मुख्य सुर्खियां
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अगर पक्षकार ना चाहें तो अदालत का यह विशेषाधिकार चला जाता है, उसने पूर्व मुख्य न्यायाधीश को एकमात्र मध्यस्थ नियुक्त किया [आर्डर पढ़े]
दिल्ली हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा को भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL -भेल) और उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (UPRVUNL) के बीच हरदुआगंज ताप बिजली संयंत्र को लेकर उठे विवाद को सुलझाने के लिए एकमात्र मध्यस्थ नियुक्त किया है। न्यायमूर्ति नवीन चावला ने उनकी नियुक्ति का आदेश जारी किया जो कि दोनों के बीच ठेका कार्य को लेकर हुए विवाद का निपटारा करेंगे। भेल का आरोप है कि उसने जो सेवाएँ दी हैं उसके बदले उसको समय पर भुगतान नहीं मिला...
मंदिर में प्रतिदिन होने वाली गतिविधियों में भाग लेना यह निर्धारित करता है कि मंदिर निजी है या सार्वजनिक : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आम लोगों का मंदिर के दर्शन और प्रतिदिन की पूजा या समारोहों में भाग लेना मंदिर के निजी/सार्वजनिक चरित्र के निर्धारण के लिए महत्त्वपूर्ण है। इस संबंध में इंदौर के एक राम मंदिर के पुजारी ने एक मामला दायर कर यह घोषित किए जाने की माँग की कि मंदिर निजी है और राज्य को इस मंदिर के प्रबंधन, पूजा अर्चना और कृषि भूमि पर क़ब्ज़े का कोई अधिकार नहीं है। मामले में राज्य सरकार के अधिकारियों के ख़िलाफ़ हुक्मनामा भी जारी करने का आग्रह किया गया। यद्यपि मिचलि अदालत ने इस मामले में अपना...
हर संत एक अतीत है और हर पापी का एक भविष्य है : बॉम्बे हाईकोर्ट ने डकैती के आरोप में सज़ा पाए लड़कों को दी राहत [निर्णय पढ़े]
एक फ़ैसला सुनाते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने ऑस्कर वाइल्ड को उद्धृत किया। कोर्ट ने कहा कि परिस्थितियाँ ऐसी थीं जिसकी वजह से इन लोगों को क़ानून को तोड़ने के लिए बाध्य होना पड़ा।नागपुर पीठ के न्यायमूर्ति एसबी शुक्रे और न्यायमूर्ति एसएम मोदक एक आपराधिक मामले को लेकर रिट पेटीशन की सुनवाई कर रहे थे जिसे 21 साल के आकाश देशपांडे और 23 साल के निकुंज साधवानी नेदायर किया था। ये दोनों ही सीआरपीसी की धारा 427 के तहत राहत की माँग कर रहे थे क्योंकि उन्हें सात अलग-अलग मामलों में सज़ा मिली थी जो एक के बाद एक चलनी...
दिल्ली हाईकोर्ट ने भागकर शादी करने वाले जोड़े को दी सुरक्षा, ज्वाइंट मेडिक्लेम पॉलिसी लेने का निर्देश दिया [आर्डर पढ़े]
भागकर शादी करने वाले एक जोड़े को सुरक्षा देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने पति को ₹5 लाख रुपए का ज्वाइंट मेडिक्लेम पॉलिसी लेने का निर्देश दिया। अपने आदेश में न्यायमूर्ति नज़्मी वज़ीरी ने कहा, "याचिकाकर्ता नम्बर 2 इस बात का वादा करता है कि वह अपने और अपनी पत्नी के लिए ₹5 लाख रुपए का मेडिक्लेम पॉलिसी लेगा। यह पॉलिसी कम से कम शादी की अवधि तक जारी रखी जाएगी। वह इसमें याचिकाकर्ता नम्बर 1, पत्नी को उस सभी सम्पत्तियों में बराबर की भागीदारी देगा जो उसे एक वारिस के तौर पर मिलेगा।" इस जोड़े ने सुरक्षा के...
केंद्रीय सूचना आयुक्त ने कहा, सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन एक 'सूचना' [आर्डर पढ़े]
मुख्य सूचना आयुक्त सुधीर भार्गव ने रज़ाक़ के हैदर की अपील पर यह बात कही है जिन्होंने आरटीआई दायर कर केंद्रीय सार्वजनिक सूचना अधिकारी (CPIO), चुनाव आयोग (EC) से एलेक्ट्रोनिक वोटिंग (ईवीएम) मशीन माँगा है। उनके अनुसार, आरटीआई अधिनियम की धारा 2(f) और 2(i) के तहत 'सूचना' और 'रेकर्ड' की परिभाषा में मॉडल या कोई नमूना शामिल है। इसलिए ईवीएम 'सूचना' की श्रेणी में आता है और उन्हें अधिनियम की धारा 6(1) के तहत दिया जाना चाहिए। इस आवेदन को ख़ारिज करने को सही ठहराते हुए CPIO ने कहा कि मॉडल/नमूना चुनाव...
ग़लत इलाज को लापरवाही नहीं माना जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण मंच (NCDRC) के फ़ैसले के ख़िलाफ़ दायर एक अपील को ख़ारिज कर दिया। इस अपील में कहा गया था कि अस्पताल के ग़लत इलाज के कारण उसकी पत्नी की मौत हो गई। हमें अपीलकर्ता के प्रति जो हुआ उसका दुःख है पर इस भावना को क़ानूनी उपचार में नहीं बदला जा सकता, यह कहना था न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल का जिन्होंने NCDRC के फ़ैसले को सही माना जिसमें कहा गया था कि यह मामला ज़्यादा से ज़्यादा ग़लत इलाज का हो सकता है; यह निश्चित रूप...
जाँच रिपोर्ट पर आपत्ति की सुनवाई किए बिना हटाए गए मजिस्ट्रेट को सुप्रीम कोर्ट से राहत [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने अभी हाल ही में एक मजिस्ट्रेट को नौकरी से बर्ख़ास्तगी को इस आधार पर निरस्त कर दिया कि उसे जाँच अधिकारी के निष्कर्षों को चुनौती देने का मौक़ा नहीं दिया गया। न्यायमूर्ति एके सीकरी, एसए नज़ीर और एमआर शाह की पीठ ने उसकी बर्ख़ास्तगी को जायज़ ठहराने वाले मद्रास हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ आर ऐलेग्ज़ैंडर की याचिका स्वीकार कर ली। एक वक़ील ने आर ऐलेग्ज़ैंडर के ख़िलाफ़ उस समय शिकायत की थी जब वे कट्टूमन्नारकोईल में मुंसिफ़-सह-न्यायिक मजिस्ट्रेट था। हाईकोर्ट की प्रशासनिक समिति ने...
घटना के समय नाबालिग़ पाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार के आरोपी को रिहा किया [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने ने शुक्रवार को बलात्कार के आरोपी एक व्यक्ति को रिहा कर दिया क्योंकि जाँच के बाद उसे घटना के समय नाबालिग़ पाया गया। न्यायमूर्ति एमवी रमना,न्यायमूर्ति एमएम शांतनागौदर और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी की पीठ ने इस आरोपी को रिहा किए जाने का आदेश दिया क्योंकि यह व्यक्ति 6 साल की कैद की सज़ा पहले ही काट चुका है। किसी नाबालिग़ को इस अपराध के लिए अधिकतम 3 साल की सज़ा हो सकती है। राजू और दो अन्य लोगों को 15 साल की एक लड़की से बलात्कार के आरोप का दोषी मानते हुए हाईकोर्ट ने यह मानने से...
अगर विज्ञापन में जानकारी नहीं दी गई है तो भर्ती नियमों में ढील नहीं दी जा सकती : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर विज्ञापन में इस बात की जानकारी नहीं दी गई है तो भर्ती नियमों में ढील दिए जाने के अधिकार का प्रयोग नहीं किया जा सकता। उत्तर प्रदेश विद्युत निगम में टेक्नीशियन ग्रेड-2 (Apprenticeship Electrical) की भर्ती के के लिए जो विज्ञापन दिया गया था उसमें कहा गया था कि साक्षात्कार के समय Department of Electronics Accreditation of Computer Courses (DOEACC) द्वारा कोर्स ऑन कम्प्यूटर कॉन्सेप्ट (सीसीसी) का प्रमाणपत्र पेश करना ज़रूरी होगा। भारी संख्या में छात्र जिन्होंने इस...
अपने सहकर्मी की नाबालिग़ बेटी से यौन संबंध बनाने वाले वायु सेना के अधिकारी की बर्ख़ास्तगी को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय वायु सेना के एक फ़्लाइट लेफ़्टिनेंट की बर्ख़ास्तगी को सही ठहराया है। इस अधिकारी पर अपने एक सहकर्मी की नाबालिग़ बेटी के साथ यौन संबंध बनाने का आरोप है। सहकर्मी की शिकायत पर जाँच बैठाई गई और इसकी रिपोर्ट में यह कहा गया कि नाबालिग़ पीडिता की स्थिति को देखते हुए आम कोर्ट मार्शल व्यावहारिक नहीं होगा। इसके बदले, जाँच रिपोर्ट की अनुशंसा के आधार पर वायु सेना प्रमुख ने अपनी राय दी कि इस अधिकारी को स्थाई तौर पर रिटायर कर दिया जाए। केंद्र सरकार ने वायु सेना प्रमुख की अनुशंसा...
किसी गवाही का अगर एक हिस्सा झूठा है तो इस वजह से पूरी गवाही को नकारा नहीं जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
क्या भारत के संदर्भ में यह उक्ति लागू हो सकता है कि 'अगर कोई बात एक जगह झूठा है तो वह हर जगह झूठा होगा'? वृहस्पतिवार को अपने एक फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को दुहराया कि यह उक्ति भारत के संदर्भ में लागू नहीं होता है। आरोपी अपीलकर्ता की याचिका पर एक बार फिर ग़ौर करते हुए इस मुद्दे पर विचार किया कि अगर किसी गवाह के बयान का कोई हिस्सा अविश्वसनीय पाया जाता है तो इस बयान के दूसरे हिस्से का प्रयोग किसी आरोपी को सज़ा दिलाने के लिए नहीं हो सकता। कसी गवाही का अगर एक हिस्सा झूठा है तो पूरे...
मालेगांव धमाका 2008: क़ानून में दस्तावेज़ों के फ़ोटो प्रतियों का प्रयोग ग़लत; बॉम्बे हाईकोर्ट ने फ़ोटोकॉपी को द्वितीयक साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने के NIA अदालत के आदेश को स्थगित किया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि असत्यापित और फ़ोटोकॉपी किए गए दस्तावेज़ों का प्रयोग क़ानून ग़लत है और इस संबंध में 2008 के मालेगांव विस्फोट में गवाहों और कबूलनामे की फ़ोटो प्रतियों और असत्यापित दस्तावेज़ों के प्रयोग की अनुमति देने वाले NIA की विशेष अदालत के आदेश को स्थगित कर दिया। न्यायमूर्ति एएस ओका और न्यायमूर्ति गडकरी की पीठ इस मामले में एक आरोपी समीर कुलकर्नी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह कहा। कुलकर्नी ने इस मामले में साक्ष्य के रूप में दस्तावेज़ों की फ़ोटो प्रतियों के प्रयोग के...
सेना के अनुशासनात्मक क्षेत्राधिकार के ख़िलाफ़ निष्फलकारी न्यायिक हड़ताल अनावश्यक है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुशासनात्मक क्षेत्राधिकार का रास्ता अपनाने की ज़रूरत है कि नहीं इस बात का निर्धारण करने के अधिकार को अपने हाथ में लेकर हाईकोर्ट को सेना के अनुशासनात्मक क्षेत्राधिकार को निष्फल नहीं करना चाहिए। न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने मणिपुर हाईकोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ भारत सरकार की याचिका पर ग़ौर करते हुए यह फ़ैसला सुनाया। पीठ के अनुसार, ऐसा करना सेना अधिनियम, 1950 के तहत एक अधिकारी के ख़िलाफ़ उसकी अनुशासनात्मक कार्रवाई के अधिकार को निष्फल...
सीआरपीसी की धारा 482 के तहत हाईकोर्ट यह जाँच कर सकता है कि दीवानी मामले को आपराधिक रंग तो नहीं दिया जा रहा है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सीआरपीसी की धारा 482 के तहत अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए हाईकोर्ट इस बात की पड़ताल कर सकता है कि जो मामला दीवानी प्रकृति का है उसे आपराधिक मामला तो नहीं बनाया जा रहा है।कोर्ट ने कहा कि अगर किसी मामले को दीवानी है पर उसे आपराधिक मामला बनाया गया है तो इस मामले का जारी रहना कोर्ट की प्रक्रिया का दुरुपयोग है और इस मामले को निरस्त किया जा सकता है। यह बात न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने अपने एक फ़ैसले में कहा।प्रो. आरके विजयसारथी बनाम...
सिर्फ़ ऋण चुका नहीं पाने का मतलब 'धोखाधड़ी' नहीं हो जाता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फ़ैसले में कहा है कि अगर कोई व्यक्ति ऋण चुकाने में विफल रहता है तो इसका अर्थ यह नहीं हुआ कि उसके ख़िलाफ़ धोखाधड़ी का आपराधिक मामला बनता है। ऐसा तभी हो सकता है जब कारोबार की शुरुआत में ही इस तरह की बेईमानी के इरादे के स्पष्ट होने का संकेत मिलता है। सतीशचंद्र रतनलाल बनाम गुजरात राज्य मामले में हाईकोर्ट के आदेशके ख़िलाफ़ दायर एक अपील पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह मत व्यक्त किया। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में धोखाधड़ी के एक मामले में आरोपी के ख़िलाफ़ जारी सम्मन को निरस्त...
किसी आरोपी को अगर एक से अधिक अपराधों में सज़ा मिलती है तो यह बताना ज़रूरी है कि जो सज़ा दी गई है वह साथ-साथ चलेगी या एक के बाद दूसरी : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि क़ानून के तहत यह बताना ज़रूरी है कि अगर किसी व्यक्ति को दो या दो से अधिक अपराधों के लिए सज़ा मिली है तो यह सज़ा साथ-साथ चलेगी या एक सज़ा पूरी हो जाने के बाद दूसरी सज़ा चलेगी। मजिस्ट्रेट ने गगन कुमार को आईपीसी की धारा 279 और 304A के तहत दोषी ठहराया था। उसे धारा 279 के तहत छह माह की सश्रम कारावास की सज़ा सुनाई गई और 304A के तहत दो साल के सश्रम कारावास की सज़ा सुनाई गई। मजिस्ट्रेट के आदेश में यह नहीं बताया गया था कि ये सज़ा एक के बाद एक होगी या एक साथ चलेगी। अपीली...
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने घाटी में रह रहे कश्मीरी पंडितों के लिए विशेष रोज़गार पैकेज को सही ठहराया [निर्णय पढ़े]
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने घाटी में रह रहे कश्मीरी पंडितों के लिए विशेष रोज़गार पैकेज देने की घोषणा को दी गई गई चुनौती को ख़ारिज कर दिया। कश्मीरी सिखों की संस्था कश्मीरी सिख समुदाय और दो बेरोज़गार कश्मीरी युवा ने हाईकोर्ट में अर्ज़ी देकर यह माँग की कि उन्हें भी कश्मीरी पंडितों के समकक्ष माना जाए। कश्मीरी पंडितों की वापसी और उनके पुनर्वास के लिए प्रधानमंत्री के पैकेज की घोषणा के बाद रोज़गार के संदर्भ उन्होंने यह अपील की।इन लोगों ने कहा कि प्रधानमंत्री के पैकेज में घाटी में रह रहे सिखों को...
क्या सुनवाई शुरू होने के बाद शिकायत में संशोधन के आवेदन की अनुमति दी जा सकती है? पढ़िए क्या कहता है सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फ़ैसले में स्पष्ट किया कि सुनवाई शुरू होने के बाद कब और किस आधार पर दलील में संशोधन की अनुमति के लिए आवेदन दिया जा सकता है। न्यायमूर्ति एनवी रमना और न्यायमूर्ति एमएम शांतनागौदर की पीठ ने कहा कि इस तरह के आवेदन पर ग़ौर करते हुए कोर्ट को यह तजवीज़ करनी है कि ऐसा करना उचित है या अनुचित और यह कि ऐसा करने से दूसरे पक्ष के ख़िलाफ़ कहीं ऐसा भेदभाव तो नहीं होता है जिसकी पैसे से भरपाई नहीं हो सकती। कोर्ट M. Revanna vs. Anjanamma मामले पर ग़ौर कर रहा था जिसमें वादी ने सुनवाई...
एमएसीटी मामले में 'सर्वाधिक बेहतर' गवाह से पूछताछ नहीं करना अनर्थकारी नहीं है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मोटर वाहन दुर्घटना दावे के मामले में अगर सर्वाधिक बेहतर गवाह से पूछताछ नहीं की गई तो यह अनर्थकारी नहीं हैं। न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की पीठ ने कहा कि अगर किसी दुर्घटना में परिवार के किसी व्यक्ति की मौत हुई है तो अधिनियम के तहत मुआवज़े के निर्धारण के दौरान अति तकनीकी और मामूली अप्रोच से बचना चाहिए। Sunita vs. Rajasthan State Transport Corporation मामले में हाईकोर्ट ने अधिकरण के फ़ैसले को मुख्य रूप से इसलिए ख़ारिज कर दिया था क्योंकि इस...
क़ानून चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में हुई प्रगति का ख़याल रखे:सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल लापरवाही पीड़ित के पति को 15 लाख मुआवजा दिया [निर्णय पढ़े]
हमारे क़ानून को चिकित्सा विज्ञान में हुई प्रगति का ख़याल रखना चाहिए और यह सुनिश्चत करना चाहिए कि मरीज़ को मदद पहुँचाने वाले रूख अपनाए जाएँ। न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने हाल ही में एक मामले में अपनी यह राय व्यक्त की। शीर्ष अदालत की पीठ जिसमें न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता भी शामिल थे, ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के एक आदेश के ख़िलाफ़ अपील पर सुनवाई कर रहे थे। आयोग ने अपने फ़ैसले में मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के एक फ़ैसले को ख़ारिज कर दिया था जिसमें एक...

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![सीआरपीसी की धारा 482 के तहत हाईकोर्ट यह जाँच कर सकता है कि दीवानी मामले को आपराधिक रंग तो नहीं दिया जा रहा है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] सीआरपीसी की धारा 482 के तहत हाईकोर्ट यह जाँच कर सकता है कि दीवानी मामले को आपराधिक रंग तो नहीं दिया जा रहा है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/01/28/500x300_357872-justice-dy-chnadrachud-and-justice-hemant-gupta.jpg)
![सिर्फ़ ऋण चुका नहीं पाने का मतलब धोखाधड़ी नहीं हो जाता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] सिर्फ़ ऋण चुका नहीं पाने का मतलब धोखाधड़ी नहीं हो जाता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/01/19/500x300_357649-justice-nv-ramana-and-justice-mohan-m-shantanagoudar.jpg)
![किसी आरोपी को अगर एक से अधिक अपराधों में सज़ा मिलती है तो यह बताना ज़रूरी है कि जो सज़ा दी गई है वह साथ-साथ चलेगी या एक के बाद दूसरी : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] किसी आरोपी को अगर एक से अधिक अपराधों में सज़ा मिलती है तो यह बताना ज़रूरी है कि जो सज़ा दी गई है वह साथ-साथ चलेगी या एक के बाद दूसरी : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/02/23/500x300_358564-am-sapre-dinesh-maheswari.jpg)
![जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने घाटी में रह रहे कश्मीरी पंडितों के लिए विशेष रोज़गार पैकेज को सही ठहराया [निर्णय पढ़े] जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने घाटी में रह रहे कश्मीरी पंडितों के लिए विशेष रोज़गार पैकेज को सही ठहराया [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//356320-jammu-kashimir-high-court-min.jpg)
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