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हत्या के अभियुक्त बरी : सुप्रीम कोर्ट ने उन चार लोगों के ख़िलाफ़ जाँच का आदेश दिया जिनकी पहचान घायल गवाह ने की थी [निर्णय पढ़े]
हत्या के अभियुक्त बरी : सुप्रीम कोर्ट ने उन चार लोगों के ख़िलाफ़ जाँच का आदेश दिया जिनकी पहचान घायल गवाह ने की थी [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने न केवल हत्या के छह आरोपियों को मौत की सज़ा से बरी कर दिया है बल्कि 15 साल पहले हुए इस हत्याकांड की आगे जाँच का आदेश भी दिया। जस्टिस सिकरी ,जस्टिस अब्दुल नज़ीर और जस्टिस म आर शाह की पीठ ने ये निर्णय दिया |अंकुश मारुति शिंदे और पाँच अन्य लोगों पर यह आरोप है कि उन्होंने पाँच हत्याओं को अंजाम देने और एक महिला के साथ बलात्कार का आरोप है। यह महिला बच गई और पर 15 साल के एक बच्चे की मौत हो गई। सुप्रीम कोर्ट ने 2009 में इस मामले में सभी लोगों को मौत की सज़ा को सही ठहराया था। पर मंगलवार को...

सुप्रीम कोर्ट ने नाल्सा से मोटर वाहन दुर्घटना मध्यस्था प्रकोष्ठ बनाने को कहा और मोटर वाहन दुर्घटना मध्यस्थता प्राधिकरण के गठन का सुझाव दिया [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने नाल्सा से मोटर वाहन दुर्घटना मध्यस्था प्रकोष्ठ बनाने को कहा और मोटर वाहन दुर्घटना मध्यस्थता प्राधिकरण के गठन का सुझाव दिया [निर्णय पढ़े]

मंगलवार को एक अहम फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने सड़क दुर्घटना में पीड़ितों को मुआवज़ा दिलाने में होने वाली देरी को रोकने के संदर्भ में कुछ अहम निर्देश जारी किए। 18 साल के उम्र में दुर्घटना का शिकार हुए एक वकील ने एक याचिका दायर कर मुआवज़े की राशि में बढ़ोतरी की माँग की। इस अपील पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वक़ील अरुण मोहन की दलीलों पर ग़ौर किया जिन्होंने देश के हर जिले में एक मोटर वाहन दुर्घटना मध्यस्थता प्राधिकरण (एमएएमए) के गठन की बात रखी। कोर्ट ने कहा कि वक़ील के सुझाव काफ़ी...

आपराधिक मामले के बारे में तथ्यों को छिपाने के कारण पंजीकरण से हाथ धोने वाले वक़ील को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं [निर्णय पढ़े]
आपराधिक मामले के बारे में तथ्यों को छिपाने के कारण पंजीकरण से हाथ धोने वाले वक़ील को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने उस वक़ील की याचिका ख़ारिज कर दी है जिसका पंजीकरण इस आधार पर रद्द कर दिया गया था कि उसने एक आपराधिक मामले से जुड़े तथ्यों को छिपाया था। आनंद कुमार शर्मा को हिमाचल प्रदेश के बार काउन्सिल में जुलाई 1988 में एडवोकेट के रूप में पंजीकरण मिला। पर उनका पंजीकरण बाद में इस आधार पर रद्द कर दिया गया कि एक तो वे हिमाचल प्रदेश सरकार की सेवा में थे और दूसरा यह कि वे एक आपराधिक मामले में भी फँसे थे। यद्यपि शर्मा हिमाचल बार काउन्सिल में पंजीकृत थे, पर बाद में बीसीआई ने उनका पंजीकरण राजस्थान...

राज्य क़ानूनी रूप से निकाले गए बालू को अपनी सीमा से बाहर भेजे जाने से नहीं रोक सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
राज्य क़ानूनी रूप से निकाले गए बालू को अपनी सीमा से बाहर भेजे जाने से नहीं रोक सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर क़ानूनी रूप से बालू की खुदाई की गई है तो कोई राज्य सरकार संवैधानिक रूप से इसे अपनी सीमा से बाहर भेजने पर प्रतिबंध नहीं लगा सकता। न्यायमूर्ति एके सीकरी, एस अब्दुल नज़ीर और एमआर शाह की पीठ ने गुजरात से से बालू को बाहर नहीं भेजने के राज्य के नियम को रद्द कर दिया। गुजरात ने एक नियम बनाकर बालू को गुजरात की सीमा के बाहर भेजने पर प्रतिबंध लगा दिया था। गुजरात हाईकोर्ट में गुजरात गौण खनिज नियम, 1966 को चुनौती दी गई थी जिसमें गुजरात राज्य के बाहर बालू को भेजने पर...

क़ैदी के जेल में रहकर स्नातक बनने और कविता लिखने से प्रभावित हुआ सुप्रीम कोर्ट, उसकी मौत की सज़ा को उम्र क़ैद में बदला
क़ैदी के जेल में रहकर स्नातक बनने और कविता लिखने से प्रभावित हुआ सुप्रीम कोर्ट, उसकी मौत की सज़ा को उम्र क़ैद में बदला

सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने अगवा और हत्या करने के एक आरोपी को जेल में रहते हुए स्नातक की डिग्री लेने और कविता लिखने पर ग़ौर करते हुए उसकी मौत की सज़ा को आजीवन कारावास में बदल दिया। ज्ञानेश्वर सुरेश बोरकर को आईपीसी की धारा 302, 364 और 201 के तहत मौत की सज़ा दी गई थी। उस पर एक नाबालिग़ लड़की 'ऋषिकेश' की हत्या करने का आरोप था। वरिष्ठ वक़ील आनंद ग्रोवर ने आरोपी द्वारा लिखी गई कविताओं को सुप्रीम कोर्ट के तीन सदस्यों की पीठ के संज्ञान में लाया। इस पीठ में न्यायमूर्ति एके सीकरी, एस अब्दुल...

 गरीब, खानाबदोश जनजाति के निर्दोष लोगों को झूठा फंसाया गया,  SC ने 6 को बरी करते हुए आगे जांच के आदेश दिए, 5 लाख का मुआवजा
" गरीब, खानाबदोश जनजाति के निर्दोष लोगों को झूठा फंसाया गया, " SC ने 6 को बरी करते हुए आगे जांच के आदेश दिए, 5 लाख का मुआवजा

एक अनूठे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने न केवल मौत की सजा के 6 दोषियों को बरी कर दिया है बल्कि 16 वर्ष पहले हुए एक अपराध में आगे जांच का भी आदेश दे दिया है।न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी, न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति एम. आर. शाह की पीठ ने महाराष्ट्र राज्य को यह आदेश दिया है कि बरी हुए सभी दोषियों को क्षति के रूप में 5 लाख रुपये का भुगतान किया जाए।अंकुश मारुति शिंदे और 5 अन्य पर 5 हत्याएं करने और 1 महिला (जो बच गई) और 15 साल की एक बच्ची (जिसकी मौत हो गई) के साथ बलात्कार करने का आरोप था।...

टाडा अधिनियम के तहत दर्ज किए गए बयान को टाडा कोर्ट किसी अन्य क़ानून के तहत दर्ज मामले में प्रयोग नहीं कर सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
टाडा अधिनियम के तहत दर्ज किए गए बयान को टाडा कोर्ट किसी अन्य क़ानून के तहत दर्ज मामले में प्रयोग नहीं कर सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि टाडा प्रावधानों के तहत दर्ज किए गए किसी आरोपी के बयान को उस आरोपी के ख़िलाफ़ किसी अन्य मामले में प्रयोग नहीं किया जा सकता ख़ासकर तब जब विशेष अदालत ने उचित अधिकार नहीं होने के कारण टाडा के तहत मामले का संज्ञान नहीं लिया है। वर्तमान मामले में विशेष टाडा अदालत ने आरोपी को इस आधार पर बरी कर दिया था कि टाडा की धारा 20 के तहत पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी और न ही यह क़ानूनसम्मत था। राज्य ने इस आदेश के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। कोर्ट के इस मत से सहमत पीठ ने...

यौन उत्पीड़न के शिकार मानसिक रूप से बीमार पीड़ितों को समाज से ज़्यादा सुरक्षा की उम्मीद; बॉम्बे हाईकोर्ट ने धारा 377 के तहत सज़ा पाए आरोपी को राहत देने से मना किया
यौन उत्पीड़न के शिकार मानसिक रूप से बीमार पीड़ितों को समाज से ज़्यादा सुरक्षा की उम्मीद; बॉम्बे हाईकोर्ट ने धारा 377 के तहत सज़ा पाए आरोपी को राहत देने से मना किया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने आईपीसी की धारा 377 और 387 के तथत सज़ा पाए एक आरोपी को कोई भी राहत देने सेमना कर दिया। इस आरोपी पर मानसिक रूप से बीमार 32 साल के एक व्यक्ति के साथ अप्राकृतिक यौन संबंधस्थापित करने का आरोप है और उसे सात साल की जेल की सज़ा मिली है।न्यायमूर्ति मृदुला भटकर ने आरोपी रामचंद्र यादव की आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए यह फ़ैसला दिया।आरोपी रामचंद्र यादव पहले ही 4.5 साल जेल में गुज़ार चुका है। कोर्ट ने कहा कि मानसिक रूप से बीमारव्यक्ति को समाज से ज़्यादा सुरक्षा की ज़रूरत होती है और इस...

संशोधित एससी/एसटी अधिनियम कोर्ट के अधिकार को सिर्फ़ उन मामलों में ज़मानत देने तक सीमित नहीं करता जहाँ किसी भी तरह का अपराध नहीं हुआ है : कलकत्ता हाईकोर्ट
संशोधित एससी/एसटी अधिनियम कोर्ट के अधिकार को सिर्फ़ उन मामलों में ज़मानत देने तक सीमित नहीं करता जहाँ किसी भी तरह का अपराध नहीं हुआ है : कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक पत्रकार को अग्रिम ज़मानत दे दी है जिस पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 की धारा 3(1) (r) (u) के तहत मामला दर्ज किया गया है।न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बाग़ची और मनोजित मंडल ने कहा कि इस अधिनियम में धारा 18A को जोड़ने के बावजूद कोर्ट को इस बात की पड़ताल का अधिकार है कि एफआइआर में जिस तरह के आरोप लगाए गए हैं वे ठहरते हैं कि नहीं।यह एफआईआर एक बंगाली अख़बार के प्रकाशक के ख़िलाफ़ दर्ज किया गया है क्योंकि सबर समुदाय के लोगों ने उसमें प्रकाशित एक...

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अगर पक्षकार ना चाहें तो अदालत का यह विशेषाधिकार चला जाता है, उसने पूर्व मुख्य न्यायाधीश को एकमात्र मध्यस्थ नियुक्त किया [आर्डर पढ़े]
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अगर पक्षकार ना चाहें तो अदालत का यह विशेषाधिकार चला जाता है, उसने पूर्व मुख्य न्यायाधीश को एकमात्र मध्यस्थ नियुक्त किया [आर्डर पढ़े]

दिल्ली हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा को भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL -भेल) और उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (UPRVUNL) के बीच हरदुआगंज ताप बिजली संयंत्र को लेकर उठे विवाद को सुलझाने के लिए एकमात्र मध्यस्थ नियुक्त किया है। न्यायमूर्ति नवीन चावला ने उनकी नियुक्ति का आदेश जारी किया जो कि दोनों के बीच ठेका कार्य को लेकर हुए विवाद का निपटारा करेंगे। भेल का आरोप है कि उसने जो सेवाएँ दी हैं उसके बदले उसको समय पर भुगतान नहीं मिला...

मंदिर में प्रतिदिन होने वाली गतिविधियों में भाग लेना यह निर्धारित करता है कि मंदिर निजी है या सार्वजनिक : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
मंदिर में प्रतिदिन होने वाली गतिविधियों में भाग लेना यह निर्धारित करता है कि मंदिर निजी है या सार्वजनिक : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आम लोगों का मंदिर के दर्शन और प्रतिदिन की पूजा या समारोहों में भाग लेना मंदिर के निजी/सार्वजनिक चरित्र के निर्धारण के लिए महत्त्वपूर्ण है। इस संबंध में इंदौर के एक राम मंदिर के पुजारी ने एक मामला दायर कर यह घोषित किए जाने की माँग की कि मंदिर निजी है और राज्य को इस मंदिर के प्रबंधन, पूजा अर्चना और कृषि भूमि पर क़ब्ज़े का कोई अधिकार नहीं है। मामले में राज्य सरकार के अधिकारियों के ख़िलाफ़ हुक्मनामा भी जारी करने का आग्रह किया गया। यद्यपि मिचलि अदालत ने इस मामले में अपना...

हर संत एक अतीत है और हर पापी का एक भविष्य है : बॉम्बे हाईकोर्ट ने डकैती के आरोप में सज़ा पाए लड़कों को दी राहत [निर्णय पढ़े]
हर संत एक अतीत है और हर पापी का एक भविष्य है : बॉम्बे हाईकोर्ट ने डकैती के आरोप में सज़ा पाए लड़कों को दी राहत [निर्णय पढ़े]

एक फ़ैसला सुनाते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने ऑस्कर वाइल्ड को उद्धृत किया। कोर्ट ने कहा कि परिस्थितियाँ ऐसी थीं जिसकी वजह से इन लोगों को क़ानून को तोड़ने के लिए बाध्य होना पड़ा।नागपुर पीठ के न्यायमूर्ति एसबी शुक्रे और न्यायमूर्ति एसएम मोदक एक आपराधिक मामले को लेकर रिट पेटीशन की सुनवाई कर रहे थे जिसे 21 साल के आकाश देशपांडे और 23 साल के निकुंज साधवानी नेदायर किया था। ये दोनों ही सीआरपीसी की धारा 427 के तहत राहत की माँग कर रहे थे क्योंकि उन्हें सात अलग-अलग मामलों में सज़ा मिली थी जो एक के बाद एक चलनी...

दिल्ली हाईकोर्ट ने भागकर शादी करने वाले जोड़े को दी सुरक्षा, ज्वाइंट मेडिक्लेम पॉलिसी लेने का निर्देश दिया [आर्डर पढ़े]
दिल्ली हाईकोर्ट ने भागकर शादी करने वाले जोड़े को दी सुरक्षा, ज्वाइंट मेडिक्लेम पॉलिसी लेने का निर्देश दिया [आर्डर पढ़े]

भागकर शादी करने वाले एक जोड़े को सुरक्षा देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने पति को ₹5 लाख रुपए का ज्वाइंट मेडिक्लेम पॉलिसी लेने का निर्देश दिया। अपने आदेश में न्यायमूर्ति नज़्मी वज़ीरी ने कहा, "याचिकाकर्ता नम्बर 2 इस बात का वादा करता है कि वह अपने और अपनी पत्नी के लिए ₹5 लाख रुपए का मेडिक्लेम पॉलिसी लेगा। यह पॉलिसी कम से कम शादी की अवधि तक जारी रखी जाएगी। वह इसमें याचिकाकर्ता नम्बर 1, पत्नी को उस सभी सम्पत्तियों में बराबर की भागीदारी देगा जो उसे एक वारिस के तौर पर मिलेगा।" इस जोड़े ने सुरक्षा के...

केंद्रीय सूचना आयुक्त ने कहा, सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन एक सूचना [आर्डर पढ़े]
केंद्रीय सूचना आयुक्त ने कहा, सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन एक 'सूचना' [आर्डर पढ़े]

मुख्य सूचना आयुक्त सुधीर भार्गव ने रज़ाक़ के हैदर की अपील पर यह बात कही है जिन्होंने आरटीआई दायर कर केंद्रीय सार्वजनिक सूचना अधिकारी (CPIO), चुनाव आयोग (EC) से एलेक्ट्रोनिक वोटिंग (ईवीएम) मशीन माँगा है। उनके अनुसार, आरटीआई अधिनियम की धारा 2(f) और 2(i) के तहत 'सूचना' और 'रेकर्ड' की परिभाषा में मॉडल या कोई नमूना शामिल है। इसलिए ईवीएम 'सूचना' की श्रेणी में आता है और उन्हें अधिनियम की धारा 6(1) के तहत दिया जाना चाहिए। इस आवेदन को ख़ारिज करने को सही ठहराते हुए CPIO ने कहा कि मॉडल/नमूना चुनाव...

जाँच रिपोर्ट पर आपत्ति की सुनवाई किए बिना हटाए गए मजिस्ट्रेट को सुप्रीम कोर्ट से राहत [निर्णय पढ़े]
जाँच रिपोर्ट पर आपत्ति की सुनवाई किए बिना हटाए गए मजिस्ट्रेट को सुप्रीम कोर्ट से राहत [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने अभी हाल ही में एक मजिस्ट्रेट को नौकरी से बर्ख़ास्तगी को इस आधार पर निरस्त कर दिया कि उसे जाँच अधिकारी के निष्कर्षों को चुनौती देने का मौक़ा नहीं दिया गया। न्यायमूर्ति एके सीकरी, एसए नज़ीर और एमआर शाह की पीठ ने उसकी बर्ख़ास्तगी को जायज़ ठहराने वाले मद्रास हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ आर ऐलेग्ज़ैंडर की याचिका स्वीकार कर ली। एक वक़ील ने आर ऐलेग्ज़ैंडर के ख़िलाफ़ उस समय शिकायत की थी जब वे कट्टूमन्नारकोईल में मुंसिफ़-सह-न्यायिक मजिस्ट्रेट था। हाईकोर्ट की प्रशासनिक समिति ने...

घटना के समय नाबालिग़ पाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार के आरोपी को रिहा किया [निर्णय पढ़े]
घटना के समय नाबालिग़ पाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार के आरोपी को रिहा किया [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने ने शुक्रवार को बलात्कार के आरोपी एक व्यक्ति को रिहा कर दिया क्योंकि जाँच के बाद उसे घटना के समय नाबालिग़ पाया गया। न्यायमूर्ति एमवी रमना,न्यायमूर्ति एमएम शांतनागौदर और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी की पीठ ने इस आरोपी को रिहा किए जाने का आदेश दिया क्योंकि यह व्यक्ति 6 साल की कैद की सज़ा पहले ही काट चुका है। किसी नाबालिग़ को इस अपराध के लिए अधिकतम 3 साल की सज़ा हो सकती है। राजू और दो अन्य लोगों को 15 साल की एक लड़की से बलात्कार के आरोप का दोषी मानते हुए हाईकोर्ट ने यह मानने से...

अपने सहकर्मी की नाबालिग़ बेटी से यौन संबंध बनाने वाले वायु सेना के अधिकारी की बर्ख़ास्तगी को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया [आर्डर पढ़े]
अपने सहकर्मी की नाबालिग़ बेटी से यौन संबंध बनाने वाले वायु सेना के अधिकारी की बर्ख़ास्तगी को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय वायु सेना के एक फ़्लाइट लेफ़्टिनेंट की बर्ख़ास्तगी को सही ठहराया है। इस अधिकारी पर अपने एक सहकर्मी की नाबालिग़ बेटी के साथ यौन संबंध बनाने का आरोप है। सहकर्मी की शिकायत पर जाँच बैठाई गई और इसकी रिपोर्ट में यह कहा गया कि नाबालिग़ पीडिता की स्थिति को देखते हुए आम कोर्ट मार्शल व्यावहारिक नहीं होगा। इसके बदले, जाँच रिपोर्ट की अनुशंसा के आधार पर वायु सेना प्रमुख ने अपनी राय दी कि इस अधिकारी को स्थाई तौर पर रिटायर कर दिया जाए। केंद्र सरकार ने वायु सेना प्रमुख की अनुशंसा...