मुख्य सुर्खियां
दिल्ली वक्फ बोर्ड मामला : अदालत ने सीबीआई मामले में आम आदमी पार्टी विधायक अमानतुल्ला खान और 10 अन्य को जमानत दी
दिल्ली वक्फ बोर्ड में कथित अवैध नियुक्तियों की जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज एक मामले में दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्ला खान और 10 अन्य को जमानत दे दी। खान वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं। राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश एमके नागपाल ने कहा कि यह एक उपयुक्त मामला है, जहां आरोपी व्यक्तियों को मुकदमे के लिए जमानत दी जानी चाहिए और उनमें से किसी को हिरासत में लेने का कोई कारण या आधार नहीं है।सीबीआई ने आरोप लगाया कि सरकारी खजाने को...
कलेक्टर अन्य दावेदारों की अनुपस्थिति में भी अधिग्रहण के तहत भूमि में हिस्से की सीमा तक मुआवजा दे सकते हैं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अधिग्रहण के तहत संपत्ति में हिस्सेदार व्यक्तियों के पक्ष में कलेक्टर उनके हिस्से की सीमा तक मुआवजा अवॉर्ड पारित कर सकता है, भले ही हिस्से के दावेदार अन्य इच्छुक व्यक्ति कलेक्टर के सामने पेश ना हों।जस्टिस आरडी धानुका और जस्टिस एमएम साथाये की खंडपीठ ने उचित मुआवजा अधिनियम के तहत बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए कुछ भूमि के अधिग्रहण के मुआवजे के फैसले को बरकरार रखा। अवॉर्ड को इस आधार पर चुनौती दी गई थी कि यह याचिकाकर्ताओं की सहमति के बिना पारित किया गया था।कोर्ट ने...
एक सिटिंग जज के समक्ष प्रतिदिन सूचीबद्ध मामलों की सीमित संख्या को चुनौती देते हुए एडवोकेट ने केरल हाईकोर्ट का रुख किया
बार काउंसिल ऑफ केरल में इनरोल एक एडवोकेट ने केरल हाईकोर्ट में चुनौती दी है कि केरल हाईकोर्ट के एक सिटिंग जज के समक्ष एक दिन में केवल 20 मामलों की सूचीबद्ध होते हैं, जबकि अन्य न्यायाधीशों के पास प्रतिदिन 100 या अधिक मामले सूचीबद्ध होते हैं। एडवोकेट यशवंत शेनॉय ने एक रिट याचिका दायर की है जिसमें कहा गया है कि 'चीफ जस्टिस, मास्टर ऑफ रोस्टर होने के नाते मामलों की लिस्टिंग पर रजिस्ट्री को निर्देश देने की शक्ति रखते हैं और कोई भी जज इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता और रजिस्ट्री को उस सूची में कटौती करने...
दिल्ली हाईकोर्ट ने हिंदी भाषा में अनुवादित जजमेंट आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध करवाए
दिल्ली हाईकोर्ट ने वादियों की समझ के लिए इस वर्ष पारित कुछ निर्णयों का हिंदी संस्करण प्रकाशित किया है। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की खंडपीठ ने 01 जनवरी से 28 फरवरी, 2023 तक हिंदी भाषा में सात निर्णय उपलब्ध कराए हैं।अनुवाद एआई टूल "सुप्रीम कोर्ट विधिक अनुवाद सॉफ्टवेयर (“Supreme Court Vidhik Anuvaad Software (SUVAS)”) के माध्यम से किया गया है। यह टूल न्यायपालिका के लिए डिजाइन किया गया है और अंग्रेजी दस्तावेजों, आदेशों या निर्णयों का नौ स्थानीय भाषाओं की लिपियों...
आदेश पांच, नियम 15 सीपीसी का सहारा लेने से पहले अपीलकर्ता को यह दिखाना होगा कि वह निवास पर नहीं था और किसी निश्चित अवधि में उसके पाए जाने की संभावना भी नहीं थी: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि सीपीसी के आदेश पांच नियम 15 (सम्मन जारी करना) में निहित प्रावधानों का उपयोग करने से पहले यह दिखाना होगा कि जब सम्मन दिया जा रहा था तब प्रतिवादी अपने निवास पर नहीं थी और एक उचित अवधि के भीतर उसके आवास पर पाए जाने की कोई संभावना भी नहीं थी।जस्टिस संजय धर की पीठ ने कहा, यह भी दिखाया जाना चाहिए कि प्रतिवादी के पास कोई ऐसा एजेंट नहीं था, जिसे उसकी ओर से सम्मन को स्वीकार करने के लिए अधिकृत किया गया था।उन्होंने कहा, जब उपरोक्त शर्तों का अनुपालन...
कर्नाटक हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को मर्डर केस में नया फैसला सुनाने का आदेश दिया, कहा- सबूतों को ध्यान में रखते हुए क्रॉस एक्जामिनेशन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि आपराधिक मामलों से निपटने वाली निचली अदालतों को समग्र रूप से सबूतों की सराहना करनी होगी और क्रॉस एग्जामिनेशन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।जस्टिस बी वीरप्पा और जस्टिस राजेश राय के की खंडपीठ ने हत्या के दोषी कट्टमने गणेशा और पीड़िता द्वारा उसी मामले में दायर अपीलों को स्वीकार कर लिया। जहां गणेश ने हत्या के मामले में उसे दोषी ठहराए जाने के आदेश को चुनौती दी, वहीं पीड़िता ने सह-आरोपी को बरी किए जाने को चुनौती दी।बेंच ने एग्जामिनेशन इन चीफ के साथ-साथ रिकॉर्ड में उपलब्ध...
जमानती अपराधों के मामले में जमानत पर रिहा आरोपी गैर-जमानती अपराधों को जोड़ने पर अग्रिम जमानत मांग सकता है: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने अभियुक्त को ऐसे अपराध के लिए जमानत दिए जाने की प्रक्रिया पर विचार करते हुए, जिसमें शुरू में केवल जमानती अपराध शामिल है, यह माना कि अभियुक्त दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 438 के तहत गैर-जमानती अपराध को जोड़ने के बाद अग्रिम जमानत की मांग कर सकता है।जस्टिस ए. बदरुद्दीन की एकल पीठ अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई कर रही थी, जहां शुरू में याचिकाकर्ताओं के खिलाफ दर्ज अपराध जमानती थे, लेकिन बाद में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 (हत्या का प्रयास) जोड़ी गई।अदालत ने प्रदीप...
मालेगांव कोर्ट ने सड़क दुर्घटना केस में मुस्लिम व्यक्ति को दिन में पांच बार नमाज पढ़ने और मस्जिद में पेड़ लगाने के आदेश दिए
मालेगांव कोर्ट ने इस हफ्ते की शुरुआत में एक मुस्लिम व्यक्ति को 21 दिनों तक दिन में पांच बार नमाज अदा करने और मस्जिद में दो।पेड़ लगाने का आदेश दिया। इस व्यक्ति को सड़क दुर्घटना विवाद मामले (आईपीसी की धारा 323) में दोषी माना गया था।मजिस्ट्रेट तेजवंत सिंह संधू ने 27 फरवरी को आदेश पारित किया और पाया कि प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट के प्रावधानों ने मजिस्ट्रेटों को एक दोषी को चेतावनी या उचित चेतावनी के बाद रिहा करने की शक्ति प्रदान की है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह अपराध नहीं दोहराए।अदालत ने कहा...
राजस्थान हाईकोर्ट ने सहकर्मी की हत्या को लेकर वकीलों की हड़ताल पर स्वत: संज्ञान लिया
राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर में वकील की हत्या के विरोध में विभिन्न बार संघों द्वारा हड़ताल पर करने पर मंगलवार को स्वत: संज्ञान लिया।एक्टिंग चीफ जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस विजय बिश्नोई की खंडपीठ ने कहा कि किसी भी बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों सहित किसी भी व्यक्ति द्वारा हड़ताल और काम से दूर रहने का आह्वान कानून के अनुसार नहीं है और यह सुप्रीम कोर्ट का उल्लंघन है।पीठ ने इस मामले में उपस्थित एडवोकेट जनरल के प्रवेश में बाधा डालने के लिए बार संघों की भी निंदा की।पीठ ने यह भी चेतावनी...
उमेश पाल मर्डर - मुख्य आरोपी बार एसोसिएशन का सदस्य नहीं है, मीडिया भ्रामक समाचार फैला रहा है: इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने एक स्पष्टीकरण जारी किया है कि उमेश पाल मर्डर केस के मुख्य आरोपी सदाकत खान, जिसे यूपी पुलिस ने साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया है, एसोसिएशन का सदस्य नहीं है, जैसा कि मीडिया द्वारा दावा किया जा रहा है।दोहरे हत्याकांड में संलिप्त खान इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत करने वाले वकील होने के बारे में विभिन्न अखबारों और सोशल मीडिया में फैलाई जा रही भ्रामक खबरों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि ऐसा व्यक्ति (सदाकत खान) कभी भी एसोसिएशन के...
धर्म परिवर्तन| इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुआट्स वीसी और निदेशक को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया, कहा-'धर्मार्थ कार्यों के पीछे उनकी मंशा संदिग्ध'
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को सामूहिक धर्म परिवर्तन मामले में इलाहाबाद स्थित सैम हिगिनबॉटम यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज, जिसे पूर्व में इलाहाबाद कृषि संस्थान के रूप में जाना जाता है, के कुलपति (डॉ.) राजेंद्र बिहारी लाल और संस्थान के निदेशक विनोद बिहारी लाल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।यह देखते हुए कि वे प्रभावशाली व्यक्ति हैं और धर्मार्थ कार्यों के पीछे उनकी मंशा संदिग्ध लगती है, यह समाज के हाशिये के लोगों के हितों को प्रभावित कर रहा है, जस्टिस मंजू रानी चौहान की...
पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करें, दिल्ली हाईकोर्ट का पुलिस को निर्देश
दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाईकोर्ट को सूचित किया है कि वह परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी में पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की निविदा प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के लिए काम कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने परमवीर सिंह सैनी मामले में निर्देश दिया था कि सीसीटीवी कैमरे 18 महीने की स्टोरेज पीयरेड के साथ लगाए जाने चाहिए।दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने की मांग करने वाली याचिका में दायर एक स्टेटस...
दिल्ली हाईकोर्ट ने कानूनी वारिसों के वेरिफिकेशन के लिए डीएनए टेस्ट के लिए मृतक की कब्र खोदने के मोटर दुर्घटना ट्रिब्यूनल के आदेश पर रोक लगाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा पारित उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें निर्देश दिया गया कि मृत व्यक्ति की कब्र खोदी जाए, जिससे विभिन्न व्यक्तियों द्वारा उसके कानूनी उत्तराधिकारी होने का दावा करने वाले मुआवजे के दावे को सत्यापित करने के लिए डीएनए टेस्ट किया जा सके।जस्टिस रेखा पल्ली ने कहा कि ट्रिब्यूनल इस बात की सराहना करने में विफल रहा कि नियमित रूप से डीएनए टेस्ट का आदेश नहीं दिया जा सकता है। अपर्णा अजिंक्य फिरोदिया बनाम अजिंक्य अरुण फिरोदिया में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर...
सफल उम्मीदवार का किशोर रिकॉर्ड पुलिस कांस्टेबल के रूप में सेवा से इनकार करने के लिए आधार नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में नियोक्ता को कानून द्वारा दोषसिद्धि के फैसले का उल्लेख करने या उस पर विचार करने से प्रतिबंधित किया गया, जिससे सफल उम्मीदवार, जो किसी समय कानून के साथ संघर्ष करने वाला बच्चा था, उसको सरकारी सेवा के रोजगार से वंचित न किया जा सके।जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ हाईकोर्ट की एकल न्यायाधीश पीठ द्वारा पारित 2 फरवरी, 2022 के आदेश को चुनौती देने वाली राज्य द्वारा दायर इंट्रा कोर्ट रिट अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें पुलिस कांस्टेबल के पद के...
पटना हाईकोर्ट के कार्यरत न्यायाधीश, जस्टिस अनिल कुमार उपाध्याय का निधन
पटना हाईकोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश, जस्टिस अनिल कुमार उपाध्याय का बुधवार सुबह चेन्नई के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। जस्टिस उपाध्याय का गुर्दे से संबंधित मुद्दों और अन्य बीमारियों के लिए इलाज चल रहा था। जस्टिस उपाध्याय को मई 2017 में हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था और वह दिसंबर 2024 में सेवानिवृत्त होने वाले थे।जस्टिस उपाध्याय का जन्म 4 दिसंबर 1962 को हुआ था। उनके पिता स्वर्गीय विद्याधर उपाध्याय पटना हाईकोर्ट में अनुभाग अधिकारी के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने एलएलबी,...
PMLA अपीलीय अथॉरिटी के चेयरपर्सन और अन्य सदस्यों की नियुक्ति के लिए शीघ्र कदम उठाएं: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को आठ सप्ताह के भीतर धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) के तहत अपीलीय अथॉरिटी के चेयरपर्सन और अन्य सदस्यों की नियुक्ति के लिए शीघ्र कदम उठाने का निर्देश दिया।जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने इस तथ्य पर न्यायिक संज्ञान लेते हुए कि पीएमएलए के तहत "बड़ी मात्रा में मामले" लंबित हैं, कहा कि कई बेंचों के गठन की "सख्त आवश्यकता" है।अदालत मैसर्स गोल्ड क्रॉफ्ट प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 25 जनवरी को अथॉरिटी द्वारा पारित आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही...
वकील की अनुपस्थिति के कारण जमानत याचिका खारिज करने की अनुमति नहीं, अदालत आरोपी और मामले की सुनवाई के लिए एमिक्स नियुक्त कर सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा कि वकील की अनुपस्थिति के कारण मुकदमा न चलाने के लिए जमानत याचिकाओं को खारिज करना अस्वीकार्य है।न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों में आवेदक/कैदी का प्रतिनिधित्व करने के लिए एमिक्स क्यूरी नियुक्त किया जाना चाहिए और मामले की गुण-दोष के आधार पर सुनवाई की जानी चाहिए।जस्टिस अजय भनोट की पीठ ने यह भी कहा कि जमानत की सुनवाई में वकील की अनुपस्थिति कैदी-आवेदक को कार्यवाही के परिणाम को प्रभावित करने की सभी क्षमता से वंचित करती है, जहां उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 10 साल के बच्चे द्वारा पिता की कस्टडी में जाने से इनकार करने के बाद पुलिस स्टेशन में नाना को उसकी कस्टडी सौंपने के लिए कहा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 10 साल के बच्चे के अपने जैविक पिता के साथ जाने से इनकार करने के बाद पुलिस स्टेशन में बच्चे की कस्टडी को उसके नानी को सौंपने के लिए कहा।जस्टिस एएस गडकरी और जस्टिस पीडी नाइक की खंडपीठ ने मदद के लिए चिल्लाते बच्चे के वीडियो फुटेज को देखने से इनकार कर दिया, जिसमें वह अपने पिता से शारीरिक रूप से लड़ रहा था, जबकि पिता ने उसे जबरन हाईकोर्ट परिसर से दूर ले जाने का प्रयास किया। बच्चे की कस्टडी सौंपने के लिए नाना और मामा के खिलाफ पिता की ओर से दायर अवमानना याचिका से कोर्ट का पारा चढ़...
'किल मोदी' कमेंट : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता राजा पटेरिया को गिरफ्तारी के दो महीने बाद जमानत दी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित टिप्पणी के एक मामले में कांग्रेस नेता राजा पटेरिया को जमानत दे दी। जस्टिस संजय द्विवेदी ने कांग्रेस नेता द्वारा दायर दूसरी जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि,"पिछले आदेश और आवेदक को तीस दिनों की अवधि के बाद आवेदन को पुनर्जीवित करने के लिए दी गई स्वतंत्रता को ध्यान में रखते हुए मैं इस जमानत याचिका पर विचार करने और अनुमति देने के लिए इच्छुक हूं, इसलिए मामले के गुण-दोष पर कुछ भी टिप्पणी किए बिना, यह जमानत...
राजस्थान हाईकोर्ट ने भरणपोषण के आदेश को बरकरार रखा, कहा-पति ने व्यभिचार का आरोप के बावजूद वैवाहिक अधिकारों की बहाली की मांग की
राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में सीआरपीसी की धारा 125 के तहत पारित भरणपोषण आदेश को बरकरार रखा, जिसे इस आधार पर चुनौती दी गई थी कि पत्नी कथित रूप से व्यभिचार में रह रही थी।जस्टिस अशोक कुमार जैन की सिंगल जज बेंच ने कहा,"मौजूदा याचिकाकर्ता की ओर से पेश साक्ष्य यह निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त नहीं हैं कि प्रतिवादी नंबर 1 (पत्नी) व्यभिचार में रह रही थी। तथ्य यह है कि वर्तमान याचिकाकर्ता ने व्यभिचार के आरोप के बावजूद, प्रतिवादी-पत्नी के साथ रहने का प्रयास किया था, जिसके लिए उसने हिंदू विवाह अधिनियम...




















