सिंह गुलिया और दो न्यायिक लिपिकों को जमानत दे दी। उक्त तीनों आरोपी भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 377/34 और पॉक्सो अधिनियम की धारा 5/6 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए हिरासत में हैं।राजस्थान हाईकोर्ट ने पिछले साल जितेंद्र सिंह गुलिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। हाईकोर्ट प्रारंभिक जांच के लंबित होने और विभागीय जांच पर विचार करने के बाद यह आदेश दिया था। इस आशय का आदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर हाईकोर्ट रजिस्ट्रार जनरल...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित मानहानिकारक न्यूज के लिए दैनिक जागरण के एडिटर-इन-चीफ के खिलाफ समन आदेश रद्द किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित मानहानिकारक न्यूज के लिए दैनिक जागरण के एडिटर-इन-चीफ के खिलाफ समन आदेश रद्द किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने दैनिक जागरण (Dainik Jagran) के एडिटर-इन-चीफ संजय गुप्ता (Sanjay Gupta) के खिलाफ कथित मानहानिकारक न्यूज प्रकाशित पर मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा जारी समन आदेश को रद्द कर दिया।न्यायमूर्ति सैयद आफताब हुसैन रिजवी की खंडपीठ ने कहा कि एडिटर-इन-चीफ के खिलाफ विशेष आरोपों के अभाव में पद धारण करने वाले व्यक्ति को समन नहीं किया जा सकता है।पूरा मामलाविरोधी पक्ष ने संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष एक शिकायत दर्ज की, जिसमें आरोप लगाया गया कि अप्रैल 2016 में दैनिक जागरण के...