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भीख माँगने को वैध बनाए जाने के बाद बेघर हुए कुष्ठ रोगियों के पुनर्वास के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में अपील; नोटिस जारी [याचिका पढ़े]

Rashid MA
19 Jan 2019 9:05 AM GMT
भीख माँगने को वैध बनाए जाने के बाद बेघर हुए कुष्ठ रोगियों के पुनर्वास के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में अपील; नोटिस जारी [याचिका पढ़े]
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दिल्ली हाईकोर्ट ने सभी कुष्ठ रोगियों के पुनर्वास की माँग के बारे में दायर याचिका पर केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। भीख माँगने को गत वर्ष अगस्त में कोर्ट द्वारा वैध ठहराए जाने के बाद ये कुष्ठ रोगी बेघर हो गए थे।

कोर्ट ने बॉम्बे प्रेवेंशन ऑफ़ बेगिंग ऐक्ट के बहुत सारे प्रावधानों को असंवैधानिक क़रार दे दिया था और स्पष्ट किया था कि इसका आवश्यक परिणाम यह होगा कि इस अधिनियम के तहत किसी व्यक्ति को भीख माँगने का दोषी क़रार नहीं दिया जा सकता है।

दिल्ली प्रेवेंशन ऑफ़ बेगिंग रूल्ज़, 1960 के तहत दिल्ली सरकार ने 11 प्रमाणीकृत केंद्र खोले थे जिसमें एक स्वागत सह वर्गीकरण केंद्र भी था जो कि बॉम्बे प्रेवेंशन ऑफ़ बेगिंग ऐक्ट के तहत खोला गया था। इसमें आधिकारिक रूप से 2018 लोगों के लिए जगह थी। इस फ़ैसले के बाद होम फ़ॉर लेप्रोसी एंड टीबी प्रभावित रोगी (एचएलटीबी), ताहिरपुर, और शाहदरा, दिल्ली में रह रहे रोगियों को निकाल दिया गया। ये स्थान भीख माँगने वाले कुष्ठ रोगियों के लिए जेल जैसा हुआ करता था।

अब एक बेघर कुष्ठ रोगी राजीव कुमार ने कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि 450 से भी अधिक कुष्ठ रोगी इन घरों से निकाले जाने के बाद सड़कों पर रहने के लिए बाध्य हैं।

इस याचिका में इस रोग से जुड़े हुए कलंक की चर्चा की गई है जिसकी वजह से अन्य लोगों की तुलना में इनकी स्थिति काफ़ी मुश्किल हो जाती है। याचिका में कहा गया है कि कुष्ठ से पीड़ित लोगों का और कोई ठिकाना नहीं है और वे सड़कों पर रात गुज़ारने और भीख माँगने के लिए मजबूर हैं क्योंकि उनका कोई परिवार नहीं है जो उनकी मदद करे और फिर उनकी बीमारी के कारण उन्हें सामान्य शेल्टर होम्स में भी नहीं ले जाया जाता है।

याचिका में कहा गया है कि भीख माँगने को आपराधिक नहीं बताने वाले फ़ैसले आने के बाद कुष्ठ रोग़ियों के अस्तित्व का संकट समाप्त नहीं हुआ है बल्कि अब हक़ीक़त में यह शुरू हुआ है। पहले एचएलटीबी एकमात्र ऐसा जगह होता था जहाँ कुष्ठ रोग़ियों का इलाज होता था, उन्हें खाना मिलता था और रहने को जगह मिलती थी। पर इस फ़ैसले के बाद अब कुष्ठ रोगी वहाँ नहीं रह सकते हैं जबकि वह उनका एकमात्र ठौर था और जेल होने के बावजूद वह उनका पुनर्वास स्थल था।


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