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ज्ञानवापी एएसआई सर्वे स्टे - इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 18 अक्टूबर तक एएसआई डीजी का व्यक्तिगत हलफनामा मांगा
इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद विवाद के संबंध में चल रही सुनवाई में हाईकोर्ट ने बुधवार को महानिदेशक, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई डीजी), नई दिल्ली को वाराणसी कोर्ट के एएसआई सर्वे के आदेश (जिस आदेश पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है) के मुद्दे पर 18 अक्टूबर तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने को कहा। जस्टिस प्रकाश पाडिया की पीठ ने आदेश दिया," चूंकि मामला राष्ट्रीय महत्व का है और तथ्य यह है कि मुकदमा 1991 से ट्रायल कोर्ट के समक्ष लंबित है, इस न्यायालय को उम्मीद और...
केंद्र ने भारत के लिए अगले अटॉर्नी जनरल के रूप में सीनियर एडवोकेट आर वेंकटरमणि की नियुक्ति की
केंद्र सरकार ने सीनियर एडवोकेट आर वेंकटरमणि को भारत का नया अटॉर्नी जनरल नियुक्त किया है। मौजूदा अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल का कार्यकाल 30 सितंबर को समाप्त हो रहा है। इस हफ्ते की शुरुआत में सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने केंद्र सरकार के अगले अटॉर्नी जनरल के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।
मृतक का पूर्व का बयान यदि मृत्यु के कारण से संबंधित हो तो यह साक्ष्य अधिनियम की धारा 32 (1) के तहत स्वीकार्य होगा, मौत का अनुमान होना जरूरी नहींः इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना है कि पीड़ित की मृत्यु होने की स्थिति में, उसके द्वारा किसी भी जीवित व्यक्ति को दिया गया बयान भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 32 (1) के तहत साक्ष्य में प्रासंगिक और स्वीकार्य हो जाता है यदि वह उसकी मृत्यु के कारण से संबंधित है। जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस उमेश चंद्र शर्मा की पीठ ने आगे स्पष्ट किया कि भारतीय कानून के तहत, यह आवश्यक नहीं है कि जिस व्यक्ति ने कोई घोषणा की है या बयान दिया है,वह वास्तव में उस हमले की उम्मीद कर रहा था जो उसे मार डालेगा। पीठ ने 2 लड़कों...
अस्पष्ट दलीलें, लगभग हर चुनाव याचिका में "कॉपी-पेस्ट" की जा सकती हैं: हाईकोर्ट ने इंदौर के सांसद शंकर लालवानी के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने हाल ही में आदेश VII नियम 11 सीपीसी के तहत एक आवेदन की अनुमति दी, जिससे विशिष्ट आरोप नहीं लगाने या कार्रवाई के वास्तविक कारण का प्रदर्शन न करने के लिए एक चुनाव याचिका को खारिज कर दिया।चुनाव याचिका में उठाई गई आपत्तियों को सामान्य मानते हुए जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने कहा-इस न्यायालय का सुविचारित मत है कि चुनाव याचिका का मसौदा इस तरह से तैयार किया गया है कि उसमें उठाई गई आपत्तियों को भारत में कहीं भी किसी अन्य संसदीय सीट के चुनाव पर सवाल उठाते हुए लगभग हर दूसरी...
गुजरात हाईकोर्ट ने तीस्ता सीतलवाड़ के साथ गिरफ्तार आरबी श्रीकुमार को अंतरिम जमानत दी
गुजरात हाईकोर्ट ने बुधवार को गुजरात के पूर्व पुलिस महानिदेशक आरबी श्रीकुमार को अंतरिम जमानत दे दी, जिन्हें गुजरात दंगों के बड़े षड्यंत्र मामले में उच्च पदाधिकारियों को फंसाने के लिए कथित तौर पर सबूत गढ़ने के आरोप में मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के साथ गिरफ्तार किया गया था। जस्टिस इलेश जे वोरा की एकल पीठ ने 15 नवंबर तक अंतरिम जमानत दी। आदेश में इस प्रकार कहा गया है:"संबंधित पक्षों के विद्वान वकीलों को सुनने के बाद और इस तथ्य पर विचार करते हुए कि आरोप पत्र संबंधित न्यायालय के समक्ष दायर...
कोर्ट एएंडसी एक्ट की धारा 34 के तहत ब्याज देकर मध्यस्थ अवॉर्ड को संशोधित नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा कि यद्यपि दावेदार अपने पक्ष में जारी काउंट-गारंटी की राशि पर पूर्व-मध्यस्थता ब्याज (pre-arbitration interest) का हकदार है। एएंडसी एक्ट, 1996 की धारा 34 के तहत न्यायिक पुनर्विचार के सीमित दायरे को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि वह दावेदार को ब्याज नहीं दे सकता क्योंकि यह अवॉर्ड में संशोधन के समान होगा।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ मामलों में मध्यस्थ अवार्डों को संशोधित करके संबंधित पक्षों को ब्याज...
पीड़ित को गंभीर और जघन्य प्रकृति के गैर-शमनीय अपराध के मामले छोड़ने का कोई अधिकार नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि समाज को बुरी तरह प्रभावित करने वाले गंभीर और जघन्य प्रकृति के गैर-शमनीय अपराध (Non-Compoundable Offence) के मामले को छोड़ने का पीड़ित को कानूनन कोई अधिकार नहीं है। जस्टिस समीर जैन ने कहा कि ऐसे मामले राज्य और आरोपी के बीच के मामले बन जाते हैं और कानून व्यवस्था सुनिश्चित करना और ऐसे मामलों में अपराधी पर मुकदमा चलाना राज्य का कर्तव्य है।संक्षेप में मामलान्यायालय अभियुक्तों/आवेदकों द्वारा सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें...
अगर परिवार का कोई सदस्य आवेदन पर विचार करने से पहले सरकारी नौकरी हासिल कर लेता है तो अनुकंपा रोजगार का दावा समाप्त हो जाता है: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अगर परिवार का कोई सदस्य आवेदन पर विचार करने से पहले सरकारी नौकरी हासिल कर लेता है तो अनुकंपा रोजगार का दावा समाप्त हो जाता है।इस प्रकार, कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हटाने के सक्षम प्राधिकारी के आदेश को बरकरार रखा, जिसे उसके ससुर के निधन के बाद अनुकंपा के आधार पर नियुक्त किया गया था। कोर्ट ने देखा कि प्राधिकरण द्वारा आवेदन पर विचार करने से पहले ही उसके पति और उसके बहनोई दोनों ने उससे पहले सरकारी नौकरी हासिल कर ली थी।याचिकाकर्ता ने 7 जनवरी, 2019 को अनुकंपा...
[जेजे एक्ट] भारत के बाहर उच्च शिक्षा प्राप्त करने का कोई मौलिक या वैधानिक अधिकार नहीं, विदेश यात्रा के किशोरों के अधिकार में कटौती की जा सकती है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने माना कि विचाराधीन या किशोर जो कानून का उल्लंघन करता है, उसे विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का कोई मौलिक या वैधानिक अधिकार नहीं है।जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह पुरी ने अपने फैसले में यह भी कहा कि हालांकि विदेश यात्रा का अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न अंग होने के अलावा "मूल्यवान और बुनियादी अधिकार" है, लेकिन इसे किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, विशेष रूप से अधिनियम की धारा 90 और 91 के तहत "उचित, न्यायसंगत और निष्पक्ष तरीके से" कम किया...
मद्रास हाईकोर्ट ने आरएसएस मार्च के लिए अनुमति देने के आदेश के खिलाफ चुनौती पर सुनवाई से इनकार किया
मद्रास हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को दो अक्टूबर को पूरे तमिलनाडु में जुलूस निकालने की अनुमति देने के एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ अपील पर विचार करने से बुधवार को इनकार कर दिया।एक्टिंग चीफ जस्टिस टी राजा और जस्टिस डी कृष्णकुमार की पीठ के समक्ष एडवोकेट एनजीआर प्रसाद ने विदुथलाई चिरुथईगल काची (वीसीके) नेता और सांसद थिरुमावलन द्वारा एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई के लिए उल्लेख किया, जिसके द्वारा अदालत ने पुलिस अधिकारियों को आरएसएस को कुछ शर्तों के साथ...
अभिनेता एजाज खान प्रथम दृष्टया मादक पदार्थों की बरामदगी में शामिल: बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रतिबंधित पदार्थ के कम मात्रा में होने के बावजूद जमानत से इनकार किया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में बॉलीवुड अभिनेता एजाज खान की जमानत याचिका को अवैध ड्रग व्यापार मामले के कथित वित्तपोषण में खारिज कर दिया, जबकि उनके पास से थोड़ी मात्रा में प्रतिबंधित पदार्थ की बरामदगी के बावजूद, इस आधार पर कि साजिश में उनकी भूमिका गवाहों के बयानों और सह- दोषी है।जस्टिस भारती डांगरे ने आदेश में कहा,"इस प्रकार यह देखा जा सकता है कि हालांकि आवेदक से थोड़ी मात्रा में प्रतिबंधित पदार्थ की वसूली हुई है, वह सह-आरोपी से वाणिज्यिक मात्रा की वसूली में शामिल है, इसलिए एडवोकेट मानेशिंदे द्वारा...
कोई वैधानिक अधिकार नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एड-हॉक सर्विस की गणना करके परस्पर वरिष्ठता के पुनर्निर्धारण की मांग वाली जजों की याचिकाओं को खारिज किया
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में विभिन्न श्रेणियों के जजों की ओर से दायर एक याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें अन्य स्रोतों से नियुक्त जजों पर वरिष्ठता का दावा किया गया था।याचिका में जजों ने एड-हॉक सेवाओं की गणना करके उनकी परस्पर वरिष्ठता के पुनर्निर्धारण की मांग की थीं। अन्य रंगरूटों पर वरिष्ठता का दावा करने वाले याचिकाकर्ता तीन श्रेणियों से संबंधित थे: (ए) फास्ट-ट्रैक अदालतों के जज जो एड-हॉक पदों से नियमित सेवा में शामिल किए गए थे; (बी) वरिष्ठता के लिए त्वरित पदोन्नति की श्रेणी में आने...
आदिवासी महिलाएं और बच्चे एक्सपर्ट डॉक्टरों की कमी से प्रभावित : सरकारी अस्पतालों में 62% मेडिको वैकेंसी' पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा
बॉम्बे हाईकोर्ट को हाल ही में सूचित किया गया कि महाराष्ट्र मेडिकल एंड हेल्थ सर्विसेज में ग्रुप ए के 62% पद एमबीबीएस और बीएएमएस डॉक्टरों के पद खाली हैं। 1786 पदों में से 1112 रिक्त हैं।चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एम.एस. कार्णिक की खंडपीठ ने महाराष्ट्र के आदिवासी क्षेत्र में उचित मेडिकल देखभाल के अभाव में महिलाओं और बच्चों की मौत के संबंध में जनहित याचिका में इस पर ध्यान दिया।अदालत ने कहा,"...विशेषज्ञ डॉक्टरों और मेडिकल परिचारकों की सहायता के लिए उनकी कमी आदिवासी महिलाओं और बच्चों को...
निर्धारिती के परिसर से मिली वार्षिक रिपोर्ट और शेयर सर्टिफिकेट बरामद हुए दस्तावेज नहीं हैं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि वार्षिक रिपोर्ट की वसूली और निर्धारिती परिसर के शेयर सर्टिफिकेट को बरामद दस्तावेज नहीं माना जा सकता।जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने पाया कि शेयर पूंजी की वास्तविकता को सीआईटी (ए) और आईटीएटी दोनों ने स्वीकार कर लिया और जब्त की गई सामग्री और किए गए जोड़ के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है।अपीलकर्ता/विभाग ने कहा कि आईटीएटी ने यह मानते हुए गलती की है कि तलाशी में कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली। शेयर पूंजी और निवेशक कंपनियों को आवंटित प्रीमियम से...
खतरनाक स्टंट: मद्रास हाईकोर्ट ने बाइकर से ट्रॉमा वार्ड में मरीजों की मदद करने और लापरवाह ड्राइविंग के खिलाफ इंस्टाग्राम पर वीडियो अपलोड करने का निर्देश दिया
सड़क पर खतरनाक स्टंट करने के आरोपी 22 वर्षीय एक बाइकर को अग्रिम जमानत देते हुए, मद्रास हाईकोर्ट उसके इंस्टाग्राम अकाउंट पर लापरवाह ड्राइविंग के खिलाफ एक वीडियो अपलोड करने और तीन सप्ताह के लिए राजीव गांधी गवर्नमेंट जनरल हॉस्पिटल के ट्रॉमा वार्ड के ड्यूटी डॉक्टर के पास रिपोर्ट करने का निर्देश दिया। जस्टिस एडी जगदीश चंडीरा ने आरोपी को राजीव गांधी गवर्नमेंट जनरल हॉस्पिटल में ड्यूटी डॉक्टर को रिपोर्ट करने और ट्रॉमा वार्ड के वार्ड बॉयज को मंगलवार से शनिवार सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच तीन सप्ताह...
आरोपी के खिलाफ एफआईआर रद्द करने के बाद कोई पीएमएलए कार्यवाही नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने IHFL और उसके कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही रद्द की
दिल्ली हाईकोर्ट ने इंडियाबुल्स हाउसिंग एंड फाइनेंस लिमिटेड (IHFL) और उसके कर्मचारियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत कार्यवाही रद्द कर दी।जस्टिस अनीश दयाल और जस्टिस मुक्ता गुप्ता की खंडपीठ ने विजय मदनलाल चौधरी और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा किया, जहां सुप्रीम कोर्ट ने माना कि पीएमएलए के तहत अधिकारी किसी भी व्यक्ति के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के लिए इस धारणा पर कार्रवाई का सहारा नहीं ले सकते कि उनके द्वारा बरामद की गई संपत्ति अपराध की आय होनी...
केरल हाईकोर्ट ने 'कन्जेनिटल एड्रेनजल हाइपरप्लासिया' को दुर्लभ बीमारियों में शामिल करने के लिए स्वत: संज्ञान से जनहित याचिका शुरू की
केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को 'कन्जेनिटल एड्रेनल हाइपरप्लासिया' दुर्लभ बीमारियों के समूह में शामिल करने और रोगियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए स्वतः संज्ञान पर एक जनहित याचिका शुरू की। यह एक आनुवंशिक विकार है जो अधिवृक्क ग्रंथियों (Adrenal Glands) को प्रभावित करता है।चीफ जस्टिस एस मणिकुमार और जस्टिस शाजी पी चाली की खंडपीठ ने राज्य सरकार और उसके स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी किया और मामले को एक सप्ताह के बाद पोस्ट कर दिया।मामलातीन बच्चों की मां ने आर्थिक...
सीपीसी की धारा 92 के तहत आने वाले मुकदमे का फैसला ट्रायल कोर्ट के समक्ष किया जाना चाहिएः केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) की धारा 92 के तहत आने वाले मुकदमे का फैसला ट्रायल कोर्ट के समक्ष किया जाना चाहिए।जस्टिस ए बदरुद्दीन ने तर्क दिया कि सीपीसी की धारा 92 के तहत मुकदमा केवल अदालत की अनुमति से चलाया जा सकता है और यदि पक्षकार को मुकदमे को अंतिम रूप देने तक आरोपी बनाया जाता है और अगर अंततः यह पाया जाता है कि सूट को अनुमति की आवश्यकता है तो मुकदमे की पूरी कवायद व्यर्थ हो जाएगी, क्योंकि अनुमति के अभाव में वाद स्वयं वर्जित हो जाता है।यहां याचिकाकर्ता यह...
बेटी का पिता से पैसे की मांग करने का मतलब उनको आत्महत्या के लिए उकसाना नहींः बॉम्बे हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द की
बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने अपने पिता को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में एक महिला के खिलाफ दर्ज एफआईआर को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह संभावना नहीं है कि आरोपी महिला ने अपने पिता को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से उनसे पैसे की मांग की हो। अदालत ने कहा, ''हमारी राय है कि इस तरह की बार-बार मांग या मांगों में कथित वृद्धि से यह निष्कर्ष नहीं निकल सकता है कि प्रथम दृष्टया पिता को आत्महत्या करने के लिए प्रेरित करने के इरादे से मांग की जा रही थी।'' जस्टिस मनीष पिटाले और...
अगर ट्रायल कोर्ट का फैसला सूट संपत्ति के स्वामित्व पर स्पष्ट नहीं है तो अस्थायी निषेधाज्ञा अपीलीय न्यायालय द्वारा जारी रखी जा सकती है: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि यदि निचली अदालत ने मुकदमे की संपत्ति के कब्जे के संबंध में स्पष्ट निष्कर्ष नहीं दिया है तो अपीलीय अदालत के लिए यह बेहतर है कि वह अस्थायी निषेधाज्ञा का आदेश दे, यदि वह ट्रायल कोर्ट के सामने मुकदमे के निपटान तक लागू है।जस्टिस श्रीनिवास हरीश कुमार की सिंगल जज बेंच ने कहा,"कोई कठोर और तेज़ नियम नहीं है कि अपीलीय अदालत को अस्थायी निषेधाज्ञा के लिए आवेदन पर फैसला करते समय गवाहों के साक्ष्य और निचली अदालत द्वारा दिए गए निष्कर्षों का उल्लेख नहीं करना चाहिए। अगर अपीलीय अदालत को...









![[जेजे एक्ट] भारत के बाहर उच्च शिक्षा प्राप्त करने का कोई मौलिक या वैधानिक अधिकार नहीं, विदेश यात्रा के किशोरों के अधिकार में कटौती की जा सकती है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट [जेजे एक्ट] भारत के बाहर उच्च शिक्षा प्राप्त करने का कोई मौलिक या वैधानिक अधिकार नहीं, विदेश यात्रा के किशोरों के अधिकार में कटौती की जा सकती है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2022/09/28/500x300_437012-justicejasgurpreetsinghpuri.jpg)







