मुख्य सुर्खियां

पत्नी को ठीक से खाना बनाने या घर का काम ठीक से करने को कहना उसके साथ दुर्व्यवहार नहीं है : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
पत्नी को ठीक से खाना बनाने या घर का काम ठीक से करने को कहना उसके साथ दुर्व्यवहार नहीं है : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में महाराष्ट्र सरकार द्वारा दाखिल एक आपराधिक अपील को खारिज करते हुए अपने फैसले में कहा कि पत्नी को ठीक से खाना बनाने को कहना या फिर घर का काम ठीक से करने को कहना उसके साथ अत्याचार नहीं है। यह अपील सांगली के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के फैसले के खिलाफ दाखिल किया गया था जिसमें विजय शिंदे और उसके माँ-बाप को धारा 498A (क्रूरता) और धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाने) के तहत दर्ज मामले में बरी कर दिया था।न्यायमूर्ति एसवी कोटवाल ने अपने फैसले में विजय शिंदे, उसकी 71 वर्षीया माँ...

ऐसे समय में जब रिटायर होने के बाद जजों में नियुक्ति पाने की होड़ लगी होती है, मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व जज ए सेल्वम ने चुना खेती करना
ऐसे समय में जब रिटायर होने के बाद जजों में नियुक्ति पाने की होड़ लगी होती है, मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व जज ए सेल्वम ने चुना खेती करना

एक ऐसे समय में जब कुछ भी वायरल हो जाता है, ऐसा हमेशा नहीं होता कि एक पूर्व जज का अपने खेतों में ट्रैक्टर चलाना वायरल हो जाए। हालांकि, मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व जज ए सेल्वम का अपने खेत में ट्रैक्टर चलाता वीडिओ पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस वीडिओ में सेल्वम टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहनकर सर में गमछा बांधकर ट्रैक्टर से अपना खेत जोतते हुए नजर आ रहे हैं। द न्यूज़ मिनट की एक रिपोर्ट के अनुसार, सेल्वम खेती करने वाले परिवार से आते हैं। इस वर्ष अप्रैल में रिटायर...

दिल्ली हाईकोर्ट ने पोक्सो पीड़ित का बयान एनजीओ/काउंसेलर के माध्यम से दर्ज करने पर एतराज किया; कहा – बयान पुलिस या मजिस्ट्रेट ही रिकॉर्ड करे [निर्णय पढ़ें]
दिल्ली हाईकोर्ट ने पोक्सो पीड़ित का बयान एनजीओ/काउंसेलर के माध्यम से दर्ज करने पर एतराज किया; कहा – बयान पुलिस या मजिस्ट्रेट ही रिकॉर्ड करे [निर्णय पढ़ें]

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस द्वारा यौन हिंसा के शिकार लोगों का बयान एनजीओ या किसी निजी काउंसेलर द्वारा रिकॉर्ड कराये जाने की अनुमति देने से अपनी असहमति जताई है और कहा है कि पीओसीएसओ (पोक्सो) अधिनियम के तहत बयान सिर्फ किसी पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट को ही दिया जा सकता है न कि किसी तीसरे पक्ष या किसी काउंसेलर को।कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गीता मित्तल और अनु मल्होत्रा की खंडपीठ ने कहा कि पुलिस द्वारा पीड़ित का एक से अधिक बयान लेना अवैध नहीं है।जेजे बोर्ड का सन्दर्भजुवेनाइल जस्टिस...

दिल्ली की एएपी सरकार को हाईकोर्ट का झटका - न्यूनतम वेतन में संशोधन की अधिसूचना को निरस्त किया [निर्णय पढ़ें]
दिल्ली की एएपी सरकार को हाईकोर्ट का झटका - न्यूनतम वेतन में संशोधन की अधिसूचना को निरस्त किया [निर्णय पढ़ें]

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सरकार को तगड़ा झटका देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने के केजरीवाल सरकार फैसले को रद्द कर दिया है। हाइकोर्ट ने मार्च 2017 के सभी श्रेणी के मजदूरों की न्यूनतम मज़दूरी बढ़ाने वाली अधिसूचना को संविधान-विरुद्ध बताया है। कोर्ट ने कहा कि ये प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ हैं।दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गीता मित्तल और सी हरि शंकर की खंडपीठ ने न्यूनतम मजदूरी पर बनाये गए परामर्श पैनल की अधिसूचना को प्राकृतिक न्याय के...

पश्चाताप के रूप में आपराधिक शिकायत में शामिल पक्षकारों को दिल्ली हाईकोर्ट ने 300 पौधे लगाने को कहा [आर्डर पढ़े]
पश्चाताप के रूप में आपराधिक शिकायत में शामिल पक्षकारों को दिल्ली हाईकोर्ट ने 300 पौधे लगाने को कहा [आर्डर पढ़े]

ऐसे बहुत मामले होते हैं जब आपराधिक शिकायतों में दोनों पक्ष आपस में सुलह कर लेते हैं और फिर कोर्ट के पास आकर एफआईआर को निरस्त करने का आग्रह करते हैं। पर इस मामले में शिकायतकर्ता और आरोपी ने प्रायश्चित के रूप में सामाजिक कार्य करने की इच्छा जताई।मामले में दायर एफआईआर को निरस्त करने का आदेश देते हुए न्यायमूर्ति नजमी वज़ीरी ने मामले से संबद्ध दोनों पक्षों से कहा कि वे दो सप्ताहों में 300 पौधे लगाएं।इस मामले में याचिकाकर्ता भवानी राम ने अपने वकील नरेश कौशिक के माध्यम से हाईकोर्ट में आवेदन देकर...

सरकारी फाइलों में सिर्फ किसी बात को दर्ज करना आतंरिक उपयोग के लिए है, इसका कोई क़ानूनी महत्त्व नहीं है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सरकारी फाइलों में सिर्फ किसी बात को दर्ज करना आतंरिक उपयोग के लिए है, इसका कोई क़ानूनी महत्त्व नहीं है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

इस तरह की बातों को दर्ज करना या बातचीत को किसी भी समय बदला जा सकता है या उसमें संशोधन लाया जा सकता है या फिर उचित अधिकारी इसे वापस ले सकता है।सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आधिकारिक फाइलों में किसी मुद्दे पर बातचीत के दौरान उससे संबंधित बातों को केवल दर्ज करना जो कि किसी व्यक्ति से संबंधित हो सकता है, आवश्यक रूप से सरकार का आतंरिक मामला होता है और इसका कोई क़ानूनी महत्त्व नहीं होता।भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 48(1) के तहत विष्णुदेव कोआपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी ने एक आवेदन दायर किया था। राजस्व मंत्री ने...

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने तीसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश की अनुमति नहीं देने वाले नियम को असंवैधानिक बताते हुए निरस्त किया [आर्डर पढ़े]
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने तीसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश की अनुमति नहीं देने वाले नियम को असंवैधानिक बताते हुए निरस्त किया [आर्डर पढ़े]

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य के एक नियम को असंवैधानिक बताते हुए निरस्त कर दिया जिसके तहत एक महिला कर्मचारी को उसके तीसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश देने से मना कर दिया गया था। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा ने दिया जो उर्मला मसीह नामक महिला की अर्जी पर सुनवाई कर रहे थे। इस महिला ने उत्तर प्रदेश मौलिक नियम की वित्तीय पुस्तिका के तहत मौलिक नियम 153 के प्रावधानों को चुनौती दी थी। उत्तराखंड सरकार ने भी इस नियम को स्वीकार किया है। इस नियम के तहत ऐसी महिला कर्मचारियों को मातृत्व लाभ से वंचित...

कोर्ट की बुनियादी सुविधाएं दम तोड़ रही हैं, सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में एमबीए डिग्री वाले अदालत प्रबंधकों की नियुक्ति का दिया सुझाव [निर्णय पढ़ें]
कोर्ट की बुनियादी सुविधाएं दम तोड़ रही हैं, सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में एमबीए डिग्री वाले अदालत प्रबंधकों की नियुक्ति का दिया सुझाव [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने वृहस्पतिवार को कहा कि देश भर में अदालतों में बुनियादी सुविधाओं को ज्यादा तरजीह नहीं दिया गया और देश के दूर दराज के इलाकों में ये सुविधाएं दम तोड़ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कुछ ऐसी सुविधाओं को रेखांकित किया जिसे देश के सभी कोर्ट परिसरों में उपलब्ध कराया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि सभी न्यायिक जिलों में एमबीए डिग्रीधारी अदालत प्रबंधकों की नियुक्ति की जानी है ताकि अदालत का प्रशासन सक्षमता से संचालित किया जा सके।मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में न्यायमूर्ति एएम...

यह कोई सुशासन नहीं है : सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार से सिर्फ नियमित नियुक्तियां करने को कहा [निर्णय पढ़ें]
यह कोई सुशासन नहीं है : सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार से सिर्फ नियमित नियुक्तियां करने को कहा [निर्णय पढ़ें]

‘झारखंड सरकार ने अभी तक जो किया है वह नियमित नियुक्ति से बचने का रास्ता अपनाया है और उसने अनियमित आधार पर नियुक्तियां की हैं। इसे सुशासन नहीं कह सकते।’ सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर ने कहा कि झारखंड सरकार उमादेवी फैसले के आने के बाद से पिछले एक दशक से अनियमित नियुक्तियां कर रही है और इसे कतई सुशासन नहीं कहा जा सकता। न्यायमूर्ति लोकुर और दीपक गुप्ता की पीठ ने झारखंड राज्य को निर्देश दिया कि वह सिर्फ नियमित नियुक्तियां करने पर ही गौर करे और अनियमित नियुक्तियां नहीं...

राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने 10 साल पुराने डीज़ल वाहनों के दिल्ली, एनसीआर में चलने पर रोक लगाई, बीएस-IV के बिना पंजीकरण संभव नहीं [आर्डर पढ़े]
राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने 10 साल पुराने डीज़ल वाहनों के दिल्ली, एनसीआर में चलने पर रोक लगाई, बीएस-IV के बिना पंजीकरण संभव नहीं [आर्डर पढ़े]

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने 10 साल पुराने  कमर्शियल वाहनों के दिल्ली एनसीआर में चलने  पर रोक लगाने का एक महत्त्वपूर्ण फैसला सुनाया है । नए डीज़ल वाहन जो बीएस-4 मानक वाले नहीं हैं  या ऐसे वाहन जो आवश्यक सेवाओं  (जैसे एम्बुलेंस, अग्निशमन,पेट्रोलियम, सीवर क्लीनिंग मशीन, भोजन सामग्री ढोने वाले वाहन, एलपीजी ट्रक) के लिए नहीं हैं अब पंजीकृत भी नहीं हो पाएंगे, ऐसा राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने अपने फैसले में कहा है । अधिकरण ने ऐसी सभी याचिकाओं को स्वीकार करने से मना कर दिया जो 10 साल पुराने डीज़ल वाहन...

घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत किसी तरह के राहत के दावे के लिए पति-पत्नी के बीच शादी जैसा संबंध होना चाहिए : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत किसी तरह के राहत के दावे के लिए पति-पत्नी के बीच शादी जैसा संबंध होना चाहिए : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत अगर कोई व्यक्ति राहत की मांग कर रहा है तो इसके इए महिला और उसके पति के बीच संबंध शादी जैसी होनी चाहिए।औरंगाबाद पीठ के न्यायमूर्ति मंगेश पाटिल की पीठ ने 30 वर्षीया एक महिला की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका ख़ारिज करते हुए उक्त फैसला दिया। इस महिला ने घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनयम (डीवी अधिनियम) की धारा 2(f) की सही व्याख्या की मांग की थी क्योंकि अतिरिक्त सत्र जज ने प्रथम श्रेणी के न्यायिक अधिकारी के फैसले को खारिज कर दिया था जिसमें उसने...

अगर बार काउंसिल या बार एसोसिएशन का कोई सदस्य हड़ताल का आह्वान करता है, तो ऐसे व्यक्ति के कोर्ट में पेश होने पर रोक लगाएगा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
अगर बार काउंसिल या बार एसोसिएशन का कोई सदस्य हड़ताल का आह्वान करता है, तो ऐसे व्यक्ति के कोर्ट में पेश होने पर रोक लगाएगा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

“न्याय प्राप्त करना मुकदमादारों को अधिकार है। ऐसा तभी हो सकता है जब देश में कोर्ट काम कर रहे हों। पर बार के सदस्य काम रोकने का निर्णय कर लोकतंत्र के इस तीसरे पाए को निष्क्रिय नहीं कर सकते। उनकी यह कार्रवाई देश में लोकतंत्रीय जीवन के उलट है।” मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की प्रथम पीठ ने राज्य बार काउंसिल और बार एसोसिएशन के सदस्यों और अधिकारियों द्वारा हड़ताल के आह्वान के खिलाफ महत्त्वपूर्ण निर्देश जारी किया है।मुख्य न्यायाधीश न्यायमूति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला की पीठ ने हाईकोर्ट...

एनडीपीएस मामले में सजा सिर्फ आरोपी के इकबालिया बयान के आधार पर ही नहीं हो सकता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
एनडीपीएस मामले में सजा सिर्फ आरोपी के इकबालिया बयान के आधार पर ही नहीं हो सकता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नशीली पदार्थ और मादक द्रव्य अधिनियम, 1985 के तहत किसी ठोस सबूत के अभाव में किसी को सिर्फ सह-आरोपी के इकबालिया बयान के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती।न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे और न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की पीठ ने एनडीपीएस मामले (सुरिंदर कुमार खन्ना बनाम इंटेलिजेंस ऑफिसर डायरेक्टरेट ऑफ़ रेवेन्यू इंटेलिजेंस) में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की सजा के खिलाफ अपील पर सुनवाई करते हुए यह बात कही।सुरिंदर को एक अन्य आरोपी के बयान के आधार पर इस मामले में आरोपी बनाया गया था। सभी...

बलात्कार के समय अभियुक्त के नाबालिग होने के कारण बॉम्बे हाईकोर्ट ने उसकी 20 वर्ष की कैद की सजा को खारिज किया [निर्णय पढ़ें]
बलात्कार के समय अभियुक्त के नाबालिग होने के कारण बॉम्बे हाईकोर्ट ने उसकी 20 वर्ष की कैद की सजा को खारिज किया [निर्णय पढ़ें]

हाल ही में बॉम्बे उच्च न्यायालय ने  विशेष  पॉक्सो न्यायालय के उस निर्णय को खारिज़ किया जिसमें नाबालिग लड़की से बलात्कार के अपराध में अभियुक्त को दोषी करार दिया गया था। नाबालिग लड़की मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं थी। उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के  इस फैसले को इस तर्क पर खारिज़  किया कि अभियुक्त जो कि अब 22 वर्ष का है घटना के समय किशोर था।न्यायामूर्ति एएम बदर ने ये फैसला अभियुक्त की अपील याचिका की सुनवाई के बाद दिया। यह याचिका अभियुक्त ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(G) एवं 506 तथा लैंगिक अपराधों से...

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने कहा, कर छूट की अधिसूचना में अस्पष्टता से राजस्व को फ़ायदा होना चाहिए [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने कहा, कर छूट की अधिसूचना में अस्पष्टता से राजस्व को फ़ायदा होना चाहिए [निर्णय पढ़ें]

‘हम यहाँ दृढ़ता से यह कहना चाहते हैं कि अगर कराधान क़ानून में कोई अस्पष्टता है तो इसका लाभ करदाता को होना चाहिए। पर ऐसी स्थिति में जब कर में छूट की व्याख्या की जानी हो, संदेह का लाभ राजस्व हित को मिलना चाहिए’सीमा शुल्क आयुक्त (आयात), मुंबई बनाम दिलीप कुमार और कंपनी मामले में एक अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने कहा कि कर छूट की अधिसूचनाओं को बहुत ही कड़ाई से व्याख्या की जानी चाहिए और इसकी प्रयोज्यता साबित करने का दायित्व करदाता की होनी चाहिए और उसे यह साबित करना चाहिए कि उसका मामला कर...

किसी अपराध का प्रत्यक्षदर्शी नहीं, भुक्तभोगी दे सकता है आरोपियों को बरी करने के फैसले को चुनौती और कर सकता है दुबारा सुनवाई की मांग : बॉम्बे हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
किसी अपराध का प्रत्यक्षदर्शी नहीं, भुक्तभोगी दे सकता है आरोपियों को बरी करने के फैसले को चुनौती और कर सकता है दुबारा सुनवाई की मांग : बॉम्बे हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हत्या की घटना के प्रत्यक्ष गवाह रहे सिराज पठान की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि कोई प्रत्यक्षदर्शी किसी मामले में आरोपी को बरी किये जाने के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 378 के तहत अपील नहीं दायर कर सकता और मामले की दुबारा सुनवाई की मांग नहीं कर सकता।औरंगाबाद पीठ के न्यायमूर्ति मंगेश पाटिल ने इस याचिका पर सुनवाई की जिसमें कहा गया था कि इसके बावजूद कि वह अभियोजन पक्ष द्वारा नामित प्रत्यक्षदर्शी है, उससे कोई पूछताछ नहीं की गई। इसी आधार पर याचिकाकर्ता ने सभी आरोपियों को बरी किये जाने...

सुप्रीम कोर्ट ने फिर कहा, कोई आदेश कितना भी गलत क्यों न हो, उसे सीआरपीसी की धारा 362 के तहत वापस नहीं लिया जा सकता [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने फिर कहा, कोई आदेश कितना भी गलत क्यों न हो, उसे सीआरपीसी की धारा 362 के तहत वापस नहीं लिया जा सकता [निर्णय पढ़ें]

“कोई आदेश कितना भी गलत क्यों न हो, उसे ज्ञात क़ानून के तहत ही ठीक किया जा सकता है, सीआरपीसी की धारा 362 के तहत नहीं”सुप्रीम कोर्ट ने मुहम्मद ज़ाकिर बनाम शबाना मामले में कहा है कि कोई हाईकोर्ट अपने किसी पूर्व आदेश को बहुत ही गलत बाताते हुए सीआरपीसी की धारा 362 के तहत वापस नहीं ले सकता।न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ कर्नाटक हाईकोर्ट के एक “वापसी” आदेश के खिलाफ दायर आपराधिक याचिका की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।हाईकोर्ट ने एक मामले में 10 दिन पहले दिए अपने आदेश को वापस...

दिल्ली हाईकोर्ट ने अंतर-धार्मिक विवाह करने वाले जोड़े को मिलवाया; पुलिस प्रशासन की जमकर खिंचाई की [आर्डर पढ़े]
दिल्ली हाईकोर्ट ने अंतर-धार्मिक विवाह करने वाले जोड़े को मिलवाया; पुलिस प्रशासन की जमकर खिंचाई की [आर्डर पढ़े]

दिल्ली हाईकोर्ट ने गत सप्ताह अंतर-धार्मिक विवाह करने वाले एक जोड़े को मिलवा दिया पर इस मामले में पुलिस की भूमिका की आलोचना की। न्यायमूर्ति एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति विनोद गोएल की पीठ ने संदीप कुमार की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर अपने आदेश से इस जोड़े को एक दूसरे से मिलवाया। कुमार ने कोर्ट से कहा था कि उसने और निशा ने 28 जून को इस वर्ष हिंदू रीति से शादी की। निशा मुस्लिम है और उसने हिंदू धर्म कबूल किया। यह गाज़ियाबाद विवाह पंजीकरण अधिकारी-V के समक्ष पंजीकृत कराया। निशा के पिता ने पुलिस से संपर्क...

किसी अन्य राज्य के एससी/एसटी प्रमाणपत्र के आधार पर तमिलनाडु में मेडिकल में प्रवेश नहीं मिल सकता : मद्रास हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
किसी अन्य राज्य के एससी/एसटी प्रमाणपत्र के आधार पर तमिलनाडु में मेडिकल में प्रवेश नहीं मिल सकता : मद्रास हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है कि ऐसे छात्र जिन्होंने किसी अन्य राज्य से जाति प्रमाणपत्र प्राप्त किया है, वे इस प्रमाणपत्र का प्रयोग तमिलनाडु में आरक्षित कोटे के तहत एमबीबीएस में प्रवेश के लिए नहीं कर सकते हैं।मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस वैद्यनाथन ने एस गीता की याचिका पर यह निर्णय दिया। गीता ने आंध्र प्रदेश से एससी का प्रमाणपत्र प्राप्त किया है और उसने इस प्रमाणपत्र के आधार पर तमिलनाडु में एमबीबीएस में प्रवेश की अनुमति माँगी थी।अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा कि कॉलेज के प्रोस्पेक्टस में...

खुले जेल में रखे गए कैदियों को जमानत के बिना भी पैरोल पर छोड़ा जा सकता है : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
खुले जेल में रखे गए कैदियों को जमानत के बिना भी पैरोल पर छोड़ा जा सकता है : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर किसी कैदी को खुले जेल में रखा गया है तो उसको उसके रिश्तेदारों की जमानत के बिना भी थोड़े दिनों की छुट्टी दी जा सकती है।नागपुर पीठ के न्यायमूर्ति पीएन देशमुख और न्यायमूर्ति एमजी गिरत्कर की पीठ ने इस बारे में बॉम्बे हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ के दीपक सुधाकर वाकलेकर बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य मामले में दिए गए फैसले पर भरोसा किया।याचिकाकर्ता ने छोटी अवधि की छुट्टी के लिए आवेदन दिया था पर उसका कोई रिश्तेदार उसके लिए बांड भरने को सामने नहीं आया जिसकी वजह से जेल प्राधिकरण...