Top
Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य सुर्खियां

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने तीसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश की अनुमति नहीं देने वाले नियम को असंवैधानिक बताते हुए निरस्त किया [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
3 Aug 2018 7:22 AM GMT
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने तीसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश की अनुमति नहीं देने वाले नियम को असंवैधानिक बताते हुए निरस्त किया [आर्डर पढ़े]
x

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य के एक नियम को असंवैधानिक बताते हुए निरस्त कर दिया जिसके तहत एक महिला कर्मचारी को उसके तीसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश देने से मना कर दिया गया था।

 यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा ने दिया जो उर्मला मसीह नामक महिला की अर्जी पर सुनवाई कर रहे थे। इस महिला ने उत्तर प्रदेश मौलिक नियम की वित्तीय पुस्तिका के तहत मौलिक नियम 153 के प्रावधानों को चुनौती दी थी। उत्तराखंड सरकार ने भी इस नियम को स्वीकार किया है। इस नियम के तहत ऐसी महिला कर्मचारियों को मातृत्व लाभ से वंचित करने का प्रावधान है जिनके दो या दो से अधिक बच्चे हैं।

मसीह ने 2015 में लगभग पांच महीने की छुट्टी के लिए आवेदन किया था पर उसे यह कहते हुए कि मातृत्व अवकाश सिर्फ प्रथम दो बच्चों के लिए दिया जाता है तीसरे बच्चे के लिए नहीं, छुट्टी नहीं दी गई ।

 कोर्ट ने याचिका को स्वीकार कर लिया और कहा कि सरकार के ये नियम मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 की धारा 27 के प्रावधानों के खिलाफ है। कोर्ट ने कहा कि जब कोई प्रावधान इस क़ानून के प्रावधानों से मेल नहीं खाता है तो उस स्थिति में अधिनियम के प्रावधानों को तरजीह दिया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि सरकार के प्रावधान अनुच्छेद 42 की भावना के खिलाफ नहीं होना चाहिए।

 न्यायमूर्ति शर्मा ने रुकसाना बनाम हरियाणा राज्य एवं अन्य मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले का सन्दर्भ देते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने इसी तरह पंजाब सिविल सेवा नियम के एक नियम को खारिज कर दिया था क्योंकि इसके तहत तीसरे बच्चे के होने पर मातृत्व अवकाश देने से मना किया गया था।

 शर्मा ने याचिकाकर्ता की याचिका स्वीकार कर ली और कहा, “...इस कोर्ट की राय में मौलिक नियम 153 के दूसरे प्रावधान मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 की धारा 27 के अनुरूप नहीं है और यह संविधान के अनुच्छेद 42 के खिलाफ भी है।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि उत्तराखंड सरकार ने जिस मौलिक नियम 153 को स्वीकार किया है, उसे गैरकानूनी घोषित किया जाता है।


 
Next Story