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लिंग परिवर्तन एक संवैधानिक अधिकार: लिंग परिवर्तन सर्जरी की अनुमति मांगने वाली महिला कांस्टेबल को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहत दी
'लिंग परिवर्तन एक संवैधानिक अधिकार': लिंग परिवर्तन सर्जरी की अनुमति मांगने वाली महिला कांस्टेबल को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहत दी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह कहते हुए कि किसी व्यक्ति को सर्जिकल हस्तक्षेप के माध्यम से अपना लिंग बदलने का "संवैधानिक रूप से मान्यता प्राप्त" अधिकार है, पिछले सप्ताह राज्य के डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) को एक महिला कांस्टेबल द्वारा लिंग बदलवाने की प्रक्रिया की अनुमति मांगने के लिए दायर एक आवेदन का निपटान करने का निर्देश दिया।जस्टिस अजीत कुमार की पीठ ने आगे कहा कि यदि आधुनिक समाज में हम किसी व्यक्ति में अपनी पहचान बदलने के इस निहित अधिकार को स्वीकार नहीं करते हैं तो हम "केवल जेंडर आईडेंटिटी डिस ऑर्डर...

अंतरिम भरण-पोषण/हिरासत आवेदनों पर 90 दिनों में निर्णय लें: दिल्ली हाईकोर्ट ने वैवाहिक मामलों के शीघ्र निपटान के लिए फैमिली कोर्ट को निर्देश जारी किए
अंतरिम भरण-पोषण/हिरासत आवेदनों पर 90 दिनों में निर्णय लें: दिल्ली हाईकोर्ट ने वैवाहिक मामलों के शीघ्र निपटान के लिए फैमिली कोर्ट को निर्देश जारी किए

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस संबंध में किसी विशिष्ट नियम के अभाव में एक समय सीमा के भीतर विवाह और पारिवारिक मामलों से संबंधित मामलों के त्वरित निपटान के लिए राष्ट्रीय राजधानी में फैमिली कोर्ट को कई निर्देश जारी किए हैं।जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि जब एक मुकदमा विधिवत स्थापित किया गया है तो प्रतिवादी को दावे का जवाब देने और 30 दिनों के भीतर बचाव का लिखित बयान दाखिल करने के लिए समन जारी किया जा सकता है।पीठ ने कहा कि ऐसा कोई समन तब जारी नहीं किया जाएगा जब...

आयकर अधिनियम के अनुसार चेक धारक द्वारा ऋण को बही में दर्ज न करना एनआई अधिनियम की धारा 138 के तहत शिकायत को खारिज करने का आधार नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
आयकर अधिनियम के अनुसार चेक धारक द्वारा ऋण को बही में दर्ज न करना एनआई अधिनियम की धारा 138 के तहत शिकायत को खारिज करने का आधार नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में एकल न्यायाधीश के एक संदर्भ का उत्तर देते हुए कहा कि चेक धारक द्वारा चेक जारीकर्ता को दिए गए ऋण को बहीयों/आयकर रिटर्न में दर्ज करने में विफलता, परक्राम्य लिखत अधिनियम (एनआई अधिनियम) की धारा 138 के तहत ऋण को अप्रवर्तनीय नहीं बना देगी। जस्टिस एएस चंदूरकर और ज‌स्टिस वृषाली वी जोशी की खंडपीठ ने कहा कि चेक धारक के पक्ष में कानूनी रूप से लागू ऋण/देयता का अस्तित्व अधिनियम की धारा 139 के तहत माना जाता है, और ऐसी धारणा का खंडन करने का दायित्व आरोपी पर है।कोर्ट ने...

जब तक कानून सक्षम ना करे, सेवानिवृत्ति या इस्तीफा देकर नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारी को लीव एनकैशमेंट का दावा करने का अधिकार नहीं: केरल हाईकोर्ट
जब तक कानून सक्षम ना करे, सेवानिवृत्ति या इस्तीफा देकर नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारी को लीव एनकैशमेंट का दावा करने का अधिकार नहीं: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि एक कर्मचारी, जिसने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति या अन्यथा, या इस्तीफे के जर‌िए अपनी नौकरी छोड़ी है, उसके पास अपनी छुट्टी को कैश (नकदीकरण) कराने का दावा करने का कोई निहित या अंतर्निहित अधिकार नहीं होता, जब तक कि किसी कानून, नियमों या सेवा की शर्तों को विनियमित करने वाले मानदंडों के जर‌िए ऐसे प्रावधान नहीं किए गए हैं।ज‌स्टिस अलेक्जेंडर थॉमस और जस्टिस सी जयचंद्रन की खंडपीठ ने य‌ह टिप्पणी नेशनल इंश्योरेंस कंपनी की अपील पर विचार करते हुए की। अपील में एकल न्यायाधीश के उस...

गुजरात हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट की कार्यवाही में अतिरिक्त भाषा के रूप में गुजराती के उपयोग की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की
गुजरात हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट की कार्यवाही में अतिरिक्त भाषा के रूप में 'गुजराती' के उपयोग की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की

गुजरात हाईकोर्ट ने उस जनहित याचिका को 'गलत' मानकर खारिज कर दिया, जिसमें राज्य सरकार को (तत्कालीन) राज्यपाल के 2012 के फैसले को लागू करने का निर्देश देने की मांग की गई। उक्त फैसले में हाईकोर्ट के समक्ष अदालती कार्यवाही में अंग्रेजी के अलावा गुजराती भाषा के उपयोग को अधिकृत किया गया।इस जनहित याचिका में गुजराती भाषा के उपयोग की अनुमति देने के प्रस्ताव को खारिज करने वाले सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के अक्टूबर 2012 के फैसले (प्रशासनिक पक्ष पर लिया गया) को भी चुनौती दी गई। उक्त याचिका पिछले साल सोशल...

कथित तौर पर यातायात में बाधा डालने के वाले व्यक्ति को हिरासत में हिंसा का शिकार बनाने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
कथित तौर पर यातायात में 'बाधा डालने' के वाले व्यक्ति को हिरासत में हिंसा का शिकार बनाने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया, जिन्होंने सड़क किनारे पार्किंग के मामूली मुद्दे पर कथित तौर पर लड़के को हिरासत में हिंसा का शिकार बनाया।जस्टिस संगीता चंद्रा और जस्टिस नरेंद्र कुमार जौहरी की खंडपीठ ने राज्य की राजधानी के पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरों के काम न करने को लेकर भी चिंता व्यक्त की और पुलिस विभाग को इस संबंध में सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया।अदालत ने यह आदेश पीड़ित द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। इस याचिका...

आरएसएस मानहानि मामला: राहुल गांधी ने अपने भाषण की ट्रांसक्रिप्ट को साक्ष्य के रूप में पेश करने की अनुमति देने वाले आदेश के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
आरएसएस मानहानि मामला: राहुल गांधी ने अपने भाषण की ट्रांसक्रिप्ट को साक्ष्य के रूप में पेश करने की अनुमति देने वाले आदेश के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भिवंडी की मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा पारित उस आदेश के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक पदाधिकारी द्वारा दायर चल रहे मानहानि मामले में उनके कथित अपमानजनक भाषण की ट्रांसक्रिप्ट को 'सबूत' के रूप में पेश करने की अनुमति दी गई है। आरएसएस कार्यकर्ता राजेश कुंटे ने गांधी पर 2014 में एक चुनावी रैली के दौरान कथित तौर पर महात्मा गांधी की हत्या के लिए आरएसएस को जिम्मेदार ठहराते हुए "झूठे और निराधार आरोप" लगाकर आरएसएस को...

लगभग 15 साल की पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाने को बलात्कार नहीं कहा जा सकताः दिल्ली हाईकोर्ट ने मुस्लिम व्यक्ति को बरी करने का फैसला बरकरार रखा
लगभग 15 साल की पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाने को बलात्कार नहीं कहा जा सकताः दिल्ली हाईकोर्ट ने मुस्लिम व्यक्ति को बरी करने का फैसला बरकरार रखा

दिल्ली हाईकोर्ट ने बलात्कार के एक मामले में एक मुस्लिम व्यक्ति को बरी करने के फैसले को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि लगभग 15 साल की पीड़ित बच्ची, जो उसकी पत्नी थी,के साथ शरीरिक संबंध बनाने को बलात्कार नहीं कहा जा सकता है। जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें कहा गया था कि नाबालिग की गवाही के मद्देनजर पॉक्सो अधिनियम की धारा 5 (1) के साथ पढ़ी जाने वाली धारा 6 के तहत व्यक्ति के खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता है। पीड़िता का कहना है...

जब हमारी राष्ट्रपति एक महिला हो तो ऐसे अपराधों पर सिर झुकाने की जरूरत: मद्रास हाईकोर्ट ने बाल यौन उत्पीड़न मामले में दोषसिद्धि बरकरार रखी
'जब हमारी राष्ट्रपति एक महिला हो तो ऐसे अपराधों पर सिर झुकाने की जरूरत': मद्रास हाईकोर्ट ने बाल यौन उत्पीड़न मामले में दोषसिद्धि बरकरार रखी

मद्रास हाईकोर्ट ने साढ़े चार साल की बच्ची के यौन उत्पीड़न के दोषी एक व्यक्ति की सजा को बरकरार रखा। कोर्ट ने फैसले में कहा कि "ऐसे युग में जब हमारी राष्ट्रपति एक महिला है, हमें दैनिक आधार पर ऐसे अपराधों के लिए अपना सिर शर्म से झुका लेना चाहिए।"जस्टिस आर हेमलता की पीठ ने कहा, "प्रत्येक लड़की को देवी का अवतार माना जाता है और जब तक यौन उत्पीड़न की इस बुराई को सख्त कानूनों और प्रभावी कार्यान्वयन के साथ खत्म नहीं किया जाता, हमारा समाज कभी भी एक सुरक्षित समाज के रूप में विकसित नहीं हो सकता।"अपने आदेश...

साल 2021 में हुए पुलिस गोलीबारी का मामला: झारखंड हाईकोर्ट ने आदिवासी की मौत की नए सिरे से जांच का निर्देश दिया, विधवा को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया
साल 2021 में हुए पुलिस गोलीबारी का मामला: झारखंड हाईकोर्ट ने आदिवासी की मौत की नए सिरे से जांच का निर्देश दिया, विधवा को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस को ब्रह्मदेव सिंह की हत्या के मामले की फिर से जांच करने का निर्देश दिया। ब्रह्मदेव सिंह को जून, 2021 में लातेहार जिले में माओवादी होने के संदेह में सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर मार डाला था। सिंह के परिवार को मुआवजे के रूप में पांच लाख रुपये का भुगतान करें।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की पीठ ने उपरोक्त आदेश सिंह की विधवा जीरामनी देवी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसने मामले की सीबीआई जांच की मांग की।जस्टिस द्विवेदी ने कहा,"क्लोजर रिपोर्ट... विवेक में...

जिस व्यक्ति का नाम एफआईआर में नहीं, लेकिन आगे की जांच के दौरान गिरफ्तार किया गया, वह सीआरपीसी की धारा 167(2) के तहत डिफ़ॉल्ट जमानत मांग सकता है: मद्रास हाईकोर्ट
जिस व्यक्ति का नाम एफआईआर में नहीं, लेकिन आगे की जांच के दौरान गिरफ्तार किया गया, वह सीआरपीसी की धारा 167(2) के तहत डिफ़ॉल्ट जमानत मांग सकता है: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अदालत द्वारा अपराध का संज्ञान लेने के बाद आगे की जांच की प्रक्रिया में गिरफ्तार किया गया व्यक्ति सीआरपीसी की धारा 167(2) के तहत वैधानिक जमानत (Default Bail) के लिए आवेदन दायर कर सकता है, यदि वह 90 दिन से अधिक समय तक हिरासत में रहा हो और पूरक आरोप पत्र दायर नहीं किया गया हो।अदालत ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 309(2) के तहत पाए गए शब्द "आरोपी यदि हिरासत में है," उसमें केवल वे लोग शामिल हैं, जो मामले का संज्ञान लेने के समय अदालत के समक्ष थे, न कि वे आरोपी जिन्हें...

दिल्ली दंगा मामला: अदालत ने मुस्लिम समुदाय के लोगों की संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने के लिए पांच लोगों के खिलाफ आरोप तय किए
दिल्ली दंगा मामला: अदालत ने मुस्लिम समुदाय के लोगों की संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने के लिए पांच लोगों के खिलाफ आरोप तय किए

दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में मुस्लिम समुदाय के लोगों की संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने के मामले में पांच लोगों के खिलाफ आरोप तय किए।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचला ने अंकित, सौरभ शर्मा, रोहित, राहुल कुमार और सचिन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 148, 149, 188, 380, 427, 435/436 और धारा 450 के तहत दंडनीय अपराध के लिए आरोप तय किए।अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता अली अहमद और दो पुलिस अधिकारियों द्वारा दिए गए बयान से पता चलता है कि गैर...

महिलाओं द्वारा आईपीसी की धारा 498ए का दुरुपयोग कानूनी आतंकवाद को उजागर करता है: कलकत्ता हाईकोर्ट ने पति और ससुराल वालों के खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला रद्द किया
महिलाओं द्वारा आईपीसी की धारा 498ए का दुरुपयोग "कानूनी आतंकवाद" को उजागर करता है: कलकत्ता हाईकोर्ट ने पति और ससुराल वालों के खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला रद्द किया

कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को पत्नी (प्रतिवादी नंबर 2) द्वारा अपने पति और ससुराल वालों (याचिकाकर्ताओं) के खिलाफ घरेलू हिंसा, हत्या के प्रयास, आपराधिक धमकी के विभिन्न मामलों में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत दायर दो आपराधिक शिकायतों को खारिज कर दिया।जस्टिस सुभेंदु सामंत की एकल पीठ ने यह देखते हुए कि रिकॉर्ड पर मौजूद मेडिकल साक्ष्य, साथ ही गवाहों के बयान, घटनाओं के प्रतिवादी नंबर 2 के वर्जन से मेल नहीं खाते, आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।पीठ ने कहा,“दोनों मामलों में शारीरिक और मानसिक यातना का...

मोटर दुर्घटना - ड्राइवर के पास वैध लाइसेंस न होने पर भी बीमाकर्ता थर्ड पार्टी को मुआवजा देगा, वाहन मालिक से वसूली कर सकता है: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
मोटर दुर्घटना - ड्राइवर के पास वैध लाइसेंस न होने पर भी बीमाकर्ता थर्ड पार्टी को मुआवजा देगा, वाहन मालिक से वसूली कर सकता है: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने दोहराया है कि एक बीमा कंपनी मोटर वाहन दुर्घटना में थर्ड पार्टी के दावे को संतुष्ट करने के लिए उत्तरदायी है, भले ही बीमाकृत वाहन के ड्राइवर ने पॉलिसी के नियमों और शर्तों का उल्लंघन किया हो। इसमें कहा गया है कि बीमा कंपनी बाद में वाहन के मालिक से मुआवज़े की राशि वसूल कर सकती है। इस मामले में दावा याचिकाकर्ताओं ने मृतक की पत्नी और बच्चे होने के नाते मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 166 के तहत 16,00,000/-रुपये के मुआवजे का दावा करते हुए याचिका दायर की।मामले के संक्षिप्त तथ्य...

कलकत्ता हाईकोर्ट ने सामूहिक बलात्कार की नाबालिग पीड़िता को शुभकामनाएं देते हुए 25+ सप्ताह की गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति दी
कलकत्ता हाईकोर्ट ने सामूहिक बलात्कार की नाबालिग पीड़िता को 'शुभकामनाएं' देते हुए 25+ सप्ताह की गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति दी

कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को एक नाबालिग सामूहिक बलात्कार पीड़िता की गर्भावस्था की मेडिकल टर्मिनेशन की अनुमति दी, जो कि चिकित्सीय गर्भावस्था समाप्ति अधिनियम, 1971 के तहत 24 सप्ताह की वैधानिक सीमा से अधिक हो गई थी। पहले के अवसर पर न्यायालय ने कहा था कि वर्तमान मामला 1971 अधिनियम के तहत परिकल्पित अपवाद के अंतर्गत आता है, जिसमें गर्भावस्था को जारी रखने की स्थिति में मां के जीवन को खतरा हो सकता है और 25+ सप्ताह की गर्भवती नाबालिग लड़की के लिए गर्भपात की व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए एक मेडिकल...

देवी दुर्गा के खिलाफ एफबी पर टिप्पणी पोस्ट करने के नाबालिग आरोपी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दी, सितंबर 2022 से जेल में बंद था
देवी दुर्गा के खिलाफ एफबी पर टिप्पणी पोस्ट करने के 'नाबालिग' आरोपी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दी, सितंबर 2022 से जेल में बंद था

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक नाबालिग को जमानत दे दी, जिस पर अपने फेसबुक अकाउंट पर देवी दुर्गा के खिलाफ टिप्पणी पोस्ट करने का आरोप है। उसकी हाई स्कूल की मार्कशीट और आधार कार्ड का अवलोकन करते हुए, जिसमें उसका जन्म वर्ष जनवरी 2006 दिया गया है, जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने उसे जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया। उसे सितंबर 2022 में गिरफ्तार किया गया था।नाबालिग आरोपी पर आईपीसी की धारा 298, 505 (i) (सी) और आईटी अधिनियम की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया था। उसे 27 सितंबर, 2022 को इस...

पितृत्व अवकाश से इनकार अनुच्छेद 21 के तहत बच्चे के जीवन के अधिकार का उल्लंघन; मद्रास हाईकार्ट ने कहा, इस विषय पर कानून की जरूरत
पितृत्व अवकाश से इनकार अनुच्छेद 21 के तहत बच्चे के जीवन के अधिकार का उल्लंघन; मद्रास हाईकार्ट ने कहा, इस विषय पर कानून की जरूरत

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में पितृत्व अवकाश कानून की आवश्यकता पर बल दिया। जस्टिस एल विक्टोरिया गौरी ने एक फैसले में एक पुलिस अधिकारी को राहत प्रदान की, जबकि विभाग की ओर से उसके खिलाफ परित्याग का आदेश पारित किया गया था। उसकी पत्नी गर्भवती थी और उसे अपनी पत्नी की देखभाल करनी थी।कोर्ट ने फैसले में बच्चे की प्रसवपूर्व और प्रसवोत्तर देखभाल के दिनों में पिता और मां दोनों की भूमिका के महत्व की चर्चा की।कोर्ट ने कहा कि एकल परिवारों की चुनौतियों के कारण, नीति निर्माताओं के लिए जैविक/दत्तक माता-पिता के...

सुरक्षा और न्याय के लिए एक पीड़ित आत्मा की करुण मांग: उड़ीसा हाइकोर्ट ने 7 साल की बच्ची के साथ बलात्कार के दोषी की सजा बरकरार रखी
'सुरक्षा और न्याय के लिए एक पीड़ित आत्मा की करुण मांग': उड़ीसा हाइकोर्ट ने 7 साल की बच्ची के साथ बलात्कार के दोषी की सजा बरकरार रखी

उड़ीसा हाईकोर्ट ने हाल ही में सात वर्षीय बच्ची से बलात्कार के दोषी एक व्यक्ति की सजा को बरकरार रखा।जस्टिस संगम कुमार साहू की सिंगल जज बेंच ने अपराध को 'जघन्य' करार देते हुए कहा, “वर्तमान मामले में, पीड़िता ने किसी भी समय घटना को छुपाने की कोशिश नहीं की; बल्कि उसने तुरंत इसकी सूचना अपने माता-पिता को दी। पीड़ित की ओर से इस तरह का आचरण सुरक्षा और न्याय के लिए एक पीड़ित आत्मा के विलापपूर्ण मांग को प्रकट करता है, जो न केवल प्रासंगिक है बल्कि अपीलकर्ता के खिलाफ भी आरोप लगाने वाला है।''घटना के समय...

पूर्व पत्नी आईपीसी की धारा 498ए के तहत केवल विवाह के दौरान हुए कथित उत्पीड़न के लिए शिकायत दर्ज करा सकती है: गुजरात हाईकोर्ट
पूर्व पत्नी आईपीसी की धारा 498ए के तहत केवल विवाह के दौरान हुए कथित उत्पीड़न के लिए शिकायत दर्ज करा सकती है: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 498ए के तहत अपराध से संबंधित आरोपों पर एक महिला द्वारा मुकदमा चलाया जा सकता है, बशर्ते कि वह अपनी शादी के दरमियान हुए उत्पीड़न और क्रूरता की घटनाओं का दावा करे। जस्टिस जितेंद्र दोशी ने कहा, "...आईपीसी की धारा 498ए के तहत अपराध के आरोप तलाकशुदा पत्नी के कहने पर भी लगाए जा सकते हैं, बशर्ते कि वह उन उत्पीड़नों और क्रूरताओं की घटना का आरोप लगाए, जिनका सामना उन्हें शादी के दरमियान करना पड़ा था।”कोर्ट ने कहा,“महिला आईपीसी...