मुख्य सुर्खियां
दिल्ली हाईकोर्ट ने DJS-2018 की प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम दुबारा तैयार करने को कहा; दो प्रश्नों को हटाने और एक के लिए दो सही उत्तर जोड़ने को कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली न्यायिक सेवा परीक्षा का परिणाम दुबारा निकालने का आदेश दिया है। कोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को आदेश दिया है कि वह DJS-2018 की प्रारंभिक परीक्षा का दुबारा परिणाम निकाले और इसके प्रशनपत्र सिरीज़ B से दो प्रश्नों को हटा दे, उत्तर कुंजी (answer key) में से एक प्रश्न के उत्तर को संशोधित करे और एक विशेष प्रश्न के उत्तर को संशोधित कर उसके चार में से दो उत्तरों को 'सर्वाधिक उचित उत्तर' बताए। यह फ़ैसला न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति प्रतीक जलान ने DJS-2018 की परीक्षा में...
राजस्व रिकॉर्ड में नाम बदलवाने से भूमि पर क़ब्ज़े का अधिकार नहीं बन जाता और इसका कोई आनुमानिक महत्व भी नहीं है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी ज़मीन के राजस्व रेकर्ड में नाम बालवाने से उस व्यक्ति का उस ज़मीन पर क़ब्ज़ा नहीं हो जाता है और जिस व्यक्ति की ज़मीन है उसका अधिकार ख़त्म नहीं हो जाता है और न ही इसका कोई आनुमानिक (presumptive) महत्व भी नहीं है। सिर्फ़ इतना होता है कि जिस व्यक्ति का नाम राजस्व रेकर्ड में डाला गया है वह राजस्व का भुगतान कर सकता है। न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे और न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के एक फ़ैसले के ख़िलाफ़ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए यह बात कही।...
'लेटर पैड कॉलेजों' से क़ानून की डिग्री ख़रीदने वालों पर रोक लगाने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल को जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने लेटर पैड कॉलेजों द्वारा बेची जाने वाली क़ानून की डिग्री पर रोक लगाने की एक याचिका पर बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI)को नोटिस जारी किया है। याचिका में इस मुद्दे की जाँच की माँग की गई है जो कि क़ानूनी पेशे की पवित्रता को समाप्त कर रहा है। न्यायमूर्ति एके सीकरी और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नज़ीर की पीठ ने एम वसंत राजा की याचिका पर BCI को नोटिस जारी किया। अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने राजा की ओर से इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ के समक्ष अपना पक्ष रखा। इस याचिका में याचिकाकर्ता ने...
बीमा कंपनियाँ पॉलिसी की शर्तों को एकतरफ़ा कार्रवाई कर बदल नहीं सकतीं और कवरेज को कम नहीं कर सकतीं : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारी बीमा कंपनियाँ मनमाना ढंग से काम नहीं कर सकती और उसने न्यू इंडिया एश्योरेंश कंपनी लिमिटेड के उस क़दम को निरस्त कर दिया जिसके तहत उसने पॉलिसी की शर्तों को समाप्त कर कवरजे को घटा दिया था। यह मामला Twenty First Century Media Pvt Ltd को बेची गई बीमा योजना का है। यह एक खेल विपणन और प्रबंधन कंपनी है और यह बीमा बाढ़, बारिश आदि के कारण क्रिकेट मैच के रद्द होने से बचाव के लिए है। अक्टूबर 17, 2010 में कोच्चि में खेला जाने वाला एक मैच बारिश के कारण रद्द हुआ और कंपनी ने...
अगर शादी हिंदू विवाह अधिनियम के तहत हुआ है तो अंग्रेज़ी निजी क़ानून के तहत राहत का दावा नहीं किया जा सकता : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्त्वपूर्ण फ़ैसले में यूके में भारतीय मूल के एक व्यक्ति को मैनचेस्टर के एक फ़ैमिली अदालत में चल रहे तलाक़ के मामले को जारी रखने से मना करदिया और कहा कि अगर कोई शादी हिंदू विवाह अधिनियम के तहत पंजीकृत है तो राहत अंग्रेज़ी निजी क़ानून के तहत नहीं माँगी जा सकती।न्यायमूर्ति आरडी धानुका अरुणिमा टाकीयर की याचिका पर यह निर्णय दिया। अरुणिमा ने अपने पति नवीन टाकीयर की यूके की अदालत में दायर तलाक़ की अर्ज़ी पर रोकआदेश की माँग की है।पृष्ठभूमिवादी के अनुसार, अरुणिमा की शादी हिंदू...
नाबालिग़ का स्वेच्छा से आरोपी के साथ होना ज़मानत मिलने को आसान करनेवाला है : गुजरात हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
गुजरात हाईकोर्ट ने बुधवार को एक व्यक्ति को ज़मानत दे दी जिस पर 17 साल की एक लड़की का यौन उत्पीड़न करने का आरोप है। ऐसा करते हुए न्यायमूर्ति एसएच वोरा ने कहा कि आरोपी और नाबालिग़ लड़की के बीच प्रेम संबंध है और यह लड़की अपनी इच्छा से इस आरोपी के साथ गई। "बार ने जो दलील दी है और एपीपी ने जो चार्जशीट के दस्तावेज़ पेश किए हैं और भाविकबेन के दर्ज बयान के अनुसार ऐसा लगता है कि आरोपी याचिकाकर्ता और लड़की के बीचक प्रेम संबंध है। इसमें संदेह नहीं कि पीड़ित लड़की आरोपी के साथ अपनी इच्छा से गई और...
NI अधिनियम की धारा 138 के तहत आरोपी और उसके गवाह हलफ़नामा दायर कर साक्ष्य प्रस्तुत कर सकते हैं : गुजरात हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
गुजरात हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि Negotiable Instruments Act के तहत दायर मामलों में गवाहों की तरह ही, आरोपी भी धारा 145 के तहत हलफ़नामा दायर कर गवाही दे सकता है। न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला ने कहा, "आरोपी की ओर से दी गई गवाही में सीआरपीसी की धारा 315 के तहत आरोपी भी शामिल हो सकता है। अगर गवाह अपना साक्ष्य NI अधिनियम की धारा 145 के तहत हलफ़नामे के रूप में देता है, तो आरोपी की गवाही भी हलफ़नामे के रूप में हो सकती है। कोर्ट ने यह बात राकेशभाई मगनभाई बरोत नामक एक व्यक्ति की याचिका पर कही।...
सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता, कहा - हाईकोर्ट का आदेश सीपीसी के प्रावधानों का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के एकपक्षीय अल्पकालिक आदेश पर चिंता जताई और कहा कि यह नागरिक प्रक्रिया संहिता का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन है। टीटीएल हॉलिडेज़ की याचिका पर हाईकोर्ट ने उसी दिन एयर इंडिया लिमिटेड के ख़िलाफ़ एक आदेश पारित किया और उसको उस क़रार को जारी रखने का आदेश दिया जिससे वह हट गया था। ऐमडेयस हवाई टिकट आरक्षण के बारे में डाटा उपलब्ध कराने वाली कंपनी है और यह एयर इंडिया के साथ मिलकर 30 साल से काम कर रही थी। 4 दिसम्बर 2018 को इस कम्पनी ने इस क़रार को रद्द...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नाबालिग़ लड़की से बलात्कार करने वाले शिक्षक की मौत की सज़ा को सही बताया [निर्णय पढ़े]
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नाबालिग़ से बलात्कार के आरोपी एक शिक्षक की मौत की सज़ा को बरक़रार रखा है। इस शिक्षक ने साढ़े चार साल की एक लड़की के साथ बलात्कार किया था। कोर्ट ने कहा कि इस सज़ा के लिए मौत से कम की सज़ा नहीं दी जा सकती। न्यायमूर्ति पीके जायसवाल और न्यायमूर्ति अंजुली पालो ने निचली अदालत के फ़ैसले को सही ठहराया और सज़ा कम करने की उसकी अपील ठुकरा दी। 28 वर्षीय आरोपी ने निचली अदालत के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की थी।इस शिक्षक के खिलाफ आरोप यह है कि उसने 1 जुलाई 2018 की रात को जब यह...
आधार में दी गई सूचना को आपराधिक मामलों के लिए निर्णयात्मक सबूत नहीं माना जा सकता : इलाहाबाद हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि आधार कार्ड में जो सूचनाएँ संग्रहीत हैं जैसे के जन्म तिथि आदि को उसे किसी आपराधिक मामलों के लिए निर्णयात्मक सबूत नहीं माना जा सकता। यह ध्यान देने वाली बात है कि इससे पहले पिछले साल दिल्ली हाईकोर्ट इसके उलट फ़ैसला दे चुका है। न्यायमूर्ति अजय लांबा और न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की पीठ ने एक दम्पति की याचिका पर यह बात कही। इस दम्पति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एक लड़की की माँ द्वारा एक लड़के और उसके परिवार के ख़िलाफ़ दायर आपराधिक मामले को ख़ारिज करने की माँग की।...
किसी पर बलात्कार का झूठा आरोप लगाना आरोपी को उत्पीड़ित और अपमानित करने के बराबर : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में 45 साल के एक व्यक्ति को बलात्कार के आरोपों से मुक्त कर दिया। न्यायमूर्ति एएम बादर ने बलात्कार के झूठे आरोपों के बारे में कहा, "…अगर महिला अभियोजक वयस्क है और सारी बातों को समझती है, तो अदालत को यह समझन की ज़रूरत है कि साक्ष्य विश्वसनीय हैं कि नहीं। बलात्कार के मामले में, अपराध के हर पक्ष के बारे में आरोपी का अपराध साबित करने की ज़िम्मेदारी अभियोजक की है।यह ज़िम्मेदारी कभी भी आरोपी के मत्थे नहीं मढ़ा जा सकता। इस स्थिति में, यह आरोपी का दायित्व नहीं है कि उसे कैसे...
किसी भी अथॉरिटी को यह विशेषाधिकार नहीं है कि वह SC के फ़ैसले को नहीं माने : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला नहीं मानने का विशेषाधिकार रखने का दावा कोई भी अथॉरिटी नहीं कर सकता।न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के एक कर्मचारी की याचिका स्वीकार करते हुए यह बात कही।इस कर्मचारी ने यह कहते हुए अधिकरण में अपील की कि जिस वार्षिक रिपोर्ट में वह उपयुक्त मानदंड तक पहुँचने में विफल रहा था उसके बारे में उसको कोई जानकारी नहीं देकर कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग केकार्यालयीय आदेश का उल्लंघन किया...
मौत की सज़ा तभी जब अन्य सभी विकल्पों का रास्ता निर्विवाद रूप से बंद हो जाए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने नौ साल की एक लड़की के साथ बलात्कार कर उसकी हत्या करने का दोषी पाए गए व्यक्ति की मौत की सज़ा को बदल दिया और उसे इसके बदले 30 साल की कारावास की सज़ा सुनाई।न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की पीठ एन कहा कि हत्या बहुत ही असाधारण क्रूरता है और बहुत ही निर्दयतापूर्वक इस अपराध को अंजाम दिया गया पर मौत की सज़ा तभी दी जानी चाहिए जब अन्यसारे विकल्प के रास्ते निर्विवाद रूप से बंद वह गए हों।राजू जगदीश पासवान को निचली अदालत ने नौ साल की एक लड़की से बलात्कार और बाद में उसे...
कर्नाटक हाईकोर्ट ने व्हाट्सएप पर "पाकिस्तान ज़िंदाबाद" नारा शेयर करने वाले ग्रूप एडमिन की अग्रिम ज़मानत याचिका ख़ारिज की
कर्नाटक हाईकोर्ट ने 'पाकिस्तान ज़िंदाबाद' नारा व्हाट्सएप ग्रूप में शेयर करने की वजह से देशद्रोह का आरोप झेल रहे ग्रूप एडमिन की अग्रिम ज़मानत याचिका ख़ारिज का दी। हनुमानगौडा सक्रागौड नायक नामक एक व्यक्ति की शिकायत पर शब्बीरसाब, चाँदपाश और मुस्तफ़ा के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 124-A के तहत राजद्रोह का मुक़दमा दायर किया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार शब्बीरसाब ने 14 अगस्त 2018 को "पाकिस्तान ज़िंदाबाद" लिखा पोस्ट साझा किया था और अपने भतीजा चाँदबाशा कलकेरी के साथ अपना फ़ोटो भी शेयर इसके साथ शेयर किया...
NI अधिनियम की धारा 138: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, निदेशक के ख़िलाफ़ शिकायत पर तब तक सुनवाई नहीं जब तक कम्पनी को आरोपी नहीं बनाया जाता
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कंपनी के निदेशक के ख़िलाफ़ चेक बाउंस की शिकायत पर तब तक सुनवाई नहीं हो सकती जब तक कि उस कम्पनी के ख़िलाफ़ शिकायत नहीं दर्ज की जाती। , की पीठ ने हाईकोर्ट के उस आदेश को भी ख़ारिज कर दिया जिसके तहत एक आरोपी की सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दायर याचिका को निरस्त कर दिया गया था। पीठ ने कहा कि शिकायतकर्ता ने निदेशक के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई थी जबकि कम्पनी के ख़िलाफ़ शिकायत नहीं दर्ज कराई थी। पीठ ने आगे कहा कि आरोपी ने यह चेक निजी रूप में नहीं दिया था बल्कि लक्ष्मी सीमेंट...
मृतक ने 'वेश्या' कहकर पत्नी और बेटी को जानबूझकर उकसाया; सुप्रीम कोर्ट ने पत्नी की सज़ा को संशोधित किया [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने पति की हत्या करने की आरोपी एक महिला को धारा 302 के तहत हत्या का दोषी नहीं मानने का फ़ैसला सुनाया और उसकी सज़ा को संशोधित कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उसने हत्या उस समय की जब उसे और उसकी बेटी को 'वेश्या' कहकर जानबूझकर ग़ुस्सा दिलाया गया। न्यायमूर्ति एमएम शांतनागौदर और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने आईपीसी की धारा 302 के तहत उसको दोषी माने जाने के निर्णय को बदलकर उसे धारा 304 के तहत दोषी माना। कोर्ट ने कहा, "मृतक ने आरोपी को 'वेश्या' कहकर उसको उकसाया। हमारे समाज में कोई भी...
सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सज़ा पाए तीन लोगों को बरी किया जब कि एक की सज़ा कम कर दी
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को हत्या के आरोप में मौत की सज़ा पाए तीन लोगों को बरी कर दिया। कर्नाटक हाईकोर्ट ने इन लोगों की सज़ा की पुष्टि की थी। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में एल नागेश्वर राव और संजीव खन्ना की तीन सदस्यीय पीठ ने एक आरोपी की मौत की सज़ा को आजीवन कारावास में बदल दिया। बासवराज, यंकप्पा, रमेश और पाल्या को निचली अदालत ने तीन लोगों की हत्या के आरोप में मौत की सज़ा सुनाई थी। कर्नाटक हाईकोर्ट ने भी उनकी सज़ा को सही ठहराया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सज़ा पाए...
पदोन्नति पर विचार के समय जो नियम लागू है उसी नियम के अनुसार पदोन्नति होनी चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पदोन्नति कोई अधिकार नहीं है बल्कि नियम के अनुसार पदोन्नति के लिए योग्य पाए जाने का अधिकार उस नियम के तहत है जो उस दिन लागू रहता है जिस दिन पदोन्नती पर विचार होता है। न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने हवलदार को रिक्त पदों पर नाइब सूबेदार के रूप में पदोन्नति देने के बारे में मणिपुर हाईकोर्ट के फ़ैसले को ख़ारिज कर दिया। यह रिक्तियाँ 2011 में हुए परिवर्तनों के पहले पैदा हुईं और फिर भर्ती नियमों को 2012 में लागू करने से पहले हुई। ...
सुप्रीम कोर्ट ने बताया 'रेट्रॉस्पेक्टिव' और 'रेट्रोऐक्टिव' के बीच अंतर [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लघु और सहायक औद्योगिक उपक्रम अधिनियम, 1993 के तहत देरी से चुकायी जाने वाली राशि पर ब्याज का भुगतान प्रस्पेक्टिव (प्रत्याशित) है पर कोर्ट ने क़ानून के रेट्रॉस्पेक्टिव (पिछले प्रभाव) और रेट्रोऐक्टिव (अगले प्रभाव) से लागू होने के बीच अंतर को स्पष्ट किया है। न्यायमूर्ति एके सीकरी, अशोक भूषण और एस अब्दुल नज़ीर की पीठ ने एक अपील पर सुनवाई करते हुए यह फ़ैसला दिया। पीठ के समक्ष यह याचिका तब आइ जब न्यायमूर्ति वी गोपाल गौडा और अरुण मिश्रा की पीठ ने इस मामले में अलग अलग फ़ैसला...
कोर्ट के साथ फ़र्जीवाड़े में लिप्त पाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल कॉलेज पर लगाया ₹5 करोड़ का जुर्माना, डीन के ख़िलाफ़ कार्रवाई का दिया आदेश [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह एक मेडिकल कॉलेज पर यह कहते हुए ₹5 करोड़ का जुर्माना लगाया कि उसने सुप्रीम कोर्ट के साथ धोखेबाज़ी की है। न्यायमूर्ति एसए बोबड़े, एल नागेश्वर राव और आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने आरकेडीएफ मेडिकल कॉलेज और अस्पताल एवं शोध केंद्र को अगले दो साल के लिए एमबीबीएस के प्रथम वर्ष में छात्रों के प्रवेश पर रोक लगा दिया है। पीठ ने भारतीय दंड संहिता की धारा 193 के तहत कॉलेज के डीन एसएस कुशवाहाँ के ख़िलाफ़ कार्रवाई का भी आदेश दिया।कोर्ट ने कॉलेज को आदेश दिया है कि वह 2017-2018 में...


![राजस्व रिकॉर्ड में नाम बदलवाने से भूमि पर क़ब्ज़े का अधिकार नहीं बन जाता और इसका कोई आनुमानिक महत्व भी नहीं है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] राजस्व रिकॉर्ड में नाम बदलवाने से भूमि पर क़ब्ज़े का अधिकार नहीं बन जाता और इसका कोई आनुमानिक महत्व भी नहीं है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/02/03/500x300_358031-supreme-court-of-india-5.jpg)

![बीमा कंपनियाँ पॉलिसी की शर्तों को एकतरफ़ा कार्रवाई कर बदल नहीं सकतीं और कवरेज को कम नहीं कर सकतीं : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े] बीमा कंपनियाँ पॉलिसी की शर्तों को एकतरफ़ा कार्रवाई कर बदल नहीं सकतीं और कवरेज को कम नहीं कर सकतीं : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/01/28/500x300_357869-justice-nariman-and-justice-vineet-saran.jpg)
![अगर शादी हिंदू विवाह अधिनियम के तहत हुआ है तो अंग्रेज़ी निजी क़ानून के तहत राहत का दावा नहीं किया जा सकता : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े] अगर शादी हिंदू विवाह अधिनियम के तहत हुआ है तो अंग्रेज़ी निजी क़ानून के तहत राहत का दावा नहीं किया जा सकता : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/02/01/500x300_358013-marriage.jpg)
![नाबालिग़ का स्वेच्छा से आरोपी के साथ होना ज़मानत मिलने को आसान करनेवाला है : गुजरात हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े] नाबालिग़ का स्वेच्छा से आरोपी के साथ होना ज़मानत मिलने को आसान करनेवाला है : गुजरात हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//356036-gujarat-high-court-min.jpg)
![NI अधिनियम की धारा 138 के तहत आरोपी और उसके गवाह हलफ़नामा दायर कर साक्ष्य प्रस्तुत कर सकते हैं : गुजरात हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े] NI अधिनियम की धारा 138 के तहत आरोपी और उसके गवाह हलफ़नामा दायर कर साक्ष्य प्रस्तुत कर सकते हैं : गुजरात हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//356387-cheque-bounce-cases.jpg)

![मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नाबालिग़ लड़की से बलात्कार करने वाले शिक्षक की मौत की सज़ा को सही बताया [निर्णय पढ़े] मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नाबालिग़ लड़की से बलात्कार करने वाले शिक्षक की मौत की सज़ा को सही बताया [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/01/31/500x300_357963-childrapevictim.jpg)
![आधार में दी गई सूचना को आपराधिक मामलों के लिए निर्णयात्मक सबूत नहीं माना जा सकता : इलाहाबाद हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े] आधार में दी गई सूचना को आपराधिक मामलों के लिए निर्णयात्मक सबूत नहीं माना जा सकता : इलाहाबाद हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/01/29/500x300_357902-aadhaar.jpg)
![किसी पर बलात्कार का झूठा आरोप लगाना आरोपी को उत्पीड़ित और अपमानित करने के बराबर : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े] किसी पर बलात्कार का झूठा आरोप लगाना आरोपी को उत्पीड़ित और अपमानित करने के बराबर : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2018/12/30/500x300_355726-bombay-hc.jpg)
![किसी भी अथॉरिटी को यह विशेषाधिकार नहीं है कि वह SC के फ़ैसले को नहीं माने : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] किसी भी अथॉरिटी को यह विशेषाधिकार नहीं है कि वह SC के फ़ैसले को नहीं माने : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//356998-supreme-court-light-1.jpg)
![मौत की सज़ा तभी जब अन्य सभी विकल्पों का रास्ता निर्विवाद रूप से बंद हो जाए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] मौत की सज़ा तभी जब अन्य सभी विकल्पों का रास्ता निर्विवाद रूप से बंद हो जाए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/01/20/500x300_357671-justice-bobde-nageswara-rao-subhash-reddy.jpg)


![मृतक ने वेश्या कहकर पत्नी और बेटी को जानबूझकर उकसाया; सुप्रीम कोर्ट ने पत्नी की सज़ा को संशोधित किया [निर्णय पढ़े] मृतक ने वेश्या कहकर पत्नी और बेटी को जानबूझकर उकसाया; सुप्रीम कोर्ट ने पत्नी की सज़ा को संशोधित किया [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/01/26/500x300_357845-dinesh-shatgaonkar.jpg)

![पदोन्नति पर विचार के समय जो नियम लागू है उसी नियम के अनुसार पदोन्नति होनी चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] पदोन्नति पर विचार के समय जो नियम लागू है उसी नियम के अनुसार पदोन्नति होनी चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/01/26/500x300_357834-justice-dy-chnadrachud-and-justice-hemant-gupta.jpg)
![सुप्रीम कोर्ट ने बताया रेट्रॉस्पेक्टिव और रेट्रोऐक्टिव के बीच अंतर [निर्णय पढ़े] सुप्रीम कोर्ट ने बताया रेट्रॉस्पेक्टिव और रेट्रोऐक्टिव के बीच अंतर [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/01/25/500x300_357810-sikri-ashokbhushan-abdulnazeer.jpg)
![कोर्ट के साथ फ़र्जीवाड़े में लिप्त पाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल कॉलेज पर लगाया ₹5 करोड़ का जुर्माना, डीन के ख़िलाफ़ कार्रवाई का दिया आदेश [निर्णय पढ़ें] कोर्ट के साथ फ़र्जीवाड़े में लिप्त पाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल कॉलेज पर लगाया ₹5 करोड़ का जुर्माना, डीन के ख़िलाफ़ कार्रवाई का दिया आदेश [निर्णय पढ़ें]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/01/25/500x300_357809-justice-bobde-nageswara-rao-subhash-reddy.jpg)