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बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
धारा 167 (2) सीआरपीसी- जांच एजेंसी गंभीर आरोपों को लागू करके अभियुक्तों के डिफॉल्ट बेल के अधिकार को कम नहीं कर सकती: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि एक जांच एजेंसी गंभीर आरोप लगाकर किसी आरोपी के डिफॉल्ट बेल को विफल नहीं कर सकती।जस्टिस सीवी भडांग ने देखा,"इसमें कोई संदेह नहीं है कि जांच जांच एजेंसी का अधिकार क्षेत्र है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं कि अदालत, लगभग सभी मामलों में, अभियोजन एजेंसी की ओर से आरोपी के खिलाफ एक विशेष धारा में आरोप लगाने के बाद बाध्य हो जाएगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि धारा या प्रावधान लगाना निर्णायक नहीं होगा। इसे अन्य तरीके से कहें तो यह डिफॉल्ट बेल के अधिकार को जांच एजेंसी की दया पर...

लाउडस्पीकर विवाद: बॉम्बे हाईकोर्ट में राज ठाकरे के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज करने के लिए जनहित याचिका दायर
लाउडस्पीकर विवाद: बॉम्बे हाईकोर्ट में राज ठाकरे के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज करने के लिए जनहित याचिका दायर

बॉम्बे हाईकोर्ट में सामाजिक और राजनीतिक एक्टिविस्ट होने का दावा करने वाले हेमंत पाटिल ने याचिका दायर कर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) नेता राज ठाकरे के खिलाफ राजद्रोह का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की। इसके साथ ही उन्हें महाराष्ट्र में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने, लाउडस्पीकरों पर हनुमान चालीसा और मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के लिए करने से रोकने की भी मांग की गई।उन्होंने कहा कि एक मई को ठाकरे ने औरंगाबाद में एक रैली का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के...

आधार अधिनियम के तहत प्रमाणीकरण के अलावा किसी भी उद्देश्य के लिए बायोमेट्रिक जानकारी साझा करना या उपयोग करना अस्वीकार्य है: दिल्ली हाईकोर्ट में यूआईडीएआई ने बताया
आधार अधिनियम के तहत प्रमाणीकरण के अलावा किसी भी उद्देश्य के लिए बायोमेट्रिक जानकारी साझा करना या उपयोग करना अस्वीकार्य है: दिल्ली हाईकोर्ट में यूआईडीएआई ने बताया

दिल्ली हाईकोर्ट में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने बताया कि आधार अधिनियम, 2016 के तहत आधार नंबर और प्रमाणीकरण के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए बायोमेट्रिक जानकारी साझा करना या उपयोग करना अस्वीकार्य है।प्राधिकरण ने न्यायालय को यह भी सूचित किया कि बायोमेट्रिक जानकारी एक व्यक्ति के लिए अद्वितीय है और इसलिए संवेदनशील जानकारी है जिसे दुरुपयोग की किसी भी संभावना को विफल करने के लिए संरक्षित करने की आवश्यकता है।यह घटनाक्रम तब हुआ जब यूआईडीएआई ने प्राधिकरण को आधार के डेटा बैंक के साथ...

मस्जिद में लाउडस्पीकर का उपयोग करना मौलिक अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लाउडस्पीकरों पर अज़ान देने की मांग वाली याचिका खारिज की
"मस्जिद में लाउडस्पीकर का उपयोग करना मौलिक अधिकार नहीं": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लाउडस्पीकरों पर अज़ान देने की मांग वाली याचिका खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि कानून अब तय हो गया है कि मस्जिदों से लाउडस्पीकर का उपयोग मौलिक अधिकार नहीं है।जस्टिस विवेक कुमार बिड़ला और जस्टिस विकास बुधवार की खंडपीठ ने इरफान द्वारा दायर एक रिट याचिका पर विचार करते हुए यह बात कही।इरफ़ान ने एसडीएम तहसील बिसौली, जिला बदायूं द्वारा पारित एक आदेश से व्यथित महसूस करते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था, जिसमें अज़ान के समय उक्त मस्जिद पर लाउडस्पीकर / माइक पर अज़ान देने की अनुमति मांगने के उनके आवेदन को खारिज कर दिया गया।अदालत के समक्ष उन्होंने जिला बदायूं...

स्थानीय अदालत ने गुजरात विधायक जिग्नेश मेवाणी को मजिस्ट्रेट के आदेश की अवहेलना करने पर 2017 में विरोध मार्च निकालने के लिए 3 महीने की जेल की सजा सुनाई
स्थानीय अदालत ने गुजरात विधायक जिग्नेश मेवाणी को मजिस्ट्रेट के आदेश की अवहेलना करने पर 2017 में विरोध मार्च निकालने के लिए 3 महीने की जेल की सजा सुनाई

गुजरात के मेहसाणा जिले की एक अदालत ने गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी (Jignesh Mevani) और 9 अन्य को आईपीसी की धारा 143 के तहत दंडनीय अपराध करने का दोषी ठहराते हुए 3 महीने के कारावास की सजा सुनाई।अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी जे.ए. परमार ने कहा कि सभी 10 मेवाणी राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच के सदस्य हैं और जब उन्हें जुलूस के साथ आगे नहीं बढ़ने के लिए कहा गया, तो उन्होंने कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेशों की अवहेलना की और इसलिए एक गैरकानूनी सभा आयोजित की।पीठ ने कहा, "जुलूस के आयोजक कौशिक...

एक बार नागरिक घोषित होने पर उसे विदेशी घोषित नहीं किया जा सकता क्योंकि विदेशी ट्रिब्यूनल कार्यवाही पर रेस ज्यूडिकाटा  सिद्धांत लागू होता है : गुवाहाटी हाईकोर्ट
एक बार नागरिक घोषित होने पर उसे विदेशी घोषित नहीं किया जा सकता क्योंकि विदेशी ट्रिब्यूनल कार्यवाही पर रेस ज्यूडिकाटा सिद्धांत लागू होता है : गुवाहाटी हाईकोर्ट

अब्दुल कुद्दस बनाम भारत संघ [(2019) 6 एससीसी 604] के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा करते हुए, गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी व्यक्ति की नागरिकता के संबंध में विदेशी ट्रिब्यूनल की राय न्यायिक के रूप में काम करेगी।यह ध्यान दिया जा सकता है कि रेस ज्यूडिकाटा कानून का एक सिद्धांत है जिसमें कहा गया है कि एक बार एक ही पक्ष के बीच एक मामले पर किसी सक्षम अदालत द्वारा अंतिम निर्णय दिया गया है, वही बाध्यकारी होगा और वही पक्ष और वही मुद्दे, लेकर फिर से मुकदमा नहीं किया जा सकता। सिविल...

पत्नी का वैवाहिक घर छोड़ना भरण-पोषण देने से इनकार करने का आधार नहीं,अगर उसने पति द्वारा किए गए दुर्व्यवहार के कारण घर छोड़ा हैः कर्नाटक हाईकोर्ट
पत्नी का वैवाहिक घर छोड़ना भरण-पोषण देने से इनकार करने का आधार नहीं,अगर उसने पति द्वारा किए गए दुर्व्यवहार के कारण घर छोड़ा हैः कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में माना है कि यदि कोई पत्नी पति द्वारा किए गए दुर्व्यवहार के कारण वैवाहिक घर को छोड़कर चली जाती है, तो वह यह दावा नहीं कर सकता कि वह आपसी सहमति से घर से चली गई है और इस प्रकार वह भरण-पोषण की राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं है। जस्टिस एम नागप्रसन्ना की पीठ ने सतीश एन नामक व्यक्ति की तरफ से दायर एक याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की है। जिसने प्रतिवादी-पत्नी द्वारा उससे भरण-पोषण की मांग करने वाली कार्यवाही पर सवाल उठाया गया था। याचिकाकर्ता और प्रतिवादी...

झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने देवघर त्रिकूट पहाड़ रोपवे हादसा मामले में सिंफर, बीआईटी मेसरा को प्रतिवादी बनाने का निर्देश

झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) ने झारखंड के देवघर जिले के त्रिकूट पहाड़ रोपवे हादसा (Deoghar Ropeway Accident) मामले में स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सिंफर व बीआईटी मेसरा को प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया है।चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने निर्देश दिया, "हम चाहते हैं कि सिंफर व बीआईटी मेसरा द्वारा रिपोर्ट को दो सप्ताह के भीतर रिकॉर्ड पर रखा जाए।" इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को हादसे की जांच से संबंधित रिपोर्ट दाखिल...

दिल्ली हाईकोर्ट
न्यायिक अधिकारियों से अनावश्यक अतिसंवेदनशीलत की उम्मीद नहीं की जाती है, संयम और संतुलन बनाए रखना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट ने 5 लाख रुपए जुर्माना भरने के आदेश को खारिज किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मामले में अतिरिक्त किराया नियंत्रक (Additional Rent Controller) के 5 लाख रुपए जुर्माना भरने के आदेश को खारिज कर दिया।इसके साथ ही कोर्ट ने देखा कि न्यायिक अधिकारियों से अनावश्यक अतिसंवेदनशीलता की उम्मीद नहीं की जाती है, जिनसे हर समय संयम और संतुलन बनाए रखने की उम्मीद की जाती है।जिस तरह से आदेश पारित किया गया था, उस पर स्पष्ट रूप से अपनी असहमति व्यक्त करते हुए जस्टिस सी हरि शंकर ने कहा,"इस क्रम में कि एआरसी का करियर, जो काफी युवा न्यायिक अधिकारी प्रतीत होता है, पूर्वाग्रह से...

दिल्ली हाईकोर्ट, दिल्ली
उचित संदेह से परे साबित करने में विफलता पर दोषमुक्ति, अनुशासनात्मक कार्यवाही, जहां परीक्षण संभावनाओं की प्रबलता है, को रोकती नहीं है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने माना है कि आपराधिक कार्यवाही में दोषमुक्ति जिसमें एक व्यक्ति के अपराध को उचित संदेह से परे साबित किया जाना है, अनुशासनात्मक कार्यवाही, जिसमें कदाचार के आरोप संभावनाओं की प्रबलता पर स्‍थापित किया जाना है, को नहीं रोकता है।जस्टिस अनु मल्होत्रा ​​​​ने कहा कि आपराधिक कार्यवाही में दोषमुक्ति, प्रबंधन को किसी कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही को आगे बढ़ाने से नहीं रोकती है।कोर्ट ने कहा,"... आपराधिक कार्यवाही में दोषमुक्ति जिसमें एक व्यक्ति के अपराध को उचित संदेह से परे साबित किया...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
विशेष निर्देशों के बावजूद 'तारीख पर तारीख': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को वरिष्ठ नागरिकों को उनकी संपत्ति को फिर से शुरू करने के लिए मुआवजा जारी करने का निर्देश दिया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court), इंदौर बेंच ने हाल ही में भारत सरकार को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ताओं, वरिष्ठ नागरिकों को उनके बंगले के लिए दिए गए मुआवजे की राशि जारी करे, जिसे रक्षा मंत्रालय ने अपने उद्देश्यों के लिए फिर से शुरू किया था।कोर्ट ने पाया कि भारत सरकार याचिकाकर्ताओं को राशि का भुगतान करने में अपने पैरों को पीछ खींच रहा था, जबकि निष्पादन अदालत को 4 महीने के भीतर निष्पादन की कार्यवाही का निपटान करने के विशेष निर्देश दिए गए थे।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर याचिकाकर्ताओं...

हाईकोर्ट ऑफ कर्नाटक
मोटर दुर्घटना की तिथि के अनुसार व्यक्ति के एकमात्र व्यवसाय के संदर्भ में काम करने में असमर्थता निर्धारित की जानी चाहिए: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि एक व्यक्ति जो पेशे से ड्राइवर है, मोटर दुर्घटना में एक आंख की पूरी दृष्टि खो देता है तो वह ड्राइविंग के पेशे को जारी नहीं रख पाएगा, इस प्रकार इसे एक स्थायी शारीरिक विकलांगता और कमाई क्षमता का 100% नुकसान माना जाएगा।जस्टिस प्रदीप सिंह येरूर की सिंगल जज बेंच ने नागेंद्र नाम के एक व्यक्ति की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कहा,"याचिकाकर्ता के पेशे में मोटर वाहन को चलाने के लिए विशिष्ट कौशल और सतर्कता शामिल है। दुर्घटना की किसी भी घटना से बचने या खुद को चोट से...

राजद्रोह कानून की वैधता को चुनौती: सुप्रीम कोर्ट विचार करेगा कि आईपीसी 124ए को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी बेंच में भेजा जाए या नहीं
राजद्रोह कानून की वैधता को चुनौती: सुप्रीम कोर्ट विचार करेगा कि आईपीसी 124ए को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी बेंच में भेजा जाए या नहीं

भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए को चुनौती देने वाली याचिकाओं में, जो राजद्रोह को अपराध बनाती है, सुप्रीम कोर्ट के 3-जजों ने गुरुवार को प्रारंभिक मुद्दे पर विचार करने का फैसला किया कि क्या 1962 के केदारनाथ फैसले को एक बड़ी बेंच के संदर्भ की आवश्यकता है जिसमें 5-न्यायाधीशों की बेंच ने खंड को बरकरार रखा था।भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने संदर्भ के मुद्दे पर प्रारंभिक बहस सुनने के लिए 10 मई को दोपहर 2 बजे मामले की सुनवाई सूचीबद्ध की है।पीठ ने सभी...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
थाना प्रभारी की अनुमति के बिना किसी को मौखिक रूप से थाने नहीं बुलाया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ खंडपीठ) ने हाल ही में उत्तर प्रदेश राज्य और पुलिस समेत अन्य शासन तंत्रों को जारी एक महत्वपूर्ण निर्देश में कहा कि किसी भी व्यक्ति को, जिसमें एक आरोपी भी शामिल है, थाना प्रभारी की सहमति/अनुमोदन के बिना अधीनस्थ पुलिस अधिकारी मौखिक रूप से पुलिस थाने में समन नहीं कर सकते।जस्टिस अरविंद कुमार मिश्रा- I और जस्टिस मनीष माथुर की खंडपीठ ने अधिकारियों को निर्देश दिया,"यदि किसी पुलिस स्टेशन में कोई आवेदन या शिकायत दी जाती है, जिसमें जांच और आरोपी की उपस्थिति की आवश्यकता होती है तो...

केवल कुछ महीनों तक साथ रहने और बच्चा होने से विवाह की धारणा नहीं बनती, पार्टियों का आचरण प्रासंगिक: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
केवल कुछ महीनों तक साथ रहने और बच्चा होने से विवाह की धारणा नहीं बनती, पार्टियों का आचरण प्रासंगिक: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हाल ही में एक घोषणात्मक मुकदमे में आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर कहा कि विवाह की धारणा आचरण, जीवन के ढंग और अन्य व्यक्तियों के झुकाव से निर्धारित होती है।जस्टिस गौतम भादुड़ी और जस्टिस संजय एस अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा,"कानून का अनुमान विवाह के पक्ष में और अवैध रिश्ते (concubinage)के खिलाफ है। जब एक पुरुष और एक महिला को कई वर्षों तक लगातार साथ रहे, लेकिन सबूत यह है कि अपीलकर्ता नंबर एक श्रीमती जानकी यादव केवल कुछ महीनों के लिए ही रहीं, इसलिए उक्त विवाह का अनुमान भी नहीं लगाया...

उम्रकैद यानी आखिरी सांस तक कैद, अदालत आजीवन कारावास की अवधि तय नहीं कर सकती : इलाहाबाद हाईकोर्ट
उम्रकैद यानी आखिरी सांस तक कैद, अदालत आजीवन कारावास की अवधि तय नहीं कर सकती : इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आजीवन कारावास (Life Sentence) की सजा अभियुक्त के प्राकृतिक जीवन तक है जिसे हाईकोर्ट द्वारा वर्षों की संख्या में तय नहीं किया जा सकता। जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस सुभाष चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने वर्ष 1997 के एक मामले में निचली अदालत द्वारा हत्या के पांच दोषियों को दी गई उम्रकैद की सजा बरकरार रखते हुए कहा।अदालत के समक्ष जब यह तर्क दिया गया कि दोषियों में से एक, कल्लू, जो पहले ही लगभग 20-21 साल जेल में काट चुका है, उसकी सज़ा की अवधि को देखते हुए क्या उसकी...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एमपीपीएससी परीक्षा में ओबीसी आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% करने की राज्य नीति पर रोक लगाई
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एमपीपीएससी परीक्षा में ओबीसी आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% करने की राज्य नीति पर रोक लगाई

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने हाल ही में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग में ओबीसी श्रेणी के लिए आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% करने की राज्य सरकार की नीति पर रोक लगाई है।स्टे को न्यायालय द्वारा समान मामलों में दी गई समान अंतरिम राहत के परिणामस्वरुप प्रदान किया गया है, जिसमें ओबीसी आरक्षण बढ़ाने की उक्त नीति को चुनौती दी जा रही थी।अंतरिम राहत देते हुए जस्टिस शील नागू और जस्टिस एम.एस. भट्टी ने देखा,"वह मुद्दा जो ओबीसी श्रेणी को 27% तक आरक्षण का लाभ प्रदान करने के संबंध में सभी...

मद्रास हाईकोर्ट
श्रीलंकाई नागरिकों के पास मिले नकली भारतीय पासपोर्ट: मद्रास हाईकोर्ट ने यूआईडीएआई को 35 आधार कार्डों का विवरण 'क्यू' शाखा-सीआईडी के साथ साझा करने का निर्देश दिया

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में उप निदेशक, यूआईडीएआई को पुलिस उपाधीक्षक, "क्यू" शाखा सीआईडी, चेन्नई शहर द्वारा मांगे गए 35 आधार कार्डों का विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।जस्टिस जी जयचंद्रन ने यूआईडीएआई द्वारा उनके अनुरोध को अस्वीकार करने के बाद उपाधीक्षक की याचिका पर उपरोक्त आदेश दिया, जिसमें संबंधित आधार कार्ड के आवेदकों द्वारा जमा किए गए केवाईसी दस्तावेजों के साथ आधार कार्ड नंबरों के बारे में जानकारी मांगी गई थी।याचिकाकर्ता द्वारा मांगी गई राहत प्रतिवादी को आधार कार्ड की वास्तविकता सहित...

शुतुरमुर्ग मानसिकता वाले लोगों द्वारा दिए गए प्रमाण पत्र से महिला के चरित्र का फैसला नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
शुतुरमुर्ग मानसिकता वाले लोगों द्वारा दिए गए प्रमाण पत्र से महिला के चरित्र का फैसला नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अवलोकन में कहा है कि यदि पत्नी पति की इच्छा के अनुसार सांचे में नहीं ढलती है तो यह बच्चे की कस्टडी को खोने का निर्णायक कारक नहीं होगा।जस्टिस गौतम भादुड़ी और जस्टिस संजय एस अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि समाज के कुछ सदस्यों द्वारा दिया गया चरित्र प्रमाण पत्र, जो शुतुरमुर्ग मानसिकता वाले हो सकते हैं, एक महिला के चरित्र को तय करने का आधार नहीं हो सकते।इसके साथ, कोर्ट ने फैमिली कोर्ट, महासमुंद के एक आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें प्रतिवादी/पिता के पक्ष में 14 साल के...

शिक्षित होने के आधार पर पत्नी को भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
शिक्षित होने के आधार पर पत्नी को भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी को अच्छी तरह से शिक्षित होने के आधार पर भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि पति अपनी पत्नी और बच्चों की देखभाल के लिए कानूनी और नैतिक रूप से जिम्मेदार है।जस्टिस राजेश भारद्वाज की खंडपीठ ने प्रिंसिपल जज (फैमिली कोर्ट) के आदेश को चुनौती देने वाली पति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान उक्त टिप्पणी की। फैमिली कोर्ट ने अपने आदेश में पति को अपनी पत्नी को 2,500 रुपये का मासिक भरण-पोषण (सीआरपीसी की धारा 125 के तहत आवेदन दाखिल करने की तारीख...