मुख्य सुर्खियां
Cut-off तिथि के बाद अगर कोई उम्मीदवार योग्यता हासिल करता है तो उसे योग्य नहीं माना जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी उम्मीदवार की योग्यता का निर्धारण cut-off तिथि के दिन इसकी योग्यता के आधार पर की जानी चाहिए। अगर कोई उम्मीदवार आवश्यक योग्यता उस तिथि के बाद प्राप्त करता है तो उसे योग्य नहीं माना जाएगा। न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति केएम जोसफ़ की पीठ ने हालाँकि ऐसे दो कर्मचारियों को राहत दी जिन्हें cut-off तिथि के बाद प्राप्त की गई योग्यता के बावजूद नियुक्ति दी गई थी और वे दो दशकों से नौकरी कर रहे थे। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राकेश बक्षी और परविंदर सिंह की...
मुस्लिम पुरुष और हिंदू महिला के बीच हुई शादी से पैदा हुआ बच्चे अपने पिता की संपत्ति में हिस्सेदारी का दावा कर सकते हैं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
एक महत्त्वपूर्ण फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मुस्लिम पिता और हिंदू माँ से पैदा हुए बच्चे को अपने पिता की संपत्ति में दावेदारी का अधिकार है।न्यायमूर्ति एनवी रमना और न्यायमूर्ति एमएम शांतनागौदर की पीठ ने कहा कि एक मुस्लिम पुरुष का एक बुतशिकन या आग की पूजा करने वाले से शादी न तो जायज़ (सहिह) है और न नाजायज़ (बतिल) शादी है बल्कि यह सिर्फ़ एक अनियमित (फ़सिद) शादी है।पीठ ने केरल हाईकोर्ट के एक फ़ैसले ख़िलाफ़ एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। केरल हाईकोर्ट ने अपने फ़ैसले में निचली...
'रोज़गार के काल्पनिक विस्तार के सिद्धांत' के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने मृत ड्राइवर के निकटतम रिश्तेदारों को मुआवज़ा देने का आदेश दिया; कहा - वह अपनी इच्छा से कार्यस्थल पर नहीं था [निर्णय पढ़े]
'रोज़गार के काल्पनिक विस्तार' के सिद्धांत को लागू करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नियोक्ताओं को एक बस डाइवर के क़ानूनी उत्तराधिकारी को मुआवज़ा देने का आदेश दिया है। इस बस ड्राइवर की उस समय मौत हो गई थी जब वह भोजन करने के बाद बस की छत से नीचे उतर रहा था। "सिर्फ़ इसलिए कि वह मृतक (ड्राइवर) खाना खाने के बाद बस की छत से उतरकर नीचे आ रहा था, इस मामले को अलग-थलग मामला नहीं माना जा सकता… और यह नहीं कहा जा सकता कि उस समय वह ड्यूटी पर नहीं था और इसलिए उसे मुआवज़ा नहीं मिल सकता," न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और...
त्रिपुरा हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा, एनडीपीएस के तहत गिरफ़्तार लगभग 70% लोग ज़मानत पर क्यों हैं? [आर्डर पढ़े]
त्रिपुरा हाईकोर्ट ने मादक द्रव्य से जुड़े मामले में गिरफ़्तार किए गए 660 लोगों में से 435 लोगों के ज़मानत पर होने को लेकर राज्य सरकार से स्पष्टीकरण माँगा है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल प्रीतम रॉय नामक व्यक्ति की ज़मानत याचिका पर ग़ौर करते हुए यह बात कही। पुलिस महानिदेशक ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों के बारे में एक स्थिति रिपोर्ट सौंपी थी जिसमें इस इससे जुड़े अपराधों के अपराधियों का विवरण था। इस स्थित को 'बहुत ही सोचनीय' बताते हुए संजय करोल ले कहा, "ज़मानत देने के क्या...
दिल्ली हाईकोर्ट ने CIC को मौत की सज़ा पाए 7/11 के मुंबई बम विस्फोट के आरोपी को आईबी रिपोर्ट की प्रति देने पर दुबारा विचार करने को कहा [निर्णय पढ़े]
मुंबई में ट्रेन में हुए 7/11 हमले में मौत की सज़ा पाए एक आरोपी ने गुप्तचर ब्यूरो द्वारा गृह मंत्रालय को सौंपी रिपोर की प्रति आरटीआई द्वारा माँगी है ताकि वह यह साबित कर सके कि इस मामले में जसे ग़लत फँसाया गया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि उसकी यह अपील मानवाधिकार के तहत आता है और उसने केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) से कहा है कि वह उसकी अर्ज़ी पर दुबारा ग़ौर करे। पहले उसकी अर्ज़ी यह कहते हुए खारिज की जा चुकी है की आईबी आरटीआई के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। न्यायमूर्ति विभू भाखरू ने अपीलकर्ता...
हत्या के लिए दूसरी बार दोषी ठहराए जाने पर कब मौत की सज़ा दी जा सकती है? पढ़िए सुप्रीम कोर्ट का यह फ़ैसला
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हत्या के आरोपी एक व्यक्ति की मौत की सज़ा को आजीवन कारावास में बदल दिया। इस व्यक्ति पर एक महिला पर एसिड डालकर उसको मार देने का आरोप था। न्यायमूर्ति एस. ए. बोबड़े, न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी की पीठ ने कहा कि हत्या के लिए दूसरी बार दोषी ठहराए जाने पर मौत की सज़ा तभी दी जा सकती है जब दोनों ही मामलों में कोई पैटर्न दिखाई देता हो। पीठ ने आरोपी को सज़ा दिए जाने को जायज़ ठहराया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इस मामले में मौत की सज़ा दिए...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नाबालिग़ लड़की से बलात्कार और उसकी हत्या कर देने वाले आरोपी की मौत की सज़ा को बरक़रार रखा [निर्णय पढ़े]
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गुरुवार को 16 वर्षीय एक लड़की के बलात्कार और उसकी हत्या के आरोपी की मौत की सज़ा को बरक़रार रखा। सत्र अदालत ने रब्बू ऊर्फ़ सर्वेश को एक अन्य नाबालिग़ आरोपी के साथ पोकसो अधिनियम की धारा 5(g)/6 और आईपीसी की धारा 450, 376(2)(i), 376(D), 376(A) के तहत दोषी पाया। इन दोनों पर एक लड़की से सामूहिक बलात्कार करने और बाद में उसको आग लगाकर जलाकर मार देने का आरोप था। लड़की की 7 दिन के बाद मौत हो गई थी। न्यायमूर्ति पी. के. जायसवाल और बी. के. श्रीवास्तव ने कोर्ट में पेश साक्ष्य,...
तत्काल किसी ऐसे सबूत के बिना सिर्फ़ उत्पीड़न का आरोप लगाना आईपीसी की धारा 306 के तहत सज़ा दिलाने के लिए पर्याप्त नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कहा है कि आईपीसी की धारा 306 के तहत लाया गया कोई भी मामला, सिर्फ़ उत्पीड़न के ही आरोप पर नहीं टिक सकता। कोर्ट ने कहा कि इसके लिए घटना के होने के समय, आरोपी की ओर से किये गए कोई तत्काल कार्य का सबूत होना ज़रूरी है, जिससे यह साबित हो कि आरोपी द्वारा मृतक को आत्महत्या के लिए बाध्य किया गया। न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति एम. आर. शाह ने Rajesh vs. State of Haryana मामले में हाईकोर्ट के एक फ़ैसले के ख़िलाफ़ की गई अपील पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। ...
भीख माँगने को वैध बनाए जाने के बाद बेघर हुए कुष्ठ रोगियों के पुनर्वास के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में अपील; नोटिस जारी [याचिका पढ़े]
दिल्ली हाईकोर्ट ने सभी कुष्ठ रोगियों के पुनर्वास की माँग के बारे में दायर याचिका पर केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। भीख माँगने को गत वर्ष अगस्त में कोर्ट द्वारा वैध ठहराए जाने के बाद ये कुष्ठ रोगी बेघर हो गए थे। कोर्ट ने बॉम्बे प्रेवेंशन ऑफ़ बेगिंग ऐक्ट के बहुत सारे प्रावधानों को असंवैधानिक क़रार दे दिया था और स्पष्ट किया था कि इसका आवश्यक परिणाम यह होगा कि इस अधिनियम के तहत किसी व्यक्ति को भीख माँगने का दोषी क़रार नहीं दिया जा सकता है। दिल्ली प्रेवेंशन ऑफ़ बेगिंग रूल्ज़,...
दूसरे नोटिस के बाद चेक बाउंस की शिकायत अदालत में स्वीकार्य है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बैंक में दुबारा चेक जमा कराने और उसके फिर बाउंस होने पर नोटिस देने और इस आधार पर दर्ज की गई शिकायत कोर्ट में स्वीकार्य है।Sicagen India Ltd vs. Mahindra Vadineni मामले में आरोपी द्वारा जारी किए गए चेक को शिकायतकर्ता ने बैंक में पेश किया और जब वह लौट गया तो 31.08.2009 को निगोशिएबल इंस्ट्रुमेंट ऐक्ट कीधारा 138 के तहत एक क़ानूनी नोटिस नोटिस जारी किया गया और उसके ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई गई।मद्रास हाईकोर्ट ने आरोपी की याचिका को स्वीकार कर लिया और शिकायत को यह कहकर निरस्त...
देशी माल अगर अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों के शुल्क-मुक्त दुकानों में आपूर्ति की जाती है तो उस पर जीएसटी लगेगा : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
मध्य पदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों पर देश में बनी हुई वस्तुओं की आपूर्ति होती है तो उस पर जीएसटी देय होगा। न्यायमूर्ति सतीश चंद्रा शर्मा और वीरेंद्र सिंह ने कहा कि ऐसा नहीं कहा जा सकता कि अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मौजूद शुल्क-मुक्त दुकाने देश के बाहर हैं। भारत में गारमेंट बनाने और इसका निर्यातक जो अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मौजूद शुल्क-मुक्त दुकानों को इसकी आपूर्ति करते हैं, ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उन्हें जीएसटी चुकाने से छूट मिलनी...
पटना हाईकोर्ट ने 1980 में दायर पुनरीक्षण याचिका का निपटारा किया; कहा -सिर्फ़ मामले का इंचार्ज लोक अभियोजक ही मामले को वापस लने का आवेदन दे सकता है
वर्ष 1990 में दायर की गई एक याचिका पर सुनवाई पर ग़ौर करते हुए पटना हाईकोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि सिर्फ़ ऐसा लोक अभियोजक जो किसी मामले का इंचार्ज है, अभियोजन वापस लेने की अपील दायर कर सकता है। पृष्ठभूमि इस मामले में एक प्राथमिकी 1970 में दर्ज कराई गई थी। 1974 में या मामला सत्र अदालत में सुनवाई के लिए आया। इस बीच, नया आपराधिक दंड संहिता 1973 में लागू हो गया। एक अतिरिक्त लोक अभियोजक जिनका नाम राम खेलावन सिंह था, इस मामले की सुनवाई कर रहे थे और गवाहों की जाँच की जा रही थी। वर्ष 1978 में...
मृतक के मां-बाप दहेज के मामले में सबसे वास्तविक गवाह होते हैं, उनके झूठ बोलने का भला क्या कारण हो सकता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने एक व्यक्ति को उसकी मृत पत्नी के मां-बाप और रिश्तेदारों की गवाही के आधार पर दहेज-हत्या का दोषी क़रार दिया है। इस मामले (Mahadevappa vs. State of Karnataka) में, अभियोजन पक्ष ने कहा की आरोपी ने अपनी पत्नी रुक्मिनी बाई के शरीर पर उस समय केरोसीन तेल डालकर आग लगा दी, जब वह रसोईघर में खाना बना रही थी। निचली अदालत ने आरोपी को यह कहते हुए बरी कर दिया था कि अभियोजन पक्ष, उसके ख़िलाफ़ दहेज की मांग के आरोप को साबित नहीं कर पाया था। अदालत ने यह भी कहा था कि मृतका को जानबूझकर नहीं मारा...
जेल का दौरा करने वाले पैनल में शामिल होने वाले एडवोकेट को चुने जाने के लिए 3 साल का अनुभव आवश्यक नहीं : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
दिल्ली हाइकोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि ऐसे क़ानूनी प्रैक्टिस करने वाले लोग जिनके पास बार में तीन साल से काम का अनुभव है, उन्हें भी दिल्ली हाईकोर्ट की विधिक सेवा समिति में जेलों का दौरा करने वाले दस्ते में शामिल किया जा सकता है। न्यायमूर्ति विभू बखरू ने यह फ़ैसला सुनाते हुए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (मुफ़्त एवं सक्षम) विनियमन के विनियम 8(3) का हवाला दिया। इसमें कहा गया है कि कोई भी क़ानूनी प्रैक्टिस करने वाला व्यक्ति जिसे बार में तीन साल से काम का अनुभव है उसे इस दस्ते में शामिल...
अवमानना का क्षेत्राधिकार एक आवश्यक क्षेत्राधिकार है; विकल्प होने के बावजूद इस याचिका को ख़ारिज नहीं किया जा सकता : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि अवमानना का क्षेत्राधिकार एक आवश्यक क्षेत्राधिकार है और अवमानना की याचिका को आधार पर ख़ारिज नहीं किया जा सकता कि इसके लिए और विकल्प उपलब्ध हैं। न्यायमूर्ति संजय के अग्रवाल ने एक अवमानना याचिका पर उठाई गई आपत्ति पर ग़ौर करते हुए यह बात कही। इस आपत्ति में कहा गया था कि चूँकि अमल सम्बंधी आवेदन पर मध्यस्थता और सुलह अधिनियम की धारा 36 के तहत ग़ौर किया जा सकता है ताकि मध्यस्थता अधिकरण के फ़ैसले को लागू किया जा सके, इसलिए अवमानना की याचिका को स्वीकार नहीं किया जा सकता।...
रिट याचिका की बहाली से क्या अंतरिम आदेश पुनर्जीवित हो जाएगा?, सुप्रीम कोर्ट करेगा पड़ताल [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट इस बात की पड़ताल करेगा कि अगर मुख्य रिट याचिका की बहाली की जाती है तो क्या इसके तहत दिए गए अंतरिम आदेश भी पुनर्जीवित हो जाएँगे। उत्तर प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड ने 1995 में एक रिट याचिका दायर की थी जिसे इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ख़ारिज कर दिया था। बाद में बोर्ड के आवेदन पर इसे फ़ाइल में दुबारा बहाल किया गया। हालाँकि, इससे पहलेश्रम अदालत के आदेश का पालन करने के लिए आदेश को स्थगित कर दिया गया था, पर हाईकोर्ट ने इसे मानने से इंकार कर दिया कि यह अंतरिम आदेश भी रिट याचिका की बहाली के साथ बहाल...
प्राचीन समाज स्वतंत्रता और समानता को तवज्जो देता था, अब लोग रूढ़िवादी विचारों से प्रभावित हो रहे हैं : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
हमारे प्राचीन समाज ने स्वतंत्रता और समानता जैसे आदर्शों का प्रतिपादन किया था, जबकि हज़ारों सालों से चली आ रही दासप्रथा के कारण बाद में इस देश में जातिवाद जैसी कुरीतियाँ पैदा हुईं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राज शेखर अत्री ने पुलिस का संरक्षण प्राप्त करने सम्बंधी याचिका को निपटाते हुए यह बात कही। इस तरह के एक मामले में, एक युवती ने हाईकोर्ट में आवेदन कर अपने रिश्तेदारों से स्वयं के बचाव हेतु पुलिस सुरक्षा की मांग करी थी। दरअसल उस युवती ने एक दूसरी जाति के युवक से शादी की है। "इस...
मुक़दमादार कोर्ट के आदेश के आधार जो राय बनाता है उसको आधार पर अवमानना की कार्रवाई नहीं शुरू की जा सकती : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना की एक कार्रवाई को निरस्त करते हुए कहा कि मुक़दमादार किसी कोर्ट आदेश के आधार पर जो राय बनाता है उसको आधार बनाकर ख़िलाफ़ अवमानना की कार्रवाई नहीं की जा सकती। अवमानना की कार्रवाई तभी की जा सकती है जब यह लगे कि मामला जानबूझकर कोर्ट के अपमान का है। उत्तर प्रदेश जल निगम के तहत कुछ कर्मचारियों ने Badri Vishal Pandey vs. Rajesh Mittal मामले के तहत निगम के ख़िलाफ़ अवमानना की याचिका दायर की थी। इन लोगों ने आरोप लगाया था कि ख़ाली पदों पर उनको नियुक्ति नहीं दी गई या उन्हें दुबारा...
पक्षों के बीच सुलह होने की वजह से आईपीसी की धारा 307 के तहत मामले को निरस्त नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आईपीसी के धारा 307 के तहत हुए अपराधों को इसलिए समाप्त नहीं किया जा सकता क्योंकि शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच सुलह हो गई है क्योंकि यह एक ग़ैर-प्रशम्य (non-compoundable) अपराध है। कोर्ट ने State of Madhya Pradesh v. Kalyan Singh, मामले में न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और एमआर शाह की पीठ ने हाइकोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। हाईकोर्ट ने वर्तमान आरोपी के ख़िलाफ़ आइपीसी की धारा 307, 294 और 34 के ख़िलाफ़ लंबित मामले को निरस्त कर...
आपराधिक मामलों में बरी होना जज बनने के लिए उम्मीदवार के अच्छे चरित्र का प्रमाणपत्र नहीं हो सकता : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट जाँच समिति के निर्णय में दख़ल देने से इंकार कर दिया है। समिति ने एक उम्मीदवार के जज बनने की उम्मीदवारी को उसके आपराधिक मामले में बरी किए जाने के बावजूद मानने सेइंकार कर दिया था। इस उम्मीदवार के ख़िलाफ़ दो आपराधिक मामले चल चुके हैं। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एसके सेठ और विजय कुमार शुक्ला की पीठ ने दीप नारायण तिवारी और नंद किशोर साहू की याचिका पर यह फ़ैसला सुनाया। याचिकाकर्ताओं ने अपने आवेदन में कहा था कि वर्ष 2017 के न्यायिक सेवा परीक्षा के लिए अंतिम चयन सूची...

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![मुस्लिम पुरुष और हिंदू महिला के बीच हुई शादी से पैदा हुआ बच्चे अपने पिता की संपत्ति में हिस्सेदारी का दावा कर सकते हैं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] मुस्लिम पुरुष और हिंदू महिला के बीच हुई शादी से पैदा हुआ बच्चे अपने पिता की संपत्ति में हिस्सेदारी का दावा कर सकते हैं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/01/24/500x300_357785-justice-nv-ramana-and-justice-mohan-m-shantanagoudar.jpg)
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![मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नाबालिग़ लड़की से बलात्कार और उसकी हत्या कर देने वाले आरोपी की मौत की सज़ा को बरक़रार रखा [निर्णय पढ़े] मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नाबालिग़ लड़की से बलात्कार और उसकी हत्या कर देने वाले आरोपी की मौत की सज़ा को बरक़रार रखा [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2018/12/30/500x300_355727-death-penalty.jpg)
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![देशी माल अगर अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों के शुल्क-मुक्त दुकानों में आपूर्ति की जाती है तो उस पर जीएसटी लगेगा : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े] देशी माल अगर अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों के शुल्क-मुक्त दुकानों में आपूर्ति की जाती है तो उस पर जीएसटी लगेगा : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//356495-gst-2.jpg)

![मृतक के मां-बाप दहेज के मामले में सबसे वास्तविक गवाह होते हैं, उनके झूठ बोलने का भला क्या कारण हो सकता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] मृतक के मां-बाप दहेज के मामले में सबसे वास्तविक गवाह होते हैं, उनके झूठ बोलने का भला क्या कारण हो सकता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//356985-am-sapre-indu-malhotra.jpg)
![जेल का दौरा करने वाले पैनल में शामिल होने वाले एडवोकेट को चुने जाने के लिए 3 साल का अनुभव आवश्यक नहीं : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े] जेल का दौरा करने वाले पैनल में शामिल होने वाले एडवोकेट को चुने जाने के लिए 3 साल का अनुभव आवश्यक नहीं : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//356705-delhi-high-court-1.jpg)
![अवमानना का क्षेत्राधिकार एक आवश्यक क्षेत्राधिकार है; विकल्प होने के बावजूद इस याचिका को ख़ारिज नहीं किया जा सकता : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े] अवमानना का क्षेत्राधिकार एक आवश्यक क्षेत्राधिकार है; विकल्प होने के बावजूद इस याचिका को ख़ारिज नहीं किया जा सकता : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//356287-chhattisgarh-hc-2.jpg)
![प्राचीन समाज स्वतंत्रता और समानता को तवज्जो देता था, अब लोग रूढ़िवादी विचारों से प्रभावित हो रहे हैं : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े] प्राचीन समाज स्वतंत्रता और समानता को तवज्जो देता था, अब लोग रूढ़िवादी विचारों से प्रभावित हो रहे हैं : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//356988-punjab-and-haryana-high-court.jpg)
![मुक़दमादार कोर्ट के आदेश के आधार जो राय बनाता है उसको आधार पर अवमानना की कार्रवाई नहीं शुरू की जा सकती : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] मुक़दमादार कोर्ट के आदेश के आधार जो राय बनाता है उसको आधार पर अवमानना की कार्रवाई नहीं शुरू की जा सकती : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/01/07/500x300_357120-khanwilkar-hemantgupta.jpg)
![पक्षों के बीच सुलह होने की वजह से आईपीसी की धारा 307 के तहत मामले को निरस्त नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] पक्षों के बीच सुलह होने की वजह से आईपीसी की धारा 307 के तहत मामले को निरस्त नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/01/07/500x300_357118-chandrachud-mrshah.jpg)
![आपराधिक मामलों में बरी होना जज बनने के लिए उम्मीदवार के अच्छे चरित्र का प्रमाणपत्र नहीं हो सकता : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े] आपराधिक मामलों में बरी होना जज बनने के लिए उम्मीदवार के अच्छे चरित्र का प्रमाणपत्र नहीं हो सकता : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/01/06/500x300_357115-2324400720054170130757726514921900151073317n.jpg)