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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दहेज की मांग के कारण गर्भवती पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोपी पति को ज़मानत देने से इनकार किया
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दहेज की मांग के कारण गर्भवती पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोपी पति को ज़मानत देने से इनकार किया

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उस पति को रेगुलर ज़मानत देने से इनकार किया, जिस पर दहेज की मांग को लेकर अपनी पत्नी को लगातार शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और अंततः उसे आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि ज़मानत अर्ज़ी पर विचार करते समय FIR दर्ज करने में देरी और गवाहों के बयानों में कथित विसंगतियों जैसे मुद्दे ट्रायल के दौरान देखे जाने वाले मामले हैं और उन पर अभी पक्के तौर पर विचार नहीं किया जा सकता।चीफ़ जस्टिस रमेश सिन्हा, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 483...

गिरफ्तारी में मौलिक अधिकारों की अनदेखी कर रही पुलिस, न्यायिक फैसलों को भी तवज्जो नहीं देती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
गिरफ्तारी में मौलिक अधिकारों की अनदेखी कर रही पुलिस, न्यायिक फैसलों को भी तवज्जो नहीं देती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी के दौरान संवैधानिक सुरक्षा उपायों के पालन को लेकर पुलिस के रवैये पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस ने परंपरागत रूप से संविधान के अनुच्छेद 22(1) के प्रावधानों की "घोर उपेक्षा" की। अदालत ने कहा कि पुलिस अक्सर गिरफ्तारी की शक्ति का प्रयोग करते समय मौलिक अधिकारों के महत्व को समझने में विफल रहती है और इन अधिकारों को लागू करने वाले न्यायिक फैसलों को भी तिरस्कार की दृष्टि से देखती है।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने यह टिप्पणी एक व्यक्ति की...

13 साल से अधिक जेल में रहने के बाद आसाराम को पहली पैरोल, राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- राज्य की आशंकाएं महज कल्पना
13 साल से अधिक जेल में रहने के बाद आसाराम को पहली पैरोल, राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- राज्य की आशंकाएं महज कल्पना

राजस्थान हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराए जा चुके स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम को 20 दिन की पहली पैरोल देने का आदेश दिया।अदालत ने कहा कि आसाराम की उम्र और 13 वर्ष से अधिक समय तक जेल में रहने के तथ्य को देखते हुए वह पहली पैरोल पाने के हकदार हैं। एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने पैरोल आवेदन खारिज करने के लिए राज्य सरकार की ओर से दिए गए कारणों को खारिज करते हुए कहा कि वे भ्रामक हैं और बिना किसी आधार के महज कल्पना पर आधारित हैं।अदालत ने अपने आदेश में...

E-20 पेट्रोल नीति पर फर्जी AI वीडियो: हाईकोर्ट ने नितिन गडकरी के खिलाफ मानहानिकारक सामग्री हटाने का दिया आदेश
E-20 पेट्रोल नीति पर फर्जी AI वीडियो: हाईकोर्ट ने नितिन गडकरी के खिलाफ मानहानिकारक सामग्री हटाने का दिया आदेश

बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के खिलाफ E-20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) नीति को लेकर प्रसारित किए गए कथित फर्जी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से तैयार वीडियो तथा अन्य मानहानिकारक सामग्री को हटाने का आदेश दिया।अदालत ने प्रथम दृष्टया इन सामग्रियों को स्वतः मानहानिकारक माना।जस्टिस आरिफ डॉक्टर की एकल पीठ ने बुधवार (5 अगस्त) को निर्देश दिया कि गडकरी की ओर से मुकदमे में जिन सभी पोस्ट और वीडियो की पहचान की गई, उन्हें संबंधित मंचों से हटाया जाए।साथ ही...

राहुल गांधी मानहानि मामले में पोते की दलील- गाय की पूजा के खिलाफ थे सावरकर, माना सिर्फ़ एक उपयोगी जानवर
राहुल गांधी मानहानि मामले में पोते की दलील- गाय की पूजा के खिलाफ थे सावरकर, माना सिर्फ़ एक उपयोगी जानवर

पुणे स्पेशल MP/MLA कोर्ट में अपनी गवाही जारी रखते हुए सत्यकी सावरकर ने मंगलवार (4 अगस्त) को माना कि उनके दादाजी के भाई विनायक सावरकर हमेशा गाय को एक 'उपयोगी' जानवर मानते थे। वास्तव में, उन्होंने अपनी एक किताब में साफ़ लिखा था कि गाय सिर्फ़ एक जानवर है और उसे देवता या देवी मानना ​​न सिर्फ़ इंसानियत का, बल्कि दिव्यता की सोच का भी अपमान होगा।सत्यकी से अभी एक क्रिमिनल मानहानि केस में जिरह (Cross-Examination) हो रही है। यह केस उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ख़िलाफ़ किया, जिसमें आरोप लगाया गया...

हमले में कृपाण का इस्तेमाल करने के आरोपी सिख व्यक्ति पर आर्म्स एक्ट के तहत आरोप सही: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
हमले में कृपाण का इस्तेमाल करने के आरोपी सिख व्यक्ति पर आर्म्स एक्ट के तहत आरोप सही: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि कृपाण का इस्तेमाल करके चोट पहुँचाने के आरोपी सिख व्यक्ति को आरोप तय करने के चरण में संविधान के आर्टिकल 25 के स्पष्टीकरण I (Explanation I) के तहत मिलने वाली संवैधानिक सुरक्षा का दावा करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने माना कि कृपाण को आस्था की ज़रूरी चीज़ के तौर पर रखा गया था या हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया गया, इसका फ़ैसला सिर्फ़ ट्रायल के दौरान ही हो सकता है।इस तरह कोर्ट ने उन आरोपियों के समूह के ख़िलाफ़ IPC की धारा 307 (हत्या की कोशिश) के तहत लगे आरोप को...

PFI Terror Plot Case | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2021 में गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ़ ट्रायल में कोई प्रगति न होने पर NIA कोर्ट से किया सवाल
PFI 'Terror Plot' Case | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2021 में गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ़ ट्रायल में कोई प्रगति न होने पर NIA कोर्ट से किया सवाल

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को PFI टेरर प्लॉट के कथित मामले में 2021 में गिरफ्तार 2 आरोपियों के ट्रायल में प्रगति न होने पर हैरानी जताई और सवाल उठाए।हाईकोर्ट ने लखनऊ के NIA/ATS स्पेशल सेशंस जज से विस्तृत रिपोर्ट मांगी और पूछा कि ट्रायल को जल्द पूरा करने और गवाहों से पूछताछ (विटनेस एग्जामिनेशन) ठीक से कराने के उसके पहले के निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की बेंच ने यह निर्देश तब दिया, जब वे अंसड बदरुद्दीन और फ़िरोज़ खान की तीसरी...

क्या ज़मानत खारिज होने के बाद गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती दी जा सकती है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया जवाब
क्या ज़मानत खारिज होने के बाद गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती दी जा सकती है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया जवाब

मध्य प्रदेश राज्य बनाम कुसुम साहू [2025 LiveLaw (SC) 1110] मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2025 के फैसले से अलग राय रखते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पिछले हफ्ते कहा कि रेगुलर ज़मानत अर्ज़ी खारिज होने का मतलब यह नहीं है कि बाद में भारत के संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ्तारी और न्यायिक रिमांड की वैधता को चुनौती नहीं दी जा सकती।जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की बेंच ने स्पष्ट किया कि कुसुम साहू मामले में तय किया गया सिद्धांत वहां लागू नहीं होगा, जहां कोर्ट का सरोकार केवल गिरफ्तारी और...

सरकारी कल्याण योजना के तहत लाभार्थी को दिए गए मुआवज़े को चुनौती देने के लिए इंश्योरेंस कंपनी रिट याचिका दायर नहीं कर सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
सरकारी कल्याण योजना के तहत लाभार्थी को दिए गए मुआवज़े को चुनौती देने के लिए इंश्योरेंस कंपनी रिट याचिका दायर नहीं कर सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि इंश्योरेंस कंपनी, राज्य सरकार और इंश्योरेंस कंपनी के बीच हुए समझौते (MoU) के कथित उल्लंघन का हवाला देकर, सरकारी कल्याण योजना के तहत लाभार्थी को दिए गए मुआवज़े को चुनौती देने के लिए संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं कर सकती।कोर्ट ने कहा कि ऐसा विवाद मूल रूप से अनुबंध (Contract) से जुड़ा है और इसे उचित सिविल, कमर्शियल या आर्बिट्रेशन फोरम के सामने उठाया जाना चाहिए।कोर्ट ने देखा कि योजना के लाभार्थी MoU का हिस्सा नहीं हैं और उन्हें...

जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट का मामला: केजरीवाल, सिसोदिया समेत अन्य दिल्ली हाईकोर्ट में हुए पेश
जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट का मामला: केजरीवाल, सिसोदिया समेत अन्य दिल्ली हाईकोर्ट में हुए पेश

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, सौरभ भारद्वाज समेत अन्य नेताओं ने मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट में अवमानना मामले में पेश होकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। यह मामला जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित रूप से आपत्तिजनक अभियान चलाने के आरोपों से जुड़ा है।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डूडेजा की खंडपीठ ने बताया कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक, संजय सिंह, विनय मिश्रा और सौरभ भारद्वाज को नोटिस मिल चुका है और उन्होंने कोर्ट में...

आपराधिक मामला लंबित होने मात्र से चरित्र प्रमाण पत्र देने से इनकार नहीं किया जा सकता : इलाहाबाद हाईकोर्ट
आपराधिक मामला लंबित होने मात्र से चरित्र प्रमाण पत्र देने से इनकार नहीं किया जा सकता : इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित होने मात्र के आधार पर चरित्र प्रमाण पत्र जारी करने से इनकार नहीं किया जा सकता।जस्टिस प्रकाश पड़िया और जस्टिस विवेक सरन की खंडपीठ ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 323, 504 और 506 के तहत दर्ज मामले का लंबित होना अपने आप में चरित्र प्रमाण पत्र की मांग खारिज करने का आधार नहीं बन सकता।कोर्ट ने कहा,"हमारी राय में केवल IPC की धारा 323, 504 और 506 के तहत मामला लंबित होने के कारण चरित्र प्रमाण पत्र जारी करने का आवेदन खारिज...

मुसलमानों में बहुविवाह पर रोक लगाने वाला कोई कानून नहीं, बिहार पॉलिसी के तहत मृतक कर्मचारी की एक से ज़्यादा विधवाओं को फ़ैमिली पेंशन पाने का हक: हाईकोर्ट
मुसलमानों में बहुविवाह पर रोक लगाने वाला कोई कानून नहीं, बिहार पॉलिसी के तहत मृतक कर्मचारी की एक से ज़्यादा विधवाओं को फ़ैमिली पेंशन पाने का हक: हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने कहा कि मुसलमानों में बहुविवाह पर रोक लगाने वाले किसी कानून के न होने पर अगर किसी मुस्लिम विधवा की शादी मृतक सरकारी कर्मचारी के साथ मोहम्मडन पर्सनल लॉ के तहत वैध है, तो वह फ़ैमिली पेंशन पाने की हकदार है। कोर्ट ने यह भी कहा कि फ़ाइनेंस डिपार्टमेंट का 2011 का स्पष्टीकरण, जो मृतक मुस्लिम सरकारी कर्मचारियों की जीवित विधवाओं को फ़ैमिली पेंशन देने की बात करता है, अभी भी लागू है और अधिकारी इसे नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते।जस्टिस पूर्णेंदु सिंह की सिंगल जज बेंच नजमा खातून की एक रिट याचिका पर...

प्रयागराज के चंद्र शेखर आज़ाद पार्क के अंदर वाहनों की आवाजाही पर रोक जारी, हाईकोर्ट ने नए निर्माण भी रोके
प्रयागराज के चंद्र शेखर आज़ाद पार्क के अंदर वाहनों की आवाजाही पर रोक जारी, हाईकोर्ट ने नए निर्माण भी रोके

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोर्ट की अनुमति के बिना प्रयागराज के कंपनी बाग, जिसे चंद्र शेखर आज़ाद पार्क के नाम से भी जाना जाता है, उसके अंदर किसी भी प्रकार की निर्माण गतिविधि पर रोक लगा दी है, चाहे वह अस्थायी हो या स्थायी।न्यायालय ने पार्क में संग्रहालय के लिए एक नए प्रवेश द्वार के प्रस्तावित निर्माण को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) पर विचार होने तक पार्क के भीतर वाहनों की आवाजाही और पार्किंग पर भी प्रतिबंध लगा दिया।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित...

AIBE पास करने तक प्रोविज़नल तौर पर एनरोल हुए वकील 2 साल तक बेझिझक प्रैक्टिस कर सकते हैं, लेकिन बार चुनाव में वोट नहीं दे सकते: BCI
AIBE पास करने तक प्रोविज़नल तौर पर एनरोल हुए वकील 2 साल तक बेझिझक प्रैक्टिस कर सकते हैं, लेकिन बार चुनाव में वोट नहीं दे सकते: BCI

बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) ने साफ़ किया कि प्रोविज़नल तौर पर एनरोल हुए वकील, एनरोलमेंट के तुरंत बाद और तय दो साल की अवधि के दौरान, ऑल-इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) पास किए बिना भी पूरी तरह से वकालत की प्रैक्टिस करने के हकदार हैं।BCI ने साफ़ किया कि स्टेट बार काउंसिल द्वारा एनरोल किए गए वकील तय दो साल की अवधि के दौरान पूरी तरह से वकालत की प्रैक्टिस कर सकते हैं - जिसमें वकालतनामा पर साइन करना और कोर्ट में पेश होना शामिल है - भले ही उन्होंने AIBE पास न किया हो।BCI ने कहा,"एक वकील एनरोलमेंट के...

NEET OMR शीट से छेड़छाड़ के आरोप गंभीर, इन्हें सिर्फ़ उम्मीदवार के शक के आधार पर नहीं माना जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
NEET OMR शीट से छेड़छाड़ के आरोप 'गंभीर', इन्हें सिर्फ़ उम्मीदवार के शक के आधार पर नहीं माना जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि NEET उम्मीदवार की OMR शीट से छेड़छाड़ के आरोप गंभीर हैं और ठोस सबूत के बिना, सिर्फ़ शक, अंदाज़े या अपनी सोच के आधार पर इन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर यह साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है कि तय तरीका उपलब्ध नहीं था या बेकार था, तो कोई उम्मीदवार परीक्षा लेने वाली संस्था की शिकायत निवारण प्रक्रिया को नज़रअंदाज़ करके सीधे अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट के रिट अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं कर सकता।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र...