मुख्य सुर्खियां

हाईकोर्ट ऑफ कर्नाटक
कर्नाटक हाईकोर्ट ने न्यायिक आदेशों की जानबूझकर अवज्ञा के लिए सिविल कारावास पर दिशानिर्देश जारी किए

कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के आदेश XXXIX नियम 2ए के तहत अदालत के आदेशों की जानबूझकर अवज्ञा के लिए आरोपी को सिविल कारावास का आदेश देते हुए ट्रायल अदालतों द्वारा पालन किए जाने वाले दिशानिर्देशों का सेट जारी किया।जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस अनंत रामनाथ हेगड़े की खंडपीठ ने कहा,“प्रावधान का अंतर्निहित दर्शन उपचारात्मक है और गलत काम करने वाले को दंडित करने के बजाय न्यायालय के आदेश के अनुपालन को लागू करना है। साथ ही यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि मुकदमे के किसी भी...

एनईईटी-पीजी: आप फिर से कैसे कह सकते हैं कि वो महिला है, जब याचिकाकर्ता खुद को ट्रांसजेंडर मानता है? तेलंगाना हाईकोर्ट ने राज्य की खिंचाई की
एनईईटी-पीजी: 'आप फिर से कैसे कह सकते हैं कि वो महिला है, जब याचिकाकर्ता खुद को ट्रांसजेंडर मानता है?' तेलंगाना हाईकोर्ट ने राज्य की खिंचाई की

तेलंगाना हाईकोर्ट ने अदालत के पहले के निर्देश के बावजूद एनईईटी पीजी 2023 में 'थर्ड जेंडर' श्रेणी के तहत एक ट्रांसजेंडर डॉक्टर को पंजीकृत करने के लिए परामर्श प्राधिकरण को निर्देश नहीं देने के लिए राज्य सरकार की खिंचाई की है।पिछले महीने, उच्च न्यायालय ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि "नीट पीजी 2023 के लिए केंद्रीय कोटा या राज्य कोटा के तहत किसी भी कोर्स में उसके प्रवेश पर विचार करते समय याचिकाकर्ता को" अनुसूचित जाति "के उम्मीदवार के अलावा थर्ड जेंडर के दर्जे का लाभ भी दिया जाए, जो याचिकाकर्ता...

नौसैनिक भर्ती | नौसेना के अस्पताल उम्मीदवारों की मेडिकल एक्जामिनेशन के लिए एक्सपर्ट्स और आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित हैं: राजस्थान हाईकोर्ट
नौसैनिक भर्ती | नौसेना के अस्पताल उम्मीदवारों की मेडिकल एक्जामिनेशन के लिए एक्सपर्ट्स और आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित हैं: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में उस उम्मीदवार द्वारा दायर रिट याचिका खारिज कर दी, जिसने भारतीय नौसेना में 'नाविक' पद के लिए चयन प्रक्रिया में भाग लिया और मेडिकल एक्जामिनेशन के बाद अयोग्य घोषित कर दिया गया।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा कि नौसेना के अस्पताल एक्जामिनेशन के लिए आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित हैं और क्षेत्र में एक्सपर्ट उम्मीदवारों की जांच और सिफारिश करते हैं और आवश्यकता के अनुसार जांच करते हैं।अदालत ने कहा,"एक्सपर्ट मेडिकल एक्जामिनेशन के बाद ही याचिकाकर्ता...

यदि जांच के बाद फाइनल रिपोर्ट में केवल गैर-संज्ञेय अपराध पाया जाता है तो मजिस्ट्रेट ट्रायल आगे बढ़ा सकता है: केरल हाईकोर्ट
यदि जांच के बाद फाइनल रिपोर्ट में केवल गैर-संज्ञेय अपराध पाया जाता है तो मजिस्ट्रेट ट्रायल आगे बढ़ा सकता है: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि यदि कोई मजिस्ट्रेट संज्ञेय और गैर-संज्ञेय दोनों अपराधों से जुड़ी शिकायत पुलिस को भेजता है और पुलिस जांच में केवल गैर-संज्ञेय अपराध का पता चलता है तो मजिस्ट्रेट कानूनी रूप से उस अपराध के मुकदमे को आगे बढ़ाने के लिए अधिकृत है।जस्टिस ए बदरुद्दीन ने दोहराया कि यदि किसी मामले में संज्ञेय और गैर-संज्ञेय दोनों अपराध शामिल हैं तो पुलिस सीआरपीसी की धारा 155 (4) के अनुसार सभी अपराधों के लिए जांच कर सकती है और आरोप पत्र दायर कर सकती है।हाईकोर्ट ने कहा,"...यदि पुलिस को...

सीआरपीसी की धारा 436 के तहत दी गई जमानत केवल हाईकोर्ट या सत्र न्यायालय द्वारा धारा 439(2) के तहत रद्द की जा सकती है: उड़ीसा हाईकोर्ट
सीआरपीसी की धारा 436 के तहत दी गई जमानत केवल हाईकोर्ट या सत्र न्यायालय द्वारा धारा 439(2) के तहत रद्द की जा सकती है: उड़ीसा हाईकोर्ट

उड़ीसा हाईकोर्ट ने हाल ही में माना है कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 436 के तहत दी गई जमानत को उसी अदालत द्वारा रद्द नहीं किया जा सकता है, जिसने जमानत दी है। साथ ही यह केवल सत्र न्यायालय या हाईकोर्ट द्वारा संहिता की धारा 439 (2) के तहत किया जा सकता है।जस्टिस शशिकांत मिश्रा की एकल न्यायाधीश पीठ ने कानून की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा,“सीआरपीसी की धारा 436 में जमानत रद्द करने का कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि, सीआरपीसी की धारा 439 की उपधारा (2) ऐसा प्रतीत होता है कि यह केवल ऐसी शक्ति...

अगर मंदिर हिंसा को बढ़ावा देने वाले हैं, तो उन मंदिरों को बंद करना बेहतर होगा: मद्रास हाईकोर्ट
'अगर मंदिर हिंसा को बढ़ावा देने वाले हैं, तो उन मंदिरों को बंद करना बेहतर होगा': मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को इस बात पर अफसोस जताया कि इन दिनों मंदिर उत्सव केवल समूहों के लिए अपनी ताकत दिखाने का मंच बन रहे हैं और मंच के संचालन में वास्तव में कोई भक्ति शामिल नहीं है। कोर्ट ने कहा,“मंदिर का उद्देश्य भक्तों को शांति और खुशी के लिए भगवान की पूजा करने में सक्षम बनाना है। हालांकि, दुर्भाग्य से, मंदिर उत्सव हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं और यह केवल समूहों के लिए यह दिखाने का केंद्र बनता जा रहा है कि किसी विशेष क्षेत्र में कौन शक्तिशाली है। इन त्योहारों के आयोजन में कोई भक्ति शामिल...

6.3 लाख अदालती मामलों में केंद्र सरकार पक्षकार बनी; पिछले पांच सालों में मुकदमेबाजी पर 272 करोड़ रुपए खर्च किए: कानून मंत्रालय
6.3 लाख अदालती मामलों में केंद्र सरकार पक्षकार बनी; पिछले पांच सालों में मुकदमेबाजी पर 272 करोड़ रुपए खर्च किए: कानून मंत्रालय

भारतीय संसद के 2023 मानसून सत्र के दूसरे दिन, लोकसभा सांसद दुष्यंत सिंह ने केंद्र सरकार से जुड़े मामलों को लेकर सवाल उठाए।उन्होंने निम्नलिखित प्रश्नों के जवाब मांगे:(ए) ऐसे मामलों का कुल प्रतिशत जिसमें सरकार एक पक्षकार के रूप में शामिल है;(बी) इन सभी मामलों पर व्यय, वर्ष और प्रकार के अनुसार श्रेणियां;(सी) इन मामलों की प्रकृति और वे अदालतें जहां वे केंद्रित हैं और उनमें शामिल विशिष्ट सरकारी विभाग, वर्ष-वार;(डी) अदालतों में अपील किए गए सेवा मामलों की संख्या जिनमें संवैधानिक अस्पष्टता का मामला...

दोषसिद्धि के बाद 5 साल बीत जाने पर भी पासपोर्ट जारी किया जा सकता है, भले ही अपील लंबित हो: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
दोषसिद्धि के बाद 5 साल बीत जाने पर भी पासपोर्ट जारी किया जा सकता है, भले ही अपील लंबित हो: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकार्ट ने माना कि पासपोर्ट जारी न करने की रोक किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति पर, सजा के 5 साल बीतने के बाद, 2 साल से कम समय तक दोषी ठहराए जाने पर लागू नहीं होगी, भले ही अपील लंबित हो। जस्टिस जगमोहन बंसल ने कहा,“यह सर्वविदित तथ्य है कि भारत में मुकदमे के निष्कर्ष में काफी लंबा समय लगता है। दोषी ठहराए जाने के बाद 5 साल की अवधि बीत जाने के बाद भी...आवेदक के न्याय से भागने की संभावना बेहद कम हो जाती है, हालांकि पूरी तरह से ऐसा नहीं भी हो सकता है।"अदालत उन दोषियों द्वारा...

गुजरात हाईकोर्ट ने एक भाजपा सदस्य द्वारा दूसरे के खिलाफ दायर शिकायत को खारिज कर दिया, एससी/एसटी अधिनियम के दुरुपयोग पर नाराजगी व्यक्त की
गुजरात हाईकोर्ट ने एक भाजपा सदस्य द्वारा दूसरे के खिलाफ दायर शिकायत को खारिज कर दिया, एससी/एसटी अधिनियम के दुरुपयोग पर नाराजगी व्यक्त की

गुजरात हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (एससी/एसटी अधिनियम) के दुरुपयोग पर दुख व्यक्त करते हुए, भाजपा के एक सदस्य द्वारा चोटिला नगरपालिका के अध्यक्ष पद पर रहे एक अन्य भाजपा नेता के खिलाफ दायर शिकायत को खारिज कर दिया।जस्टिस संदीप भट्ट ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "हालांकि अधिनियम अनिवार्य रूप से अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को अत्याचार या उत्पीड़न से बचाने के लिए है, साथ ही इसका दुरुपयोग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। ऐसे अपराध की...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक ही राहत की मांग के लिए बार बार याचिका दायर करने पर वादी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव रखा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक ही राहत की मांग के लिए बार बार याचिका दायर करने पर वादी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव रखा

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उसी राहत की मांग करने वाली याचिका दायर करने के लिए वादी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव रखा, जिसका पहले ही निपटारा किया जा चुका है।चीफ जस्टिस रवि मलिमथ और जस्टिस विशाल मिश्रा की खंडपीठ ने कहा,“यह न्यायालय की प्रक्रिया के दुरुपयोग का स्पष्ट मामला है। पार्टियां वही हैं, आधार वही हैं और प्रार्थना भी वही हैं। इसके बावजूद, ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता ने कानून के प्रावधानों का दुरुपयोग करते हुए और उत्तरदाताओं को ब्लैकमेल करने का प्रयास करते हुए यह याचिका...

दिल्ली हाईकोर्ट ने तहलका और तरुण तेजपाल को मानहानि के मुकदमे में मेजर जनरल अहलूवालिया को 2 करोड़ रुपये का हर्जाना देने का निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने तहलका और तरुण तेजपाल को मानहानि के मुकदमे में मेजर जनरल अहलूवालिया को 2 करोड़ रुपये का हर्जाना देने का निर्देश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को समाचार पत्रिका तहलका, उसके पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल और दो पत्रकारों को 2002 में मेजर जनरल एमएस अहलूवालिया द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे में उन्हें 2 करोड़ रुपये का हर्जाना देने का निर्देश दिया।मार्च 2001 में तहलका द्वारा स्टोरी प्रकाशित की गई, जिसमें अहलूवालिया को नए रक्षा उपकरणों के आयात से संबंधित रक्षा सौदों में कथित भ्रष्ट बिचौलिए के रूप में दर्शाया गया।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि अहलूवालिया की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची, क्योंकि उन्हें न केवल जनता की...

कोई भी अपने बच्चे को वह सब कुछ नहीं दे सकता जो एक मां  दे सकती है: केरल हाईकोर्ट ने दिव्यांग बच्चे को मां से मिलाया
'कोई भी अपने बच्चे को वह सब कुछ नहीं दे सकता जो एक मां दे सकती है': केरल हाईकोर्ट ने दिव्यांग बच्चे को मां से मिलाया

केरल हाईकोर्ट ने एक दिव्यांग बच्चे को उसकी मां से मिलाते हुए कहा कि कोई भी बच्चे को वह सब नहीं दे सकता जो एक मां उसे दे सकती है। जस्टिस पीबी सुरेश कुमार और जस्टिस सीएस सुधा की खंडपीठ ने यह सुनिश्चित करने के लिए माता-पिता के अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल किया कि बच्चे को "दूसरों की दया पर" नहीं छोड़ा जाना चाहिए।मामले की आधार यह है कि याचिकाकर्ता-मां बच्चे के जन्म के बाद अपने पति से अलग रह रही थी। बच्चा अपने पिता के साथ रहता था, जिसने ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, मानसिक मंदता और एकाधिक विकलांगता वाले...

अदालत परिसर में केवल महात्मा गांधी और संत तिरुवल्लुवर की मूर्तियों/चित्रों की अनुमति: मद्रास हाईकोर्ट ने जिला जजों को परिपत्र जारी किया
अदालत परिसर में केवल महात्मा गांधी और संत तिरुवल्लुवर की मूर्तियों/चित्रों की अनुमति: मद्रास हाईकोर्ट ने जिला जजों को परिपत्र जारी किया

मद्रास हाईकोर्ट ने जिला अदालतों को 7 जुलाई को जारी एक परिपत्र के जर‌िए सूचित किया है कि मद्रास हाईकोर्ट की फुल कोर्ट की ओर से ‌लिए गए संकल्प के अनुसार, अब से महात्मा गांधी और संत तिरुवल्लुवर की प्रतिमाओं और चित्रों को छोड़कर, अदालत परिसर के अंदर कहीं भी कोई अन्य चित्र प्रदर्शित नहीं किए जाएंगे। परिपत्र रजिस्ट्रार जनरल (प्रभारी) ने जारी किया है। परिपत्र में लिखा है,"हाल ही में 11.04.2023 को माननीय फुल कोर्ट ने इसी तरह के अनुरोध पर विचार किया और सभी पहले के प्रस्तावों (सुप्रा) को दोहराते हुए...

जम्मू-कश्मीर में मेडिकल अधिकारियों, कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में बताएं: हाईकोर्ट ने सरकार से कहा
जम्मू-कश्मीर में मेडिकल अधिकारियों, कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में बताएं: हाईकोर्ट ने सरकार से कहा

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन से रिपोर्ट मांगी, जिसमें क्षेत्र में मेडिकल अधिकारियों और कर्मचारियों की गंभीर कमी को दूर करने के लिए उठाए गए कदमों का संकेत दिया गया।चीफ जस्टिस एन कोटिस्वर सिंह और जस्टिस एम ए चौधरी की खंडपीठ ने इस आशय का निर्देश आरटीआई कार्यकर्ता बलविंदर सिंह द्वारा 2018 में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया, जिसमें जम्मू-कश्मीर के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों, विशेष रूप से जम्मू प्रांत के दूरदराज के इलाकों में मेडिकल अधिकारियों और पैरामेडिकल स्टाफ...

अगर मंदिर हिंसा को बढ़ावा देने वाले हैं तो उन मंदिरों को बंद करना बेहतर होगा: मद्रास हाईकोर्ट
'अगर मंदिर हिंसा को बढ़ावा देने वाले हैं तो उन मंदिरों को बंद करना बेहतर होगा': मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को इस बात पर अफसोस जताया कि इन दिनों मंदिर उत्सव केवल समूहों के लिए अपनी ताकत दिखाने का केंद्र मंच बन रहे हैं और मंच के संचालन में वास्तव में कोई भक्ति शामिल नहीं है।अदालत ने कहा,“मंदिर का उद्देश्य भक्तों को शांति और खुशी के लिए भगवान की पूजा करने में सक्षम बनाना है। हालांकि, दुर्भाग्य से मंदिर उत्सव हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं और यह केवल समूहों के लिए यह दिखाने का केंद्र बनता जा रहा है कि किसी विशेष क्षेत्र में कौन शक्तिशाली है। इन त्योहारों के आयोजन में कोई भक्ति...

दिल्ली हाईकोर्ट ने एएसआई को कुतुब परिसर के अंदर मुगल मस्जिद पर 109 साल पुराना रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने एएसआई को कुतुब परिसर के अंदर 'मुगल मस्जिद' पर 109 साल पुराना रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को कुतुब मीनार परिसर के अंदर स्थित मस्जिद को संरक्षित स्मारक घोषित करने वाली 1914 में जारी अधिसूचना के संबंध में उसके पास उपलब्ध रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया।जस्टिस प्रतीक जालान दिल्ली वक्फ बोर्ड द्वारा नियुक्त मस्जिद में कथित तौर पर नमाज़ बंद करने के खिलाफ मस्जिद की प्रबंध समिति की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे।विचाराधीन मस्जिद, जिसे 'मुगल मस्जिद' कहा जाता है, कुतुब परिसर में स्थित है। हालांकि, यह कुतुब बाड़े के बाहर है और प्रसिद्ध 'मस्जिद...

मैटरनिटी लीव से इनकार करना महिला कर्मचारी की गरिमा पर हमला, अनुच्छेद 21 का उल्लंघन: उड़ीसा हाईकोर्ट
मैटरनिटी लीव से इनकार करना महिला कर्मचारी की गरिमा पर हमला, अनुच्छेद 21 का उल्लंघन: उड़ीसा हाईकोर्ट

उड़ीसा हाईकोर्ट ने कहा कि मैटरनिटी लीव से इनकार करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त महिलाओं के सम्मान के साथ जीवन जीने के मौलिक अधिकार के खिलाफ है।जस्टिस शशिकांत मिश्रा की एकल पीठ ने सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल के शिक्षक को राहत देते हुए कहा,"यदि किसी महिला कर्मचारी को इस बुनियादी मानव अधिकार से वंचित किया जाता है तो यह व्यक्ति के रूप में उसकी गरिमा पर हमला होगा और इस तरह संविधान के अनुच्छेद -21 के तहत गारंटीकृत जीवन के उसके मौलिक अधिकार का उल्लंघन होगा, जिसकी व्याख्या गरिमा के साथ जीवन...

यूएपीए के तहत अपराधों के लिए किसी भी परिस्थिति में अग्रिम जमानत उपलब्ध नहीं है: केरल हाईकोर्ट
यूएपीए के तहत अपराधों के लिए किसी भी परिस्थिति में अग्रिम जमानत उपलब्ध नहीं है: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को माना कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (यूएपीए एक्ट) के तहत मामलों में सीआरपीसी की धारा 438 के आवेदन का बहिष्कार पूर्ण है और इस प्रकार किसी भी परिस्थिति में यूएपीए के तहत दंडनीय अपराधों के लिए अग्रिम जमानत के लिए कोई आवेदन स्वीकार्य नहीं है।जस्टिस पी.बी. सुरेश कुमार और जस्टिस सी.एस. सुधा की खंडपीठ ने कहा कि यदि इसकी अलग-अलग व्याख्या की गई और अग्रिम जमानत की अनुमति दी गई तो यह बेतुकी स्थिति पैदा होगी, जहां आरोपी व्यक्तियों को बिना शर्त अग्रिम जमानत मिल...