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वकीलों को दोष देने से पहले जज खुद आत्ममंथन करें : बीसीआई ने पास किया प्रस्ताव – सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के जज रिटायर होने के कम से कम दो साल तक कोई पद ग्रहण नहीं करें
वकीलों को दोष देने से पहले जज खुद आत्ममंथन करें : बीसीआई ने पास किया प्रस्ताव – सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के जज रिटायर होने के कम से कम दो साल तक कोई पद ग्रहण नहीं करें

“बार पर दोष लगाने या नियंत्रित करने” से पहले आत्मनिरीक्षण करने का आह्वान करते हुए बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (बीसीआई) ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों से कहा है की वे रिटायर होने के कम से कम दो साल बाद तक कोई पद ग्रहण नहीं करें।  यह प्रस्ताव बीसीआई की संयुक्त बैठक में पास किया गया जिसमें राज्य बार काउंसिलों और हाईकोर्ट बार एसोसिएशनों के सदस्य मौजूद थे।एक प्रेस विज्ञप्ति में बीसीआई ने रिटायरमेंट के बाद न्यायमूर्ति पी सदाशिवम के केरल का राज्यपाल नियुक्त किये जाने पर उठे विवाद की चर्चा करते हुए कहा...

सबरीमाला मामला में न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा बहुमत से असहमत; कहा, किसी धर्म की किस परम्परा को समाप्त किया जाए यह कोर्ट का काम नहीं बशर्ते कि यह सती जैसी कोई सामाजिक बुराई का मामला हो
सबरीमाला मामला में न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा बहुमत से असहमत; कहा, किसी धर्म की किस परम्परा को समाप्त किया जाए यह कोर्ट का काम नहीं बशर्ते कि यह सती जैसी कोई सामाजिक बुराई का मामला हो

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने सभी उम्र की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की ऐतिहासिक इजाजत दे दी। यह फैसला बहुमत से सुनाया गया पर पाँच जजों की इस पीठ में शामिल एकमात्र महिला जज न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा ने बहुमत के इस फैसले के विरोध में अपना फैसला दिया। मल्होत्रा ने कहा कि “भक्तिभाव लैंगिक भेदभाव का विषय नहीं हो सकता”। जो चार जज बहुमत के फैसले के साथ खड़े हुए वे हैं मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, आरएफ नरीमन, एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़। न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा ने अपनी...

सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा में कुली समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने को सही ठहराया [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा में कुली समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने को सही ठहराया [निर्णय पढ़ें]

सामान्य रूप से जब अंग्रेजी के किसी शब्द के अंत में “s” लगाया जाता है तो वह बहुवचन हो जाता है । पर इस ‘s’ की वजह से एक मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया। ‘कुलीज’ को ‘कुली’ का बहुवचन बताते हुए सुप्रीम कोर्ट को व्याकरण की जानकारी को उद्धृत करना पड़ा।ओडिशा के कुली समुदाय को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आदेश (संशोधन) अधिनियम, 1976 के अनुच्छेद II के अध्याय XII में जिस ‘कुलीज’ का जिक्र किया गया है वे ‘कुली’ समुदाय के हैं।उड़ीसा हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते...

सबरीमाला की विशिष्ट परंपरा हिन्दू धर्म का न तो ऐसा आवश्यक और न ही अविभाज्य अंग है जिसके बिना वह जीवित नहीं रहेगा : सीजेआई दीपक मिश्रा
सबरीमाला की विशिष्ट परंपरा हिन्दू धर्म का न तो ऐसा आवश्यक और न ही अविभाज्य अंग है जिसके बिना वह जीवित नहीं रहेगा : सीजेआई दीपक मिश्रा

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर को सभी उम्र की महिलाओं के लिए खोल दिया है। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, आरएफ नरीमन, डीवाई चंद्रचूड़ ने अलग अलग फैसले लिखे हैं पर सबने यह कहा कि महिलाओं को इस मंदिर में प्रवेश करने से नहीं रोका जा सकता जिसके भगवान आयप्पा हैं जो कुँवारे हैं। दिलचस्प यह है कि पीठ की एकमात्र महिला जज इन्दु मल्होत्रा ने बहुमत के खिलाफ फैसला दिया है।सीजेआई दीपक मिश्रा ने कहा कि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं में प्रवेश की मनाही न तो जरूरी है और न ही ऐसा करना हिन्दू धर्म का अविभाज्य हिस्सा है...

भिन्न शारीरिक क्षमता वालों को आरटीआई अधिनियम के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता; सुप्रीम कोर्ट ने उन तक सूचना पहुंचाने के लिए तकनीक का पता लगाने को कहा [निर्णय पढ़ें]
भिन्न शारीरिक क्षमता वालों को आरटीआई अधिनियम के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता; सुप्रीम कोर्ट ने उन तक सूचना पहुंचाने के लिए तकनीक का पता लगाने को कहा [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने वृहस्पतिवार को सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 6 को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा किया। इसमें कहा गया था की यह धारा निरक्षर, नहीं देख सकने वाले और अन्य तरह की अशक्तता के शिकार लोगों के साथ भेदभाव करता है।मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने याचिकाकर्ता असीर जमाल को निर्देश दिया की वह उचित अधिकारी का दरवाजा खटखटाएँ और उन्हें सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत किसी और तरीके से सूचना दिये जाने के बारे में बताएं।असीर जमाल ने सुप्रीम...

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अपीली अदालत का सजा को स्थगित करना जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत सांसदों और विधायकों की अयोग्यता को समाप्त कर देगा [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अपीली अदालत का सजा को स्थगित करना जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत सांसदों और विधायकों की अयोग्यता को समाप्त कर देगा [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि सीआरपीसी की धारा 389 के तहत अगर अपीली अदालत किसी सांसद या विधायक की सजा को स्थगित कर देती है तो जनप्रतिनिधित्व की अधिनियम, 1951 की धारा 8 की उपधारा 1, 2, और 3 के तहत अयोग्य ठहराने का प्रावधान लागू नहीं हो सकता।मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में डीवाई चंद्रचूड़ और एएम खानविलकर की पीठ ने एनजीओ लोक प्रहरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। एनजीओ ने अपनी याचिका में मांग की थी कि चूंकि कानून के तहत सजा पर रोक लगाने का प्रावधान नहीं है, पर...

महिला ने कहा, वैवाहिक अधिकारों की बहाली संबंधी आदेश को मानने के लिए वह बाध्य नहीं; सुप्रीम कोर्ट ने अकेले छोड़ दिये जाने की उसकी याचिका खारिज की [आर्डर पढ़े]
महिला ने कहा, वैवाहिक अधिकारों की बहाली संबंधी आदेश को मानने के लिए वह बाध्य नहीं; सुप्रीम कोर्ट ने अकेले छोड़ दिये जाने की उसकी याचिका खारिज की [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने एक पत्नी की याचिका को खारिज कर दिया जिसने निजता पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के एक फैसले पर भरोसा करते हुए कहा था कि उसे पूरा हक है कि उसे अकेले छोड़ दिया जाए और उस पर वैवाहिक अधिकारों की बहाली से संबन्धित आदेश को पूरा करने के लिए दवाब नहीं डाला जा सकता।वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर नफाडे ने केएस पुत्तुस्वामी एवं अन्य बनाम भारत संघ मामले में न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ के फैसले को उद्धृत किया।दीवानी प्रक्रिया संहिता के आदेश XXI, नियम 32 और 33 के प्रावधानों के संदर्भ में विवाद का मुद्दा यह था...

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने न्याय को सुलभ करने के लिए उठाए कई कदम; कागजों पर होने वाले खर्चों की हुई बचत, घर तक पहुंचाए जा रहे हैं कोर्ट के आदेश
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने न्याय को सुलभ करने के लिए उठाए कई कदम; कागजों पर होने वाले खर्चों की हुई बचत, घर तक पहुंचाए जा रहे हैं कोर्ट के आदेश

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश कृष्ण मुरारी के नेतृत्व में कई सारे कदम उठाए गए हैं ताकि कागज का प्रयोग सीमित किया जाए और न्याय की डिलिवरी को मुकदमादारों के प्रति ज्यादा सहूलियत वाला बनाया जाए। हाईकोर्ट ने ई-पेमेंट लागू किया है और आदेश, जांच आदि की कॉपी के लिए भुगतान अब इंटरनेट बैंकिंग, डेबिट और क्रेडिट कार्ड या अन्य प्री-पेड कार्ड द्वारा किया जा सकता है। कोर्ट कागज के दोनों पृष्ठों पर प्रिंट करने के विकल्प को भी लागू करने जा रहा है जिससे 1.5 करोड़ शीट कागज की हर वर्ष बचत होगी और...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत के लिए 10-दिन पहले सूचित करने के नियम को संशोधित कर इसे दो दिन किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत के लिए 10-दिन पहले सूचित करने के नियम को संशोधित कर इसे दो दिन किया

अब उत्तर प्रदेश में गिरफ्तार किए गए किसी व्यक्ति को 10 दिनों तक जमानत के लिए इंतजार नहीं करना होगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत के लिए 10-दिन वाले नियम को घटाकर अब उसे दो दिन कर दिया है। पहले किसी सरकारी वकील को जमानत की अर्जी पर 10 दिन का अग्रिम नोटिस देना पड़ता था जिसके बाद ही जमानत की अर्जी पर सुनवाई होती थी। इसे अब घटाकर दो दिन कर दिया गया है। यह संसोधन इलाहाबाद हाईकोर्ट नियम, 1952 के नंबर 18 के उपनियम 3 में किया गया है। इस नियम में कहा गया है : जमानत की अर्जी पर जमानत का आदेश तब तक नहीं दिया...

सुप्रीम कोर्ट ने दूरस्थ माध्यम से इंजीनीयरिंग की डिग्री को वैध करने के आग्रह को ठुकराया [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने दूरस्थ माध्यम से इंजीनीयरिंग की डिग्री को वैध करने के आग्रह को ठुकराया [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उन सात याचिकाकार्ताओं को कोई राहत देने से मना कर दिया जिन्होंने 2004 और 2005 में खुला दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम के तहत इंजीनियरिंग के डिग्री कोर्स में दाखिला लिया था। यह कोर्स एक डीम्ड विश्वविद्यालय का था और इसने कोर्ट से अपने डिग्री कोर्ट को वैध करार दिये जाने और एआईसीटीटी के अनुमोदन की जरूरत नहीं होने और उनकी डिग्री को देश के किसी अन्य परंपरागत/एआईसीटीई द्वारा अनुमोदनप्राप्त संस्थान के समतुल्य माने जाने का आग्रह किया था। न्यायमूर्ति एएम सप्रे और यूयू ललित ने कहा...

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, धारा 167(2) के तहत किसी भी अदालत को 90 दिनों के बाद हिरासत की अवधि बढ़ाने का अधिकार नहीं; आरोपपत्र को तकनीकी आधार पर वापस करने के बावजूद आरोपी को स्वतः जमानत का अधिकार [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, धारा 167(2) के तहत किसी भी अदालत को 90 दिनों के बाद हिरासत की अवधि बढ़ाने का अधिकार नहीं; आरोपपत्र को तकनीकी आधार पर वापस करने के बावजूद आरोपी को स्वतः जमानत का अधिकार [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ ने सोमवार को कहा कि आरोपी सीआरपीसी की धारा 167(2) के तहत स्वतः ही जमानत का अधिकारी है भले ही उसके खिलाफ पुलिस की जार्चशीट को मजिस्ट्रेट ने तकनीकी कारणों से वापस कर दिया हो।कोर्ट ने यह भी कहा जिस अवधि तक जांच को पूरी की जानी है उस अवधि को बढ़ाने का अधिकार किसी भी अदालत को नहीं है।न्यायमूर्ति एएम सप्रे और यूयू ललित ने जयपुर स्थित हाईकोर्ट ऑफ जुडीकेचर के राजस्थान  पीठ  (एसबीसीआरएमबी नंबर 9035, 2018) द्वारा दिये गए फैसले की जांच कर रहे थे।तथ्यआवेदनकर्ता एक मामले में...

एमएसीटी दावा : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हाईकोर्ट को मुआवजे में बढ़ोतरी या कमी नहीं करने का कारण बताना चाहिए [निर्णय पढ़ें]
एमएसीटी दावा : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हाईकोर्ट को मुआवजे में बढ़ोतरी या कमी नहीं करने का कारण बताना चाहिए [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है की एमएसीटी आदेश के खिलाफ अपील की सुनवाई पर अपने आदेश में मुआवजे की राशि नहीं बढ़ाने या घटाने का कारण हाईकोर्ट को बताना चाहिए।मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने एक युवक को 2462065 रुपए का दुर्घटना मुआवजा दिये जाने का आदेश दिया। इस युवक को दुर्घटना के कारण उसके spinal cord में चोट लग गई थी। दावेदार और बीमाकर्ता दोनों ने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। दावेदार की अपील को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया गया जबकि बीमाकर्ता की अपील मानकर मुआवजे की राशि को घटाकर 20 लाख...

किसी आपराधिक मामले में सिर्फ आरोपी होने वाले व्यक्ति पर वकील के रूप में पंजीकृत होने पर रोक नहीं : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
किसी आपराधिक मामले में सिर्फ आरोपी होने वाले व्यक्ति पर वकील के रूप में पंजीकृत होने पर रोक नहीं : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी आपराधिक मामले के आरोपी को अगर उसे अभी तक दोषी नहीं ठहराया गया है तो वकील के रूप में उसके पंजीकरण पर कोई रोक नहीं है।न्यायमूर्ति शील नागु ने न केवल बार काउंसिल को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने को कहा बल्कि उसे ब्रज मोहन महाजन को 5000 रुपए का हरजाना भी देने को कहा जिसे वकील के रूप में पंजीकरण की अनुमति नहीं दी गई।मध्य प्रदेश राज्य बार काउंसिल ने ब्रज मोहन को एक आपराधिक मामले मेंआईपीसी की धारा 452, 352, 323, 294 में आरोपी नामजद किए जाने के कारण वकील के रूप...

अगर किसी गैर कानूनी निर्माण को कानून की उचित प्रक्रिया के तहत गिराया जाता है तो इससे अनुच्छेद 300A के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
अगर किसी गैर कानूनी निर्माण को कानून की उचित प्रक्रिया के तहत गिराया जाता है तो इससे अनुच्छेद 300A के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल में कहा कि अगर किसी गैर कानूनी निर्माण को उचित प्रक्रिया के तहत गिराया जाता है तो इससे संविधान के अनुच्छेद 300-A के तहत किसी भी तरह के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता। अनुच्छेद 300-A में कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को कानून के अलावा किसी अन्य तरीके से उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।न्यायमूर्ति एएस ओका और न्यायमूर्ति आरआई छगला ने मुंबई में जल आपूर्ति के लिए बिछाए गए पाइपलाइन के आसपास रहने वाले लोगों की याचिका पर सुनवाई के दौरान उक्त बात कही।पृष्ठभूमियाचिकाकार्ताओं...

विभागीय जांच के गैर कानूनी साबित होने के बाद ही श्रम अदालत मेरिट के आधार पर मामले की जांच कर सकता है; सुप्रीम कोर्ट ने ड्यूटी पर शराब पीकर आने वाले बैंकर की बर्खास्तगी को सही ठहराया [निर्णय पढ़ें]
विभागीय जांच के गैर कानूनी साबित होने के बाद ही श्रम अदालत मेरिट के आधार पर मामले की जांच कर सकता है; सुप्रीम कोर्ट ने ड्यूटी पर शराब पीकर आने वाले बैंकर की बर्खास्तगी को सही ठहराया [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने ड्यूटी पर शराब के नशे में धुत पाये जाने वाले एक बैंककर्मी की बर्खास्तगी को सही ठहराया और किसी कर्मचारी की बर्खास्तगी के बारे में औद्योगिक संदर्भ की जाँच के बारे में श्रम अदालत को हिदायत दी।न्यायमूर्ति अभय मननोहर सप्रे और एस अब्दुल नज़ीर की पीठ ने कहा कि औद्योगिक संदर्भ का हवाला देने के क्रम में श्रम अदालत को आरोपों की जांच करने का अधिकार तभी मिलता है जब विभागीय जांच को गैर कानूनी ठहरा दिया गया है।इस मामले में, कैशियर के रूप में कार्यरत बैंककर्मी को विभागीय जांच में ड्यूटी पर शराब...

कोर्ट के आदेश पर नौकरी में बहाल किए जाने का अर्थ यह नहीं कि कामगार बकाया वेतन भी पाने का अधिकारी है  : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
कोर्ट के आदेश पर नौकरी में बहाल किए जाने का अर्थ यह नहीं कि कामगार बकाया वेतन भी पाने का अधिकारी है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

‘सिर्फ इसलिए कि किसी कामगार की बर्खास्तगी को निरस्त करते हुए कोर्ट ने सेवा में उसके पुनर्बहाली का आदेश दिया है, उसे अपने नियोक्त से बकाया वेतन पाने का दावा करने का अधिकार नहीं है”।सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी कामगार की बर्खास्तगी के खिलाफ कोर्ट फैसला देता है और उसको दुबारा काम पर रखा जाता है तो कोर्ट ऐसे कामगार को बकाया वेतन दिये जाने को उसका अधिकार मानकर इस बारे में कोई आदेश नहीं दे सकता।राजस्थान राज्य सड़क परिवहन निगम बनाम श्री फूल चंद मामले में श्रम अदालत ने निगम के एक ड्राईवर नौकरी से...

जब सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु से कहा, 11.71 करोड़ नहीं हैं, पेट्रोल पर टैक्स से कितना इकट्ठा करते हो ?
जब सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु से कहा, 11.71 करोड़ नहीं हैं, पेट्रोल पर टैक्स से कितना इकट्ठा करते हो ?

“ यह अजीब बात है कि तमिलनाडु सरकार रेत आयातक को 11.71 करोड़ रुपये रुपये का भुगतान नहीं कर सकती जबकि पेट्रोल पर टैक्स से वो इतना पैसा इकट्ठा करती है, “ सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ये टिप्पणी की जब राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने भुगतान के लिए चार सप्ताह के लिए आग्रह किया।याचिका को स्वीकार करने से इनकार करते हुए न्यायमूर्ति मदन लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने राज्य को एक हफ्ते के भीतर राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया, जिसके विफल रहने पर उसे 18 प्रतिशत ब्याज का भुगतान...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री आवास योजना के घरों में लगे प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज चौहान के चित्र वाले टाइल को हटाने का दिया आदेश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री आवास योजना के घरों में लगे प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज चौहान के चित्र वाले टाइल को हटाने का दिया आदेश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने बुधवार को राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत बनाए गए घरों में लगे ऐसे टाइलों को हटाए जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज चौहान के चित्र हैं। यह निर्देश न्यायमूर्ति संजय यादव और विवेक अग्रवाल की पीठ ने पत्रकार संजय पुरोहित की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। पुरोहित ने अपनी याचिका में कहा था कि ऐसा करके राज्य सरकार ने न केवल सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया है बल्कि ऐसा करके राज्य में होने वाले विधानसभा...

सुप्रीम कोर्ट ने भ्रमित मध्यस्थ से कहा, हमने जब यह कहा कि “Costs Made Easy” तो इसका अर्थ यह हुआ कि कोई दंड नहीं वसूला जाना चाहिए [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने भ्रमित मध्यस्थ से कहा, हमने जब यह कहा कि “Costs Made Easy” तो इसका अर्थ यह हुआ कि कोई दंड नहीं वसूला जाना चाहिए [आर्डर पढ़े]

दिल्ली हाईकोर्ट के एक निर्णय के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका को निपटाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हम यह निर्देश देना उचित समझते हैं कि हाईकोर्ट ने जो दंड लगाया है और मध्यस्थ ने जो दंड लगाया है उसे आसान किया जाए...।”ऐसा हुआ कि मध्यस्थ ने ‘दंड को आसान बनाया जाए’ (costs made easy) का अर्थ यह समझा कि इसे कम करने को कहा गया है। इसके बाद पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में दुबारा अपील की और मामले को स्पष्ट करने का अनुरोध किया।मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने आदेश में कहा, “जब हमने यह कहा...

किसी प्रॉपर्टी पर अवैध कब्जा रखने वाला व्यक्ति पंचायत का सदस्य नहीं हो सकता; सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले को बदला [निर्णय पढ़ें]
किसी प्रॉपर्टी पर अवैध कब्जा रखने वाला व्यक्ति पंचायत का सदस्य नहीं हो सकता; सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले को बदला [निर्णय पढ़ें]

“अगर कोई सदस्य किसी संपत्ति पर अवैध कब्जा किए हुए है तो उसके हितों के टकराव का मामला बनता है। अगर इसका अर्थ यह निकाला जाता है कि सिर्फ कब्जा करने वाले मूल व्यक्ति को ही इसकी सजा दी जाए और उसे अयोग्य घोषित कर दिया जाए, तो इससे एक बेतुकी स्थिति का निर्माण होगा”।सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले दिये अपने फैसले को उलटते हुए कहा है कि अगर कोई व्यक्ति गैर कानूनी कब्जे वाली जमीन पर रहता है और ऐसा वह लगातार कर रहा/रही है, तो उसे पंचायत का सदस्य होने के अयोग्य करार दे दिया जाएगा।मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति...