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यूपी में हर सफाई कर्मचारी को उनके अधिकारों के बारे में बताया जाना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को निर्देश दिया
'यूपी में हर सफाई कर्मचारी को उनके अधिकारों के बारे में बताया जाना चाहिए': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को निर्देश दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह प्रत्येक सफाई कर्मचारी को उनके अधिकारों को सूचीबद्ध करने वाला एक प्रिंटेड पैम्फलेट सौंपे।इस संबंध में जस्टिस चंद्र कुमार राय और जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने राज्य सरकार से सफाई कर्मियों के अधिकारों को निर्दिष्ट करते हुए एक पृष्ठ का संक्षिप्त पैम्फलेट तैयार करने और उसे समाचार पत्रों में प्रकाशित करने को कहा है।यह आदेश एक स्वत: जनहित याचिका में जारी किया गया है, जिसमें कोर्ट ने पिछले महीने 24 मई, 2022...

Writ Of Habeas Corpus Will Not Lie When Adoptive Mother Seeks Child
"तुच्छ मामला": मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 18 साल के बाद 'दूसरी पत्नी' के कहने पर दर्ज रेप केस खारिज किया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक व्यक्ति के खिलाफ अपनी 'दूसरी पत्नी' के कहने पर दर्ज रेप केस खारिज किया। साथ ही कोर्ट ने कहा कि यह एक तुच्छ मामला है और उसके बयान ने उस व्यक्ति के खिलाफ झूठे आरोपों का संकेत दिया है।जस्टिस आनंद पाठक की खंडपीठ ने कहा कि यह तंग करने वाला और तुच्छ मुकदमा है, केवल उस व्यक्ति पर पैसे निकालने के लिए दबाव डालना या घरेलू विवाद को आपराधिक आरोपों में बदलने के लिए अभियोक्ता ('दूसरी पत्नी') द्वारा किया गया प्रयास है।पूरा मामला41 वर्षीय प्रतिवादी संख्या...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
साक्ष्य अधिनियम की धारा 106- पति को उसके घर में हुई पत्नी की मौत का विवरण देने के लिए तब तक नहीं कहा जा सकता, जब तक कि अभियोजन प्रथम दृष्टया मामला स्थापित न करे : बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में पत्नी की हत्या के मामले में एक व्यक्ति की दोषसिद्धि को रद्द कर दिया। मृतका का शरीर उसके घर में मिला था और वह मृतका के पास पाया गया था।जस्टिस साधना एस. जाधव और जस्टिस मिलिंद एन. जाधव की खंडपीठ ने तर्क दिया कि आरोपी को चुप्पी बनाए रखने का अधिकार है और यह अभियोजन पक्ष के लिए है कि वह पहले अपने मामले को उचित संदेह से परे साबित करे, इससे पहले कि आरोपी को अपने बचाव में परिस्थितियों की व्याख्या करने के लिए कहा जाए। यह नोट किया गया कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 के...

संपत्ति के हस्तांतरण अधिनियम द्वारा शासित मकान मालिक-किरायेदार विवाद प्रकृति में मध्यस्थता योग्य हैं: कर्नाटक हाईकोर्ट ने दोहराया
संपत्ति के हस्तांतरण अधिनियम द्वारा शासित 'मकान मालिक-किरायेदार' विवाद प्रकृति में मध्यस्थता योग्य हैं: कर्नाटक हाईकोर्ट ने दोहराया

कर्नाटक हाईकोर्ट ने दोहराया है कि संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882 द्वारा शासित मकान मालिक-किरायेदार विवाद प्रकृति में मध्यस्थता योग्य हैं। जस्टिस ई.एस. इंदिरेश ने कहा कि 'विद्या ड्रोलिया बनाम दुर्गा ट्रेडिंग कॉरपोरेशन (2020)' के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 'हिमांगी एंटरप्राइजेज बनाम अमलजीत सिंह अहुलवालिया (2017)' के अपने ही फैसले को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने इस प्रकार माना कि लीज डीड के तहत पार्टियों के बीच मकान मालिक-किरायेदार विवाद, जो संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम द्वारा शासित था, को मध्यस्थता...

दिल्ली हाईकोर्ट
सीआरपीसी की धारा 127- वैवाहिक विवाद में भरण-पोषण का निर्धारण करते समय पति की वित्तीय स्थिति और बदली हुई परिस्थितियों पर विचार करना चाहिएः दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि वैवाहिक विवादों में भरण-पोषण का निर्धारण पति की वित्तीय स्थिति और उस जीवन स्तर पर निर्भर करता है जिसकी पत्नी अपने वैवाहिक घर में अभ्यस्त थी। जस्टिस चंद्रधारी सिंह ने कहा कि भुगतान किए जाने वाले भरण-पोषण की उचित मात्रा पर पहुंचने के लिए पति की वित्तीय क्षमता, उसके अपने भरण-पोषण के लिए उचित खर्च के साथ उसकी वास्तविक आय, और परिवार के आश्रित सदस्यों, जिन्हें वह अपनी जिम्मेदारियों सहित कानून के तहत बनाए रखने के लिए बाध्य है, को ध्यान में रखा जाना चाहिए। न्यायालय ने...

समरी जनरल कोर्ट मार्शल पॉक्सो अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई कर सकता है, पीड़ित बच्चे की पहचान, सम्मान और मनोविज्ञान की रक्षा करनी चाहिए: जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट
समरी जनरल कोर्ट मार्शल पॉक्सो अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई कर सकता है, पीड़ित बच्चे की पहचान, सम्मान और मनोविज्ञान की रक्षा करनी चाहिए: जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि पॉक्सो अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो समरी जनरल कोर्ट मार्शल (एसजीसीएम) के अधिकार क्षेत्र को उल्लिखित अपराधों के मामले में सुनवाई करने से रोकता है। जस्टिस रजनीश ओसवाल ने कहा कि"वर्ष 2012 के अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो इस अधिनियम के तहत अपराधों की सुनवाई करने के लिए एसजीसीएम के अधिकार क्षेत्र को प्रतिबंधित करता है, बल्कि 2012 के अधिनियम की धारा 42-ए में प्रावधान है कि इस अधिनियम के प्रावधान अतिरिक्त होंगे, न कि किसी...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राष्ट्रीयकृत बैंक कर्मचारी का ट्रांसफर आदेश पत्नी की दिव्यांगता के आधार पर रद्द किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के एक कर्मचारी को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ट्रांसफर करने के आदेश को रद्द कर दिया क्योंकि यह नोट किया गया कि उसकी पत्नी स्थायी रूप से दिव्यांग है जिसकी दिव्यांगता 100% है। जस्टिस राजेश सिंह चौहान की खंडपीठ ने कहा कि पति (कर्मचारी) अपनी पत्नी की देखभाल करने वाला है [जैसा कि दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 2 (डी) के तहत परिभाषित किया गया है], इसलिए, बैंक की ट्रांसफर पॉलिसी के अनुसार , उसे नियमित / रोटेशनल ट्रांसफर से छूट...

हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार का निष्कासन अंतर्निहित है, निहित नहीं : याचिकाकर्ताओं ने मद्रास हाईकोर्ट पूर्ण पीठ में बच्चों की कस्टडी केसों में समवर्ती क्षेत्राधिकार की वकालत की
हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार का निष्कासन अंतर्निहित है, निहित नहीं : याचिकाकर्ताओं ने मद्रास हाईकोर्ट पूर्ण पीठ में बच्चों की कस्टडी केसों में समवर्ती क्षेत्राधिकार की वकालत की

मद्रास हाईकोर्ट की एक पूर्ण पीठ ने शुक्रवार को फैमिली कोर्ट्स एक्ट, 1984 के लागू होने के कारण चाइल्ड कस्टडी और संरक्षकता मामलों की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट के मूल अधिकार क्षेत्र से संबंधित एक मामले की सुनवाई शुरू की।जस्टिस पीएन प्रकाश, जस्टिस आर महादेवन, जस्टिस एम सुंदर, जस्टिस एन आनंद वेंकटेश और जस्टिस ए ए नकीरन तीन जजों की पीठ द्वारा भेजे गए दो प्रश्नों के जवाब देने के लिए गठित की गई थी(i) क्या बाल कस्टडी और संरक्षकता के मामलों पर अपने मूल पक्ष पर हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र को फैमिली कोर्ट्स...

पॉक्सो अधिनियम | धारा 33(5) के तहत नाबालिग पीड़िता को जिरह के लिए वापस बुलाने पर लगी रोक, उसके वयस्‍क होने पर लागू नहीं होतीः कर्नाटक हाईकोर्ट
पॉक्सो अधिनियम | धारा 33(5) के तहत नाबालिग पीड़िता को जिरह के लिए वापस बुलाने पर लगी रोक, उसके वयस्‍क होने पर लागू नहीं होतीः कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना कि 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम, 2012 की धारा 33 (5) के तहत कठोरता कम हो जाएगी और आरोपी द्वारा किए गए एक आवेदन पर सीआरपीसी की धारा 311 के तहत पीड़ित को वापस बुलाने और आगे जिरह की मांग के लिए एक बार नहीं बनेगा।जस्टिस एम नागप्रसन्ना की पीठ ने ट्रायल कोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली एक याचिका की अनुमति देते हुए यह टिप्पणी की, जिसके तहत एक मामले में आगे जिरह के लिए पीड़ित को वापस बुलाने के उसके आवेदन को खारिज कर दिया था। आरोपी...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने UPHJS पात्रता परीक्षा 2020 के लिए उपस्थित होने के लिए 3 साल से कम सेवा वाले न्यायिक अधिकारियों की याचिका खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कुछ न्यायिक अधिकारियों (31 दिसंबर, 2021 तक 3 साल से कम का अनुभव रखने वाले) के साथ यूपी न्यायिक सेवा संघ द्वारा दायर एक याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्हें यूपी उच्च न्यायिक सेवा में पदोन्नति के लिए उपयुक्तता परीक्षा 2020 के लिए उपस्थित होने की अनुमति देने की मांग की गई थी।ज‌स्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने कहा कि हाईकोर्ट कमेटी के केवल उन जजों के नाम शामिल करने के निर्णय में, जिन्होंने तीन साल की सेवा पूरी कर ली है, न्यायालय द्वारा...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
मृत्यु के समय और लास्ट सीन में निकटता होनी चाहिए: बॉम्बे हाईकोर्ट ने विक्षिप्त व्यक्ति की हत्या के दो आरोपियों को बरी किया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि "लास्‍ट सीन थ‌ियरी", जिससे अभियुक्त पीड़ित के साथ दिखा अंतिम व्यक्ति है, पीड़ित की मृत्यु के समय के साथ सहसंबंध की अनुपस्थिति, उसे अपराध का दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है।अभियोजन पक्ष को उस समय की स्थापना करनी चाहिए, जब पीड़ित को आखिरी बार आरोपी के साथ देखा गया और वह मौत के समय का समय था। अदालत ने कहा, "जब तक कि अंतिम बारे देखे गए समय और मृत्यु के समय में निकटता नहीं है, तब तक आरोपियों को दोषी ठहराने के लिए सबूतों को ध्यान नहीं दिया जा सकता है।"इस प्रकार, जस्टिस...

महिला साइकिलिस्ट ने भारतीय स्प्रिंट टीम कोच पर अनुचित व्यवहार करने का आरोप लगायाः एनएचआरसी ने स्वतः संज्ञान लिया
महिला साइकिलिस्ट ने भारतीय स्प्रिंट टीम कोच पर 'अनुचित व्यवहार' करने का आरोप लगायाः एनएचआरसी ने स्वतः संज्ञान लिया

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग(एनएचआरसी) ने शुक्रवार को उस मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया है,जिसमें एक भारतीय महिला साइकिल चालक(साइकिलिस्ट) ने स्लोवेनिया में एक शिविर(कैंप) के दौरान राष्ट्रीय स्प्रिंट टीम के मुख्य कोच आर के शर्मा पर ''अनुचित व्यवहार'' करने का आरोप लगाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) को भेजे गए ईमेल में शिकायत दर्ज कराई गई है। साई ने एक बयान में कहा है कि शिकायतकर्ता को उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'तुरंत' भारत वापस लाया गया है। साई और...

दिल्ली हाईकोर्ट
पड़ोसियों के बीच विवाद में महिला के शील भंग के मामले दर्ज करने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने की जरूरत: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि पड़ोसियों के बीच विवाद के कारण एक महिला के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354 और 509 के तहत शील भंग के मामले दर्ज करने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने की जरूरत है।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 452, 506, 509, 354बी और 34 के तहत दर्ज एफआईआर को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। मामले की सुनवाई में शिकायतकर्ता ने कहा कि दोनों पक्ष पड़ोसी थे और कुछ गलतफहमी को लेकर विवाद पैदा हो गया था, जिसके बाद क्रॉस एफआईआर दर्ज की गई थी।मामले वर्ष 2017 में दर्ज...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को डिंडोशी मेट्रो स्टेशन का नाम पठानवाड़ी करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से पहले 1 लाख रुपए जमा करने को कहा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को 'डिंडोशी' मेट्रो स्टेशन का नाम 'पठानवाड़ी' करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से पहले 1 लाख रुपए जमा करने को कहा

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने गुरुवार को याचिकाकर्ता को मुंबई मेट्रो लाइन 7 पर एक स्टेशन का नाम 'डिंडोशी' से 'पठानवाड़ी' करने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से पहले 1 लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया।नई रोशनी सामाजिक संगठन द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि मूल रूप से मेट्रो स्टेशन का नाम "पठानवाड़ी" रखा गया था। हालांकि, "अनुचित राजनीतिक दबाव" और विधायकों द्वारा किए गए अनुरोधों के कारण, 18 जनवरी, 2019 को एमएमआरडीए आयुक्त ने आदेश दिया कि स्टेशन को "दिंडोशी" बुलाया...

हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी द्वारा सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ दायर मानहानि का मुकदमा डायमंड हार्बर से कोलकाता ट्रांसफर किया
हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी द्वारा सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ दायर मानहानि का मुकदमा डायमंड हार्बर से कोलकाता ट्रांसफर किया

कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी द्वारा भाजपा विधायक और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ दायर मानहानि के मुकदमे को डायमंड हार्बर, दक्षिण 24-परगना से कलकत्ता में सिटी सिविल कोर्ट ट्रांसफर करने का आदेश दिया।अधिकारी ने सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) की धारा 24 के तहत आवेदन किया था। इसमें सिविल जज (जूनियर डिवीजन), द्वितीय कोर्ट, डायमंड हार्बर, दक्षिण 24-परगना की अदालत में लंबित मुकदमे को चीफ जज कोर्ट, सिटी...