मुख्य सुर्खियां
अधिकारियों की ओर से सकारात्मक घोषणा होने के बाद एकाउंट ऑफिस पेंशन दावे को पलट नहीं सकता: एएफटी ने पायलट की मृत्यु के 24 साल बाद विधवा को राहत दी
सशस्त्र बल न्यायाधिकरण की चंडीगढ़ पीठ ने हाल ही में एक मृत वायु सेना पायलट की पत्नी को 'उदारीकृत पारिवारिक पेंशन' प्रदान की। पायलट का हेलीकॉप्टर 1999 में हिमाचल प्रदेश में एक जीवन रक्षक मिशन के दरमियान प्रतिकूल मौसम की स्थिति के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।जस्टिस धर्म चंद चौधरी और लेफ्टिनेंट जनरल डॉ रणबीर सिंह की पीठ ने कहा,"यह तयशुदा कानून है कि जब संबंधित प्राधिकारी की ओर से दावेदार के पक्ष में सकारात्मक घोषणा की जाती है, तो इसे एकाउंट्स ब्रांच की ओर से पलटा नहीं जा सकता है। उसका कार्य केवल...
जिस किरायेदार की लीज की अवधि समाप्त हो चुकी हो, वक्फ एक्ट के तहत उसे अतिक्रमणकारी माना जाएगाः केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि लीज (पट्टा) की अवधि समाप्त होने के बाद, किरायेदार को वक्फ कानून के तहत 'अतिक्रमणकारी' माना जाएगा।जस्टिस ए मुहम्मद मुस्ताक और जस्टिस सोफी थॉमस ने कहा कि एक बार वक्फ एक्ट लागू हो गया और कोई लीज मौजूद नहीं रही तो पार्टियों के बीच संबंध वक्फ एक्ट के तहत शासित होंगे, न कि ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट के तहत।कोर्ट ने कहा,“ट्रासंफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट एक सामान्य अधिनियम है, जिसके तहत लीज को नियंत्रित किया जाता है। जब कोई विशेष कानून लीज की समाप्ति के बाद किसी किरायेदार...
दस प्रो बोनो केस लड़ें: दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व पत्नी की शिकायत पर वकील के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर रद्द करते हुए वकील को निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक वकील को उनकी पूर्व पत्नी द्वारा उनके खिलाफ दर्ज की गई दो एफआईआर को रद्द करते हुए विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटाने और तलाक लेने के बाद दस प्रो बोनो केस लड़ने करने का निर्देश दिया।जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा ने भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए, 406 और 34 और दहेज निषेध अधिनियम, 1961 की धारा 4 के साथ-साथ आईपीसी की धारा 354 और POCSO अधिनियम की धारा 10 के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया। पीति और पत्नी के बीच वैवाहिक विवादों के चलते पत्नी ने ये मामले दर्ज कराए थे। ...
स्वतंत्रता सैनिक सम्मान पेंशन योजना के तहत केवल स्वतंत्रता सेनानी ही लाभ के पात्र हैं, उग्रवाद से लड़े लोग नहीं: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में कहा कि स्वतंत्रता सैनिक सम्मान पेंशन योजना (एसएसएस पेंशन प्लान) के तहत आतंकवाद के खिलाफ लड़ा व्यक्ति पेंशन नहीं पा सकता है, क्योंकि ऐसा व्यक्ति पेंशन योजना के मानदंडों को पूरा नहीं करता।जस्टिस संजय धर ने कहा कि एसएसएस पेंशन प्लान उन लोगों को सम्मानित करने के लिए विशेष रूप से बनाया गया है, जिन्होंने राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया था।कोर्ट ने कहा,"जिस व्यक्ति ने उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी, वह पेंशन प्लान के...
जोशीमठ संकट: 'ज़मीन डूबने के असली कारण का पता लगाने को लेकर राज्य गंभीर नहीं', उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को पेश होने का निर्देश दिया
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उत्तराखंड के जोशीमठ क्षेत्र में भूस्खलन और धंसाव का अध्ययन करने के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञों को शामिल नहीं करने के लिए राज्य अधिकारियों की खिंचाई की।चीफ जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने कहा,“उत्तरदाताओं ने स्टडी के संचालन में उपरोक्त क्षेत्रों के एक्सपर्ट्स को शामिल नहीं किया है। हमें यह अभिव्यक्ति मिलती है कि राज्य भूमि धंसाव के वास्तविक कारणों का पता लगाने और उभरी स्थिति से गंभीरता से निपटने के प्रति गंभीर नहीं है।सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात का...
बीएसएफ में शामिल होने के बाद ठीक होने वाली बीमारी के कारण बेसिक ट्रेनिंग पूरा नहीं कर पाने वाले कर्मचारी को बर्खास्त करना अनुचित: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बेसिक ट्रेनिंग (Basic Training) पूरा नहीं कर पाने के कारण 'अयोग्य' घोषित कर सेवा से हटा दिए गए बीएसएफ कांस्टेबल के मामले पर सहानुभूतिपूर्वक पुनर्विचार करने का निर्देश दिया। कांस्टेबल को सर्विस से हटाने का आधार यह बताया गया था कि वह इलाज योग्य बीमारी के कारण बेसिक ट्रेनिंग पूरा नहीं कर सकता। कांस्टेबल को यह बीमारी सर्विस में शामिल होने के बाद हुई थी।जस्टिस जगमोहन बंसल की पीठ ने कहा,''किसी कर्मचारी को इस आधार पर बाहर करना बेहद अनुचित लगता है कि वह बीमारी, जो उसे...
[कस्टडी] बच्चे को यह महसूस नहीं कराया जाना चाहिए कि उसे सिर्फ अदालत के आदेश को लागू करने के लिए जबरदस्ती एक से दूसरे के पास ले जाया जा रहा है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि गोद लिए बच्चे को यह महसूस नहीं कराया जाना चाहिए कि उसे सिर्फ़ अदालत के आदेश को लागू करने के लिए जबरदस्ती एक माता-पिता से दूसरे माता-पिता के पास ले जाया जा रहा है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कथित तौर पर दत्तक मां की कस्टडी में रह रहे बच्चे के जैविक माता-पिता को उससे मुलाक़ात करने का अधिकार दिया।जस्टिस अरुण मोंगा की बेंच ने कहा,"फिलहाल, ऊपर बताए अनुसार अंतरिम व्यवस्था (मुलाकात के अधिकार) को बच्चे के कल्याण में सर्वोपरि रखते हुए और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के...
किसी महिला की इज्जत को छूने की कोशिश से बड़ा कोई अपमान नहीं, गुजरात हाईकोर्ट ने 12 साल की लड़की की अबॉर्शन याचिका स्वीकार की; पिता पर रेप का आरोप
गुजरात हाईकोर्ट ने 12 साल की एक लड़की की लगभग 27 सप्ताह की गर्भावस्था को समाप्त करने की याचिका स्वीकार कर ली। लड़की का बलात्कार करने का आरोप उसके उसके पिता के ऊपर है । कोर्ट ने फैसले में कहा, किसी महिला की इज्जत को छूने की कोशिश करने से बड़ा कोई अपमान नहीं है।जस्टिस समीर जे दवे की पीठ ने मामले को दुखद और आश्चर्यजनक माना। उन्होंने फैसले में 'दुर्गा सप्तशती' का उल्लेख करते हुए कहा,"स्त्रिया: समस्ता: सकला जगत्सु [जगत की समस्त स्त्रियां तुम्हारा ही स्वरूप हैं] अर्थात हे देवी जगदम्बे, जगत में जितनी...
'मानसिक क्रूरता' में जीवनसाथी की 'वित्तीय अस्थिरता' को भी शामिल किया जा सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि "मानसिक क्रूरता" शब्द इतना व्यापक है कि यह अपने दायरे में जीवनसाथी की "वित्तीय अस्थिरता" को भी ले सकता है।जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की खंडपीठ ने कहा,“वर्तमान मामले में मानसिक आघात को समझना आसान है, क्योंकि अपीलकर्ता [पत्नी] काम कर रही थी और प्रतिवादी [पति] काम नहीं कर रहा था। अपीलकर्ता और प्रतिवादी की वित्तीय स्थिति में भारी असमानता थी। स्वयं को जीवित रखने में सक्षम होने के प्रतिवादी के प्रयास निश्चित रूप से विफल रहे थे। इस प्रकार की...
उत्तर प्रदेश 'धर्मांतरण विरोधी' कानून | बाइबल बांटना, भंडारा आयोजित करना धार्मिक परिवर्तन के लिए 'प्रलोभन' नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अच्छी शिक्षा देना, पवित्र बाइबिल की किताबें बांटना और भंडारा करना उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम 2021 (The Uttar Pradesh Prohibition of Unlawful Conversion of Religion Act 2021) के तहत धर्म परिवर्तन के लिए 'प्रलोभन' नहीं है। जस्टिस शमीम अहमद की पीठ ने यूपी गैरकानूनी धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की धारा 4 के दायरे की भी व्याख्या की [एफआईआर दर्ज करने में सक्षम व्यक्ति]। अदालत ने अपनी इस व्याख्या में यह बताया कि अधिनियम की धारा 3 के तहत...
आधी रात को पीड़ितों को कॉल करना और उनसे मिलना, विशेषकर यौन उत्पीड़न के पीड़ितों से, उनकी निजता और गरिमा का उल्लंघन है: कलकत्ता हाईकोर्ट ने लेक पुलिस अधिकारियों की आलोचना की
कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक स्वत: संज्ञान मामले में सामूहिक बलात्कार पीड़िता से जुड़े मामले की जांच कर रहे लेक गार्डन और नरेंद्रपुर पुलिस स्टेशन के पुलिस अधिकारियों के आचरण पर कड़ी निंदा व्यक्त की।जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस गौरांग कंठ की खंडपीठ ने आधी रात को पीड़िता को फोन करने, उससे मिलने जाने और मामले को छोड़ने के लिए उसे प्रभावित करने का प्रयास करने वाले किसी व्यक्ति को जमानत देने के लिए पुलिस अधिकारियों को फटकार लगाई।इसके साथ ही खंडपीठ ने कहा,"इस अदालत ने कभी ऐसा मामला नहीं देखा, जहां...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक एसएचओ के खिलाफ महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने, पुलिस स्टेशन में एक बूढ़े व्यक्ति की पिटाई के आरोपों की जांच के आदेश दिए
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस अधीक्षक, सुल्तानपुर को एक स्टेशन हाउस अधिकारी (एसएचओ) के खिलाफ कुछ महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने और पुलिस स्टेशन के अंदर एक बूढ़े व्यक्ति की पिटाई करने के लगाए गए आरोपों की जांच करने का आदेश दिया है। जस्टिस संगीता चंद्रा और जस्टिस नरेंद्र कुमार जौहरी की पीठ ने यह आदेश याचिकाकर्ताओं (कुछ महिलाओं सहित) द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। इस याचिका में आरोप लगाया गया कि जब वे अपने बयान दर्ज कराने के लिए पुलिस स्टेशन गए तो एसएचओ. कूरेभार, जिला...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साल 1998 से 150 रुपए प्रति माह वेतन पर काम कर रहे चौकीदार को राहत दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट हाल ही में एक स्कूल चौकीदार के बचाव में आया, जिसे राज्य सरकार द्वारा 1998 से 150 प्रति माह रुपए की राशि मिल रही थी। न्यायालय ने उनके रोजगार को 'जबरन श्रम' करार दिया और कहा कि यह कानून में अस्वीकार्य है। अदालत ने राज्य को छह सप्ताह की अवधि के भीतर उन्हें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए स्वीकार्य न्यूनतम वेतनमान के बराबर वर्तमान वेतन का भुगतान करने का निर्देश दिया।जस्टिस इरशाद अली की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता के रोजगार की प्रकृति में नियमितता, जिम्मेदारी और यदि नियमित...
सीआरपीसी की धारा 82 - व्यक्ति तभी 'घोषित' भगोड़ा अपराधी होता है, जब इस संबंध में उद्घोषणा प्रकाशित होती है : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि जब तक सीआरपीसी की धारा 82 के अनुसार लिखित उद्घोषणा प्रकाशित नहीं की जाती है, तब तक आवेदक को भगोड़ा घोषित करने का अवसर ही नहीं आता है। जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने सीआरपीसी की धारा 82 के तहत निर्धारित प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि सीआरपीसी की धारा 82 की उपधारा (4) के तहत किसी व्यक्ति को भगोड़ा अपराधी घोषित करने से पहले सीआरपीसी की धारा 82 की उपधारा (1) के तहत एक उद्घोषणा प्रकाशित' की जानी चाहिए।भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एक मामले में खालिद अनवर को...
कलकत्ता हाईकोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप वाला केस रद्द करने से इनकार किया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक याचिकाकर्ता के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इनकार कर दिया। इस याचिकाकर्ता के खिलाफ 4 अन्य आरोपियों के साथ प्रतिवादी नंबर 2 द्वारा दायर शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया है। प्रतिवादी नंबर 2 ने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता ने उसके पति को "गंभीर मानसिक आघात" पहुंचाया, जिसके कारण उसने अपनी जान ले ली थी।जस्टिस सुभेंदु सामंत की एकल पीठ ने मामले को सुनवाई की ओर आगे बढ़ाने का निर्देश देते हुए कहा,केस...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गर्भपात की मांग कर रही नाबालिग बलात्कार पीड़िता को मेडिकल सुविधा और मुआवजा देने का आदेश दिया, पीड़िता के पिता गोद लिए जाने तक बच्चे को रखने के लिए सहमत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को एक 15 वर्षीय बलात्कार पीड़िता को पर्याप्त मेडिकल सुविधा और मुआवजा दिया। अदालत से पीड़ित लड़की अपने 29 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की मांग कर रही थी, लेकिन उसके पिता अपनी बेटी की मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद गोद लिये जाने तक नवजात शिशु की देखभाल करने के लिए सहमत हुए। इसे देखते हुए अदालत ने पीड़िता को पर्याप्त मेडिकल सुविधा और मुआवजा देने का आदेश दिया। बलात्कार पीड़िता ने अपनी गर्भावस्था को समाप्त करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था, हालांकि लड़की की...
सुप्रीम कोर्ट ने रिटरयर्ड जजों की सेवानिवृत्ति के बाद की नियुक्तियों के लिए दो साल के कूलिंग ऑफ पीरियड की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मांग की गई थी कि संवैधानिक अदालत के किसी भी रिटायर्ड जज को राजनीतिक नियुक्ति स्वीकार करने से पहले दो साल की 'कूलिंग ऑफ' अवधि से गुजरना पड़े।उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला, उन आलोचनाओं के मद्देनजर महत्वपूर्ण है, जिनमें कहा जा रहा है कि रिटायर्ड जज सेवानिवृत्ति के बाद चैन की नौकरी स्वीकार कर रहे हैं।जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन की ओर से "न्यायपालिका की स्वतंत्रता, कानून...
एफआईआर दर्ज करने के बाद बहू के व्हाट्सएप मैसेज से पता चलता है कि ससुराल वालों के साथ उसके संबंध सामान्य थे : कलकत्ता हाईकोर्ट ने आईपीसी की धारा 498ए केस रद्द किया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आईपीसी की धारा 498ए के तहत दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। याचिकाकर्ताओं पर उनकी बहू ("विपरित पक्ष नंबर 2") ने कई मौकों पर उसे पीटने की साजिश रचने का आरोप लगाया था। जस्टिस शंपा (दत्त) पॉल ने कहा कि बहू के दावे किसी भी मेडीकल एविडेंस से समर्थित नहीं हैं और उसका मानसिक बीमारियों का इलाज चल रहा था, जिसके कारण कई मौकों पर उसने अपने पति के साथ हिंसक व्यवहार किया।बेंच ने कहा,"एक मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन से पता चलता है कि विपरीत पक्ष नंबर 2 के पति का...
यूपी 'धर्मांतरण विरोधी' कानून की धारा 4 के अनुसार एफआईआर दर्ज कराने के लिए सक्षम व्यक्ति कौन है?: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बताया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को यूपी गैरकानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम 2021 (UP Prohibition of Unlawful Conversion of Religion Act 2021) की धारा 4 के दायरे की व्याख्या की [एफआईआर दर्ज करने में सक्षम व्यक्ति]। अपनी इस व्याख्या में कोर्ट ने बताया कि अधिनियम की धारा 3 के तहत अपराध के संबंध में कौन एफआईआर दर्ज कर सकता है।जस्टिस शमीम अहमद की पीठ ने कहा कि उक्त प्रावधान के आदेश के अनुसार, केवल वह व्यक्ति, जिसका धर्म परिवर्तन किया गया है, उसके माता-पिता, भाई, बहन, या कोई अन्य व्यक्ति जो उससे रक्त,...
'जांच अधिकारी ने बच्चे का पता लगाने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किया': पटना हाईकोर्ट ने सीआईडी को 11 साल पुराने अपहरण मामले की दोबारा जांच करने का आदेश दिया
पटना हाईकोर्ट ने सीआईडी को बिहार के सीवान जिले के 5 साल के एक लड़के के अपहरण के 11 साल पुराने मामले की दोबारा जांच करने का आदेश दिया है।यह फैसला तब आया जब अदालत ने कहा कि जांच अधिकारियों और पर्यवेक्षण अधिकारियों ने अपहृत लड़के या आरोपी व्यक्तियों का पता लगाने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किए।जस्टिस अनिल कुमार सिन्हा ने कहा, “रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्रियों के आधार पर चर्चा से, जैसा कि ऊपर बताया गया है, जो तथ्य सामने आए हैं, वह यह है कि पुलिस ने लगभग पांच साल के बच्चे के अपहरण के संबंध में वर्तमान...







![[कस्टडी] बच्चे को यह महसूस नहीं कराया जाना चाहिए कि उसे सिर्फ अदालत के आदेश को लागू करने के लिए जबरदस्ती एक से दूसरे के पास ले जाया जा रहा है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट [कस्टडी] बच्चे को यह महसूस नहीं कराया जाना चाहिए कि उसे सिर्फ अदालत के आदेश को लागू करने के लिए जबरदस्ती एक से दूसरे के पास ले जाया जा रहा है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2023/09/02/500x300_490115-750x450455422-justice-arun-monga.jpg)











