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Writ Of Habeas Corpus Will Not Lie When Adoptive Mother Seeks Child
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 'सपेरों' पर प्रतिबंध लगाने वाले वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम के प्रावधानों को समाप्त करने की याचिका ख़ारिज की [आर्डर पढ़े]

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 'सपेरा' समुदाय के एक व्यक्ति की उस याचिका को ख़ारिज कर दिया जिसमें उसने वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 9 और 11 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी। महावीर नाथ ने हाईकोर्ट के ग्वालियर पीठ में अर्ज़ी देकर यह कहा कि उसे सपेरों के परंपरागत कार्य करने से रोका जा रहा है जो कि उसकी आजीविका का साधन रहा है। उसने कहा कि नाथ/सपेरा समुदाय के परम्परागत पेशे पर अचानक ही पाबंदी लगा दी गई है और उन्हें सांपों को रखने से रोक दिया गया है। उसने या भी कहा कि उनका समुदाय ग्वालियर...

चिकित्सा पेशेवरों को सभी मरीज़ों के साथ समान आदर और संवेदनशीलता के साथ पेश आना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
चिकित्सा पेशेवरों को सभी मरीज़ों के साथ समान आदर और संवेदनशीलता के साथ पेश आना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

चिकित्सा में लापरवाही के एक मामले में एक महिला को ऊँची मुआवज़ा राशि चुकाए जाने का आदेश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मेडिकल पेशे से जुड़े लोगों को अपने सभी उपभोक्ताओं के साथ समान व्यवहार करना चाहिए। यह मामला 45 साल की जिस महिला से संबंधित है वह बहुत ही ग़रीब घर और ग्रामीण परिवेश की है और इलाज में लापरवाही के कारण उसकी दाहिनी बाँह काटनी पड़ी। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने पाया कि यह मामला चिकित्सा में लापरवाही का है और इसके लिए सिर्फ़ दो लाख रुपए का मुआवज़ा ही देने का आदेश दिया।...

एनजीटी ने फ़ॉक्सवैगन पर उत्सर्जन की मात्रा को छिपाने वाला यंत्र लगाने के आरोप में लगाया ₹500 करोड़ का जुर्माना
एनजीटी ने फ़ॉक्सवैगन पर उत्सर्जन की मात्रा को छिपाने वाला यंत्र लगाने के आरोप में लगाया ₹500 करोड़ का जुर्माना

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) जर्मनी की कार कंपनी फ़ॉक्सवैगन पर उत्सर्जन के नियम का उल्लंघन करने और इसको छिपाने के लिए कारों में यंत्र लगाने का दोषी पाते हुए उस पर ₹500 करोड़ का जुर्माना लगाया है। एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एके गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कंपनी पर इस जुर्माने की घोषणा की।पीठ ने दिल्ली के एक शिक्षक सलोनी ऐलवादी की याचिका पर यह फ़ैसला सुनाया। ऐलवादी ने यह याचिका तब दायर की जब उसको पता चला कि उसके पिता को चौथे चरण का कैंसर है। उसके वक़ील संजीव ऐलवादी ने कहा कि मानवों में...

ट्रान्स्फ़र ऑफ़ प्रॉपर्टी ऐक्ट,1882 के तहत किरायेदार और मकान मालिक के बीच सम्पत्ति विवाद का फ़ैसला मध्यस्थता से हो सकता है या नहीं, बड़ी पीठ करेगी निर्णय [निर्णय पढ़े]
ट्रान्स्फ़र ऑफ़ प्रॉपर्टी ऐक्ट,1882 के तहत किरायेदार और मकान मालिक के बीच सम्पत्ति विवाद का फ़ैसला मध्यस्थता से हो सकता है या नहीं, बड़ी पीठ करेगी निर्णय [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाँगनी एंटरप्राइज़ बनाम कमलजीत सिंह अहलूवालिया मामले में उसका फ़ैसला सही है कि नहीं यह जानने के लिए इस मामले को एक बड़ी बेंच को सौंप दिया है। इस फ़ैसले में कोर्ट ने कहा था कि मकान मालिक और किरायेदार के बीच जहाँ ट्रान्स्फ़र ऑफ़ प्रॉपर्टी ऐक्ट, 1882 लागू होगा उस मामले में मध्यस्थता नहीं हो सकती। न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन और न्यायमूर्ति विनीत सरन की पीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के एक फ़ैसले के ख़िलाफ़ याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस फ़ैसले में एक मकान मालिक और उसके किरायेदार के...

12 साल से कम उम्र की किसी लड़की ज़बरन चूमना और गले लगाना पोकसो अधिनियम के तहत गंभीर यौन उत्पीड़न हो सकता है : सिक्किम हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
12 साल से कम उम्र की किसी लड़की ज़बरन चूमना और गले लगाना पोकसो अधिनियम के तहत 'गंभीर यौन उत्पीड़न' हो सकता है : सिक्किम हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]

सिक्किम हाई कोर्ट ने कहा है कि 11 साल की किसी लड़की को ज़बरन चूमना और उसे गले से लगाना पोकसो अधिनियम, 2012 की धारा 9m के तहत 'गंभीर यौन अपराध' हो सकता है। न्यायमूर्ति भास्कर राज प्रधान ने पोकसो अधिनियम की धारा 9m के तहत एक व्यक्ति को दोषी ठहराने के विशेष अदालत के फ़ैसले को जायज़ ठहराया। इस व्यक्ति ने 11 साल की एक लड्डकि को ज़बरन चूमा था और उसे गले लगाया था। विशेष अदालत ने नाबालिग़ के बयान पर ग़ौर किया जिसे उसकी एक सहेली ने भी सही ठहराया जो कि उस समय वहाँ मौजूद थी जब यह वाक़या हुआ। कोर्ट के...

उम्मीदवार का ग़लत हलफ़नामा देना धाँधली नहीं बशर्ते वह चुनाव अधिकारी की जाँच से पहले इसमें सुधार कर लेता है : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]
उम्मीदवार का ग़लत हलफ़नामा देना धाँधली नहीं बशर्ते वह चुनाव अधिकारी की जाँच से पहले इसमें सुधार कर लेता है : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई उम्मीदवार नामांकन पत्र में दिए गए किसी ग़लत सूचना को चुनाव अधिकारी की जाँच से पहले ठीक कर लेता है तो उसे 'धाँधली' नहीं कहा जाएगा। जिबोनतारा घटोवर के ख़िलाफ़ शिकायत यह थी कि उसने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33A के तहत जो फ़ॉर्म भरा था उसमें इस बात का ज़िक्र नहीं किया था कि उसके ख़िलाफ़ एक आपराधिक मामला लंबित था। इस प्रावधान के अनुसार, उम्मीदवारों से उम्मीद की जाती है कि वह इसमें अपने ख़िलाफ़ ऐसे लंबित मामलों का ज़िक्र करेंगे जिसमें दो वर्ष या इससे अधिक की...

हत्या के अभियुक्त बरी : सुप्रीम कोर्ट ने उन चार लोगों के ख़िलाफ़ जाँच का आदेश दिया जिनकी पहचान घायल गवाह ने की थी [निर्णय पढ़े]
हत्या के अभियुक्त बरी : सुप्रीम कोर्ट ने उन चार लोगों के ख़िलाफ़ जाँच का आदेश दिया जिनकी पहचान घायल गवाह ने की थी [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने न केवल हत्या के छह आरोपियों को मौत की सज़ा से बरी कर दिया है बल्कि 15 साल पहले हुए इस हत्याकांड की आगे जाँच का आदेश भी दिया। जस्टिस सिकरी ,जस्टिस अब्दुल नज़ीर और जस्टिस म आर शाह की पीठ ने ये निर्णय दिया |अंकुश मारुति शिंदे और पाँच अन्य लोगों पर यह आरोप है कि उन्होंने पाँच हत्याओं को अंजाम देने और एक महिला के साथ बलात्कार का आरोप है। यह महिला बच गई और पर 15 साल के एक बच्चे की मौत हो गई। सुप्रीम कोर्ट ने 2009 में इस मामले में सभी लोगों को मौत की सज़ा को सही ठहराया था। पर मंगलवार को...

सुप्रीम कोर्ट ने नाल्सा से मोटर वाहन दुर्घटना मध्यस्था प्रकोष्ठ बनाने को कहा और मोटर वाहन दुर्घटना मध्यस्थता प्राधिकरण के गठन का सुझाव दिया [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने नाल्सा से मोटर वाहन दुर्घटना मध्यस्था प्रकोष्ठ बनाने को कहा और मोटर वाहन दुर्घटना मध्यस्थता प्राधिकरण के गठन का सुझाव दिया [निर्णय पढ़े]

मंगलवार को एक अहम फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने सड़क दुर्घटना में पीड़ितों को मुआवज़ा दिलाने में होने वाली देरी को रोकने के संदर्भ में कुछ अहम निर्देश जारी किए। 18 साल के उम्र में दुर्घटना का शिकार हुए एक वकील ने एक याचिका दायर कर मुआवज़े की राशि में बढ़ोतरी की माँग की। इस अपील पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वक़ील अरुण मोहन की दलीलों पर ग़ौर किया जिन्होंने देश के हर जिले में एक मोटर वाहन दुर्घटना मध्यस्थता प्राधिकरण (एमएएमए) के गठन की बात रखी। कोर्ट ने कहा कि वक़ील के सुझाव काफ़ी...

आपराधिक मामले के बारे में तथ्यों को छिपाने के कारण पंजीकरण से हाथ धोने वाले वक़ील को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं [निर्णय पढ़े]
आपराधिक मामले के बारे में तथ्यों को छिपाने के कारण पंजीकरण से हाथ धोने वाले वक़ील को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने उस वक़ील की याचिका ख़ारिज कर दी है जिसका पंजीकरण इस आधार पर रद्द कर दिया गया था कि उसने एक आपराधिक मामले से जुड़े तथ्यों को छिपाया था। आनंद कुमार शर्मा को हिमाचल प्रदेश के बार काउन्सिल में जुलाई 1988 में एडवोकेट के रूप में पंजीकरण मिला। पर उनका पंजीकरण बाद में इस आधार पर रद्द कर दिया गया कि एक तो वे हिमाचल प्रदेश सरकार की सेवा में थे और दूसरा यह कि वे एक आपराधिक मामले में भी फँसे थे। यद्यपि शर्मा हिमाचल बार काउन्सिल में पंजीकृत थे, पर बाद में बीसीआई ने उनका पंजीकरण राजस्थान...

राज्य क़ानूनी रूप से निकाले गए बालू को अपनी सीमा से बाहर भेजे जाने से नहीं रोक सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
राज्य क़ानूनी रूप से निकाले गए बालू को अपनी सीमा से बाहर भेजे जाने से नहीं रोक सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर क़ानूनी रूप से बालू की खुदाई की गई है तो कोई राज्य सरकार संवैधानिक रूप से इसे अपनी सीमा से बाहर भेजने पर प्रतिबंध नहीं लगा सकता। न्यायमूर्ति एके सीकरी, एस अब्दुल नज़ीर और एमआर शाह की पीठ ने गुजरात से से बालू को बाहर नहीं भेजने के राज्य के नियम को रद्द कर दिया। गुजरात ने एक नियम बनाकर बालू को गुजरात की सीमा के बाहर भेजने पर प्रतिबंध लगा दिया था। गुजरात हाईकोर्ट में गुजरात गौण खनिज नियम, 1966 को चुनौती दी गई थी जिसमें गुजरात राज्य के बाहर बालू को भेजने पर...

क़ैदी के जेल में रहकर स्नातक बनने और कविता लिखने से प्रभावित हुआ सुप्रीम कोर्ट, उसकी मौत की सज़ा को उम्र क़ैद में बदला
क़ैदी के जेल में रहकर स्नातक बनने और कविता लिखने से प्रभावित हुआ सुप्रीम कोर्ट, उसकी मौत की सज़ा को उम्र क़ैद में बदला

सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने अगवा और हत्या करने के एक आरोपी को जेल में रहते हुए स्नातक की डिग्री लेने और कविता लिखने पर ग़ौर करते हुए उसकी मौत की सज़ा को आजीवन कारावास में बदल दिया। ज्ञानेश्वर सुरेश बोरकर को आईपीसी की धारा 302, 364 और 201 के तहत मौत की सज़ा दी गई थी। उस पर एक नाबालिग़ लड़की 'ऋषिकेश' की हत्या करने का आरोप था। वरिष्ठ वक़ील आनंद ग्रोवर ने आरोपी द्वारा लिखी गई कविताओं को सुप्रीम कोर्ट के तीन सदस्यों की पीठ के संज्ञान में लाया। इस पीठ में न्यायमूर्ति एके सीकरी, एस अब्दुल...

 गरीब, खानाबदोश जनजाति के निर्दोष लोगों को झूठा फंसाया गया,  SC ने 6 को बरी करते हुए आगे जांच के आदेश दिए, 5 लाख का मुआवजा
" गरीब, खानाबदोश जनजाति के निर्दोष लोगों को झूठा फंसाया गया, " SC ने 6 को बरी करते हुए आगे जांच के आदेश दिए, 5 लाख का मुआवजा

एक अनूठे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने न केवल मौत की सजा के 6 दोषियों को बरी कर दिया है बल्कि 16 वर्ष पहले हुए एक अपराध में आगे जांच का भी आदेश दे दिया है।न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी, न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति एम. आर. शाह की पीठ ने महाराष्ट्र राज्य को यह आदेश दिया है कि बरी हुए सभी दोषियों को क्षति के रूप में 5 लाख रुपये का भुगतान किया जाए।अंकुश मारुति शिंदे और 5 अन्य पर 5 हत्याएं करने और 1 महिला (जो बच गई) और 15 साल की एक बच्ची (जिसकी मौत हो गई) के साथ बलात्कार करने का आरोप था।...

टाडा अधिनियम के तहत दर्ज किए गए बयान को टाडा कोर्ट किसी अन्य क़ानून के तहत दर्ज मामले में प्रयोग नहीं कर सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
टाडा अधिनियम के तहत दर्ज किए गए बयान को टाडा कोर्ट किसी अन्य क़ानून के तहत दर्ज मामले में प्रयोग नहीं कर सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि टाडा प्रावधानों के तहत दर्ज किए गए किसी आरोपी के बयान को उस आरोपी के ख़िलाफ़ किसी अन्य मामले में प्रयोग नहीं किया जा सकता ख़ासकर तब जब विशेष अदालत ने उचित अधिकार नहीं होने के कारण टाडा के तहत मामले का संज्ञान नहीं लिया है। वर्तमान मामले में विशेष टाडा अदालत ने आरोपी को इस आधार पर बरी कर दिया था कि टाडा की धारा 20 के तहत पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी और न ही यह क़ानूनसम्मत था। राज्य ने इस आदेश के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। कोर्ट के इस मत से सहमत पीठ ने...

यौन उत्पीड़न के शिकार मानसिक रूप से बीमार पीड़ितों को समाज से ज़्यादा सुरक्षा की उम्मीद; बॉम्बे हाईकोर्ट ने धारा 377 के तहत सज़ा पाए आरोपी को राहत देने से मना किया
यौन उत्पीड़न के शिकार मानसिक रूप से बीमार पीड़ितों को समाज से ज़्यादा सुरक्षा की उम्मीद; बॉम्बे हाईकोर्ट ने धारा 377 के तहत सज़ा पाए आरोपी को राहत देने से मना किया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने आईपीसी की धारा 377 और 387 के तथत सज़ा पाए एक आरोपी को कोई भी राहत देने सेमना कर दिया। इस आरोपी पर मानसिक रूप से बीमार 32 साल के एक व्यक्ति के साथ अप्राकृतिक यौन संबंधस्थापित करने का आरोप है और उसे सात साल की जेल की सज़ा मिली है।न्यायमूर्ति मृदुला भटकर ने आरोपी रामचंद्र यादव की आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए यह फ़ैसला दिया।आरोपी रामचंद्र यादव पहले ही 4.5 साल जेल में गुज़ार चुका है। कोर्ट ने कहा कि मानसिक रूप से बीमारव्यक्ति को समाज से ज़्यादा सुरक्षा की ज़रूरत होती है और इस...

संशोधित एससी/एसटी अधिनियम कोर्ट के अधिकार को सिर्फ़ उन मामलों में ज़मानत देने तक सीमित नहीं करता जहाँ किसी भी तरह का अपराध नहीं हुआ है : कलकत्ता हाईकोर्ट
संशोधित एससी/एसटी अधिनियम कोर्ट के अधिकार को सिर्फ़ उन मामलों में ज़मानत देने तक सीमित नहीं करता जहाँ किसी भी तरह का अपराध नहीं हुआ है : कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक पत्रकार को अग्रिम ज़मानत दे दी है जिस पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 की धारा 3(1) (r) (u) के तहत मामला दर्ज किया गया है।न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बाग़ची और मनोजित मंडल ने कहा कि इस अधिनियम में धारा 18A को जोड़ने के बावजूद कोर्ट को इस बात की पड़ताल का अधिकार है कि एफआइआर में जिस तरह के आरोप लगाए गए हैं वे ठहरते हैं कि नहीं।यह एफआईआर एक बंगाली अख़बार के प्रकाशक के ख़िलाफ़ दर्ज किया गया है क्योंकि सबर समुदाय के लोगों ने उसमें प्रकाशित एक...