मुख्य सुर्खियां

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के तोड़फोड़ के खिलाफ स्वत: संज्ञान मामले में नूंह जिला परिषद सदस्य ने हस्तक्षेप आवेदन दायर किया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के तोड़फोड़ के खिलाफ स्वत: संज्ञान मामले में नूंह जिला परिषद सदस्य ने हस्तक्षेप आवेदन दायर किया

नूंह जिला परिषद के एक सदस्य ने हरियाणा में कथित अवैध विध्वंस के खिलाफ पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा सोमवार को की गई स्वत: संज्ञान कार्रवाई में हस्तक्षेप आवेदन दायर किया। आवेदक याहुदा मोहम्मद ने कहा कि जिला प्रशासन ने सांप्रदायिक हिंसा प्रभावित नूंह प्रशासन में हुए विध्वंस अभियान में 200 से अधिक रहवासी घर नष्ट कर दिये।आवेदन में कहा गया है कि “तीन दर्जन से अधिक गांवों में 300 से अधिक परिवार राजस्थान और अन्य राज्यों की ओर जाने के लिए अपना घर छोड़ चुके हैं। नूंह पुलिस की एक टीम ने बिना कोई नोटिस...

गुजरात हाईकोर्ट ने एनआईए कोर्ट द्वारा 2019 में अपहरण विरोधी कानून के तहत आजीवन कारावास की सजा पाए व्यवसायी को बरी किया
गुजरात हाईकोर्ट ने एनआईए कोर्ट द्वारा 2019 में अपहरण विरोधी कानून के तहत आजीवन कारावास की सजा पाए व्यवसायी को बरी किया

गुजरात हाईकोर्ट ने आज मुंबई स्थित व्यवसायी बिरजू किशोर सल्ला को बरी कर दिया, जिन्हें एनआईए कोर्ट ने 2019 में संशोधित अपहरण विरोधी अधिनियम 2016 के तहत दोषी ठहराया था और शेष जीवन के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। गौरतलब है कि जस्टिस एएस सुपेहिया और जस्टिस एमआर मेंगेडे की पीठ ने एनआईए कोर्ट के जून 2019 के फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने आरोपी पर 5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। खंडपीठ ने निर्देश दिया कि यदि जुर्माना अदा कर दिया गया हो तो अपीलकर्ता को वापस कर दिया जाए।कोर्ट ने...

रजिस्ट्रार अस्वीकार्य इस्तीफे के आधार पर सहकारी समिति प्रबंधन समिति को भंग नहीं कर सकते: बॉम्बे हाईकोर्ट
रजिस्ट्रार अस्वीकार्य इस्तीफे के आधार पर सहकारी समिति प्रबंधन समिति को भंग नहीं कर सकते: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि रजिस्ट्रार (सहकारी समितियां) किसी सोसायटी के निदेशक मंडल को इसलिए भंग नहीं कर सकता क्योंकि समिति के आधे सदस्यों ने सोसायटी के इस्तीफे स्वीकार करने से पहले ही इस्तीफा दे दिया है। औरंगाबाद पीठ के जस्टिस किशोर सी संत ने एक रिट याचिका में एक सहकारी समिति के निदेशक मंडल को भंग करने के रजिस्ट्रार के आदेश को रद्द कर दिया, जिसके 12 में से छह सदस्यों ने एक साथ इस्तीफा दे दिया था, यह देखते हुए कि सोसायटी द्वारा इस्तीफे स्वीकार नहीं किए गए थे।कोर्ट ने कहा,“इस न्यायालय...

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा: प्रमाणपत्र में त्रुटि के कारण ईडब्ल्यूएस आरक्षण से वंचित किए गए 3 उम्मीदवारों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा: प्रमाणपत्र में त्रुटि के कारण ईडब्ल्यूएस आरक्षण से वंचित किए गए 3 उम्मीदवारों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 3 सिविल सेवा उम्मीदवारों की याचिका पर नोटिस जारी किया, जिन्होंने दलील दी थी कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रमाणपत्र में की गई लिपिकीय त्रुटि के कारण उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) श्रेणी के तहत आरक्षण से वंचित कर दिया गया था। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि ईडब्ल्यूएस कटऑफ अंक से अधिक अंक प्राप्त करने के बावजूद 2022 में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में उनका चयन नहीं किया गया था। 23 मई 2023 को परिणाम घोषित होने के बाद, उनकी श्रेणी...

दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण का आज तक गठन नहीं हुआ: हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सचिव को तलब किया
'दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण का आज तक गठन नहीं हुआ': हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सचिव को तलब किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह देखते हुए कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 2017 के तहत राष्ट्रीय राजधानी में अब तक स्थायी राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण का गठन नहीं किया गया, राज्य सरकार के स्वास्थ्य सचिव को 15 सितंबर को उसके समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस संजीव नरूला की खंडपीठ ने 02 अगस्त को पारित आदेश में कहा,“यह स्पष्ट किया जाता है कि यदि मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 2017 की धारा 45 और 46 की आवश्यकता के अनुसार स्थायी राज्य मानसिक स्वास्थ्य...

केरल हाईकोर्ट ने 7-वर्षीय बच्चे की लिंग चयनात्मक सर्जरी कराने के लिए माता-पिता की ओर से दायर याचिका खारिज की, ऐसे अनुरोधों की जांच के लिए समिति के गठन का निर्देश दिया
केरल हाईकोर्ट ने 7-वर्षीय बच्चे की लिंग चयनात्मक सर्जरी कराने के लिए माता-पिता की ओर से दायर याचिका खारिज की, ऐसे अनुरोधों की जांच के लिए समिति के गठन का निर्देश दिया

केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को सरकार को इंटरसेक्स बच्चों पर लिंग-चयनात्मक सर्जरी करने के अनुरोधों की जांच करने के लिए विशेषज्ञों की एक राज्य स्तरीय बहु-विषयक समिति गठित करने का निर्देश दिया। समिति में एक बाल रोग विशेषज्ञ/बाल चिकित्सा एंडोक्राइनोलॉजिस्ट, बाल चिकित्सा सर्जन और बाल मनोचिकित्सक/बाल मनोवैज्ञानिक शामिल होंगे। जस्टिस वीजी अरुण की सिंगल जज बेंच ने सरकार से तीन महीने के भीतर शिशुओं और बच्चों पर लिंग चयनात्मक सर्जरी को विनियमित करने के लिए एक आदेश जारी करने का भी आह्वान किया। खंडपीठ ने...

केवल छात्र रियायती दरों का लाभ उठाने के लिए बस में चढ़ते समय स्टूडेंट के साथ अन्य यात्रियों से भेदभाव नहीं किया जा सकता: केरल हाईकोर्ट
केवल छात्र रियायती दरों का लाभ उठाने के लिए बस में चढ़ते समय स्टूडेंट के साथ अन्य यात्रियों से भेदभाव नहीं किया जा सकता: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह राज्य पुलिस प्रमुख को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी करने का निर्देश दिया कि छात्र रियायत दरों के संबंध में स्टूडेंट और बस मालिकों/कर्मचारियों के बीच कानून और व्यवस्था की समस्या पैदा न हो।न्यायालय ने माना कि केवल छात्र रियायती दरों का लाभ उठाने के लिए बस में चढ़ते समय स्टूडेंट के साथ अन्य यात्रियों के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता।जस्टिस पी.वी.कुन्हिकृष्णन ने इस प्रकार कहा,“लेकिन जब तक छात्र रियायतें लागू हैं, बस के मालिक और कर्मचारी बसों में चढ़ते समय...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर को सील करने, गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर को सील करने, गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उस जनहित याचिका (पीआईएल) को वापस लेने की शर्त के साथ खारिज की, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार को वाराणसी कोर्ट के एएसआई सर्वेक्षण आदेश को प्रभावित किए बिना पूरे ज्ञानवापी मस्जिद परिसर को सील करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में एएसआई सर्वेक्षण कराए जाने के वाराणसी कोर्ट के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने बरकरार रखा है।जनहित याचिका, जिसमें विवादित स्थल पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग की गई, विश्व वैदिक सनातन...

नितिन देसाई की आत्महत्या का मामला: एडलवाइस ग्रुप के चेयरमैन ने आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप वाली एफआईआर के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया
नितिन देसाई की आत्महत्या का मामला: एडलवाइस ग्रुप के चेयरमैन ने आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप वाली एफआईआर के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया

एडलवाइस फाइनेंशियल सर्विसेज के ग्रुप चेयरमैन और एडलवाइस एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड के सीईओ ने आर्ट डायरेक्टर नितिन देसाई को कथित तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।राशेष शाह एडलवाइस फाइनेंशियल सर्विसेज के अध्यक्ष हैं और राज कुमार बंसल एडलवाइस एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक और सीईओ हैं।जस्टिस नितिन साम्ब्रे और जस्टिस आरएन लड्ढा की खंडपीठ के समक्ष सीनियर एडवोकेट अमित देसाई ने मंगलवार को...

जस्टिस सुभासिस तलपात्रा ने उड़ीसा हाईकोर्ट के 33वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली
जस्टिस सुभासिस तलपात्रा ने उड़ीसा हाईकोर्ट के 33वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली

उड़ीसा हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सुभासिस तालापात्रा ने मंगलवार को अपने पूर्व मुख्य न्यायाधीश डॉ. एस. मुरलीधर की सेवानिवृत्ति के बाद हाईकोर्ट के 33 वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। उन्हें ओडिशा के राज्यपाल प्रोफेसर गणेशी लाल ने शपथ दिलाई। मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस तालापात्रा के नाम की सिफारिश पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की थी जिसे बाद में केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी थी ।जस्टिस तालापात्रा का जन्म 4 अक्टूबर 1961 को उदयपुर, त्रिपुरा में हुआ था। उन्होंने कलकत्ता...

एमवी एक्ट | पॉलिसी शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन साबित होने पर बीमा कंपनी बीमाधारक से मुआवजा वसूल सकती है: केरल हाईकोर्ट
एमवी एक्ट | पॉलिसी शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन साबित होने पर बीमा कंपनी बीमाधारक से मुआवजा वसूल सकती है: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में मोटर दुर्घटना में शामिल ड्राइवर के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होने पर बीमाधारक (वाहन मालिक) से मुआवजा राशि वसूलने के बीमा कंपनियों के अधिकार को बरकरार रखा है, जब तक कि बीमा कंपनी मोटर वाहन अधिनियम (एमवी एक्ट) की धारा 149(2) के तहत अपना बचाव साबित कर देती।जस्टिस सी. जयचंद्रन ने इस बात पर जोर दिया कि बीमाकर्ता को प्रतिपूर्ति के हकदार होने के लिए मालिक द्वारा पॉलिसी शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन स्थापित करना होगा और बीमाधारक लापरवाही का दोषी था और यह सुनिश्चित करने में...

ट्रायल पूरा होने तक केवल प्रीपेड मोबाइल नंबर रखें: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की पीछा करने वाले आरोपी के लिए जमानत शर्त
'ट्रायल पूरा होने तक केवल प्रीपेड मोबाइल नंबर रखें': पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की 'पीछा' करने वाले आरोपी के लिए जमानत शर्त

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 'स्टॉकिंग' (आईपीसी की धारा 354 डी) के अपराध के आरोपी को जमानत देते हुए हाल ही में उस पर जमानत की शर्त लगाई कि जेल से रिहा होने के 15 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता को ट्रायल पूरा होने तक 'प्रीपेड' सिम/मोबाइल फोन नंबर रखने का निर्देश दिया जाता है।हालांकि, न्यायालय द्वारा लगाया गया प्रतिबंध केवल प्रीपेड सिम [मोबाइल नंबरों] पर है, न कि आरोपी के स्वामित्व वाले पोस्ट-पेड कनेक्शन या लैंडलाइन नंबरों पर।जस्टिस अनूप चितकारा की पीठ ने संबंधित पुलिस इंस्पेक्टर/पुलिस आयुक्त को यह भी...

मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि मुझे ओडिशा के मुख्य न्यायाधीश के रूप में भेजा गया: सीजे मुरलीधर
'मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि मुझे ओडिशा के मुख्य न्यायाधीश के रूप में भेजा गया': सीजे मुरलीधर

उड़ीसा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद पर दो साल और सात महीने से अधिक समय तक रहे डॉ. जस्टिस एस. मुरलीधर ने सोमवार दोपहर फुल कोर्ट रेफरेंस में भाग लिया, जो उनके सेवानिवृत्ति पर उन्हें विदाई देने के लिए आयोजित किया गया था। उन्होंने उड़ीसा हाईकोर्ट के 32 वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य भार संभाला था। मनोनीत मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुभासिस तालापात्रा और न्यायालय के सभी न्यायाधीशों ने इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की।एडवोकेट जनरल अशोक कुमार परिजा ने संस्थान की सेवा करने और इसे नई ऊंचाइयों पर ले...

उड़ीसा में बेंच और बार के बीच संबंध बेहतर हुए हैं : जस्टिस डॉक्टर एस. मुरलीधर
उड़ीसा में बेंच और बार के बीच संबंध बेहतर हुए हैं : जस्टिस डॉक्टर एस. मुरलीधर

उड़ीसा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ. जस्टिस एस. मुरलीधर ने सोमवार सुबह आखिरी बार अपने न्यायालय की अध्यक्षता की, क्योंकि वह सेवानिवृत्ति हो रहे हैं। उन्होंने न्यायालय के नामित मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुभासिस तालापात्रा के साथ बेंच साझा की। सुनवाई के लिए सेरेमोनियल बेंच के समक्ष तीन जनहित याचिकाएं (पीआईएल) सूचीबद्ध की गईं, जिनमें से दो मामले पर्यावरणीय मुद्दों से संबंधित थे और उन्हें वापस लेने की अनुमति दी गई और याचिकाकर्ताओं को इसके बजाय राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) से संपर्क करने की...

धारा 498ए आईपीसी | मानसिक क्रूरता मन की एक स्थिति, वैवाहिक मामलों में समान मानक नहीं हो सकते: कलकत्ता हाईकोर्ट
धारा 498ए आईपीसी | मानसिक क्रूरता मन की एक स्थिति, वैवाहिक मामलों में समान मानक नहीं हो सकते: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में एक पति द्वारा अपने जीवनसाथी/शिकायतकर्ता पर मानसिक और शारीरिक क्रूरता के कथित अपराधों के लिए दोषी ठहराए जाने के ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील की अनुमति दी थी।जस्टिस शंपा (दत्त) पॉल की एकल पीठ ने कहा, हालांकि इस गवाह ने कहा है कि अपीलकर्ता और उसके परिवार के सदस्यों द्वारा उस पर हमला किया गया था और उसका खून बह रहा था, लेकिन रिकॉर्ड पर कोई मेडिकल दस्तावेज या चोट की कोई रिपोर्ट नहीं है। मानसिक क्रूरता के प्रश्न पर उस विशेष समाज के वैवाहिक संबंधों के मानदंडों, उनके...

मथुरा की ईदगाह मस्जिद को हटाने, एएसआई द्वारा परिसर की खुदाई की मांग करने वाली 2020 में दायर जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट 23 अगस्त को सुनवाई करेगा
मथुरा की ईदगाह मस्जिद को हटाने, एएसआई द्वारा परिसर की खुदाई की मांग करने वाली 2020 में दायर जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट 23 अगस्त को सुनवाई करेगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट 23 अगस्त को मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद स्थल को कृष्ण जन्म भूमि के रूप में मान्यता देने की मांग वाली एक जनहित याचिका (2020 में स्थानांतरित) पर सुनवाई करेगा। एडवोकेट महक माहेश्वरी द्वारा 2020 में दायर की गई यह जनहित याचिका पहले जनवरी 2021 में डिफ़ॉल्ट रूप से खारिज कर दी गई थी, हालांकि, मार्च 2022 में इसे बहाल कर दिया गया था।अब आज चीफ जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर और जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की पीठ के समक्ष वीसी सुविधा के माध्यम से याचिकाकर्ता महक माहेश्वरी द्वारा मामले का उल्लेख किया...

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के दुरुपयोग की आलोचना की, संपत्ति विवाद पर आपराधिक मामला रद्द किया
कर्नाटक हाईकोर्ट ने एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के दुरुपयोग की आलोचना की, संपत्ति विवाद पर आपराधिक मामला रद्द किया

कर्नाटक हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रावधानों के तहत दो व्यक्तियों के खिलाफ शुरू किए गए अभियोजन को रद्द कर दिया है, जो याचिकाकर्ताओं द्वारा की गई शिकायत पर पुलिस द्वारा उनके खिलाफ घर में अतिक्रमण और लगातार उत्पीड़न के आरोप में आरोप पत्र दायर करने के तुरंत बाद शिकायतकर्ता द्वारा पंजीकृत किया गया।ज‌स्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल न्यायाधीश पीठ ने रसिक लाल पटेल और एक अन्य द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए कहा, “यह मामला अधिनियम के प्रावधानों और...

धारा 104 सीपीसी| जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा,  निषेधाज्ञा मामलों में अपीलीय न्यायालय की शक्ति प्रतिबंधित हो गई है
धारा 104 सीपीसी| जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा, निषेधाज्ञा मामलों में अपीलीय न्यायालय की शक्ति प्रतिबंधित हो गई है

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा कि एक अपीलीय कोर्ट को, केवल इस धारणा पर कि अगर उसने शुरू में मामले पर विचार किया होता तो वह एक अलग निष्कर्ष पर पहुंच सकता था, निषेधाज्ञा आवेदनों में हस्तक्षेप करने और निचली अदालत के फैसले को पलटने में संकोच करना चाहिए। फैसले में इस बात पर जोर दिया गया कि यदि ट्रायल कोर्ट अपने विवेक का उपयोग उचित और विवेकपूर्ण तरीके से करता है, तो अपीलीय अदालत को उसके अधिकार और अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।जस्टिस जावेद इकबाल वानी ने...

कथित तौर पर राज्य की नीति का उल्लंघन करने वाले स्थानांतरण आदेश को रिट क्षेत्राधिकार में चुनौती नहीं दी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
कथित तौर पर राज्य की नीति का उल्लंघन करने वाले स्थानांतरण आदेश को रिट क्षेत्राधिकार में चुनौती नहीं दी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि राज्य की नीति के उल्लंघन में कथित रूप से पारित किए गए स्थानांतरण आदेश को रिट क्षेत्राधिकार में चुनौती नहीं दी जा सकती क्योंकि इससे कोई वैधानिक अधिकार प्रभावित नहीं होता है। राज्य की नीतियां प्रशासनिक प्रकृति की होती हैं और विधायिका द्वारा बनाए गए वैधानिक कानूनों से अलग होती हैं। जस्टिस जेजे मुनीर ने कहा,“स्थानांतरण वास्तव में सेवा की अनिवार्यता है और संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हमारे रिट क्षेत्राधिकार के प्रयोग में इस न्यायालय द्वारा हस्तक्षेप केवल तभी स्वीकार्य...