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नानी कानूनी अभिभावक बने बिना भी नाबालिग के लिए भरण-पोषण की मांग कर सकती हैं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि नानी, नाबालिग की कानूनी अभिभावक (लीगल गार्जियन) नियुक्त हुए बिना भी CrPC की धारा 125 के तहत अपने नाती-नातिन के लिए भरण-पोषण की मांग कर सकती हैं। [2026 LiveLaw (MP) 420]इस बात पर जोर देते हुए कि CrPC की धारा 125 की व्याख्या सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की जानी चाहिए, जस्टिस द्वारकाधीश बंसल की बेंच ने कहा:"CrPC की धारा 125 के प्रावधान की व्याख्या इस तरह की जानी चाहिए, जिससे सामाजिक न्याय को बढ़ावा मिले और असहाय लोगों को इसका लाभ मिल सके। फैमिली कोर्ट...

मुकदमा चलाने के लिए दहेज की रकम पर पहले से सहमति होना ज़रूरी नहीं; शादी के बाद दहेज की मांग करना भी दंडनीय: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि शादी के बाद की गई दहेज की मांग पर भी 'दहेज निषेध अधिनियम' की धारा 4 लागू हो सकती है, भले ही शादी से पहले दहेज को लेकर कोई समझौता न हुआ हो। [2026 LiveLaw (MP) 419]अपीलीय अदालत के उस आदेश को रद्द करते हुए, जिसमें एक पति और उसके पिता को बरी कर दिया गया था, जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने कहा,"यह एक संस्कृति या परंपरा है कि दहेज अधिनियम की धारा 4 के तहत अपराध के लिए पहले से दहेज का कोई समझौता होना अनिवार्य शर्त नहीं है"... "दहेज" का अर्थ है कोई भी संपत्ति या कीमती वस्तु,...

राजस्थान हाईकोर्ट ने अमेरिका में रह रही रेप पीड़िता को समन भेजने के लिए भारत-अमेरिका संधि का सहारा लिया
राजस्थान हाईकोर्ट ने भारत और अमेरिका के बीच हुई 'म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी' (MLAT) और BNSS की धारा 110 का इस्तेमाल करते हुए रेप केस की उस शिकायतकर्ता महिला का पता लगाने और उसे नोटिस भेजने का निर्देश दिया, जो शिकायत दर्ज कराने के बाद अमेरिका चली गई थी।भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 110 उन मामलों से जुड़ी है, जहां भारत के बाहर रहने वाले किसी व्यक्ति तक कोर्ट के नोटिस या समन पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने संबंधित देश के साथ कोई आपसी समझौता (Reciprocal Arrangement) किया हो।जस्टिस...

CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका की न्यायिक हिरासत के खिलाफ दायर याचिका पर आज सुनवाई करेगा दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका की उस याचिका पर आज सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया, जिसमें उन्होंने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी, जिसके तहत उनकी न्यायिक हिरासत को दो और दिनों के लिए बढ़ा दिया गया।इस मामले को आज (बुधवार) तत्काल सुनवाई के लिए रखा गया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। यह मामला जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच के सामने सूचीबद्ध किया गया।इस बीच, दास और रंका को SEM कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा, क्योंकि...

क्या प्रैक्टिस की जगह बदलने पर 'सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस' को फिर से जारी किया जा सकता है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी बार काउंसिल से पूछा
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने उत्तर प्रदेश बार काउंसिल से स्पष्टीकरण मांगा कि क्या किसी वकील के 'सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस' (CoP) को उसकी प्रैक्टिस की जगह में बदलाव को दर्शाने के लिए फिर से जारी किया जा सकता है।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने पूछा कि क्या CoP को इस तरह फिर से जारी करना संभव है। अगर है तो क्या इसके लिए कोई समय-सीमा तय है?बेंच ने यह स्पष्टीकरण तब मांगा, जब वह गिरधारी लाल यादव द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका 'अवध बार एसोसिएशन' के...

पुलिस थानों में CCTV कैमरों की जांच से जुड़े अपने फरवरी 2026 के आदेश को जारी न करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
यह देखते हुए कि कोई प्रशासनिक समिति किसी न्यायिक आदेश को रोक कर नहीं रख सकती, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में पुलिस थानों में CCTV कैमरों के कामकाज की जांच के लिए 'सरप्राइज इंस्पेक्शन' (अचानक निरीक्षण) के निर्देशों को जारी करने में हुई देरी पर नाराजगी जताई।कोर्ट ने कहा,"यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक न्यायिक आदेश को सिर्फ इसलिए लंबित रखा गया, क्योंकि समिति उस पर विचार नहीं कर सकी।" जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच को बताया गया कि कोर्ट का पिछला आदेश - जिसमें उत्तर प्रदेश के सभी मुख्य...

'कानून के प्रति कोई सम्मान नहीं, प्रतिबंधित क्षेत्रों में विरोध-प्रदर्शन बुलाने की आदत': CJP नेताओं की हिरासत बढ़ाने पर एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की टिप्पणी
प्रतिबंधित (डी-नोटिफाइड) जगहों पर बार-बार विरोध-प्रदर्शन बुलाने को कानून के प्रति सम्मान की कमी मानते हुए स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) ने 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत चल रही कार्यवाही में CJP नेताओं आशुतोष रंका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ा दी।स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ऋतु राज ने 19 अक्टूबर के अपने आदेश में कहा कि दोनों प्रतिवादियों ने जानबूझकर 11 अक्टूबर को भरे गए बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया और तुरंत शांति भंग करने का काम...

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना करते हुए उसे 'न्याय से वंचित करना' कहना अपराध नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट ने FIR रद्द की
असहमति जताने के अधिकार के दायरे को स्पष्ट करते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में 13 लोगों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द की। इन लोगों पर आरोप था कि उन्होंने एक सार्वजनिक दीवार पर ऐसे नारे लिखे थे, जिनमें सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले की आलोचना की गई थी। [2026 LiveLaw (Kar) 425]जस्टिस एच.पी. संदेश की सिंगल बेंच ने कहा कि किसी फैसले के प्रति केवल असंतोष जताना, देशद्रोह या समाज में अशांति फैलाने के बराबर नहीं है।कोर्ट ने कहा,"...ऐसा लगता है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के संबंध में आवाज उठाई गई। इसमें केवल...

IAF विमान में प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं के रिकॉर्ड RTI के दायरे से बाहर: दिल्ली हाईकोर्ट ने CIC का आदेश रद्द किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय वायु सेना (IAF) के विमान में भारत के प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं से जुड़े 'स्पेशल फ्लाइट रिटर्न्स' (SFR-II) के विवरण को 'सूचना का अधिकार' अधिनियम (RTI Act) के तहत सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, यदि ऐसा करने से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो या प्रधानमंत्री के जीवन और शारीरिक सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा हो।जस्टिस अमित महाजन ने कहा कि केवल सुरक्षा कर्मियों के नाम और उनकी पहचान से जुड़ी जानकारी को हटा देने से, इन रिकॉर्ड्स को सार्वजनिक करने से पैदा होने वाले सुरक्षा...

'पढ़ाई पर ध्यान दें': इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के खिलाफ बार-बार बेबुनियाद याचिकाएं दायर करने पर हाईकोर्ट ने छात्र को चेतावनी दी, अपील खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक BA छात्र की अपील खारिज की। छात्र ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के खिलाफ अपनी याचिकाएं खारिज होने को चुनौती दी थी। कोर्ट ने उसे बेबुनियाद याचिकाएं दायर करने के खिलाफ चेतावनी दी और कहा कि ऐसे मामले दायर करने पर उसके खिलाफ सख्त आदेश दिए जा सकते हैं।चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की बेंच ने पाया कि छात्र का इरादा अपनी पढ़ाई करने का नहीं, बल्कि पढ़ाई से इतर गतिविधियों में शामिल होने का लग रहा था।कोर्ट ने कहा,"इस अपील में कोई दम नहीं है; इसलिए इसे खारिज...

आयु में छूट देने वाली कार्यकारी अधिसूचना MCD के अलग भर्ती नियमों से ऊपर नहीं हो सकती: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस भरत पाराशर की खंडपीठ ने कहा कि आयु में छूट देने वाली कोई कार्यकारी अधिसूचना MCD जैसी स्वायत्त संस्था के अलग भर्ती नियमों (Recruitment Rules) को दरकिनार नहीं कर सकती, जब तक कि उसे खुद उन नियमों या भर्ती विज्ञापन में शामिल न किया गया हो।मामले की पृष्ठभूमियाचिकाकर्ता (आवेदक) का जन्म 27.04.1982 को हुआ था और वह अनारक्षित (Unreserved) श्रेणी से संबंधित है। वह 2012 से DoE, GNCTD के साथ अतिथि शिक्षक (Guest Teacher) के रूप में काम कर रही थी। दिल्ली...

BREAKING | जेल से अभी रिहा नहीं होंगे CJP नेता, कोर्ट ने सौरव दास और आशुतोष रंका की कस्टडी दो दिन बढ़ाई
दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका की न्यायिक हिरासत (जुडिशियल कस्टडी) को दो दिन और बढ़ा दिया।यह मामला उनके द्वारा पहले भरे गए 'पीस बॉन्ड' (शांति बनाए रखने के मुचलके) के कथित उल्लंघन से जुड़ा है।आरोप है कि उन्होंने निषेधाज्ञा (Prohibitory Orders) का उल्लंघन करते हुए जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने की कोशिश की थी।इससे पहले, 14 अक्टूबर को एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट महेश कुमार मीणा ने इन दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था। इस मामले में...

अंकिता भंडारी हत्याकांड: दुष्यंत गौतम के राज्यपाल पद की शपथ लेने का सिक्किम बार एसोसिएशन ने किया विरोध, राष्ट्रपति से नियुक्ति रोकने की अपील
सिक्किम बार एसोसिएशन (हाईकोर्ट और अधीनस्थ अदालतें) ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राज्यपाल-नामित दुष्यंत कुमार गौतम के शपथ ग्रहण समारोह को स्थगित करने और 2022 के अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े विवाद का समाधान होने तक उनकी नियुक्ति के वारंट को लंबित रखने की अपील की। हालांकि, गौतम ने सोमवार को सिक्किम के 21वें राज्यपाल के रूप में शपथ ले ली। सिक्किम हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ए. मुहम्मद मुस्ताक ने उन्हें पद की शपथ दिलाई।राष्ट्रपति को भेजे गए तत्काल प्रतिवेदन में बार एसोसिएशन ने मामले में तुरंत...

उमर खालिद और शरजील इमाम को बहुत पहले ही जमानत मिल जानी चाहिए थी: जस्टिस सुधांशु धूलिया
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस सुधांशु धूलिया ने अपनी निजी राय व्यक्त करते हुए कहा कि दिल्ली दंगों की 'बड़ी साजिश' (लार्जर कॉन्स्पिरेसी) मामले में विचाराधीन कैदी के तौर पर छह साल से अधिक समय से जेल में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम को बहुत पहले ही जमानत मिल जानी चाहिए थी।जस्टिस धूलिया ने 'भारतीय संविधान में न्याय की परिकल्पना' (विज़न ऑफ़ जस्टिस इन द इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन) विषय पर आयोजित तीसरे 'सर सैयद व्याख्यान' के दौरान, न्यायिक स्वतंत्रता पर एक श्रोता के सवाल का जवाब देते हुए यह टिप्पणी...

सुप्रीम कोर्ट पर 'कब्जा' करने की कोशिश कर रही है सरकार: सीनियर वकील कपिल सिब्बल
सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने मीडिया सहित विभिन्न संस्थानों पर नियंत्रण कर लिया है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट एक ऐसी संस्था है, जिस पर कब्जा नहीं किया गया।मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और SIR के खिलाफ हालिया विरोध प्रदर्शनों पर सरकार की प्रतिक्रिया पर एक संवाददाता सम्मेलन में बोलते हुए सिब्बल ने पूरा विश्वास जताया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट पर कब्जा करने में सफल नहीं होगी।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने 2014 से संस्थानों पर कब्जा करने की रणनीति अपनाई। उन्होंने कहा कि...

रिटायरमेंट के समय लिया गया 'इंडेंनिटी बॉन्ड' राज्य को गलत तरीके से तय किए गए वेतन की वसूली करने का अधिकार नहीं देता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी से उसके रिटायरमेंट के समय लिया गया कोई 'अंडरटेकिंग' या 'इंडेंनिटी बॉन्ड' राज्य को इस बात का अधिकार नहीं देता कि वह वेतनमान गलत तरीके से तय होने के कारण दिए गए अतिरिक्त वेतन की वसूली कर सके। ऐसी वसूली केवल तभी की जा सकती है, जब वह 'अंडरटेकिंग' वेतन तय करते समय ही दी गई हो, जिसे बाद में गलत पाया गया हो।'पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट बनाम जगदेव सिंह' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता ने कहा:"जगदेव सिंह मामले में...

Public Tender| सड़क बनाने के अनुभव की तुलना टाउनशिप के आंतरिक विकास कार्यों से नहीं की जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सड़क बनाने और उसके रखरखाव का अनुभव टाउनशिप के आंतरिक विकास कार्यों के अनुभव के बराबर नहीं हो सकता। साथ ही यह अनुभव टेंडर की एक अनिवार्य शर्त थी, जिसमें किसी भी तरह की छूट नहीं दी जा सकती।जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने कहा:"यदि प्राधिकरण सड़क बनाने के कार्य अनुभव को टाउनशिप के आंतरिक विकास कार्यों के अनुभव के बराबर मान लेता है तो पात्रता की शर्त का कोई अर्थ ही नहीं रह जाएगा। ऐसा इसलिए है, क्योंकि टाउनशिप विकसित करने के लिए जिस विशेष प्रकार...

स्वीकार किए गए अनुबंध संबंधी बकाया का भुगतान न करना मनमाना, इसकी वसूली के लिए रिट याचिका दायर की जा सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अनुबंध संबंधी उन बकायों को रोक कर रखना, जिन्हें राज्य प्राधिकरण स्वयं स्वीकार करता है, मनमाना कदम है। ऐसे बकायों की वसूली के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दायर की जा सकती है।न्यायालय ने स्पष्ट किया कि रिट अधिकार क्षेत्र (Writ Jurisdiction) में धन संबंधी दावों पर विचार न करने का नियम कोई कठोर या पूर्ण नियम नहीं है; यह उन मामलों में लागू नहीं होता, जहां प्राधिकरण स्वयं बकाया राशि स्वीकार करता है। जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की...

फर्जी आधार कार्ड बनवाने में मदद का आरोप: राजस्थान हाईकोर्ट ने खारिज की सरकारी अधिकारियों की जमानत याचिका
राजस्थान हाईकोर्ट ने उन आरोपियों की दूसरी जमानत याचिका भी खारिज की, जिन पर UIDAI (आधार कार्ड प्रोजेक्ट) की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। इन लोगों ने एक ऐसे व्यक्ति की मदद की थी, जो आधार कार्ड एनरोलमेंट/अपडेशन सेंटर चला रहा था, लेकिन यह सेंटर UIDAI की शर्तों के अनुसार नहीं था।जमानत मांगने वाले ये लोग सरकारी अधिकारी हैं, जो प्रोग्रामर और असिस्टेंट प्रोग्रामर के तौर पर काम कर रहे थे। इन पर आरोप है कि ये फर्जी आधार कार्ड बनाने, उनमें हेरफेर करने और जाली दस्तावेज तैयार करने में शामिल थे।...

अवैध संबंध के आरोप से किसी महिला का 'विधवा' के रूप में कानूनी दर्जा खत्म नहीं होता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी महिला की शादी और उसके पति की मौत की बात मान ली गई तो उसका 'विधवा' होना एक कानूनी परिणाम है। यह दर्जा सिर्फ इसलिए खत्म नहीं हो जाता, क्योंकि उस पर पति की मौत के बाद किसी दूसरे पुरुष के साथ संबंध रखने का आरोप है।जस्टिस अनिल कुमार-X ने कहा:"विधवा का दर्जा, शादी और पति की मौत से मिलने वाला एक कानूनी दर्जा है। इसे सिर्फ इसलिए खत्म नहीं किया जा सकता, क्योंकि कोई व्यक्ति या समाज अपनी निजी मान्यताओं, आचरण या सुविधा के आधार पर इस दर्जे को मानने से इनकार कर दे। किसी...
