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दिल्ली हाईकोर्ट ने गिरफ्तार आप नेता सत्येंद्र जैन को अस्वस्थ दिमाग का व्यक्ति घोषित करने की मांग वाली याचिका में आदेश सुरक्षित रखा
दिल्ली हाईकोर्ट ने गिरफ्तार आप नेता सत्येंद्र जैन को 'अस्वस्थ दिमाग का व्यक्ति' घोषित करने की मांग वाली याचिका में आदेश सुरक्षित रखा

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को उस जनहित याचिका में आदेश सुरक्षित रख लिया, जिसमें आप नेता सत्येंद्र जैन को 'विकृत व्यक्ति' घोषित करने की मांग की गई, जिसके आधार पर उन्हेंदिल्ली विधानसभा से अयोग्य घोषित करने की मांग की गई है।जैन वर्तमान में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जांच किए जा रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में न्यायिक हिरासत में हैं।मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने आशीष कुमार श्रीवास्तव द्वारा दायर याचिका में आदेश सुरक्षित रख लिया। याचिकाकर्ता ने सामाजिक...

सबूत का बोझ कभी नहीं बदलता, जबकि सबूत के मूल्यांकन में सबूत का दायित्व लगातार बदलता रहता है: त्रिपुरा हाईकोर्ट
सबूत का बोझ कभी नहीं बदलता, जबकि सबूत के मूल्यांकन में 'सबूत का दायित्व' लगातार बदलता रहता है: त्रिपुरा हाईकोर्ट

त्रिपुरा हाईकोर्ट ने हाल ही में 'सबूत के बोझ' (Proof of burden) और 'सबूत के दायित्व' (Onus of proof) के बीच अंतर समझाया। जस्टिस टी अमरनाथ गौड़ ने कहा कि सबूत का बोझ एक ऐसे व्यक्ति पर होता है, जिसे किसी विशेष तथ्य को साबित करना होता है और यह कभी नहीं बदलता है।पीठ ने कहा कि सबूतों के मूल्यांकन में 'सबूत का दायित्व' बदल जाता है और इस तरह के दाय‌ित्व का स्थानांतरण एक सतत प्रक्रिया है।कोर्ट ने यह टिप्पणी संपत्ति विवाद के संबंध में दायर दूसरी अपील में की है। मूल वादी, यहां प्रतिवादी ने, क्रमशः आवंटन...

झारखंड हाईकोर्ट
अनुकंपा नियुक्त‌ि से वंचित करने का पैमाना जेंडर नहीं: झारखंड हाईकोर्ट ने मृतक कर्मचारी की विवाहित बेटी को राहत दी

झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मृतक कर्मचारी की विवाहित बेटी को राहत दी, जिसे झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड ने अनुकंपा नियुक्ति से वंचित कर दिया था। जस्टिस एसएन पाठक ने कहा कि यह मामला एक उदाहरण है, जहां अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदक के साथ लिंग के आधार पर "भेदभाव" किया गया था। याचिकाकर्ता ने प्रस्तुत किया कि उसके दावे को खारिज करने वाला आक्षेपित आदेश लैंगिक पूर्वाग्रह से ग्रस्त है, क्योंकि यदि मृतक कर्मचारी का बेटा अनुकंपा के आधार पर रोजगार के लिए विचार क्षेत्र में आता है तो इसका कोई कारण...

अनुच्छेद 226 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते समय कानूनी उपचारों को लागू करने में अस्पष्टीकृत और अत्यधिक देरी प्रासंगिक विचार है: झारखंड हाईकोर्ट
अनुच्छेद 226 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते समय कानूनी उपचारों को लागू करने में अस्पष्टीकृत और अत्यधिक देरी प्रासंगिक विचार है: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि पुनर्विचार के वैधानिक उपाय पर परिसीमा अवधि से रोक लगाने को बरकरार रखा जाता है तो बिना किसी स्पष्टीकरण के रिट कार्यवाही में देरी को नजरअंदाज करना हाईकोर्ट को संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत प्राप्त शक्ति को उसके दायरे से खींचने के समान होगा।जस्टिस अनुभा रावत चौधरी ने कहा:"इस न्यायालय का सुविचारित विचार है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत विवेकाधीन शक्तियों का प्रयोग करने के लिए वैधानिक उपायों को लागू करने वाले वैधानिक अधिकारियों से संपर्क करने में...

झारखंड हाईकोर्ट
दीवानी मामला और आपराधिक कार्यवाही एक साथ तभी शुरू की जा सकती है जब "आपराधिकता" शामिल हो: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने दोहराया कि दीवानी मामले और आपराधिक कार्यवाही दोनों एक साथ इस शर्त के साथ शुरू किया जा सकता है कि आरोपों में "आपराधिकता" की भावना शामिल हो।हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी के कथित अपराध के लिए खारिज करने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। उक्त मामला तथ्यों के एक ही सेट पर पैसे की वसूली के लिए दायर किया गया है।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी याचिका की अनुमति देते हुए कहा:"इस तथ्य के संबंध में कोई विवाद नहीं है कि यदि आपराधिकता शामिल है तो दीवानी मामला और आपराधिक कार्यवाही एक साथ चल...

सहमति से संबंध की विफलता आईपीसी की 376 (2) (n) के तहत बलात्कार के अपराध के लिए एफआईआर दर्ज करने का आधार नहीं हो सकता: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
सहमति से संबंध की विफलता आईपीसी की 376 (2) (n) के तहत बलात्कार के अपराध के लिए एफआईआर दर्ज करने का आधार नहीं हो सकता: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट (Andhra Pradesh High Court) के जस्टिस रवि चीमालापति की सिंगल जज की पीठ ने कहा कि सहमति से संबंध की विफलता भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (2) (n) के तहत बलात्कार (Rape Case) के अपराध के लिए एफआईआर दर्ज करने का आधार नहीं हो सकता है।आईपीसी की धारा 376(2)(एन), 417, 420, 323, 384, 506 के साथ 109 के तहत दंडनीय अपराधों के आरोपी याचिकाकर्ता ने नियमित जमानत मांगी थी।शिकायतकर्ता ने कहा कि वह और याचिकाकर्ता एक रिश्ते में थे।बाद में, शिकायतकर्ता से शादी करने का वादा करते हुए, उसे अपने...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
"अविश्वसनीय है कि व्यक्ति परिवार के सदस्यों के साथ शादी का प्रस्ताव लेकर पीड़िता के घर गया और उसके साथ बलात्कार किया": मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने केस रद्द किया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (इंदौर पीठ) ने हाल ही में पीड़िता द्वारा आरोपी के खिलाफ दर्ज कथित रेप केस (Rape Case) को खारिज कर दिया कि उसने उससे शादी करने का झूठा वादा करके उसके साथ शारीरिक संबंध स्थापित किए।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की पीठ ने कहा कि भले ही यह मान लिया जाए कि आरोपी ने पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाए हैं, लेकिन यह नहीं कहा जा सकता है कि यह पीड़िता की इच्छा के विरुद्ध या उसकी सहमति के बिना था।कोर्ट ने आगे कहा कि यह अविश्वसनीय है कि आरोपी, जो अपनी मां, बहन और साले के साथ शादी के प्रस्ताव के...

Gujarat High Court
गुजरात हाईकोर्ट के समक्ष कार्यवाही में गुजराती भाषा के इस्तेमाल की अनुमति देने की मांग: जीएचसीएए ने राज्यपाल के समक्ष अभ्यावेदन पेश किया

गुजरात हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन (जीएचसीएए) ने गुजरात राज्य के राज्यपाल देवव्रत आचार्य के समक्ष एक अभ्यावेदन दिया है, जिसमें गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) के समक्ष अदालती कार्यवाही में भारत के संविधान के अनुच्छेद 348 (2) के तहत अंग्रेजी के अलावा गुजराती भाषा के इस्तेमाल की अनुमति देने के लिए उनके विशिष्ट प्राधिकरण की मांग की गई है।यह ध्यान दिया जा सकता है कि भारत के संविधान के तहत यह प्रावधान किसी राज्य के राज्यपाल को, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से, हिंदी भाषा, या राज्य के किसी भी...

नवाब सिराजुद्दौला के सम्मान में 2 जुलाई को सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की मांग, कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर
नवाब सिराजुद्दौला के सम्मान में 2 जुलाई को सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की मांग, कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर

बंगाल के अंतिम स्वतंत्र नवाब मिर्जा मुहम्मद सिराजुद्दौला की शहादत के सम्मान में 2 जुलाई (जिस दिन उनकी मृत्यु हुई) को सार्वजनिक अवकाश घोषित करने के लिए राज्य सरकार को निर्देश देने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) याचिका दायर की गई है। वकील सौगत बनर्जी के माध्यम से एक कौशिक घोष द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि सिराजुद्दौला उन कुछ भारतीय शासकों में से एक थे, जो शुरू से ही अंग्रेजों की मंशा जानते थे, जिसने उन्हें बंगाल में ब्रिटिश उपनिवेशवाद के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए...

भारत की तरह किसी अन्य देश की न्यायपालिका में जजों पर काम का इतना बोझ नहीं : कानून मंत्री किरेन रिजिजू
भारत की तरह किसी अन्य देश की न्यायपालिका में जजों पर काम का इतना बोझ नहीं : कानून मंत्री किरेन रिजिजू

केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री श्री किरेन रिजिजू को सुप्रीम कोर्ट परिसर में सोमवार को एससीबीए द्वारा आयोजित 75 वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में 'गेस्ट ऑफ ऑनर' के रूप में आमंत्रित किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कोई भी देश उन अद्वितीय समस्याओं का सामना नहीं कर सकता, जिनका भारत सामना कर रहा है, उन्होंने कहा कि राज्य के कामकाज पर व्यापक टिप्पणी करना आसान है, लेकिन राज्य के किसी एक अंग में एक पद धारण करना आसान नहीं है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि अब से, 2047 तक भारत 'अमृत कल' मनाएगा।...

उड़ीसा हाईकोर्ट ने राज्य बार काउंसिल को एनरॉलमेंट की अत्यधिक फीस को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया
उड़ीसा हाईकोर्ट ने राज्य बार काउंसिल को एनरॉलमेंट की 'अत्यधिक फीस' को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब दाखिल करने का 'अंतिम अवसर' दिया

उड़ीसा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ. एस. मुरलीधर और जस्टिस राधा कृष्ण पटनायक की खंडपीठ ने एडवोकेट विनायक सुबुद्धि की उस याचिका पर उड़ीसा राज्य बार काउंसिल ('ओएसबीसी') को अपना जवाब दाखिल करने के लिए अंतिम अवसर के तौर पर चार सप्ताह का समय दिया है, जिसमें उन्होंने 'स्टेट बार रोल' में एडवोकेट के रूप में लॉ ग्रेजुएट को नामांकित (एनरॉल) करने के लिए काउंसिल द्वारा 'अत्यधिक फीस' वसूली को चुनौती दी है। गौरतलब है कि ओएसबीसी सामान्य श्रेणी के 25 वर्ष की आयु से कम वाले विधि स्नातकों के एनरॉलमेंट के लिए लगभग...

आरोपों को तय करने के चरण में तथ्यों की गहराई से जांच करने की आवश्यकता नहीं: जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट
आरोपों को तय करने के चरण में तथ्यों की गहराई से जांच करने की आवश्यकता नहीं: जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी आरोपी के खिलाफ आरोप तय करने या बरी करने के मामले पर विचार करते समय, अदालत को तथ्यों की गहराई से जांच करने की आवश्यकता नहीं है।जस्टिस संजय धर ने कहा,"यह एक स्थापित कानून है कि किसी आरोपी के आरोप तय करने या आरोप मुक्त करने के मामले पर विचार करते समय, अदालत को तथ्यों की गहराई से जांच करने की आवश्यकता नहीं है। निचली अदालत के समक्ष उपलब्ध साक्ष्य और सामग्री को स्कैन और मूल्यांकन नहीं किया जाना चाहिए। इस तरह से जैसे कि अदालत को यह पता लगाना...

भारतीयों को स्वतंत्रता दिवस मनाने से मना नहीं कर सकते: मद्रास हाईकोर्ट ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के हिस्से के रूप में रेकला दौड़ के आयोजन की अनुमति दी
"भारतीयों को स्वतंत्रता दिवस मनाने से मना नहीं कर सकते": मद्रास हाईकोर्ट ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के हिस्से के रूप में 'रेकला' दौड़ के आयोजन की अनुमति दी

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में राज्य के इरोड जिले के भवानी शहर में 75 वें स्वतंत्रता दिवस समारोह और आदि मंदिर महोत्सव के संबंध में रेकला दौड़ आयोजित करने की अनुमति दी। जस्टिस टी. राजा और जस्टिस के. कुमारेश बाबू की पीठ ने कहा कि चूंकि रेकला दौड़ का आयोजन इरोड जिले के निवासियों द्वारा 75वें स्वतंत्रता दिवस के हिस्से के रूप में किया जाना है, इसलिए उनकी प्रार्थना को अस्वीकार करने से यह संदेश जाएगा कि भारतीयों को स्वतंत्रता दिवस भी मनाने से मना कर दिया गया है।उल्लेखनीय है कि रेकला दौड़ में दूर तक...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मप्र हाईकोर्ट ने सांसद/विधायकों को आजीवन पेंशन के लिए पांच साल कार्यकाल की अनिवार्यता संबंधी याचिका खारिज की

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सांसद/विधायकों की आजीवन पेंशन के लिए कम से कम पांच साल का कार्यकाल पूरा करने की पात्रता निर्धारित करने को लेकर भारत सरकार और मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश देने संबंधी एक जनहित याचिका (पीआईएल) हाल ही में खारिज कर दी। जस्टिस विवेक रसिया और जस्टिस अमर नाथ (केशरवानी) की खंडपीठ ने पेशे से वकील याचिकाकर्ता पर 10,000/- रुपये का जुर्माना भी लगाया और कहा कि याचिकाकर्ता ने इस विषय पर उचित शोध नहीं किया।संक्षेप में जनहित याचिकाकोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता पुरवा जैन ने दलील दी कि लोक...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
"गलत काम करने वालों को तुच्छ मुकदमे से लाभ नहीं मिलना चाहिए": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तथ्यों को छिपाने पर याचिकाकर्ता पर 25 हज़ार रुपए का जुर्माना लगाया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर देते हुए कि गलत काम करने वालों को तुच्छ मुकदमेबाजी से लाभ नहीं मिलना चाहिए, हाल ही में एक याचिकाकर्ता पर 25,000 / - रुपए का जुर्माना लगाया। इस याचिकाकर्ता ने अदालत से भौतिक तथ्यों को छुपाया कि उसने पहले दो अग्रिम जमानत आवेदन दायर किए थे और अदालत के आदेश का पालन नहीं किया था। जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस सरोज यादव की पीठ ने विकास कुमार उर्फ ​​विकास अग्रहरी (याचिकाकर्ता) पर जुर्माना लगाया , जिसने आईपीसी की धारा 417, 376, 504, 506 के तहत दर्ज एफआईआर रद्द करने की...

धर्म परिवर्तन के बाद माता-पिता की जाति/धर्म का लाभ उठाना दंडनीय: हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने धर्म की स्वतंत्रता संशोधन विधेयक 2022 पारित किया
धर्म परिवर्तन के बाद माता-पिता की जाति/धर्म का लाभ उठाना दंडनीय: हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने धर्म की स्वतंत्रता संशोधन विधेयक 2022 पारित किया

हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने शनिवार (12 अगस्त) को हिमाचल प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक, 2022 पारित किया, जो राज्य के 2019 के धर्मांतरण विरोधी कानून को और अधिक कठोर बनाने का प्रयास करता है। विधेयक अन्य बातों के साथ-साथ सामूहिक धर्मांतरण, विवाह के लिए धर्म छुपाना, धर्मांतरण के बाद भी माता-पिता की जाति/धर्म का लाभ लेने आदि को दंडित करता है। यह बिल किसी व्यक्ति के लिए जो अन्य धर्म में परिवर्तित होने की इच्छा रखता है, कम से कम एक महीने पहले जिला मजिस्ट्रेट या कार्यकारी मजिस्ट्रेट को यह घोषणा...