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Prayagraj Waterlogging | हाईकोर्ट का म्युनिसिपल कमिश्नर और DM को निर्देश: निचले इलाकों से बारिश का पानी पंप करके निकाला जाए

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को प्रयागराज के म्युनिसिपल कमिश्नर और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि वे यह पक्का करें कि लगातार बारिश के कारण शहर के निचले इलाकों में जमा बारिश का पानी मोरी गेट, दारागंज के रास्ते पंप करके निकाला जाए।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने प्रयागराज में जल-जमाव से जुड़ी एक स्वतः संज्ञान (suo motu) याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया।बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार के स्थानीय निकाय निदेशक (Director, Local Bodies) को भी निर्देश दिया कि वे...

लेबर कोर्ट के फैसले का पालन न करना आपराधिक अपराध: एमपी हाईकोर्ट ने देर से नौकरी पर बहाल करने की अवधि के लिए वेतन का आदेश दिया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि लेबर कोर्ट के फैसले में तय समय-सीमा का पालन न करना 'इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट, 1947' की धारा 29 के तहत एक आपराधिक अपराध है। [2026 LiveLaw (MP) 332]जस्टिस विवेक जैन की बेंच ने गौर किया कि लेबर कोर्ट ने कर्मचारी को एक महीने के भीतर नौकरी पर बहाल करने का निर्देश दिया, जिसमें एमपी रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन ने देरी की। अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने के बजाय, एग्जीक्यूटिंग कोर्ट ने कार्यवाही बंद की।एग्जीक्यूटिंग कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए बेंच ने...

निष्पक्ष सुनवाई के लिए कॉल रिकॉर्ड ज़रूरी हों तो सिर्फ़ पीड़ित की प्राइवेसी के लिए उन्हें देने से मना नहीं किया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और टावर-लोकेशन की जानकारी मांगने वाली अर्ज़ी को "सिर्फ़ पीड़ित के प्राइवेसी के अधिकार के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता, जब ये रिकॉर्ड मामले के सही फ़ैसले के लिए शुरुआती तौर पर ज़रूरी हों"।जस्टिस आलोक महरा ने कहा कि हालांकि आर्टिकल 21 के तहत आरोपी का निष्पक्ष सुनवाई और जांच का अधिकार और पीड़ित का प्राइवेसी का अधिकार, दोनों ही संवैधानिक रूप से सुरक्षित हैं। फिर भी ट्रायल कोर्ट को "इन दोनों अधिकारों के बीच संतुलन बनाना होगा" और ऐसा करने के लिए...

कोर्ट ने सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की, दिल्ली जल बोर्ड भ्रष्टाचार मामले में न्यायिक हिरासत में भेजा

दिल्ली कोर्ट ने बुधवार को आम आदमी पार्टी (AAP) नेता सत्येंद्र जैन को दिल्ली जल बोर्ड में कथित अनियमितताओं से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में न्यायिक हिरासत में भेज दिया।राउज़ एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज दिग विनय सिंह ने आरोपियों को अदालत में पेश किए जाने के बाद यह आदेश दिया।जज ने जैन की उस अर्जी को भी खारिज किया, जिसमें उनकी गिरफ्तारी को गैर-कानूनी घोषित करने की मांग की गई।AAP की पिछली दिल्ली सरकार में जल मंत्री रहे जैन को कल दिल्ली पुलिस की एंटी-करप्शन ब्रांच (ACB) ने गिरफ्तार किया था। यह मामला...

Electronic Evidence | दिल्ली हाईकोर्ट ने कानूनी सहायता पाने वालों के लिए मुफ़्त फ़ोरेंसिक मदद की मांग वाली PIL पर नोटिस जारी किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक PIL पर नोटिस जारी किया। इस PIL में कानूनी सहायता पाने के हकदार लोगों को मुफ़्त फ़ोरेंसिक एक्सपर्ट की मदद देने के लिए एक सिस्टम बनाने की मांग की गई, ताकि वे 'भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023' (BSA) की धारा 63 के तहत इलेक्ट्रॉनिक-सबूत सर्टिफ़िकेशन की ज़रूरतों को पूरा कर सकें।चीफ़ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने नेशनल लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी (NALSA) और केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय तथा गृह मंत्रालय से जवाब मांगा।ज़ीशान अख़लाक और अमन भिड़े द्वारा...

NALSAR छात्रों के खिलाफ कार्रवाई पर माफी देर से आई, BCI चेयरमैन को इस्तीफा देना चाहिए: बॉम्बे बार एसोसिएशन

बॉम्बे बार एसोसिएशन ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा की ओर से NALSAR विश्वविद्यालय के छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई। एसोसिएशन ने कहा कि 15 अगस्त को आई उनकी माफी काफी देर से आई और इसे वास्तविक पश्चाताप नहीं माना जा सकता। एसोसिएशन के अनुसार अपने पद पर बने रहने के बजाय उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।18 अगस्त को जारी पत्र में एसोसिएशन ने कहा कि 13 अगस्त को NALSAR के वर्ष 2026 के ग्रेजुएट छात्रों के खिलाफ जारी पत्र BCI के चेयरमैन के पद का दुरुपयोग था।...

कोर्ट यह तय नहीं कर सकता कि सावरकर बहादुर थे या कायर: राहुल गांधी के ट्रायल पर रोक के लिए हाईकोर्ट में याचिका

पुणे स्पेशल MP/MLA कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मानहानि के मामले में दखल देने की पंकज फड़नीस की अर्जी खारिज की थी। यह मामला दक्षिणपंथी विचारक विनायक सावरकर की कथित तौर पर बदनामी करने से जुड़ा है। इसके बाद फड़नीस ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया। उनका दावा है कि स्पेशल कोर्ट अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर के मुद्दों पर विचार कर रही है और यह तय करने की कोशिश कर रही है कि सावरकर बहादुर थे या कायर।पेशे से प्रोफेसर फड़नीस, जिनका दावा है कि उन्हें सावरकर के जीवन के बारे में...

लिव-इन रिलेशनशिप शादी जैसा ही, अपनी मर्ज़ी से साथ रहने वाले बालिग़ों को पुलिस सुरक्षा का अधिकार: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप शादी के समान ही होते हैं, भले ही उन्हें कानूनी तौर पर शादी न माना गया हो। ऐसे रिश्तों में रहने वाले बालिग़ों को पुलिस सुरक्षा पाने का अधिकार है।जस्टिस सौरभ बनर्जी ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों को भारत के संविधान के आर्टिकल 19 और 21 के तहत आज़ादी, जीवन और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार मिलते हैं।कोर्ट ने कहा कि अपनी मर्ज़ी से साथ रहने वाले बालिग़ों को अपना पार्टनर चुनने और उनके साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने का पूरा अधिकार है, जिसमें...

छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा गैर-कानूनी हिरासत और मारपीट का आरोप: पटना हाईकोर्ट पहुंचा वकील

पटना हाईकोर्ट में एक वकील ने याचिका दायर की। उनका आरोप है कि पटना के गांधी मैदान के पास विरोध कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज के दौरान जब उन्होंने पुलिसकर्मियों से संयम बरतने का अनुरोध किया, तो उन्हें गैर-कानूनी तरीके से पकड़ा गया, उनके साथ मारपीट की गई और लगभग 31 घंटे तक हिरासत में रखा गया।याचिकाकर्ता आदिल हुसैन ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट का रुख किया। उन्होंने 'रिट ऑफ़ मैंडमस' (आदेश) की मांग की है ताकि संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया जा सके।...

BNSS, UAPA के तहत हिरासत की अवधि को 90 दिनों तक सीमित नहीं करता: हाईकोर्ट का लाल किला बम धमाका आरोपी को डिफ़ॉल्ट ज़मानत देने से इनकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार (18 अगस्त) को जसीर बिलाल वानी उर्फ़ दानिश को डिफ़ॉल्ट ज़मानत देने से इनकार किया। वह 10 नवंबर, 2025 को लाल किले के पास हुई कार में धमाके के आरोपियों में से एक है, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई थी।'लेजिस्लेशन बाय रेफरेंस' (कानून के संदर्भ का सिद्धांत) को लागू करते हुए कोर्ट ने कहा कि UAPA की धारा 43(D)(2) पर लागू होने वाली CrPC की धारा 167 को BNSS की धारा 187 के तौर पर समझा जाना चाहिए।बता दें, UAPA की धारा 43D(2) के पहले प्रावधान के तहत हिरासत की अवधि को 180 दिनों तक...

NDPS मामले में मथुरा SSP ने आरोपियों के खिलाफ CCTV में दिखाई फर्जी बारदमगी, हाईकोर्ट ने कहा- गंभीर मामला, किया तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा के SSP को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। यह आदेश NDPS मामले के दो आरोपियों द्वारा पेश किए गए CCTV फुटेज के आधार पर दिया गया, जिससे कोर्ट को प्रथम दृष्टया लगा कि उनके खिलाफ "फर्जी बरामदगी" दिखाई गई।जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की बेंच ने इस मामले को "बहुत गंभीर" बताया और SSP को निर्देश दिया कि वे आवेदकों द्वारा लगाए गए आरोपों का बिंदुवार (para-wise) जवाब दें।यह आदेश आरोपी पिंकू और नरेश शर्मा द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के...

पत्नी के रंग-रूप, कम IQ और बातचीत के कौशल को लेकर ताने मारना मात्र IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता नहीं: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में एक व्यक्ति के खिलाफ क्रूरता का मामला रद्द किया। कोर्ट ने कहा कि पत्नी के रंग-रूप, कम IQ और बातचीत के खराब कौशल को लेकर ताने मारने के आरोप, अकेले IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता का अपराध साबित करने के लिए काफी नहीं हैं।संदर्भ के लिए, IPC की धारा 498A में क्रूरता को इस तरह परिभाषित किया गया: a) ऐसा कोई जानबूझकर किया गया व्यवहार जिससे महिला आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो सकती है या उसके शरीर या स्वास्थ्य को गंभीर चोट पहुँच सकती है, या b) उसे या उसके रिश्तेदारों को दहेज...

AAP MLA कुलदीप कुमार की कथित गैर-कानूनी हिरासत का मामला दिल्ली हाईकोर्ट ने बंद किया, पुलिस ने कहा- उन्हें रिहा कर दिया गया

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार (18 अगस्त) को आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक कुलदीप कुमार की कथित गैर-कानूनी हिरासत के मामले में दायर 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका को बंद कर दिया। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि उन्हें उसी दिन पहले ही रिहा कर दिया गया।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की डिवीजन बेंच ने गौर किया कि कुमार को 18 अगस्त को दोपहर करीब 3:48 बजे रिहा कर दिया गया और कहा कि उनकी रिहाई के साथ ही इस याचिका का मकसद पूरा हो गया।इस मामले का ज़िक्र सीनियर एडवोकेट शादान फरासत...

अनुकंपा नियुक्ति पॉलिसी में लड़के-लड़की के बीच फ़र्क नहीं किया जाता, पहला बच्चा का मतलब- सबसे पहले पैदा हुआ बच्चा: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य की अनुकंपा आधार पर नौकरी देने की पॉलिसी में मृतक कर्मचारी के बेटे और बेटी के बीच कोई भेदभाव नहीं किया जाता है और यह सख्ती से 'पहले बच्चे' पर लागू होती है। [2026 LiveLaw (MP) 325]जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की डिवीज़न बेंच ने मृतक कर्मचारी के इकलौते बेटे की हमदर्दी के आधार पर नौकरी की मांग को खारिज करते हुए कहा:"ऊपर बताई गई क्लॉज़ (धारा) लड़कियों और लड़कों के बीच कोई भेदभाव नहीं करती या कोई अलग वर्ग नहीं बनाती; यह सख्ती से 'पहले बच्चे' का...