मुख्य सुर्खियां
किसी गवाही का अगर एक हिस्सा झूठा है तो इस वजह से पूरी गवाही को नकारा नहीं जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
क्या भारत के संदर्भ में यह उक्ति लागू हो सकता है कि 'अगर कोई बात एक जगह झूठा है तो वह हर जगह झूठा होगा'? वृहस्पतिवार को अपने एक फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को दुहराया कि यह उक्ति भारत के संदर्भ में लागू नहीं होता है। आरोपी अपीलकर्ता की याचिका पर एक बार फिर ग़ौर करते हुए इस मुद्दे पर विचार किया कि अगर किसी गवाह के बयान का कोई हिस्सा अविश्वसनीय पाया जाता है तो इस बयान के दूसरे हिस्से का प्रयोग किसी आरोपी को सज़ा दिलाने के लिए नहीं हो सकता। कसी गवाही का अगर एक हिस्सा झूठा है तो पूरे...
मालेगांव धमाका 2008: क़ानून में दस्तावेज़ों के फ़ोटो प्रतियों का प्रयोग ग़लत; बॉम्बे हाईकोर्ट ने फ़ोटोकॉपी को द्वितीयक साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने के NIA अदालत के आदेश को स्थगित किया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि असत्यापित और फ़ोटोकॉपी किए गए दस्तावेज़ों का प्रयोग क़ानून ग़लत है और इस संबंध में 2008 के मालेगांव विस्फोट में गवाहों और कबूलनामे की फ़ोटो प्रतियों और असत्यापित दस्तावेज़ों के प्रयोग की अनुमति देने वाले NIA की विशेष अदालत के आदेश को स्थगित कर दिया। न्यायमूर्ति एएस ओका और न्यायमूर्ति गडकरी की पीठ इस मामले में एक आरोपी समीर कुलकर्नी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह कहा। कुलकर्नी ने इस मामले में साक्ष्य के रूप में दस्तावेज़ों की फ़ोटो प्रतियों के प्रयोग के...
सेना के अनुशासनात्मक क्षेत्राधिकार के ख़िलाफ़ निष्फलकारी न्यायिक हड़ताल अनावश्यक है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुशासनात्मक क्षेत्राधिकार का रास्ता अपनाने की ज़रूरत है कि नहीं इस बात का निर्धारण करने के अधिकार को अपने हाथ में लेकर हाईकोर्ट को सेना के अनुशासनात्मक क्षेत्राधिकार को निष्फल नहीं करना चाहिए। न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने मणिपुर हाईकोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ भारत सरकार की याचिका पर ग़ौर करते हुए यह फ़ैसला सुनाया। पीठ के अनुसार, ऐसा करना सेना अधिनियम, 1950 के तहत एक अधिकारी के ख़िलाफ़ उसकी अनुशासनात्मक कार्रवाई के अधिकार को निष्फल...
सीआरपीसी की धारा 482 के तहत हाईकोर्ट यह जाँच कर सकता है कि दीवानी मामले को आपराधिक रंग तो नहीं दिया जा रहा है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सीआरपीसी की धारा 482 के तहत अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए हाईकोर्ट इस बात की पड़ताल कर सकता है कि जो मामला दीवानी प्रकृति का है उसे आपराधिक मामला तो नहीं बनाया जा रहा है।कोर्ट ने कहा कि अगर किसी मामले को दीवानी है पर उसे आपराधिक मामला बनाया गया है तो इस मामले का जारी रहना कोर्ट की प्रक्रिया का दुरुपयोग है और इस मामले को निरस्त किया जा सकता है। यह बात न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने अपने एक फ़ैसले में कहा।प्रो. आरके विजयसारथी बनाम...
सिर्फ़ ऋण चुका नहीं पाने का मतलब 'धोखाधड़ी' नहीं हो जाता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फ़ैसले में कहा है कि अगर कोई व्यक्ति ऋण चुकाने में विफल रहता है तो इसका अर्थ यह नहीं हुआ कि उसके ख़िलाफ़ धोखाधड़ी का आपराधिक मामला बनता है। ऐसा तभी हो सकता है जब कारोबार की शुरुआत में ही इस तरह की बेईमानी के इरादे के स्पष्ट होने का संकेत मिलता है। सतीशचंद्र रतनलाल बनाम गुजरात राज्य मामले में हाईकोर्ट के आदेशके ख़िलाफ़ दायर एक अपील पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह मत व्यक्त किया। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में धोखाधड़ी के एक मामले में आरोपी के ख़िलाफ़ जारी सम्मन को निरस्त...
किसी आरोपी को अगर एक से अधिक अपराधों में सज़ा मिलती है तो यह बताना ज़रूरी है कि जो सज़ा दी गई है वह साथ-साथ चलेगी या एक के बाद दूसरी : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि क़ानून के तहत यह बताना ज़रूरी है कि अगर किसी व्यक्ति को दो या दो से अधिक अपराधों के लिए सज़ा मिली है तो यह सज़ा साथ-साथ चलेगी या एक सज़ा पूरी हो जाने के बाद दूसरी सज़ा चलेगी। मजिस्ट्रेट ने गगन कुमार को आईपीसी की धारा 279 और 304A के तहत दोषी ठहराया था। उसे धारा 279 के तहत छह माह की सश्रम कारावास की सज़ा सुनाई गई और 304A के तहत दो साल के सश्रम कारावास की सज़ा सुनाई गई। मजिस्ट्रेट के आदेश में यह नहीं बताया गया था कि ये सज़ा एक के बाद एक होगी या एक साथ चलेगी। अपीली...
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने घाटी में रह रहे कश्मीरी पंडितों के लिए विशेष रोज़गार पैकेज को सही ठहराया [निर्णय पढ़े]
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने घाटी में रह रहे कश्मीरी पंडितों के लिए विशेष रोज़गार पैकेज देने की घोषणा को दी गई गई चुनौती को ख़ारिज कर दिया। कश्मीरी सिखों की संस्था कश्मीरी सिख समुदाय और दो बेरोज़गार कश्मीरी युवा ने हाईकोर्ट में अर्ज़ी देकर यह माँग की कि उन्हें भी कश्मीरी पंडितों के समकक्ष माना जाए। कश्मीरी पंडितों की वापसी और उनके पुनर्वास के लिए प्रधानमंत्री के पैकेज की घोषणा के बाद रोज़गार के संदर्भ उन्होंने यह अपील की।इन लोगों ने कहा कि प्रधानमंत्री के पैकेज में घाटी में रह रहे सिखों को...
क्या सुनवाई शुरू होने के बाद शिकायत में संशोधन के आवेदन की अनुमति दी जा सकती है? पढ़िए क्या कहता है सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फ़ैसले में स्पष्ट किया कि सुनवाई शुरू होने के बाद कब और किस आधार पर दलील में संशोधन की अनुमति के लिए आवेदन दिया जा सकता है। न्यायमूर्ति एनवी रमना और न्यायमूर्ति एमएम शांतनागौदर की पीठ ने कहा कि इस तरह के आवेदन पर ग़ौर करते हुए कोर्ट को यह तजवीज़ करनी है कि ऐसा करना उचित है या अनुचित और यह कि ऐसा करने से दूसरे पक्ष के ख़िलाफ़ कहीं ऐसा भेदभाव तो नहीं होता है जिसकी पैसे से भरपाई नहीं हो सकती। कोर्ट M. Revanna vs. Anjanamma मामले पर ग़ौर कर रहा था जिसमें वादी ने सुनवाई...
एमएसीटी मामले में 'सर्वाधिक बेहतर' गवाह से पूछताछ नहीं करना अनर्थकारी नहीं है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मोटर वाहन दुर्घटना दावे के मामले में अगर सर्वाधिक बेहतर गवाह से पूछताछ नहीं की गई तो यह अनर्थकारी नहीं हैं। न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की पीठ ने कहा कि अगर किसी दुर्घटना में परिवार के किसी व्यक्ति की मौत हुई है तो अधिनियम के तहत मुआवज़े के निर्धारण के दौरान अति तकनीकी और मामूली अप्रोच से बचना चाहिए। Sunita vs. Rajasthan State Transport Corporation मामले में हाईकोर्ट ने अधिकरण के फ़ैसले को मुख्य रूप से इसलिए ख़ारिज कर दिया था क्योंकि इस...
क़ानून चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में हुई प्रगति का ख़याल रखे:सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल लापरवाही पीड़ित के पति को 15 लाख मुआवजा दिया [निर्णय पढ़े]
हमारे क़ानून को चिकित्सा विज्ञान में हुई प्रगति का ख़याल रखना चाहिए और यह सुनिश्चत करना चाहिए कि मरीज़ को मदद पहुँचाने वाले रूख अपनाए जाएँ। न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने हाल ही में एक मामले में अपनी यह राय व्यक्त की। शीर्ष अदालत की पीठ जिसमें न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता भी शामिल थे, ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के एक आदेश के ख़िलाफ़ अपील पर सुनवाई कर रहे थे। आयोग ने अपने फ़ैसले में मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के एक फ़ैसले को ख़ारिज कर दिया था जिसमें एक...
सीरपीसी की धारा 456: अगर निचली अदालत ने संपत्ति को सौंपे जाने को लेकर आदेश दिया है तो 30 दिनों की समय सीमा लागू नहीं होगी : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर सीआरपीसी की धारा 456 के तहत कोई अर्ज़ी स्वीकार की गई है जिसमें अचल सम्पत्ति को वापस करने की माँग की गई है और अगर निचली अदालत ने इस बारे में आरोपी को क़सूरवार ठहराते हुए कोई आदेश पास किया है तो 30 दिनों की समय सीमा इस पर लागू नहीं होगी। इस मामले में, किरायेदार के ख़िलाफ़ मकान मालिक के मामले में फ़ैसला सुनाया गया और मकान मालिक को मकान का क़ब्ज़ा दिला दिया गया। उसी दिन किरायेदार उस मकान में घुसा और दुबारा उस मकान पर क़ब्ज़ा कर लिया। मकान मालिक ने दुबारा शिकायत की...
साढ़े सात साल की लड़की से बलात्कार का मामला : सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की मौत की सज़ा को बदला [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने गत सप्ताह साढ़े सात साल की लड़की से बलात्कार के आरोपी एक व्यक्ति की मौत की सज़ा को बदल दिया। तीन जजों न्यायमूर्ति एके सीकरी,न्यायमूर्ति एस अब्दुल नज़ीर और न्यायमूर्ति एमआर शाह की पीठ ने अपने फ़ैसले में आरोपी को दोषी माना और कहा कि अपराध नृशंस तो है पर इतना नहीं कि इस मामले में आरोपी को मौत की सज़ा दी जा सके। निचली अदालत ने आरोपी विजय रैकवर को आईपीसी की धारा 376 (2) (f) और धारा 201 तथा POCSO अधिनियम की धारा 6 के तहत दोषी माना था। बाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी आरोपी को...
आपराधिक शिकायत को सिर्फ़ इसलिए निरस्त नहीं किया जा सकता क्योंकि शिकायत दीवानी प्रकृति का लगता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आपराधिक शिकायतों को सिर्फ़ इसलिए नहीं निरस्त किया जा सकता कि क्योंकि यह शिकायत दीवानी प्रकृति का लगता है। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति एमआर शाह की पीठ ने कहा कि अगर शिकायत में आरोपी के ख़िलाफ़ प्रथम दृष्ट्या अपराध दिखती है तो आपराधिक प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई जाएगी। अपनी शिकायत में शिकायतकर्ता ने एक भवन निर्माता पर फ़र्जीवाड़े का आरोप लगाया और फ़र्ज़ी आधार पर दस्तावेज़ बनाकर उसके आधार पर क़रार का आरोप लगाया। मजिस्ट्रेट ने इस शिकायत की जाँच करवाई।...
हरियाणा शराब लाइसेंस नियम: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, वित्तीय आयुक्त यह निर्णय नहीं कर सकता कि राज्य में कितने लाइसेंस जारी किए जाएँगे
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा शराब लाइसेंस नियम, 1970 के नियम 24(i-eeee) को यह कहते हुए ग़ैर-क़ानूनी घोषित कर दिया है कि यह पंजाब आबकारी अधिनियम, 1914 के अनुरूप नहीं है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा और न्यायमूर्ति केएम जोसफ़ की पीठ ने बहुमत से अपने फ़ैसले में यह कहा कि वित्तीय आयुक्त यह निर्णय नहीं कर सकता कि पूरे राज्य में कितने लाइसेंस जारी किए जाएँगे। धारा 6, 13(a) और 58(2)(e) के तहत यह अधिकार पूरी तरह से राज्य सरकार के पास है। न्यायमूर्ति केएम जोसफ़ ने इस...
'स्वैच्छिक उकसावा' का हवाला देकर हत्या के अपराध को अपवाद की श्रेणी में नहीं डाला जा सकता : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर आरोपी के उकसावे की कार्रवाई स्वैच्छिक है तो इस पर आईपीसी की धारा 300 के तहत अपवाद 1 लागू नहीं होगा। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति संजय किशन कॉल ने हाईकोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया जिसमें एक आरोपी जिसको आईपीसी की धारा 302 के तहत दोषी पाया गया था, को बदलकर उसको धारा 304 के भाग एक के तहत दोषी माना। निचली अदालत ने हत्या के आरोपी को दोषी माना क्योंकि उसने पाया कि आरोपी ने मृतक पर अपने पिस्टल से गोली चलाई क्योंकि उसको शक था कि मृतक उसके घर गया था...
गवाह को बुलाने के लिए बार बार अर्ज़ी दिए जाने को प्रोत्साहन नहीं दिया जाना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सीआरपीसी की धारा 311 के तहत बार बार गवाह को बुलाए जाने के लिए अर्ज़ी देने को प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति एके सीकरी और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नज़ीर की पीठ ने Swapan Kumar Chatterjee vs. CBI मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट के एक आदेश के खिलाफ अपील पर ग़ौर करते हुए यह कहा। हाईकोर्ट ने अपने फ़ैसले में निचली अदालत के उस फ़ैसले को सही ठहराया था जिसमें अभियोजन को एक हस्तलेखन विशेषज्ञ को कोर्ट में बुलाए जाने को लेकर था। भ्रष्टाचार के इस मामले की सुनवाई 1985 से...
कर्मचारियों को वेतन निर्धारण के लिए होने वाले निर्णय प्रक्रिया से जुड़ने का कोई अधिकार नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी बैंक के कर्मचारी को यह अधिकार नहीं है कि वह वेतन निर्धारण प्रक्रिया से अपने को जोड़े। न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने कहा कि बैंक अपने अधिकारियों के लिए जो वेतन निर्धारित करता है बैंक के अधिकारी उससे बंधे होते हैं और स्थाई समिति का निर्णय बैंक के कर्मचारियों को दिए जाने वाले वेतन के बारे में लिए जाने वाले निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है। एसबीआई के एक कर्मचारी ने अपने वेतन के पुनर्निर्धारण के बारे में बैंक के निर्णय को बॉम्बे हाईकोर्ट...
सूचना देनेवाले और जाँच करने वाले के एक ही होने पर रिहाई का मामला : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, मोहनलाल मामले में आए फ़ैसले का लाभ इससे पहले के लंबित मामले पर लागू नहीं होंगे
सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक महत्त्वपूर्ण फ़ैसले में कहा है कि मोहनलाल मामले में आए फ़ैसले के आधार पर बने क़ानून से पहले जितने भी मामले लंबित हैं उन मामलों पर कार्रवाई उसके तथ्यों के आधार पर होगा। मोहनलाल का मामला एक ही व्यक्ति के सूचना देनेवाला और जाँच अधिकारी दोनों होने से संबंधित है।मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई,न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा और न्यायमूर्ति केएम जोसफ़ की पीठ ने एनडीपीएस मामले में मिली सज़ा के ख़िलाफ़ एक अपील पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। इस मामले में मोहनलाल मामले में आए...
मेडिकल रिपोर्ट के बावजूद बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को क़ानूनन मानसिक रूप से पागल माना [निर्णय पढ़े]
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल में एक व्यक्ति को क़ानूनी रूप से पागल बताया जबकि यरवदा मानसिक अस्पताल ने उसे पागल क़रार नहीं दिया था। यह आदेश न्यायमूर्ति एसएस शिंदे और न्यायमूर्ति आरजी अवचट की पीठ ने सुनाया। आरोपी को अक्टूबर 2013 में हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी जिसके ख़िलाफ़ उसने अपील की। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने 2012 में एक दुकानदार को पत्थरों से कुचलकर मार दिया था क्योंकि दुकानदार ने उसे मुफ़्त का पेप्सी देने से मना कर दिया था। वह उस समय शांत हुआ जब उसका भाई वहाँ...
सिर्फ़ इसलिए अग्रिम ज़मानत नहीं दिया जा सकता क्योंकि गिरफ़्तारी से आवेदक की प्रतिष्ठा धूमिल होगी : गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड और उनके पति जावेद आनंद को उनके सबरंग ट्रस्ट के ₹1.4 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी में दर्ज मामले में अग्रिम ज़मानत दे दी है। ज़मानत देते हुए जस्टिस जेबी परदीवाला ने कहा कि ज़मानत दिए जाने के समय ज़मानत लेने वाले की प्रतिष्ठा पर ध्यान देने की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने कहा, "समाज में आवेदक की प्रतिष्ठा और उसके प्रतिष्ठित पत्रकार होने और सामाजिक कार्यकर्ता होने का उसके राशियों के हेरफेर से संबंधित आपराधिक आरोपों से कोई लेना देना नहीं है। ...

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![सेना के अनुशासनात्मक क्षेत्राधिकार के ख़िलाफ़ निष्फलकारी न्यायिक हड़ताल अनावश्यक है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] सेना के अनुशासनात्मक क्षेत्राधिकार के ख़िलाफ़ निष्फलकारी न्यायिक हड़ताल अनावश्यक है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/02/24/500x300_358572-justice-dy-chnadrachud-and-justice-hemant-gupta.jpg)
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![सिर्फ़ ऋण चुका नहीं पाने का मतलब धोखाधड़ी नहीं हो जाता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] सिर्फ़ ऋण चुका नहीं पाने का मतलब धोखाधड़ी नहीं हो जाता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/01/19/500x300_357649-justice-nv-ramana-and-justice-mohan-m-shantanagoudar.jpg)
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![सीरपीसी की धारा 456: अगर निचली अदालत ने संपत्ति को सौंपे जाने को लेकर आदेश दिया है तो 30 दिनों की समय सीमा लागू नहीं होगी : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] सीरपीसी की धारा 456: अगर निचली अदालत ने संपत्ति को सौंपे जाने को लेकर आदेश दिया है तो 30 दिनों की समय सीमा लागू नहीं होगी : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/02/18/500x300_358406-supreme-court.jpg)
![साढ़े सात साल की लड़की से बलात्कार का मामला : सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की मौत की सज़ा को बदला [निर्णय पढ़े] साढ़े सात साल की लड़की से बलात्कार का मामला : सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की मौत की सज़ा को बदला [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/02/18/500x300_358405-358158-justices-a-k-sikri-abdul-nazeer-and-m-r-shah.jpg)
![आपराधिक शिकायत को सिर्फ़ इसलिए निरस्त नहीं किया जा सकता क्योंकि शिकायत दीवानी प्रकृति का लगता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] आपराधिक शिकायत को सिर्फ़ इसलिए निरस्त नहीं किया जा सकता क्योंकि शिकायत दीवानी प्रकृति का लगता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/01/20/500x300_357668-justice-nageswara-rao-mr-shah.jpg)


![गवाह को बुलाने के लिए बार बार अर्ज़ी दिए जाने को प्रोत्साहन नहीं दिया जाना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] गवाह को बुलाने के लिए बार बार अर्ज़ी दिए जाने को प्रोत्साहन नहीं दिया जाना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/02/14/500x300_358329-justicesikri-abdulnazeer.jpg)
![कर्मचारियों को वेतन निर्धारण के लिए होने वाले निर्णय प्रक्रिया से जुड़ने का कोई अधिकार नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] कर्मचारियों को वेतन निर्धारण के लिए होने वाले निर्णय प्रक्रिया से जुड़ने का कोई अधिकार नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/02/14/500x300_358327-358251-justice-uday-umesh-lalit-and-justice-hemant-gupta.jpg)

![मेडिकल रिपोर्ट के बावजूद बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को क़ानूनन मानसिक रूप से पागल माना [निर्णय पढ़े] मेडिकल रिपोर्ट के बावजूद बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को क़ानूनन मानसिक रूप से पागल माना [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/02/13/500x300_358281-aurangabadbench.jpg)
