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अगर किसी गैर कानूनी निर्माण को कानून की उचित प्रक्रिया के तहत गिराया जाता है तो इससे अनुच्छेद 300A के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
24 Sep 2018 7:23 AM GMT
अगर किसी गैर कानूनी निर्माण को कानून की उचित प्रक्रिया के तहत गिराया जाता है तो इससे अनुच्छेद 300A के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल में कहा कि अगर किसी गैर कानूनी निर्माण को उचित प्रक्रिया के तहत गिराया जाता है तो इससे संविधान के अनुच्छेद 300-A के तहत किसी भी तरह के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता। अनुच्छेद 300-A में कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को कानून के अलावा किसी अन्य तरीके से उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति एएस ओका और न्यायमूर्ति आरआई छगला ने मुंबई में जल आपूर्ति के लिए बिछाए गए पाइपलाइन के आसपास रहने वाले लोगों की याचिका पर सुनवाई के दौरान उक्त बात कही।

पृष्ठभूमि

याचिकाकार्ताओं ने हाईकोर्ट के आदेशानुसार बृहनमुंबई नगर निगम के नोटिस को चुनौती दी थी।

वर्ष 2009 में जनहित मंच की एक याचिका में कहा गया था कि मुंबई नगर को पानी की आपूर्ति करने वाली पाइपलाइन 160 किलोमीटर लंबी है और 90 किलोमीटर पाइपलाइन जो कि जमीन से ऊपर है, उसके पास काफी गैर कानूनी निर्माण कार्य किए गए हैं जिसकी वजह से इस पाइपलाइन को खतरा उत्पन्न हो गया है।

इस बारे में एक समिति बनाई गई जिसने पाइपलाइन के 10 मिटर के आसपास की संरचना को गिराने का सुझाव दिया गया और प्रभावित लोगों के पुनर्वास की बात भी कही गई। 14 अक्तूबर 2009 को कोर्ट ने इन निर्माण को गिराने का आदेश दिया।

फैसला

याचिकाकार्ताओं की पैरवी वरिष्ठ वकील एवी अंतुरकर ने की और उन्होने दलील दी कि इन निर्माण को गिराने से संविधान के अनुच्छेद 300-A तहत लोगों के अधिकारों का उल्लंघन होता है।

कोर्ट ने कहा कि इनमें से कुछ संरचना निजी स्वामित्व वाली जमीन पर थी पर इन्हें भी 10 मिटर की परिधि में होने के कारण गिराया जाना था। कुछ निर्माण सार्वजनिक जमीन पर थे और कुछ गैर आवासीय निर्माण थे। जिन लोगों के निर्माण को गिराया गया उनमें से कुछ लोगों को पुनर्वास के लायक माना गया।

कोर्ट ने कहा, “अगर गैर कानूनी निर्माण को कानून के तहत मिले अधिकारों के अनुरूप गिराया जाता है तो इससे अनुच्छेद 300-A के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं होता। पर इस मामले में, जिन निर्माणों के बारे में कहा गया कि वे सार्वजनिक संपत्ति पर बनाए गए हैं, उसके संदर्भ में भी कानून की उचित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ”

कोर्ट ने बीएमसी से कहा कि वह निर्माण को गिराने के लिए कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करे। पीठ ने राज्य को निर्देश दिया कि वह ऐसे लोग जो पुनर्वास के हकदार हैं, उन्हें तीन सप्ताह के भीतर प्रस्ताव दे और इसके बाद इन निजी निर्माण वाले लोगों को बीएमसी के प्रस्ताव को मानने के लिए एक माह का समय मिलेगा।

अगर इन प्रस्तावों को नहीं माना जाता है, तो बीएमसी निर्माण को गिराने के लिए स्वतंत्र होगा पर ऐसा वह उचित प्रक्रिया के पालन के बाद ही करेगा।

 

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