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एंटी-सीएए प्रोटेस्ट : हाईकोर्ट ने दिल्ली दंगों के पीड़ितों की सहायता के लिए दावेदारों, सरकारी योजना के तहत वितरित राशि का विवरण मांगा
एंटी-सीएए प्रोटेस्ट : हाईकोर्ट ने दिल्ली दंगों के पीड़ितों की सहायता के लिए दावेदारों, सरकारी योजना के तहत वितरित राशि का विवरण मांगा

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार की 'दंगा पीड़ितों की मदद के लिए सहायता योजना' के तहत मुआवजे की मांग करने वाले दावेदारों और अब तक वितरित की गई राशि का एक सारणीबद्ध चार्ट (tabular chart) में विवरण मांगा है।दिल्ली सरकार द्वारा 2019-20 में सीएए के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुए दंगों के पीड़ितों को मुआवजा देने और उनकी सहायता करने के लिए सहायता योजना शुरू की गई थी। उक्त योजना में बालिग की मृत्यु, अवयस्क की मृत्यु, स्थायी अपंगता, गंभीर या मामूली चोट और संपत्ति के नुकसान के लिए मुआवजे का प्रावधान...

डिटेंशन सेंटर्स की कमी के बीच जेल में बंद असहाय अप्रवासी: कर्नाटक कानूनी सेवा प्राधिकरण ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका, नोटिस जारी
डिटेंशन सेंटर्स की कमी के बीच जेल में बंद असहाय अप्रवासी: कर्नाटक कानूनी सेवा प्राधिकरण ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका, नोटिस जारी

कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोमवार को कर्नाटक राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण द्वारा दायर एक याचिका पर यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया, जिसमें निर्वासन का इंतजार कर रहे अवैध अप्रवासियों के डिटेंशन के लिए राज्य में सभी बुनियादी सुविधाओं के साथ पर्याप्त संख्या में डिटेंशन सेंटर स्थापित करने के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश देने की मांग की गई थी।कार्यवाहक चीफ जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस एस विश्वजीत शेट्टी की खंडपीठ ने नोटिस जारी किया। याचिका में प्रतिवादी नंबर एक और तीन को अदालत...

भूमि उपयोग के लिए एनओसी अधिग्रहण के खिलाफ भूमि मालिक को इम्यूनिटी नहीं देता, प्रॉमिसरी एस्टॉपेल का सिद्धांत भी आकर्षित नहीं होता: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
भूमि उपयोग के लिए एनओसी अधिग्रहण के खिलाफ भूमि मालिक को इम्यूनिटी नहीं देता, प्रॉमिसरी एस्टॉपेल का सिद्धांत भी आकर्षित नहीं होता: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में भूमि उपयोग के संबंध में अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रदान करने पर सरकार के खिलाफ प्रॉमिसरी एस्टॉपेल की गैर-प्रयोज्यता के समक्ष भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के तहत "सार्वजनिक उद्देश्य" के लिए एक बाद के अधिग्रहण के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं।चीफ ज‌स्टिस रवि शंकर झा और जस्टिस अरुण पल्ली की खंडपीठ ने कहा,"एक बार कॉलेज की स्‍थापना के लिए अनुमति दी गई/एनओसी दी गई और उसके बाद राज्य इसे कभी पान नहीं सकता है, यह एक विषम स्थिति को जन्म दे सकता है, जो बड़े...

हाईकोर्ट ऑफ कर्नाटक
जब तक धोखाधड़ी का अपराध/आपराधिक न्यास भंग नहीं होता, आपराधिक कानून का इस्तेमाल 'पैसे वसूली' के लिए नहीं किया जा सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि अनुबंध के तहत भुगतान किए गए धन की वसूली के लिए आपराधिक कानून तब तक लागू नहीं किया जा सकता, जब तक कि धोखाधड़ी या आपराधिक न्यास भंग का अपराध स्थापित नहीं हो जाता।जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने इसके साथ ही अमित गर्ग द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया और उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 419 और 420 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66 सी और 66 डी के तहत शुरू की गई कार्यवाही को रद्द कर दिया।बेंच ने कहा,"पक्षों के बीच अनुबंध या घटिया गुणवत्ता की...

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कैट के अध्यक्ष के रूप में जस्टिस रंजीत वसंतराव मोरे की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर भारत सरकार से जवाब मांगा
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कैट के अध्यक्ष के रूप में जस्टिस रंजीत वसंतराव मोरे की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर भारत सरकार से जवाब मांगा

गुवाहाटी हाईकोर्ट (Gauhati High Court) ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के अध्यक्ष के रूप में जस्टिस रंजीत वसंतराव मोरे की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर भारत सरकार से जवाब मांगा है।सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (गुवाहाटी बेंच) बार एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर जस्टिस माइकल जोथनखुमा की बेंच ने यह आदेश जारी किया।याचिका में कहा गया है कि जस्टिस मोरे की केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी) के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति इस आधार पर अवैध है कि न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम, 2021 की...

God Does Not Recognize Any Community, Temple Shall Not Be A Place For Perpetuating Communal Separation Leading To Discrimination
उचित इलाज के लिए मरीज को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने में अस्पताल की ओर से की गई देरी लापरवाही के बराबर: मद्रास हाईकोर्ट ने पांच लाख रुपये मुआवजे का आदेश दिया

मद्रास हाईकोर्ट ने एक युवा मां को 5 लाख रुपये एकमुश्त मुआवजा देने का आदेश दिया है, जिसकी एक सरकारी अस्पताल की ओर से एक बेहतर सुविधा में स्थानांतरित करने में देरी के कारण तीन सर्जर‌ियां करनी पड़ी, और वह नौ महीने तक अपने नवजात बच्चे से दूर रही।जस्टिस आनंद वेंकटेश की पीठ ने कहा,"तीसरे प्रतिवादी अस्पताल को, यह महसूस करने के बाद कि याचिकाकर्ता को अस्पताल में पर्याप्त देखभाल नहीं दी जा सकती है, याचिकाकर्ता को तुरंत कोयंबटूर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्थानांतरित कर देना चाहिए था। यदि ऐसा नहीं किया गया...

जनहित याचिका सेवा मामलों में सुनवाई योग्य नहीं: हाईकोर्ट ने राज्य नर्सिंग शिक्षा विनियमन प्राधिकरण के लिए विशेष अधिकारी की नियुक्ति के लिए चुनौती खारिज की
जनहित याचिका सेवा मामलों में सुनवाई योग्य नहीं: हाईकोर्ट ने राज्य नर्सिंग शिक्षा विनियमन प्राधिकरण के लिए विशेष अधिकारी की नियुक्ति के लिए चुनौती खारिज की

कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलवार को पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती घोटाले में मुख्य आरोपी दिव्या राजेश हागरागी द्वारा दायर जनहित याचिका खारिज कर दी। इस याचिका में कर्नाटक नर्सिंग और पैरामेडिकल विज्ञान शिक्षा (विनियमन) प्राधिकरण के लिए विशेष अधिकारी के रूप में डॉ. एन रामकृष्ण रेड्डी की नियुक्ति पर सवाल उठाया गया।याचिकाकर्ता ने खुद को कर्नाटक नर्सिंग काउंसिल का नामांकित सदस्य होने और नर्सों और पैरामेडिक्स की शिक्षा के उत्थान और कल्याण के लिए काम करने का दावा करते हुए 9 अगस्त, 2016 के आदेश को रद्द करने के...

हाईकोर्ट ने जिला उत्तरकाशी के उप-नियमों के तहत गंगा के किनारे से 500 मीटर के भीतर मांस बेचने पर रोक लगाने को कहा
हाईकोर्ट ने जिला उत्तरकाशी के उप-नियमों के तहत गंगा के किनारे से 500 मीटर के भीतर मांस बेचने पर रोक लगाने को कहा

उत्तराखंड हाईकोर्ट (Uttarakhand High Court) ने जिला पंचायत उत्तरकाशी के उप-नियम के साथ सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि गंगा नदी (Ganga) के किनारे से 500 मीटर के भीतर जानवरों को काटने और मांस बेचने की किसी भी दुकान को अनुमति नहीं दी जाएगी।जस्टिस संजय कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि उत्तराखंड की "विशेष स्थिति" और जिला उत्तरकाशी से निकलने वाली गंगा नदी और उत्तराखंड की अधिकांश आबादी द्वारा गंगा नदी से जुड़ी पवित्रता को ध्यान में रखते हुए जिला पंचायत द्वारा लिया गया निर्णय उक्त उप-नियम बनाकर भारत के...

सभी को-ऑनर्स में से एक ऑनर अन्य सभी को-ऑनर्स के एजेंट के रूप में भूमि पर कब्ज़ा मांग सकता है : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
सभी को-ऑनर्स में से एक ऑनर अन्य सभी को-ऑनर्स के एजेंट के रूप में भूमि पर कब्ज़ा मांग सकता है : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में दोहराया कि को-ऑनर्स में से कोई भी एक ऑनर पूरी संयुक्त भूमि पर कब्जा मांग सकता है।जस्टिस मंजरी नेहरू कौल की पीठ ने आगे कहा कि ऐसा को-ऑनर अपनी ओर से अपने अधिकार में और अन्य को-ऑनर्स के एजेंट के रूप में पूरी संयुक्त भूमि पर कब्जा मांग सकता है।कोर्ट ने मामले में इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए मेसर्स इंडिया अम्ब्रेला मैन्युफैक्चरिंग कंपनी बनाम भारत भगबंदी अग्रवाल (डी) एलआर द्वारा: 2004 (1) आरसीआर (सिविल) 686 और मोहिंदर प्रसाद जैन बनाम मनोहर लाल जैन: 2006(2)...

केरल हाईकोर्ट ने संविधान पर टिप्पणी करने वाले विधायक साजी चेरियन को अयोग्य घोषित करने की मांग वाली याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा
केरल हाईकोर्ट ने संविधान पर टिप्पणी करने वाले विधायक साजी चेरियन को अयोग्य घोषित करने की मांग वाली याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा

केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें माकपा विधायक और पूर्व मंत्री साजी चेरियन को विधायिकी के लिए अयोग्य घोषित करने की मांग की गई थी। चेरियन के खिलाफ यह याचिका संविधान पर की गई उनकी कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर दायर की गई है। उनकी इस टिप्पणी ने राज्य भर में विवाद छिड़ दिया था।चीफ जस्टिस एस. मणिकुमार और जस्टिस शाजी पी. शैली की खंडपीठ ने मामले में अपना आदेश सुरक्षित रखने से पहले पक्षकारों को सुना।पिछले हफ्ते जब मामला उठाया गया था तो न्यायालय ने प्रथम दृष्टया...

अनुबंध अधिनियम की धारा 31 के तहत आकस्मिक अनुबंध का अस्तित्व एक विवाद है, जिसे मध्यस्थता के लिए संदर्भित किया जाएगा: तेलंगाना हाईकोर्ट
अनुबंध अधिनियम की धारा 31 के तहत आकस्मिक अनुबंध का अस्तित्व एक विवाद है, जिसे मध्यस्थता के लिए संदर्भित किया जाएगा: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि मध्यस्थता अधिनियम की धारा 11 के तहत न्यायालयों के सीमित क्षेत्राधिकार में "आकस्मिक अनुबंध" के अस्तित्व का निर्णय नहीं किया जा सकता है।ज‌स्टिस के लक्ष्मण ने विद्या ड्रोलिया बनाम दुर्गा ट्रेडिंग कॉरपोरेशन (2021) में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा करते हुए कहा कि मध्यस्थता अधिनियम की धारा 11 के तहत न्यायालयों द्वारा हस्तक्षेप की गुंजाइश बेहद सीमित है।उन्होंने कहा, "अदालत को एक मामले का उल्लेख करना चाहिए यदि मध्यस्थता समझौते की वैधता को प्रथम दृष्टया आधार पर...

कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अंतिम संस्कार के लिए एडवोकेट के लावारिस शव को बार एसोसिएशन को सौंपने का निर्देश दिया

कलकत्ता हाईकोर्ट ने वकील के लावारिस शव का अंतिम संस्कार करने के लिए हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को सौंपने की मांग वाली जनहित याचिका को अनुमति दी।चीफ जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और जस्टिस राजर्षि भारद्वाज की खंडपीठ ने राज्य के अधिकारियों को "मृतक कौशिक डे के शव को जनहित याचिका के याचिकाकर्ता या कोलकाता बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष कल्लोल मंडल या बार एसोसिएशन के सचिव विश्वब्रत बसु मल्लिक को बिना किसी अनावश्यक देरी के नियमानुसार उचित औपचारिकताएं पूरी कर सौंपने का निर्देश दिया।"यह सूचित किए जाने पर कि शव का...

Consider The Establishment Of The State Commission For Protection Of Child Rights In The UT Of J&K
अपराध में संलिप्तता के विशिष्ट उदाहरणों के अभाव में पति के रिश्तेदारों को वैवाहिक विवादों में नहीं घसीटा जा सकता: जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट

जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने सोमवार को एक फैसले में कहा कि वैवाहिक विवादों और दहेज हत्या से संबंधित अपराधों में पति के रिश्तेदारों को सर्वव्यापी आरोपों के आधार पर तब तक नहीं फंसाया जाना चाहिए जब तक कि अपराध में उनकी संलिप्तता के विशिष्ट उदाहरण नहीं दिए जाते।जस्टिस संजय धर की पीठ सामूहिक रूप से आईपीसी की धारा 498 ए और 406 के तहत कथित अपराधों के लिए एफआईआर रद्द करने के लिए अदालत द्वारा सीआरपीसी की धारा 482 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।एक...

दिल्ली हाईकोर्ट
हमला और आपराधिक बल: दिल्ली हाईकोर्ट ने समझौते के बाद पड़ोसियों द्वारा दर्ज कराई गई क्रॉस एफआईआर रद्द की

दिल्ली हाईकोर्ट ने दो पक्षकारों द्वारा समझौते पर पहुंचने के बाद उनके बीच लड़ाई में शामिल महिलाओं का शील भंग करने के इरादे से हमला करने और आपराधिक बल का उपयोग करने का आरोप लगाते हुए पड़ोसियों द्वारा दर्ज की गई दो क्रॉस एफआईआर को रद्द कर दिया।जस्टिस जसमीत सिंह के समक्ष सुनवाई के दौरान पक्षकारों ने वचन पत्र दिया कि दोनों पक्षकार मिलकर फतेहपुर बेरी गांव में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाएंगे। बेंच ने पक्षकारों को निर्देश दिया कि वे वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करने के साथ साथ कम से कम दस साल की...

मैंने रात के अंधेरे में सुबह चार बजे कार्यभार संभाला था, मैं दिन के उजाले में जा रहा हूं: NALSAR वाइस चांसलर प्रो. फैजान मुस्तफा
"मैंने रात के अंधेरे में सुबह चार बजे कार्यभार संभाला था, मैं दिन के उजाले में जा रहा हूं": NALSAR वाइस चांसलर प्रो. फैजान मुस्तफा

नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड (NALSAR) लॉ यूनिवर्सिटी, हैदराबाद के 10 साल वाइस चासंलर रहे रिसर्च प्रोफेसर फैजान मुस्तफा को स्टूडेंट्स और फैकल्टी स्टाफ द्वारा गर्मजोशी से विदाई दी गई।स्टूडेंट रिप्रजेंटेटिव ने NALSAR को हाई लॉ यूनिवर्सिटी बनाने के लिए प्रो. मुस्तफा के समर्थन और प्रयास के लिए उनका हार्दिक आभार व्यक्त किया।प्रो. मुस्तफा ने 2012 में NALSAR में अपनी नियुक्ति के आगमन के समय को याद करते हुए टिप्पणी की,"मैंने रात के अंधेरे में सुबह चार बजे पदभार संभाला, मैं दिन के उजाले में जा रहा...

दिल्ली हाईकोर्ट
अनुच्छेद 226 | न्यायालय पहले से ही विभागीय अधिकारियों द्वारा विचार किए गए साक्ष्य की फिर से सराहना नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि वह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 या 227 के तहत अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए, विभागीय पूछताछ के मामलों में, सबूतों की फिर से सराहना नहीं कर सकता है, जिस पर पहले से ही विभागीय अधिकारियों द्वारा उचित रूप से विचार किया जा चुका है।जस्टिस चंद्रधारी सिंह की पीठ ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में सजा की आनुपातिकता पर फैसला करना हाईकोर्ट पर निर्भर नहीं करता।कोर्ट ने यह देखा,"यह इस न्यायालय के लिए खुला नहीं है कि वह भारत के संविधान के अनुच्छेद 226/227 के तहत अपने अधिकार...

बाबरी विध्वंस मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीआई और राज्य सरकार को बरी करने के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर आपत्ति दर्ज करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया
बाबरी विध्वंस मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीआई और राज्य सरकार को बरी करने के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर आपत्ति दर्ज करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को सीबीआई और राज्य सरकार को लखनऊ में विशेष सीबीआई अदालत के आदेश के खिलाफ दायर आपराधिक अपील पर अपनी आपत्ति दर्ज करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया। इस अपील में सभी 32 व्यक्तियों को 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस की आपराधिक साजिश रचने के आरोप से बरी किया था।आपराधिक पुनर्विचार याचिका के रूप में मूल में 2021 में दायर की गई याचिका को 18 जुलाई, 2022 को जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की पीठ द्वारा आपराधिक अपील के रूप में मानने का निर्देश दिया गया।विशेष सीबीआई न्यायाधीश एस के...

[दिल्ली दंगे] अभियुक्तों द्वारा दिए गए भाषणों का सार मुस्लिम आबादी में भय की भावना पैदा करना था: हाईकोर्ट में अभियोजन पक्ष का तर्क
[दिल्ली दंगे] अभियुक्तों द्वारा दिए गए भाषणों का सार मुस्लिम आबादी में भय की भावना पैदा करना था: हाईकोर्ट में अभियोजन पक्ष का तर्क

दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष दिल्ली दंगों के बड़े षड्यंत्र मामले में स्टूडेंट एक्टिविस्ट उमर खालिद की जमानत याचिका का विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष ने सोमवार को प्रस्तुत किया कि एफआईआर में विभिन्न आरोपी व्यक्तियों द्वारा दिए गए भाषणों में एक 'सामान्य कारक' था, जिसका सार देश की मुस्लिम आबादी में भय की भावना पैदा करना था।दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने विशेष रूप से उमर खालिद, शरजील इमाम और खालिद सैफी द्वारा दिए गए भाषणों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि वे सभी 2020 के दंगों...

एकनाथ शिंदे सरकार एमवीए सरकार द्वारा लिए गए वैध फैसलों को रद्द नहीं कर सकती: बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका
'एकनाथ शिंदे सरकार एमवीए सरकार द्वारा लिए गए वैध फैसलों को रद्द नहीं कर सकती': बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका

बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कथित मनमाना और सैकड़ों विकास परियोजनाओं, कल्याणकारी योजनाओं, नीतिगत फैसलों को रोकने और पिछली महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार द्वारा नियुक्त समिति प्रमुखों को हटाने के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई है।याचिकाकर्ता सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी किशोर गजभिये, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष जगन्नाथ अभियानकर और अन्य विशेष रूप से सामाजिक न्याय और विशेष सहायता विभाग, जनजातीय विकास विभाग और पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों...

[मोटर दुर्घटना में मौत] दावेदार को पैरेंटल कंसोर्टियम के तहत मुआवजा नहीं दिया जा सकता क्योंकि वह बच्चा नहीं है: तेलंगाना हाईकोर्ट
[मोटर दुर्घटना में मौत] दावेदार को पैरेंटल कंसोर्टियम के तहत मुआवजा नहीं दिया जा सकता क्योंकि वह "बच्चा" नहीं है: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट (Telangana High Court) ने हाल ही में एक मोटर दुर्घटना मृत्यु (Motor Accident Death) मामले में एक 50 वर्षीय दावेदार को पैरेंटल कंसोर्टियम के प्रमुख के तहत मुआवजे की अनुमति नहीं दी, यह कहते हुए कि वह एक "बच्चा" नहीं है।पूरा मामलामोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के आदेश से व्यथित होकर मुआवजे में वृद्धि के लिए दावेदार द्वारा अपील दायर की गई थी। ट्रिब्यूनल ने 1,96,000 रुपये की राशि प्रदान की थी, लेकिन दावेदार ने 6,00,000 रुपए का दावा किया था।मृतक दावेदार की मां थी। दावा याचिका में यह...