मुख्य सुर्खियां
पीएम मोदी डिग्री मानहानि केस -अहमदाबाद की अदालत ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, राज्यसभा सांसद संजय सिंह को नया समन जारी किया
गुजरात के अहमदाबाद जिले की एक अदालत ने मंगलवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को गुजरात यूनिवर्सिटी द्वारा दायर एक आपराधिक मानहानि की शिकायत में एक नया सम्मन जारी किया। इस मामले में आपराधिक शिकायत में कहा गया है कि केजरीवाल और संजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री विवाद के संबंध में कथित रूप से अपमानजनक बयान दिए। अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट जयेशभाई चोवाटिया की अदालत ने दोनों को 7 जून को पेश होने का निर्देश...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गलत श्रेणी के तहत आवेदन करने वाले सिविल जज (JD) उम्मीदवार को मुख्य परीक्षा में प्रोविज़नल रूप से उपस्थित होने की अनुमति दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अंतरिम राहत में सोमवार को गलत श्रेणी के तहत आवेदन करने वाले एक उम्मीदवार को मंगलवार से शुरू होने वाली यूपी न्यायिक सेवा सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा -2022 की मुख्य परीक्षा लिखने की अनुमति दी। . जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस राजेंद्र कुमार--IV की पीठ ने हालांकि स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को प्रोविज़नल रूप से परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जा रही है , जो वर्तमान रिट याचिका के अंतिम परिणाम के अधीन है और निर्देश दिया कि न्यायालय की अनुमति को छोड़कर याचिकाकर्ता का इस...
वैवाहिक विवाद के निपटारे के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्धारित समय-सीमा पत्नी ने छुपाई, उड़ीसा हाईकोर्ट ने ₹25,000 का जुर्माना लगाया
उड़ीसा हाईकोर्ट ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्धारित समय-सीमा को छुपाने के कारण एक वैवाहिक विवाद में पत्नी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। मामले को निस्तारित करने के लिए फैमिली कोर्ट को ट्रांसफर कर दिया गया है।यह देखते हुए कि महिला ने अनुकूल आदेश प्राप्त करने के लिए न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास किया, जस्टिस कृष्ण राम महापात्रा की एकल न्यायाधीश खंडपीठ ने कहा,"...यह अदालत पीड़ा के साथ यह कह रही है कि याचिकाकर्ता ने इस अदालत के समक्ष रिट याचिका में भौतिक तथ्यों को छुपाया है,...
सरकारी कर्मचारी को उसके खिलाफ लंबित आपराधिक मामले के परिणाम के आधार पर प्रोमोशन नहीं दिया जा सकता : उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने हाल ही में दोहराया है कि किसी सरकारी कर्मचारी को एडहॉक या नियमित पदोन्नति उसके खिलाफ लंबित आपराधिक मामले के परिणाम के आधार पर नहीं दी जा सकती। मुख्य न्यायाधीश डॉ. एस. मुरलीधर और जस्टिस गौरीशंकर सतपथी की खंडपीठ ने कई सरकारी कर्मचारियों को इस तरह की पदोन्नति की अनुमति देने वाले एकल जज के आदेश को रद्द करते हुए कहा,"... इस न्यायालय के लिए वर्तमान मामलों में विद्वान एकल न्यायाधीश के विवादित आदेशों को बरकरार रखना संभव नहीं है, जिसमें अपीलकर्ताओं को उत्तरदाताओं को नियमित पदोन्नति...
जम्मू-कश्मीर में प्रेवेंटिव डिटेंशन कानून के तहत कैद व्यक्ति को एक साल पहले हाईकोर्ट के हिरासत में रखने के आदेश को रद्द करने के बावजूद रिहा नहीं किया गया
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने पिछले साल सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिए गए एक बंदी की रिहाई को बहुत ही "परेशान करने वाले परिदृश्य" के रूप में बताया। कोर्ट ने बारामूला के जिला मजिस्ट्रेट को अगले सप्ताह व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साथ ही बंदी को भी पेश करने का आदेश दिया। जस्टिस राहुल भारती की बेंच ने कहा," इस रिट याचिका के माध्यम से इस न्यायालय के समक्ष एक बहुत ही परेशान करने वाला परिदृश्य प्रस्तुत किया गया है, जिसे नियमित रूप से निपटाए जाने के लिए...
आंशिक रूप से जमानत के लिए आवेदन करने की अनुमति नहीं, अभियुक्त को उन सभी अपराधों में जमानत लेनी चाहिए जिसके लिए वह वांछित है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति आंशिक रूप से जमानत के लिए आवेदन नहीं कर सकता है और अभियुक्त को उन सभी अपराधों के लिए जमानत की आवश्यकता होती है जिसके लिए वह वांछित है।जस्टिस कृष्ण पहल की पीठ ने कहा,"किसी भी व्यक्ति को आंशिक रूप से जमानत के लिए आवेदन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है, वह भी पहले सीआरपीसी की धारा 437 और बाद में अन्य धाराओं में धारा 438 सीआरपीसी का सहारा लेकर जमानत प्राप्त करना होता है। उसे धारा 437 CrPC या 438 CrPC के तहत उन सभी सेक्शन में जमानत के लिए आवेदन करना...
वाराणसी जिला जज ने ज्ञानवापी विवाद संबंधित सभी लंबित मुकदमों को समेकित किया, सुनवाई एक साथ होगी
वाराणसी की जिला अदालत ने विभिन्न अदालतों में लंबित ज्ञानवापी संबंधित सभी आठ मुकदमों को समेकित करने के लिए दायर एक आवेदन को स्वीकार कर लिया है। अब इन सभी मामलों की सुनवाई जिला जज की अदालत एक साथ करेगी। जिला जज अजय कृष्ण विश्वेश ने आज यह आदेश पारित करते हुए कहा कि सभी मामलों पर सुनवाई एक साथ की जानी चाहिए। उन्हें समेकित किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा,"मेरा विचार है कि न्याय के हित में यह समीचीन होगा कि उपरोक्त सभी मुकदमों की एक साथ सुनवाई की जाए और उन्हें समेकित किया जाए। इन सभी मुकदमों और...
यूएपीए नियमों के तहत अभियोजन की स्वीकृति देने के लिए समय सीमा अनिवार्य, विलंब के मामले में आरोपी अंतरिम जमानत का हकदार: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में माना कि जांच के निष्कर्ष और चालान दाखिल करने पर, यदि अभियोजन की स्वीकृति पर कोई निर्णय नहीं लिया जाता है और गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) (अनुशंसा और अभियोजन की स्वीकृति) नियमावली, 2008 में निर्दिष्ट अवधि के भीतर सूचित नहीं किया जाता है तो अभियुक्त को अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए।यह देखते हुए कि यूएपीए के प्रावधान कठोर हैं और यह ध्यान में रखते हुए कि अनुमति के लिए एक विशिष्ट समय सीमा निर्दिष्ट की गई है, जस्टिस हरिंदर सिंह सिद्धू और...
दिल्ली एलजी विनय सक्सेना के खिलाफ मारपीट का मामला| गुजरात हाईकोर्ट ने अहमदाबाद कोर्ट में लंबित आपराधिक मुकदमे की कार्यवाही पर रोक लगाई
गुजरात हाईकोर्ट ने दिल्ली उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को 2002 के हमले के एक मामले में उपराज्यपाल पद पर रहने तक मुकदमे पर रोक लगाने की उनकी याचिका में अंतरिम राहत प्रदान की।अदालत ने अहमदाबाद कोर्ट के समक्ष लंबित आपराधिक मुकदमे की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है।इससे पहले अहमदाबाद मेट्रोपॉलिटन कोर्ट ने 9 मई को सक्सेना के आवेदन को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 361 (2) के तहत दिए गए रोक के मद्देनजर अपने वर्तमान पद पर रहने तक आपराधिक मुकदमे का सामना करने से प्रतिरक्षा की...
"धार्मिक टैटू हटाने पर उम्मीदवारी पर विचार करें": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र को BSF हेड कांस्टेबल उम्मीदवार को राहत दी
आज के दौर में लोगों में टैटू बनवाने का काफी ट्रेंड है, खासकर युवाओं। वैसे ये निजी पसंद का मामला है,लेकिन कभी-कभी ये नुकसान भी पहुंचा सकती है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है। एक युवक ने सीमा सुरक्षा बल यानी BSF हेड कांस्टेबल की परीक्षा पास कर ली थी। लेकिन उसे नौकरी से रिजेक्ट कर दिया गया था। रिजेक्ट करने की पीछे की वजह थी कि उसके दाहिने हाथ पर धार्मिक टैटू। अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने युवक को राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि अगर युवक टैटू हटा देता है तो केंद्र सरकार उसकी उम्मीदवारी पर विचार करे।जस्टिस सौरभ...
केरल हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामले में एक्टर उन्नी मुकुंदन के खिलाफ मुकदमे पर रोक लगाने से इनकार किया
केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट अदालत, एर्नाकुलम के समक्ष लंबित यौन उत्पीड़न के मामले में मलयालम फिल्म एक्टर उन्नी मुकुंदन द्वारा उनके खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगाने के लिए दायर याचिका खारिज कर दी।जस्टिस के बाबू की एकल पीठ ने बर्खास्तगी का आदेश पारित किया।यह मामला एक्टर के खिलाफ चल रही ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही से संबंधित है, जो 2017 में महिला द्वारा एक्टर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली शिकायत के आधार पर शुरू किया गया। कथित घटना कोच्चि में हुई थी जब महिला फिल्म...
दिल्ली हाईकोर्ट ने आईडी प्रूफ के बिना 2000 रुपए के नोट बदलने की अनुमति देने वाली जनहित याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय स्टेट बैंक की उन अधिसूचनाओं को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया जो 2000 रुपये के करेंसी नोट बिना किसी पहचान प्रमाण के विनिमय की अनुमति देती हैं। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने कहा, "हम उचित आदेश पारित करेंगे।"भाजपा नेता और एडवोकेट अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा याचिका दायर की गई है जिसमें अधिसूचनाओं को मनमाना और भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ घोषित करने की मांग...
उड़ीसा हाईकोर्ट ने अपनी वेबसाइट पर निर्णयों और आदेशों की 'डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित' कॉपी अपलोड करना शुरू किया
उड़ीसा हाईकोर्ट ने भाग-V के तहत अध्याय XXI-A को सम्मिलित करने के लिए उड़ीसा हाईकोर्ट, 1948 के नियमों में संशोधन किया, जिससे डिजिटल रूप से हस्ताक्षर की गई कॉपी का सिस्टम लगा गया है।इस अध्याय के तहत नियम आदेश/निर्णय की सॉफ्ट कॉपी पर अपने डिजिटल हस्ताक्षर संलग्न करने के लिए आदेश या निर्णय तैयार करने वाले सचिवीय कर्मचारियों को अनिवार्य करते हैं। संबंधित कर्मचारियों को आदेश/निर्णय की डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित कॉपी को हाईकोर्ट की वेबसाइट पर उसी दिन या न्यायाधीश द्वारा हस्ताक्षर किए जाने के ठीक अगले...
केरल हाईकोर्ट ने सबरीमाला के पास पोन्नम्बलमेडु के संरक्षित क्षेत्र में कथित घुसपैठ की घटना की जांच की जानकारी मांगी
केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को पेरियार पश्चिम डिवीजन के उप-निदेशक और जिला पुलिस प्रमुख से सबरीमाला मंदिर के पास संरक्षित वन क्षेत्र पोन्नम्बलमेडु के पवित्र 'कलथारा' में कुछ व्यक्तियों द्वारा कथित रूप से अतिचार से संबंधित मामले में जांच के वर्तमान चरण के बारे में जानकारी मांगी।साथ ही सीनियर सरकारी वकील को उक्त अधिकारियों से इस संबंध में निर्देश प्राप्त करने का निर्देश दिया गया।पोन्नंबलामेडु में पूजा करने वाले कुछ व्यक्तियों का वीडियो ऑनलाइन सामने आने के बाद यह मामला सामने आया। पवित्र क्षेत्र पेरियार...
अमित शाह पर टिप्पणी का मामला- 'वो सुनवाई के लिए तैयार नहीं': झारखंड हाईकोर्ट ने राहुल गांधी को राहत देने वाला अपना आदेश वापस लिया
झारखंड हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह मई 2022 के अपने उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें उसने मार्च 2018 में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ की गई उनकी कथित टिप्पणी को लेकर चाईबासा कोर्ट के समक्ष लंबित एक आपराधिक मानहानि शिकायत के संबंध में राहुल गांधी को राहत दी थी।जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की पीठ ने ये आदेश पारित किया। कोर्ट ने देखा गया कि राहुल गांधी शिकायतकर्ता प्रताप कुमार द्वारा चाईबासा अदालत के समक्ष दायर आपराधिक शिकायत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार नहीं हैं।गांधी के...
एक्सपर्ट की राय अस्पष्ट नहीं होनी चाहिए, यह तो 'देहाती' भी कह सकते हैं कि 'अगर समय पर इलाज न किया जाए तो चोट जीवन के लिए खतरा हो सकती है ': राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 45 के तहत एक्सपर्ट की राय अस्पष्ट नहीं होनी चाहिए, बल्कि दृढ़ और निश्चित होनी चाहिए। केवल उस स्थिति में कानून के तहत साक्ष्य में स्वीकार्य है।जस्टिस फरजंद अली ने कहा,"एक्सपर्ट से यह उम्मीद की जाती है कि उसकी राय दृढ़ होनी चाहिए और अस्पष्ट, टालमटोल या आकस्मिकताओं पर निर्भर नहीं होना चाहिए। चोटों को सरल या गंभीर प्रकृति का होना चाहिए। डॉक्टर द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला मुहावरा है कि" सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सेवारत किसी...
पिता अपने में घर में अजनबी से वीडियो शूट करवाए, वह बच्चे के रहने के लिए अनुकूल माहौल बनाने में विफल रहा: कर्नाटक हाईकोर्ट ने कस्टडी से इनकार किया
कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में फैमिली कोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें नाबालिग बेटी को उसके पिता को सौंपने से इनकार कर दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि पिता बच्चे के रहने के लिए अपने घर में अनुकूल माहौल बनाने में विफल रहा।जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल न्यायाधीश पीठ ने पिता द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए कहा,उन्होंने कहा, 'यह सच्चाई है कि जब पिता आसपास नहीं होता है और बच्चे को अन्य पुरुष अजनबी को सौंप दिया जाता है तो बच्चे की देखभाल करने वाला कोई नहीं होता है। मां ने...
पुलिस वेरीफिकेशन के लिए आगे बढ़ने से पहले स्टेशन डायरी में शिकायतकर्ता का विवरण, शिकायत का विवरण दर्ज करे: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि वेरीफिकेशन की कवायद करने से पहले पुलिस को पहले शिकायतकर्ता का नाम, उसका विवरण और शिकायत का सार स्टेशन डायरी में दर्ज करना होगा और फिर वेरीफिकेशन के लिए आगे बढ़ना होगा।जस्टिस संदीप कुमार की पीठ ने कहा,"अगर पुलिस को कोई शिकायत मिलती है तो उसे आरोपों को सत्यापित करने के लिए आगे बढ़ने से पहले स्टेशन डायरी में कम से कम शिकायतकर्ता का नाम, उसका विवरण और शिकायत का सारांश दर्ज करना चाहिए।"अदालत स्थानीय अधिकृत प्रतिनिधि और मैंडोलियन ज्वैलर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंधक द्वारा दायर...
हाईकोर्ट के पास न्यायपालिका के प्रशासनिक पक्ष में कर्मचारियों के अंतर-जिला स्थानांतरण के लिए शर्तें निर्धारित करने की शक्ति: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि न्यायपालिका के प्रशासनिक पक्ष में कर्मचारियों के अंतर जिला स्थानांतरण के लिए शर्तों को निर्धारित करने की शक्ति हाईकोर्ट के पास है। न्यायालय ने पाया कि यह शक्ति संविधान के अनुच्छेद 235 से ली गई है जो हाईकोर्ट को अधीनस्थ न्यायालयों पर पूर्ण प्रशासनिक नियंत्रण रखने की शक्ति प्रेदान करता है।जस्टिस एन नागेश की एकल पीठ ने कहा,"अदालतें संस्थाएं या एक जीव हैं, जहां सभी अंग अदालतों की पूरी प्रणाली को पूरा करते हैं। जब संवैधानिक प्रावधान अदालतों और न्यायिक कार्यालय से...
मजिस्ट्रेट ने जिरह के आदेश को केवल इसलिए रद्द कर दिया कि आरोपी का वकील पेश नहीं हो सका, यह क्षेत्राधिकार का उल्लंघन: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मजिस्ट्रेट कोर्ट के एक आदेश को रद्द कर दिया। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने कुछ गवाहों की जिरह की अनुमति का आदेश दिया था, हालांकि उन्होंने आदेश को केवल इस आधार पर रद्द कर दिया था कि जिस दिन गवाहों की जांच की गई, उस दिन अभियुक्तों के वकील उपस्थित नहीं हो सके।यह देखते हुए कि उत्तर परावुर स्थित जेएफसीएम कोर्ट का आदेश अनुचित था, जस्टिस सीएस डायस की सिंगल जज बेंच ने कहा,"मामले के तथ्यों, परिस्थितियों और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पर विचार करने के बाद, मेरा निश्चित मत है कि निचली...

















