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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत के लिए 10-दिन पहले सूचित करने के नियम को संशोधित कर इसे दो दिन किया

LiveLaw News Network
26 Sep 2018 4:09 AM GMT
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत के लिए 10-दिन पहले सूचित करने के नियम को संशोधित कर इसे दो दिन किया
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अब उत्तर प्रदेश में गिरफ्तार किए गए किसी व्यक्ति को 10 दिनों तक जमानत के लिए इंतजार नहीं करना होगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत के लिए 10-दिन वाले नियम को घटाकर अब उसे दो दिन कर दिया है। पहले किसी सरकारी वकील को जमानत की अर्जी पर 10 दिन का अग्रिम नोटिस देना पड़ता था जिसके बाद ही जमानत की अर्जी पर सुनवाई होती थी। इसे अब घटाकर दो दिन कर दिया गया है।

 यह संसोधन इलाहाबाद हाईकोर्ट नियम, 1952 के नंबर 18 के उपनियम 3 में किया गया है। इस नियम में कहा गया है : जमानत की अर्जी पर जमानत का आदेश तब तक नहीं दिया जा सकता जब तक की सरकारी वकील को कम से कम 10 दिन पहले इसका अग्रिम नोटिस नहीं दिया जाता है। जमानत की अर्जी देने और इस पर सुनवाई शुरू होने के बीच 10 दिन का अंतर होना चाहिए।

 सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में हाईकोर्ट को इस बारे में छह सप्ताह के भीतर निर्णय लेने को कहा था। इस बारे में याचिका सैयद मोहम्मद हैदर रिजवी ने दायर किया था जो पेशे से वकील हैं और एक दूरसंचार कंपनी के लिए काम करते हैं।

रिजवी के वकील तल्हा अब्दुल रहमान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट नियम, 1952 के नंबर 18 के उपनियम 3 को जीवन के अधिकार और निजी स्वतन्त्रता के मौलिक सिद्धान्त के खिलाफ होने के कारण इसे गैर कानूनी करार देने का आग्रह किया था।

 इस नियम के साथ-साथ नियम 18(3) को संशोधित किया गया है।

 पहले यह कहा गया था कि अगर 10 दिन के नोटिस की अवधि के बीत जाने के दो दिनों के अंदर अगर जमानत के लिए आवेदन नहीं दिया जाता है तो आवेदनकर्ता को दो दिन का पूर्व नोटिस देना होगा।

वकील रहमान ने कहा कि यह नियम प्रभावी रूप से गिरफ्तार होने वाले सभी लोगों को 10 दिनों के लिए कैद मुकर्रर करता है और इस तरह यह इस सिद्धान्त को नजरंदाज करता है कि ‘जमानत नियम है, जेल अपवाद’।

 ध्यान देने वाली बात यह है कि इस नियम को 1983 में ही चुनौती दी गई थी पर उस समय इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसे सही ठहराया था।

 रिजवी ने खुद भी 2015 में ही हाईकोर्ट और राज्य सरकार से कई बार अपील की थी पर हर बार वह निष्फल रहे थे जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में इसके बारे में अपील की।


 
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