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सुप्रीम कोर्ट ने वर्तमान सिविल जजों को उच्चतर न्यायिक सेवा के माध्यम से जिला जज के रूप में नियुक्ति की अंतरिम अनुमति दी [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने वर्तमान सिविल जजों को उच्चतर न्यायिक सेवा के माध्यम से जिला जज के रूप में नियुक्ति की अंतरिम अनुमति दी [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जिला जजों के पद पर नियुक्ति चाहने वाले न्यायिक अधिकारियों को सीधी नियुक्ति द्वारा जिला जज के रूप में नियुक्ति किये जाने की अंतरिम अनुमति दे दी है।न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ और न्यायमूर्ति एसके कौल की पीठ ने दिल्ली और इलाहाबाद हाईकोर्टों को अपने निर्देश में कहा कि वे याचिकाकर्ताओं के चयन की प्रक्रिया में आगे बढ़ सकते हैं और इनको जिला जज के रूप में नियुक्त कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि इसके लिए इन लोगों को अधीनस्थ न्यायिक सेवा से इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है। हालांकि, कोर्ट...

सिर्फ केंद्रीय होमियोपैथी परिषद होमियो कॉलेजों की जांच के लिए चिकित्सा निरीक्षकों की नियुक्ति कर सकता है : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]
सिर्फ केंद्रीय होमियोपैथी परिषद होमियो कॉलेजों की जांच के लिए चिकित्सा निरीक्षकों की नियुक्ति कर सकता है : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने ‘The Temple Of Hanemann Homoeopathic Medical College And Hospital vs.  Union of India’ मामले में कहा है कि केंद्र सरकार होम्यो कॉलेजों की जांच के लिए चिकित्सा निरीक्षकों की नियुक्ति नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा है कि होमियोपैथी केंद्रीय परिषद अधिनियम, 1973 के तहत यह अधिकार सिर्फ केंद्रीय होमियोपैथी परिषद (सीसीएच) को है। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नज़ीर ने पटना हाईकोर्ट के खंडपीठ के फैसले को निरस्त हुए कहा कि केंद्र सरकार को अनुमति देने और किसी विशेष योजना को...

विवाद को रोकने और समझौते को आसानी से लागू करने वाले क्लॉज़ को मध्यस्थता का समझौता नहीं माना जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
विवाद को रोकने और समझौते को आसानी से लागू करने वाले क्लॉज़ को मध्यस्थता का समझौता नहीं माना जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने श्याम सुन्दर अगव्राल बनाम पी नरोथम राव मामले में कहा है कि विवादों को रोकने के लिए और समझौते को आसानी से लागू कराने के लिए समझौते में डाली गई धाराओं को मध्यस्था का समझौता नहीं माना जा सकता।इस मामले में जिस समझौते की चर्चा हो रही है उसमें नारोथम राव के नाम से नौ चेक सुधाकर राव और गोने प्रकाश राव को सौंपा गया। इन लोगों को मध्यस्थ/पंच बताया गया। समझौते में कहा गया कि यह तब उनके पास रहेगा जबतक कि पूरी लेन-देन संतोषप्रद रूप से पूरी नहीं हो जाती। इसमें यह कहा गया है कि अगर दोनों में...

कभी-कभी ऐसा भी होता है ! पटना हाईकोर्ट ने आपराधिक अपील पर अपना फैसला वापस लिया
कभी-कभी ऐसा भी होता है ! पटना हाईकोर्ट ने आपराधिक अपील पर अपना फैसला वापस लिया

' हालांकि सीआरपीसी की धारा 482 अंतर्निहित क्षेत्राधिकार के तहत उच्च न्यायालय की शक्ति को निर्धारित व सही ढंग से पहचानती है और उसकी सीमा असीमित रही है। ' क्या आपराधिक अपीलीय क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल कर कोई फैसला सुनाने के बाद  उच्च न्यायालय उस फैसले को वापस ले सकता है ? क्या सीआरपीसी की धारा 482  इसे ऐसा करने के लिए उसे सशक्त बनाती है जबकि धारा 362 आपराधिक मामले में पारित होने और हस्ताक्षरित होने के बाद किसी भी फैसले या आदेश को वापस लेने  या पुनर्विचार करने पर प्रतिबंध लगाती है?दरअसल पटना उच्च...

यह “उचित विचार” क्या है? सुप्रीम कोर्ट ने हर मामलों में तार्किक आदेश देने की जरूरत पर जोर दिया [निर्णय पढ़ें]
यह “उचित विचार” क्या है? सुप्रीम कोर्ट ने हर मामलों में तार्किक आदेश देने की जरूरत पर जोर दिया [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले पर सुनवाई करते हुए एक बार फिर हाईकोर्टों द्वारा अतार्किक आदेश पास करने की परिपाटी की आलोचना की।न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के एक आदेश के खिलाफ याचिका की सुनवाई कर रहे थे जिसमें कर्मचारी भविष्य निधि अपीली अधिकरण के आदेश को सही ठहराया था।हाईकोर्ट का आदेश शुरू होता है मामले के तथ्यों के साथ लेकिन अपने निर्णय के बारे में कोई कारण नहीं देता है। कोर्ट कहता है, “उपलब्ध ताजा दस्तावेजों और हलफनामे के तथ्यों पर पर्याप्त रूप से गौर...

शादी पंजीकरण की प्रक्रिया को धर्मनिरपेक्ष देश में बदले हुए समय की मिजाज को प्रतिबिंबित करना चाहिए और इसे अंतर-धार्मिक शादियों को बढ़ावा देने वाला होना चाहिए : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
शादी पंजीकरण की प्रक्रिया को धर्मनिरपेक्ष देश में बदले हुए समय की मिजाज को प्रतिबिंबित करना चाहिए और इसे अंतर-धार्मिक शादियों को बढ़ावा देने वाला होना चाहिए : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

‘याचिकाकर्ताओं के बीच निस्संदेह रिलेशनशिप है और वे शादी करना चाहते हैं। वे भिन्न धर्म के हो सकते हैं पर प्यार और स्नेह किसी बाधा को कब मानता है’पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा राज्य को सुझाव दिया है कि वह अदालती शादी चेक लिस्ट (सीएमसीएल) को सरल और उसे विशेष विवाह अधिनियम के अनुरूप बनाएं ताकि उसमें न्यूनतम सरकारी हस्तक्षेप हो। कोर्ट ने कहा कि इनके कुछ प्रावधान निजता के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं और ये अपमानजनक होने के साथ साथ विशेष विवाह अधिनियम के बाहर भी अत्यधिक रूप से सरकारी कार्रवाई पर...

बालिग़ बेटा गुजारे का दावा नहीं कर सकता पर उसके रोजगार प्राप्त करने तक माँ-बाप को उसका देखभाल करना होगा : उत्तराखंड हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
बालिग़ बेटा गुजारे का दावा नहीं कर सकता पर उसके रोजगार प्राप्त करने तक माँ-बाप को उसका देखभाल करना होगा : उत्तराखंड हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक महिला को मिलने वाली  गुजारा राशि में यह कहते हुए बढ़ोतरी किये जाने का आदेश दिया कि उसे अपने बालिग़ बेटे की भी देखभाल करनी है क्योंकि वह अभी बेरोजगार है।न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह ने कहा, “यद्यपि एक बालिग़ बेटे को अपने माँ-बाप से गुजारे का दावा करने का अधिकार नहीं होता है लेकिन भारतीय संस्कृति में हम इस बात को नहीं भूल सकते कि माँ-बाप को तब तक अपने बच्चों की देखभाल करनी पड़ती है जब तक कि उसे उपयुक्त रोजगार नहीं मिल जाता और बालिग़ बच्चों की देखभाल करना माँ-बाप का सामाजिक कर्तव्य...

राजस्व रिकॉर्ड में भूमि का वर्गीकरण निष्कर्षतः यह नहीं बताता कि इस पर SARFAESI अधिनियम लागू होगा : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
राजस्व रिकॉर्ड में भूमि का वर्गीकरण निष्कर्षतः यह नहीं बताता कि इस पर SARFAESI अधिनियम लागू होगा : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

‘जमीन का कोई टुकड़ा कृषि भूमि है कि नहीं इसका पता तथ्यात्मक रूप से अवश्य ही उस जमीन की प्रकृति, जिस तिथि को इसको प्रतिभूतिकरण के लिए दिया गया उस समय उसका किस कार्य के लिए प्रयोग हो रहा था और जिस उद्देश्य के लिए इसे अलग से रखा गया, से लगाना चाहिए’ सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन बैंक बनाम के पप्पीरेडियार के मामले में कहा है कि राजस्व रिकॉर्ड में किसी भूमि को कृषि भूमि बताना निष्कर्षतः इस सवाल का उत्तर नहीं देता कि इस पर SARFAESI अधिनियम लागू होता है या नहीं। इंडियन बैंक ने इस बारे में मद्रास हाईकोर्ट के...

सुप्रीम कोर्ट ने डीपीएस वर्ल्ड फाउंडेशन को ब्रांड नाम “दिल्ली पब्लिक स्कूल” या “डीपीएस” नाम का प्रयोग करने से रोका [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने डीपीएस वर्ल्ड फाउंडेशन को ब्रांड नाम “दिल्ली पब्लिक स्कूल” या “डीपीएस” नाम का प्रयोग करने से रोका [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को डीपीएस वर्ल्ड फाउंडेशन को ब्रांड ‘डीपीएस’ मार्क या ‘दिल्ली पब्लिक स्कूल’ लोगो का प्रयोग करने से रोक दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति आर बानुमती और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ ने एक विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। यह याचिका दिल्ली पब्लिक स्कूल सोसाइटी ने दायर की थी जिसमें उसने गत वर्ष अप्रैल में दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ के एक फैसले को चुनौती दी है। अपने इस आदेश में खंडपीठ ने एकल जज द्वारा दिए गए फैसले को सही ठहराया था जिसमें डीपीएस...

अगर कई लोग किसी परिसंपत्ति के मालिक हैं तो एक आदमी परिसंपत्ति को कब्जे में लेने के लिए किराए का पट्टा रद्द नहीं कर सकता : दिल्ली हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
अगर कई लोग किसी परिसंपत्ति के मालिक हैं तो एक आदमी परिसंपत्ति को कब्जे में लेने के लिए किराए का पट्टा रद्द नहीं कर सकता : दिल्ली हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

“जब एक से अधिक लोगों का किसी परिसंपत्ति पर स्वामित्व है तो उसका सिर्फ एक सह-स्वामी परिसंपत्ति को अपने कब्जे में लेने के लिए किराए के करार को रद्द नहीं कर सकता” दिल्ली हाईकोर्ट ने यह कहते हुए मामले को खारिज करने के खिलाफ दायर याचिका को निरस्त कर दिया कि किसी परिसंपत्ति के सिर्फ एक हिस्सेदार की मांग वाली याचिका अदालत में नहीं ठहर सकती। यह याचिका एक परिसंपत्ति को किरायेदार से वापस लेने के लिए परिसंपत्ति के एक मालिक ने दायर की थी जबकि अन्य साझीदार इससे सहमत नहीं थे। इस संपत्ति के दूसरे मालिकों ने...

महिला का लूज कैरेक्टर पुरुषों को बलात्कार का अधिकार नहीं देता : बॉम्बे HC ने रेप पीड़िता के चरित्र को दागदार करने के प्रयास  को खारिज किया [निर्णय पढ़ें]
महिला का "लूज कैरेक्टर" पुरुषों को बलात्कार का अधिकार नहीं देता : बॉम्बे HC ने रेप पीड़िता के चरित्र को दागदार करने के प्रयास को खारिज किया [निर्णय पढ़ें]

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने हाल ही में बलात्कार के दोषी के पीड़िता के चरित्र पर कीचड़ उछालने के प्रयास को खारिज करने वाले निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए दोषी की अपील को खारिज कर दिया।न्यायमूर्ति मनीष पिताले रामकृष्ण गणेश वाघ द्वारा दायर अपील की सुनवाई कर रहे थे जिसने अक्टूबर 2005 के अकोला सत्र न्यायालय द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी थी जिसमें  15 वर्षीय लड़की से बलात्कार करने के लिए उसे दोषी ठहराया था। मुकदमे के दौरान वाघ ने एक महिला को गवाह के रूप में बुलाया था जिसने अभियोजन पक्ष...

अपने वेबसाइट से लोगों को ठगने वाली ई-कॉमर्स कंपनियों के दायित्व क्या हैं? सुप्रीम कोर्ट ने इंडिया मार्ट की अपील पर नोटिस जारी किया [आर्डर पढ़े]
अपने वेबसाइट से लोगों को ठगने वाली ई-कॉमर्स कंपनियों के दायित्व क्या हैं? सुप्रीम कोर्ट ने इंडिया मार्ट की अपील पर नोटिस जारी किया [आर्डर पढ़े]

ई-कॉमर्स कंपनी इंडिया मार्ट के प्रबंध निदेशक की विशेष अनुमति याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। इस याचिका में कंपनी के वेबसाइट के खिलाफ दायर शिकायत को निरस्त करने की मांग की गई है।न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने निर्देश दिया कि दर्ज एफआईआर की जांच के सिलसिले में ई-कॉमर्स वेबसाइट और इसके अधिकारियों के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की जाए।दिनेश अग्रवाल के वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में कहा कि वेबसाइट ने तो सिर्फ एक मंच उपलब्ध कराया है और उसका उस पर...

2001 में दाखिल आपराधिक शिकायत अब तक लंबित, सुप्रीम कोर्ट ने ‘ तकनीकी याचिका’ को खारिज करने में लगाया एक दशक से ज्यादा [निर्णय पढ़ें]
2001 में दाखिल आपराधिक शिकायत अब तक लंबित, सुप्रीम कोर्ट ने ‘ तकनीकी याचिका’ को खारिज करने में लगाया एक दशक से ज्यादा [निर्णय पढ़ें]

न्याय में देरी न्याय को ख़ारिज करना है, पर इस पर अमल शायद ही कभी होता है। यह मामला इसका ज्वलंत उदाहरण है।एक महिला ने 2001 में बिहार में मजिस्ट्रेट की अदालत में एक आपराधिक शिकायत दर्ज की जिसमें उसने अपने ससुराल वालों के खिलाफ क्रूरता की शिकायत की थी। यह कथित अपराध आईपीसी की धारा 498A, 323,406, 379 और 504 के तहत दर्ज किये गए थे। मजिस्ट्रेट ने 2004 में बरी किये जाने की अर्जी खारिज कर दी थी और मामले में चार्जशीट दाखिल करने को कहा।महिला के ससुराल वालों ने हाईकोर्ट में अपील कर शिकायत को खारिज करने की...

सभी पहाड़ी राज्यों में विशेष स्वास्थ्य पैकेज उपलब्ध कराना केंद्र का कर्तव्य है : उत्तराखंड हाईकोर्ट
सभी पहाड़ी राज्यों में विशेष स्वास्थ्य पैकेज उपलब्ध कराना केंद्र का कर्तव्य है : उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राज्य में स्वास्थ्य की स्थिति को सुधारने के लिए अनेक निर्देश जारी किए। न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति लोक पाल सिंह ने कहा कि यह केंद्र का कर्तव्य है कि वह सभी पहाड़ी राज्यों को विशेष स्वास्थ्य पैकेज दे। कोर्ट ने कहा, “उत्तराखंड को जिस तरह का वित्तीय संकट झेलना पड़ रहा है उससे हम अनजान नहीं हैं। केंद्र सभी पहाड़ी राज्यों को स्वास्थ्य पैकेज उपलब्ध कराए ताकि वह अपने-अपने राज्यों में आम स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार ला सकें इसके बारे में कोर्ट न्यायिक रूप से...

एक गुमशुदा व्यक्ति को 13 साल में नहीं ढूंढ पाने पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार पर लगाया 60 लाख का अप्रत्याशित जुर्माना [आर्डर पढ़े]
एक गुमशुदा व्यक्ति को 13 साल में नहीं ढूंढ पाने पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार पर लगाया 60 लाख का अप्रत्याशित जुर्माना [आर्डर पढ़े]

बॉम्बे हाईकोर्ट ने पिछले 13 सालों से गुमशुदा गंगाधर पाटिल नामक व्यक्ति को नहीं ढूंढ पाने के लिए महाराष्ट्र सरकार को 60 लाख रुपए जमा कराने को कहा है।औरंगाबाद पीठ के न्यायमूर्ति टीवी नलवाडे और केवी वाल्डाने पाटिल की पत्नी द्वारा दायर एक आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।पृष्ठभूमिगंगाधर किसानों से कपास इकट्ठा करता था और उसे स्पिन यार्न का व्यवसाय करने वाले कोआपरेटिव सोसायटी को बेचा करता था।आरोपी नंबर 8 गंगाखेड और एमएलए विट्ठल गायकवाड उस सोसायटी के निदेशक थे। गंगाधर का 53.58 लाख...

अपराध-पीड़ित आरोपी का जमानत रद्द किये जाने की मांग कर सकता है : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
अपराध-पीड़ित आरोपी का जमानत रद्द किये जाने की मांग कर सकता है : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

‘यह राज्य का दायित्व है कि वह आरोपी को क़ानून के हवाले करे लेकिन इस प्रक्रिया में अपराध के वास्तविक भुक्तभोगी को क़ानून के बाहर खड़े रहने और पूरी प्रक्रिया को पीछे से देखने की अनुमति नहीं दी जा सकती।’मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महेश पहाड़े बनाम मध्य प्रदेश राज्य मामले में कहा कि किसी अपराध के पीड़ित को जमानत को रद्द करने या सजा को निलंबित किये जाने की मांग करने का अधिकार है।न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला ने एक आवेदन पर गौर करते हुए उक्त बातें कही। इस आवेदन में के आरोपी को निचली...

सिर्फ धर्म के आधार पर किसी व्यक्ति की प्रोफाइलिंग हमारे संवैधानिक धर्म के खिलाफ : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सिर्फ धर्म के आधार पर किसी व्यक्ति की प्रोफाइलिंग हमारे संवैधानिक धर्म के खिलाफ : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

“वीसा के नियमों का हर उल्लंघन का मतलब यह नहीं है कि उस व्यक्ति को देश में प्रवेश करने से ही रोक दिया जाए बशर्ते कि संबंधित व्यक्ति के बारे में यह साक्ष्य हो कि उसका व्यवहार राष्ट्रीय हितों के खिलाफ था।”आव्रजन अधिकारीयों को ओसीआई कार्डधारी एक व्यक्ति को “काली सूची” में डालने के निर्णय पर पुनर्विचार करने का आदेश देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि वीसा के नियम का हर उल्लंघन का मतलब यह नहीं है कि उस व्यक्ति को देश में प्रवेश करने से ही रोक दिया जाए। ऐसा तभी किया जा सकता है जब इस बात का सबूत हो कि...

संदेह का लाभ देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरोपी को 6 साल की बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या के आरोप से बरी किया [निर्णय पढ़ें]
संदेह का लाभ देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरोपी को 6 साल की बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या के आरोप से बरी किया [निर्णय पढ़ें]

आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने आईपीसी की धारा 302 और 376(f) के तहत सजायाफ्ता एक आरोपी को बरी कर दिया है। आरोपी गायकवाड को छह साल की पीड़ित बच्ची से एक फुट दूर सोया पाया गया। इस  बच्ची के गुप्तांगों पर चोट के निशान थे और वह बेहोश पाई गई थी।न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति सारंग कोटवाल आरोपी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया जिसमें उसने निचली अदालत के निर्णय को चुनौती दी थी जिसने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।मामले की पृष्ठभूमिसितंबर 4 2009 को मृतक के पिता ने...

शादी का अर्थ यह नहीं है कि पत्नी को यौन संबंधों के लिए हमेशा इच्छुक होना चाहिए : दिल्ली हाईकोर्ट
शादी का अर्थ यह नहीं है कि पत्नी को यौन संबंधों के लिए हमेशा इच्छुक होना चाहिए : दिल्ली हाईकोर्ट

वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि शादी का अर्थ यह नहीं है कि पत्नी को अपने पति के साथ हमेशा शारीरिक संबंध बनाने के लिए तैयार रहना चाहिए। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ ने आरटीआई फाउंडेशन, आल इंडियन डेमोक्रेटिक विमेंस एसोसिएशन (एआईडीडब्ल्यूए) और वैवाहिक बलात्कार की शिकार एक महिला की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान यह बात कही। “विवाह का मतलब यह नहीं है कि महिला (शारीरिक...

माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक गुजारा और कल्याण अधिनियम के तहत वरिष्ठ नागरिक अंतरिम बेदखली की मांग कर सकते हैं : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक गुजारा और कल्याण अधिनियम के तहत वरिष्ठ नागरिक अंतरिम बेदखली की मांग कर सकते हैं : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

‘वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों के उल्लंघन को रोकने को प्रभावी बनाना होगा नहीं तो अगर इस बारे में अपील की सुनवाई नहीं की गई या अदालतें अगर नकली तरीके से इससे निपटती रहीं तो यह क़ानूनी व्यवस्था के टूटने का लक्षण होगा।’छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रमोद राजनकर बनाम अरुणाशंकर मामले में कहा था कि वरिष्ठ नागरिक अंतरिम राहत के रूप में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक गुजारा और कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत बेदखली की मांग कर सकते हैं।एक वरिष्ठ नागरिक दम्पति ने मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत की थी कि उसका बेटा और उसकी बहू...