गुजरात हाईकोर्ट ने तीस्ता सीतलवाड़ के साथ गिरफ्तार आरबी श्रीकुमार को अंतरिम जमानत दी
Sharafat
28 Sept 2022 8:34 PM IST

गुजरात हाईकोर्ट ने बुधवार को गुजरात के पूर्व पुलिस महानिदेशक आरबी श्रीकुमार को अंतरिम जमानत दे दी, जिन्हें गुजरात दंगों के बड़े षड्यंत्र मामले में उच्च पदाधिकारियों को फंसाने के लिए कथित तौर पर सबूत गढ़ने के आरोप में मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के साथ गिरफ्तार किया गया था।
जस्टिस इलेश जे वोरा की एकल पीठ ने 15 नवंबर तक अंतरिम जमानत दी। आदेश में इस प्रकार कहा गया है:
"संबंधित पक्षों के विद्वान वकीलों को सुनने के बाद और इस तथ्य पर विचार करते हुए कि आरोप पत्र संबंधित न्यायालय के समक्ष दायर किया गया है, मैं आवेदक को अंतरिम जमानत पर देने का इच्छुक हूं और तदनुसार, आवेदक को सामान्य नियमों और शर्तों पर जेल प्राधिकरण के समक्ष 10,000 / - (दस हजार रुपये केवल) के व्यक्तिगत बांड को निष्पादित करने पर 15.11.2022 तक अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाएगा।
आवेदक को जेल से रिहा होने की तारीख से एक सप्ताह के भीतर अपना पासपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया जाता है। आवेदक को अंतरिम जमानत अवधि पूरी होने पर जेल प्राधिकरण के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा।"
एडवोकेट वाईएन रवानी ने कल्पेश शास्त्री की सहायता से श्रीकुमार का प्रतिनिधित्व किया और मितेश अमीन एपीपी राज्य के लिए पेश हुए।
श्रीकुमार को 25 जून को गुजरात एटीएस ने मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के साथ गिरफ्तार किया था। इसके एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने जकिया जाफरी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें गुजरात दंगों के पीछे बड़ी साजिश की जांच की मांग की गई थी।
गुजरात दंगों में बड़ी साजिश का आरोप लगाने वाली याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि याचिका गलत उद्देश्यों से दायर की गई थी। कोर्ट ने आगे कहा कि कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि गुजरात और अन्य के असंतुष्ट अधिकारियों का एक "सामंजस्यपूर्ण प्रयास" झूठे सनसनीखेज खुलासे करना था, जिसे गुजरात एसआईटी ने "उजागर" किया।
सुप्रीम कोर्ट ने 2 सितंबर को तीस्ता सीतलवाड़ को तब तक के लिए अंतरिम जमानत दे दी थी , जब तक कि गुजरात हाईकोर्ट ने उनकी जमानत अर्जी पर फैसला नहीं हो जाता।
श्रीकुमार 2002 के दंगों के समय एडिशनल पुलिस डायरेक्टर जनरल थे। उन्होंने गुजरात दंगों के संबंध में नानावती-मेहता आयोग के समक्ष प्रशासन के खिलाफ गवाही दी थी।
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