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'प्रथम दृष्टया मानहानि': बीजेपी नेता किरीट सोमैया की पत्नी की शिकायत पर मुंबई कोर्ट ने शिवसेना के संजय राउत को तलब किया
मुंबई की एक मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने भाजपा नेता किरीट सोमैया की पत्नी मेधा सोमैया द्वारा दायर मानहानि शिकायत में शिवसेना नेता संजय राउत को समन जारी किया। मजिस्ट्रेट पीआई मोखाशी ने राउत को सीआरपीसी की धारा 204 (ए) के तहत समन जारी करके 4 जुलाई, 2022 तक अदालत में पेश होना का आदेश दिया।न्यायाधीश ने कहा," इन दस्तावेजों और वीडियो क्लिप को रिकॉर्ड पर प्रस्तुत किया गया है, प्रथम दृष्टया पता चलता है कि आरोपी ने शिकायतकर्ता के खिलाफ 15/04/2022 और 16/04/2022 को अपमानजनक बयान दिया है, ताकि इसे बड़े...
दिल्ली हाईकोर्ट ने पक्षकारों को 45 दिनों तक यमुना नदी साफ करने के लिए कहा, समझौते के आधार पर हमले की एफआईआर रद्द की
दिल्ली हाईकोर्ट ने दो पक्षों के बीच हुए लड़ाई झगड़े के बाद दर्ज एफआईआर रद्द करते हुए शिकायतकर्ता के साथ-साथ प्रतिवादी पक्षों को यमुना नदी को 45 दिनों तक साफ करने का निर्देश दिया। जस्टिस जसमीत सिंह ने पक्षकारों को दिल्ली जल बोर्ड की टीम के ड्रेनेज सदस्य की देखरेख में साथ काम करने का निर्देश दिया।अदालत ने निर्देश दिया,"संतोषजनक सेवा के अंत में याचिकाकर्ताओं और प्रतिवादियों को यमुना सफाई के लिए दिल्ली जल बोर्ड द्वारा एक प्रमाण पत्र दिया जाएगा और प्रत्येक याचिकाकर्ता और प्रतिवादी द्वारा इस प्रमाण...
[एनडीपीएस अधिनियम] 201 किलो गांजा जब्त करने में 1989 के स्थायी आदेश के अनुसार सैंपल नहीं लिया गया : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 201 किलो गांजा की तस्करी के आरोपी एनडीपीएस अधिनियम के तहत आरोपी वली हसन को इस तथ्य के मद्देनजर सशर्त जमानत दी कि गांजा का नमूना 1989 के स्थायी आदेश / निर्देश संख्या 1 के अनुसार नहीं लिया गया। जस्टिस चंद्र कुमार राय की खंडपीठ ने संबंधित अदालत की संतुष्टि के अनुसार आवेदक वली हसन को एक व्यक्तिगत बांड और इतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करने पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।संक्षेप में मामलाअभियोजन पक्ष का यह मामला था कि वली हसन/अभियुक्त एक ट्रक चला रहा था, जिसे रोका गया और...
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जनप्रतिनिधि लोक सेवकों को अवैध आदेश पारित करने के लिए मजबूर करते हैं और वे बिना किसी आपत्ति के उन आदेशों का पालन करते हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मामले में आदेश में कहा,"यह खेदजनक है कि जनता का प्रतिनिधि लोक सेवक को अवैध आदेश पारित करने के लिए मजबूर करते हैं और लोक सेवक बिना किसी आपत्ति के उनके अवैध आदेशों का पालन करते हैं।"जस्टिस सिद्धार्थ की खंडपीठ ने बसरत उल्लाह द्वारा दायर याचिका की अनुमति देते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें विशेष सचिव, यूपी सरकार द्वारा उन्हें जिला बस्ती में मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत बदरूल उलूम के प्रधानाचार्य के पद से हटाने के आदेश को चुनौती दी गई थी।मामला यह था कि वर्ष 2019 में...
मस्जिद लाउडस्पीकर: हाईकोर्ट ने कर्नाटक सरकार से पूछा, कौन से कानून के तहत स्थायी लाइसेंस दिया जा सकता है?
कर्नाटक हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मस्जिदों में लाउडस्पीकर लगाने के लिए स्थायी लाइसेंस देने से संबंधित आरोपों पर राज्य सरकार से जवाब देने को कहा। कोर्ट ने राज्य से यह भी पूछा कि किस प्रावधान के तहत 16 मस्जिदों (जो अदालत के सामने हैं) को लाउडस्पीकर इस्तेमाल करने के लिए लाइसेंस दिया जा सकता है और कौन सा प्राधिकरण अधिकृत है और किस कानून के तहत और किस अवधि के लिए ऐसी अनुमति दी जा रही है।मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी और जस्टिस अशोक एस किनागी की खंडपीठ ने याचिका के एक बैच की सुनवाई के दौरान मौखिक रूप...
एएसजी और पब्लिक प्रॉसिक्यूटर को अपील दायर करने पर राय देने का अधिकार दिया जाए, कलकत्ता हाईकोर्ट ने 'अत्यधिक देरी' पर अंकुश लगाने के लिए सीबीआई परिपत्र में बदलाव का सुझाव दिया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने सुझाव दिया है कि सीबीआई एडिसनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) और पब्लिक प्रॉसिक्यूटर को अदालत के आदेशों के खिलाफ अपील दायर करने पर प्रॉसिक्यूशन डारेक्टर को राय देने का अधिकार देने के लिए एक नया सर्कूलर जारी करे, ताकि देरी को कम किया जा सके।जस्टिस विवेक चौधरी ने समय सीमा समाप्त होने के बाद अपील दायर करने के कारण एजेंसी के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की थी। अदालत ने कहा था कि सीबीआई अधिकारी सीबीआई मैनुअल का पालन करने में विफल रहे हैं, जिसमें देरी से बचने और सीमित अवधि के भीतर अपील और संशोधन...
यदि पति-पत्नी ने कोर्ट द्वारा सत्यापित समझौता विलेख के जरिए अपने विवाद का समाधान किया है तो वैवाहिक मामला रद्द कर दिया जाना चाहिएः इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि जब पार्टियों ने अदालत द्वारा विधिवत रूप से सत्यापित समझौता विलेख के जरिए अपने पूरे विवाद को आपस में सुलझा लिया हो तो पति और पत्नी के बीच चल रहे वैवाहिक विवाद को रद्द कर दिया जाना चाहिए। जस्टिस चंद्र कुमार राय की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए पत्नी की शिकायत पर पति और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए, 323 और डीपी एक्ट की धारा 3/4 के तहत दर्ज एफआईआर और उसके बाद शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने यह आदेश देते...
अभियुक्त पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से संविधान के अनुच्छेद 226 या सीआरपीसी की धारा 482 के तहत हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार का आह्वान नहीं कर सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना है कि किसी अभियुक्त का पॉवर ऑफ एटॉर्नी होल्डर संविधान के अनुच्छेद 226 या 227 सहपठित सीआरपीसी की धारा 482 या सीआरपीसी की धारा 482 के तहत आपराधिक याचिका को कायम नहीं रख सकता है।जस्टिस एम नागप्रसन्ना की पीठ ने सामंथा क्रिस्टीना डेल्फिना विलिस और अन्य की याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। याचिकाकर्ता लंदन के निवासी हैं। महिला ने याचिका में अपने पति द्वारा दायर एक शिकायत को रद्द करने की मांग की थी।पीठ ने कहा, "मैं मानता हूं कि आरोपी के पॉवर ऑफ अटॉर्नी होल्डर ने इस...
सुवेंदु अधिकारी और 4 भाजपा विधायकों को पश्चिम बंगाल विधानसभा से निलंबित करने के अध्यक्ष के फैसले को चुनौती देने वाली लंबित याचिकाएं मुद्दों को सुलझाने वाले पार्टियों के लिए बाधा नहीं: हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी और पश्चिम बंगाल विधानसभा के चार अन्य भाजपा विधायकों को निलंबित करने के अध्यक्ष के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका का लंबित होना इस मुद्दे को हल करने में पार्टियों के लिए बाधा नहीं है।सुवेंदु अधिकारी सहित पांच भाजपा विधायकों को पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष ने 28 मार्च को सदन में उनके कथित अभद्र आचरण के लिए निलंबित कर दिया था। अधिकारी, भाजपा विधायक दीपक बर्मन, शंकर घोष, मनोज तिग्गा और नरहरि महतो के साथ, अध्यक्ष ने इस साल...
एक बार जब मजिस्ट्रेट अपराधों का संज्ञान ले लेता है तो वह अपने स्वयं के आदेश पर पुनर्विचार और धारा/ओं को छोड़/वापस नहीं ले सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि एक बार जब मजिस्ट्रेट ने कुछ धाराओं/अपराधों के तहत अपराधों का संज्ञान लिया है तो उसे संज्ञान आदेश से धारा/ओं को हटाने के अपने आदेश की समीक्षा करने की कोई शक्ति नहीं है। जस्टिस राजबीर सिंह की खंडपीठ ने यह टिप्पणी की। उन्होंने मजिस्ट्रेट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें आरोप पत्र (जिस पर मजिस्ट्रेट ने पहले संज्ञान लिया था) के एक अपराध संबंध में संज्ञान आदेश को वापस लेने के लिए आरोपी/याचिकाकर्ता द्वारा दायर एक आवेदन को खारिज कर दिया गया था।मामलायाचिकाकर्ता/आरोपी के...
बॉम्बे हाईकोर्ट के जज जस्टिस एसएस शिंदे की बेंच 9.5 घंटे से अधिक समय तक बैठकर 190 से अधिक मामलों की सुनवाई की
बॉम्बे हाईकोर्ट की जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस एमएन जाधव की खंडपीठ ने गुरुवार को रात 8 बजे तक बैठ कर 190 से अधिक मामलों की सुनवाई की, क्योंकि दिन के मामलों की सूची लंबी थी।पीठ ने अपने समक्ष सूचीबद्ध 206 मामलों में से 190 से अधिक मामलों की सुनवाई की। बॉम्बे हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के लिए सामान्य काम का समय सुबह 10.30 बजे से शाम 4.30 बजे तक है।पीठ के सीनियर जज जस्टिस शिंदे उन नामों में से एक हैं जिनकी सिफारिश सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने चीफ जस्टिस के रूप में पदोन्नति के लिए की है।राजस्थान...
केवल प्रारंभिक जांच के आधार पर सरकारी कर्मचारी को दंडित नहीं किया जा सकता, उचित अवसर के साथ विभागीय जांच होनी चाहिए: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट
जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी अपराधी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही करना और अपराध के निष्कर्ष दर्ज करना और उसी के लिए सजा देना अर्ध-न्यायिक कार्य है, न कि प्रशासनिक कार्य।हाईकोर्ट ने इन्हीं टिप्पणियों के साथ जेएंड के स्टेट बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन के सचिव द्वारा याचिकाकर्ता के खिलाफ पारित आदेश को रद्द कर दिया। याचिककर्ता बोर्ड में वरिष्ठ सहायक के रूप में कार्यरत थे। अदालत ने कहा कि कि याचिकाकर्ता को अगली पदोन्नति के लिए देय होने की तारीख से पदोन्नति को रोकने का दंड...
बचपन बचाओ आंदोलन ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के उचित कार्यान्वयन की मांग करते हुए गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया, नोटिस जारी
गुजरात हाईकोर्ट ने बच्चों के अधिकारों और बाल श्रम की रोकथाम पर केंद्रित नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी (Kailash Satyarthi) द्वारा स्थापित एक गैर-सरकारी संगठन बचपन बचाओ आंदोलन द्वारा दायर रिट याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के उचित कार्यान्वयन की मांग की गई थी।संगठन ने संपूर्ण बेहुरा बनाम भारत संघ के लगातार गैर-कार्यान्वयन पर गंभीर चिंता व्यक्त की है, जिससे सुप्रीम कोर्ट ने किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के उचित कार्यान्वयन के लिए कई...
कम मात्रा में प्रतिबंधित पदार्थ के मामले में जमानत पर एनडीपीएस अधिनियम की धारा 37 के कठोर प्रतिबंध लागू नहीं होते : गुजरात हाईकोर्ट ने दोहराया
गुजरात हाईकोर्ट ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (एनडीपीएस एक्ट), 1985 के तहत आरोपी को जमानत दे दी। कोर्ट ने यह देखते हुए जमानत दी कि अधिनियम की धारा 37 के तहत जमानत के कठोर प्रावधान मामले में लागू नहीं होते है, इसलिए नियमित जमानत की अनुमति दी जा सकती है।एनडीपीएस अधिनियम की धारा 37 में प्रावधान है कि अधिनियम के तहत वाणिज्यिक मात्रा से जुड़े अपराधों के आरोपी व्यक्तियों को तब तक जमानत पर रिहा नहीं किया जाएगा जब तक कि न्यायालय संतुष्ट न हो कि आरोपी दोषी नहीं है और उसके जमानत पर...
निवारक हिरासत आदेश तब भी पारित किया जा सकता है जब कोई व्यक्ति पुलिस हिरासत में हो, बशर्ते कि इसके पीछे ठोस वाले कारण हों : जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने दोहराया
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसे व्यक्ति के खिलाफ निवारक हिरासत के आदेश को रद्द कर दिया, जो पहले से ही इसी तरह के एक मामले में ट्रायल का सामना कर रहा था और इस मामले में एक सक्षम अदालत द्वारा पहले जमानत पर रिहा किया गया था।हिरासत का आदेश कश्मीर के डिवीजनल कमिश्नर द्वारा जारी किया गया था ताकि याचिकाकर्ता को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1988 में अवैध कारोबार के अर्थ में कोई भी कार्य करने से रोका जा सके।जस्टिस एम ए चौधरी की पीठ ने हिरासत के आदेश को रद्द...
केरल हाईकोर्ट ने बलात्कार मामले में अभिनेता-फिल्म निर्माता विजय बाबू की अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाई
केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अभिनेता-निर्माता विजय बाबू को उस मामले में अंतरिम अग्रिम जमानत दी, जिसमें अभिनेत्री ने उन पर यौन शोषण का आरोप लगाया है।जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने अंतरिम जमानत तब बढ़ा दी जब उन्हें सूचित किया गया कि डीजीपी अस्वस्थ हैं और मामले में पेश होने के लिए समय की आवश्यकता है।अभिनेता ने पिछले हफ्ते यह देखते हुए अंतरिम अग्रिम जमानत दी गई थी कि केवल इसलिए कि वह देश से बाहर था, उसके जमानत आवेदन पर विचार नहीं करने का आधार नहीं है। जज द्वारा यह सूचित किए जाने पर कि विजय बाबू भारत लौट...
निष्पादन न्यायालय केवल मेमो के आधार पर आर्बिट्रल अवार्ड में बदलाव नहीं कर सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा कि आर्बिट्रेशन एंड कन्सिलिएशन एक्ट, 1996 की धारा 33 के तहत मध्यस्थ अवॉर्डों में टाइपोग्राफिकल त्रुटियों के सुधार के लिए दायर एक आवेदन के अभाव में, कोर्ट मध्यस्थ एक पक्ष द्वारा उसके समक्ष दायर मेमो के आधार पर अवॉर्ड को संशोधित करने और सही करने का आदेश पारित नहीं कर सकता है।जस्टिस ईएस इंदिरेश ने कहा कि मध्यस्थ निर्णय पारित होने के 30 दिनों के बाद, ए एंड सी एक्ट की धारा 33 के तहत टाइपोग्राफिक गलतियों के सुधार के लिए किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जा सकता...
लंबे समय तक क्लिनिकल ट्रायल स्टडीज की अनुपलब्धता के कारण दुर्लभ बीमारियों वाले बच्चों के उपचार को टाला नहीं जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों के उपचार को इस आधार पर स्थगित नहीं किया जा सकता कि लंबे समय तक क्लीनिकल ट्रायल स्टडीज उपलब्ध नहीं हैं या पर्याप्त साक्ष्य सामग्री मौजूद नहीं है।जस्टिस यशवंत वर्मा डचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (डीएमडी), हंटर सिंड्रोम जैसी दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे। याचिका में उन्हें मुफ्त इलाज मुहैया कराने का निर्देश देने की मांग की गई है, क्योंकि इस बीमारी का मेडिकल ट्रीटमेंट बहुत महंगा है।यह स्वीकार करते हुए...
केरल हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री के खिलाफ आरोप लगाने वाली स्वप्ना सुरेश और सरित की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को विधायक के टी जलील, मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और राज्य सरकार के खिलाफ झूठी सूचना फैलाने के आरोपी स्वप्ना सुरेश और सरित पीएस की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की।जस्टिस विजू अब्राहम ने लोक अभियोजक की इस दलील को दर्ज करने के बाद याचिका खारिज की कि दूसरे याचिकाकर्ता (सरित) को अपराधी नहीं बनाया गया है, इसलिए अग्रिम जमानत याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। न्यायाधीश ने यह भी देखा कि सुरेश के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153 और 120 बी के तहत दर्ज एफआईआर में कथित अपराध दोनों...
मोटर दुर्घटना | एक दावेदार जिसे उसके बीमाकर्ता ने मुआवजा दिया हो, वह दुर्घटनाकारी वाहन के बीमाकर्ता से उसी नुकसान के लिए मुआवजा पाने का हकदार नहींः केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि मोटर दुर्घटना के मामलों में, एक दावेदार जिसे उसके बीमाकर्ता ने मुआवजा दिया हो, वह दुर्घटनाकारी वाहन (Offending Vehicle) के मालिक या बीमाकर्ता से उसी नुकसान के लिए फिर से कोई मुआवजा पाने का हकदार नहीं है।जस्टिस ए बदरुद्दीन ने इकोनॉमिक ट्रांसपोर्ट ऑर्गनाइजेशन बनाम चरण स्पिनिंग मिल्स (प्राइवेट) लिमिटेड में यह पाया कि सुप्रीम कोर्ट ने यह माना था कि बीमा का कानून क्षतिपूर्ति के सिद्धांत के न्यायासंगत परिणाम को मान्यता देता है, जब बीमाकर्ता ने बीमाधारक की क्षतिपूर्ति प्रदान...



![[एनडीपीएस अधिनियम] 201 किलो गांजा जब्त करने में 1989 के स्थायी आदेश के अनुसार सैंपल नहीं लिया गया : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दी [एनडीपीएस अधिनियम] 201 किलो गांजा जब्त करने में 1989 के स्थायी आदेश के अनुसार सैंपल नहीं लिया गया : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दी](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2022/06/10/500x300_421494-justice-chandra-kumar-rai-allahabad-high-court.jpg)












