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अपने वेबसाइट से लोगों को ठगने वाली ई-कॉमर्स कंपनियों के दायित्व क्या हैं? सुप्रीम कोर्ट ने इंडिया मार्ट की अपील पर नोटिस जारी किया [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
23 July 2018 5:00 PM GMT
अपने वेबसाइट से लोगों को ठगने वाली ई-कॉमर्स कंपनियों के दायित्व क्या हैं? सुप्रीम कोर्ट ने इंडिया मार्ट की अपील पर नोटिस जारी किया [आर्डर पढ़े]
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ई-कॉमर्स कंपनी इंडिया मार्ट के प्रबंध निदेशक की विशेष अनुमति याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। इस याचिका में कंपनी के वेबसाइट के खिलाफ दायर शिकायत को निरस्त करने की मांग की गई है।

न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने निर्देश दिया कि दर्ज एफआईआर की जांच के सिलसिले में ई-कॉमर्स वेबसाइट और इसके अधिकारियों के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की जाए।

दिनेश अग्रवाल के वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में कहा कि वेबसाइट ने तो सिर्फ एक मंच उपलब्ध कराया है और उसका उस पर कोई नियंत्रण नहीं है और न तो क्रेता और न ही विक्रेता से किसी भी तरह का कमीशन लिया गया।

पटना हाईकोर्ट के समक्ष कंपनी के प्रबंध निदेशक ने एक अपील दायर कर इस बारे में शिकायत को खारिज करने की मांग की है। शिकायत रामजी लाल शर्मा नामक व्यक्ति ने दायर की थी। शर्मा के अनुसार उसने वेबसाइट पर पंजीकरण कराया और एक व्यक्ति से संपर्क किया जिसने उसको एक ‘बोलने वाला तोता’ बेचने का प्रस्ताव दिया। उससे 15 हजार रुपए भी जमा कराया गया पर उसको तोता नहीं दिया गया। यद्यपि इंडिया मार्ट ने उसे विक्रेता के बारे में जानकारियाँ उपलब्ध कराई, वह इससे संतुष्ट नहीं हुआ और ई-कॉमर्स कंपनी को आरोपी बनाते हुए शिकायत दर्ज करा दी।

कंपनी ने सूचना तकनीकी अधिनियम, 2000 की धारा 79 के तहत कहा कि इस मामले के बारे में उसकी कोई देनदारी नहीं बनती है।

हाईकोर्ट ने हालांकि इस दलील को ठुकरा दिया कि मध्यस्थों को कुछ मामलों में देनदारी से मुक्त रखा गया है बशर्ते कि ये मध्यस्थ अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा से करते हैं और केंद्र सरकार द्वारा समय समय पर जारी दिशानिर्देशों का पालन करते हैं। कोर्ट ने कहा कि विक्रेता को कोई उत्पाद बेचने की अनुमति देने से पहले इंडिया मार्ट को तत्परता दिखानी चाहिए थी।

मेरा मानना है कि सिंह का सारा मामला अधिनियम की धारा 79 पर टिका हुआ है और उसका मानना है कि उसके मुवक्किल के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती। मैं वकील की दलील से सहमत नहीं हूँ। मध्यस्थ को सिर्फ उस स्थिति में धारा 79 के तहत किसी दायित्व से छूट दी गई है कि मध्यस्थ तीसरे पक्ष की उस किसी सूचना, आंकड़े या संदेश के लिंक के लिए जिम्मेदार नहीं होगा जो उस पर उपलब्ध है। धारा 79 कहीं यह नहीं कहता कि अगर मध्यस्थ के वेबसाइट का प्रयोग करते हुए कोई धोखाधड़ी होती है तो उस स्थिति में भी उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी...,” पीठ ने कहा।

“कोर्ट के समक्ष ऐसा कोई रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया है जिससे यह साबित हो कि नंदा को इंडिया मार्ट के प्लेटफार्म से कुछ भी बेचने की अनुमति देने से पहले कोई सतर्कता बरती गई हो। फिर, इस अदालत के अनुसार, अगर इस तरह की कोई सतर्कता बरती गई है तो यह जाँच में सामने आनी चाहिए। यह मामला सूचना एवं तकनीक अधिनियम के तहत किए गए अपराध से संबंधित है और साइबर अपराध होने की वजह से सिर्फ इस बारे में होने वाली वैज्ञानिक जाँच से ही सही बात सामने आएगी। इस मामले में षड्यंत्र की बात भी शामिल है जो कि प्राथमिकी से स्पष्ट है,” हाईकोर्ट ने कहा।


 
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