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सीरपीसी की धारा 456: अगर निचली अदालत ने संपत्ति को सौंपे जाने को लेकर आदेश दिया है तो 30 दिनों की समय सीमा लागू नहीं होगी : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सीरपीसी की धारा 456: अगर निचली अदालत ने संपत्ति को सौंपे जाने को लेकर आदेश दिया है तो 30 दिनों की समय सीमा लागू नहीं होगी : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर सीआरपीसी की धारा 456 के तहत कोई अर्ज़ी स्वीकार की गई है जिसमें अचल सम्पत्ति को वापस करने की माँग की गई है और अगर निचली अदालत ने इस बारे में आरोपी को क़सूरवार ठहराते हुए कोई आदेश पास किया है तो 30 दिनों की समय सीमा इस पर लागू नहीं होगी। इस मामले में, किरायेदार के ख़िलाफ़ मकान मालिक के मामले में फ़ैसला सुनाया गया और मकान मालिक को मकान का क़ब्ज़ा दिला दिया गया। उसी दिन किरायेदार उस मकान में घुसा और दुबारा उस मकान पर क़ब्ज़ा कर लिया। मकान मालिक ने दुबारा शिकायत की...

साढ़े सात साल की लड़की से बलात्कार का मामला : सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की मौत की सज़ा को बदला [निर्णय पढ़े]
साढ़े सात साल की लड़की से बलात्कार का मामला : सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की मौत की सज़ा को बदला [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने गत सप्ताह साढ़े सात साल की लड़की से बलात्कार के आरोपी एक व्यक्ति की मौत की सज़ा को बदल दिया। तीन जजों न्यायमूर्ति एके सीकरी,न्यायमूर्ति एस अब्दुल नज़ीर और न्यायमूर्ति एमआर शाह की पीठ ने अपने फ़ैसले में आरोपी को दोषी माना और कहा कि अपराध नृशंस तो है पर इतना नहीं कि इस मामले में आरोपी को मौत की सज़ा दी जा सके। निचली अदालत ने आरोपी विजय रैकवर को आईपीसी की धारा 376 (2) (f) और धारा 201 तथा POCSO अधिनियम की धारा 6 के तहत दोषी माना था। बाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी आरोपी को...

आपराधिक शिकायत को सिर्फ़ इसलिए निरस्त नहीं किया जा सकता क्योंकि शिकायत दीवानी प्रकृति का लगता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
आपराधिक शिकायत को सिर्फ़ इसलिए निरस्त नहीं किया जा सकता क्योंकि शिकायत दीवानी प्रकृति का लगता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आपराधिक शिकायतों को सिर्फ़ इसलिए नहीं निरस्त किया जा सकता कि क्योंकि यह शिकायत दीवानी प्रकृति का लगता है। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति एमआर शाह की पीठ ने कहा कि अगर शिकायत में आरोपी के ख़िलाफ़ प्रथम दृष्ट्या अपराध दिखती है तो आपराधिक प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई जाएगी। अपनी शिकायत में शिकायतकर्ता ने एक भवन निर्माता पर फ़र्जीवाड़े का आरोप लगाया और फ़र्ज़ी आधार पर दस्तावेज़ बनाकर उसके आधार पर क़रार का आरोप लगाया। मजिस्ट्रेट ने इस शिकायत की जाँच करवाई।...

हरियाणा शराब लाइसेंस नियम: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, वित्तीय आयुक्त यह निर्णय नहीं कर सकता कि राज्य में कितने लाइसेंस जारी किए जाएँगे
हरियाणा शराब लाइसेंस नियम: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, वित्तीय आयुक्त यह निर्णय नहीं कर सकता कि राज्य में कितने लाइसेंस जारी किए जाएँगे

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा शराब लाइसेंस नियम, 1970 के नियम 24(i-eeee) को यह कहते हुए ग़ैर-क़ानूनी घोषित कर दिया है कि यह पंजाब आबकारी अधिनियम, 1914 के अनुरूप नहीं है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा और न्यायमूर्ति केएम जोसफ़ की पीठ ने बहुमत से अपने फ़ैसले में यह कहा कि वित्तीय आयुक्त यह निर्णय नहीं कर सकता कि पूरे राज्य में कितने लाइसेंस जारी किए जाएँगे। धारा 6, 13(a) और 58(2)(e) के तहत यह अधिकार पूरी तरह से राज्य सरकार के पास है। न्यायमूर्ति केएम जोसफ़ ने इस...

स्वैच्छिक उकसावा का हवाला देकर हत्या के अपराध को अपवाद की श्रेणी में नहीं डाला जा सकता : सुप्रीम कोर्ट
'स्वैच्छिक उकसावा' का हवाला देकर हत्या के अपराध को अपवाद की श्रेणी में नहीं डाला जा सकता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर आरोपी के उकसावे की कार्रवाई स्वैच्छिक है तो इस पर आईपीसी की धारा 300 के तहत अपवाद 1 लागू नहीं होगा। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति संजय किशन कॉल ने हाईकोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया जिसमें एक आरोपी जिसको आईपीसी की धारा 302 के तहत दोषी पाया गया था, को बदलकर उसको धारा 304 के भाग एक के तहत दोषी माना। निचली अदालत ने हत्या के आरोपी को दोषी माना क्योंकि उसने पाया कि आरोपी ने मृतक पर अपने पिस्टल से गोली चलाई क्योंकि उसको शक था कि मृतक उसके घर गया था...

गवाह को बुलाने के लिए बार बार अर्ज़ी दिए जाने को प्रोत्साहन नहीं दिया जाना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
गवाह को बुलाने के लिए बार बार अर्ज़ी दिए जाने को प्रोत्साहन नहीं दिया जाना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सीआरपीसी की धारा 311 के तहत बार बार गवाह को बुलाए जाने के लिए अर्ज़ी देने को प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति एके सीकरी और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नज़ीर की पीठ ने Swapan Kumar Chatterjee vs. CBI मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट के एक आदेश के खिलाफ अपील पर ग़ौर करते हुए यह कहा। हाईकोर्ट ने अपने फ़ैसले में निचली अदालत के उस फ़ैसले को सही ठहराया था जिसमें अभियोजन को एक हस्तलेखन विशेषज्ञ को कोर्ट में बुलाए जाने को लेकर था। भ्रष्टाचार के इस मामले की सुनवाई 1985 से...

कर्मचारियों को वेतन निर्धारण के लिए होने वाले निर्णय प्रक्रिया से जुड़ने का कोई अधिकार नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
कर्मचारियों को वेतन निर्धारण के लिए होने वाले निर्णय प्रक्रिया से जुड़ने का कोई अधिकार नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी बैंक के कर्मचारी को यह अधिकार नहीं है कि वह वेतन निर्धारण प्रक्रिया से अपने को जोड़े। न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने कहा कि बैंक अपने अधिकारियों के लिए जो वेतन निर्धारित करता है बैंक के अधिकारी उससे बंधे होते हैं और स्थाई समिति का निर्णय बैंक के कर्मचारियों को दिए जाने वाले वेतन के बारे में लिए जाने वाले निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है। एसबीआई के एक कर्मचारी ने अपने वेतन के पुनर्निर्धारण के बारे में बैंक के निर्णय को बॉम्बे हाईकोर्ट...

सूचना देनेवाले और जाँच करने वाले के एक ही होने पर रिहाई का मामला : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, मोहनलाल मामले में आए फ़ैसले का लाभ इससे पहले के लंबित मामले पर लागू नहीं होंगे
सूचना देनेवाले और जाँच करने वाले के एक ही होने पर रिहाई का मामला : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, मोहनलाल मामले में आए फ़ैसले का लाभ इससे पहले के लंबित मामले पर लागू नहीं होंगे

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक महत्त्वपूर्ण फ़ैसले में कहा है कि मोहनलाल मामले में आए फ़ैसले के आधार पर बने क़ानून से पहले जितने भी मामले लंबित हैं उन मामलों पर कार्रवाई उसके तथ्यों के आधार पर होगा। मोहनलाल का मामला एक ही व्यक्ति के सूचना देनेवाला और जाँच अधिकारी दोनों होने से संबंधित है।मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई,न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा और न्यायमूर्ति केएम जोसफ़ की पीठ ने एनडीपीएस मामले में मिली सज़ा के ख़िलाफ़ एक अपील पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। इस मामले में मोहनलाल मामले में आए...

मेडिकल रिपोर्ट के बावजूद बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को क़ानूनन मानसिक रूप से पागल माना [निर्णय पढ़े]
मेडिकल रिपोर्ट के बावजूद बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को क़ानूनन मानसिक रूप से पागल माना [निर्णय पढ़े]

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल में एक व्यक्ति को क़ानूनी रूप से पागल बताया जबकि यरवदा मानसिक अस्पताल ने उसे पागल क़रार नहीं दिया था। यह आदेश न्यायमूर्ति एसएस शिंदे और न्यायमूर्ति आरजी अवचट की पीठ ने सुनाया। आरोपी को अक्टूबर 2013 में हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी जिसके ख़िलाफ़ उसने अपील की। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने 2012 में एक दुकानदार को पत्थरों से कुचलकर मार दिया था क्योंकि दुकानदार ने उसे मुफ़्त का पेप्सी देने से मना कर दिया था। वह उस समय शांत हुआ जब उसका भाई वहाँ...

सिर्फ़ इसलिए अग्रिम ज़मानत नहीं दिया जा सकता क्योंकि गिरफ़्तारी से आवेदक की प्रतिष्ठा धूमिल होगी : गुजरात हाईकोर्ट
सिर्फ़ इसलिए अग्रिम ज़मानत नहीं दिया जा सकता क्योंकि गिरफ़्तारी से आवेदक की प्रतिष्ठा धूमिल होगी : गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड और उनके पति जावेद आनंद को उनके सबरंग ट्रस्ट के ₹1.4 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी में दर्ज मामले में अग्रिम ज़मानत दे दी है। ज़मानत देते हुए जस्टिस जेबी परदीवाला ने कहा कि ज़मानत दिए जाने के समय ज़मानत लेने वाले की प्रतिष्ठा पर ध्यान देने की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने कहा, "समाज में आवेदक की प्रतिष्ठा और उसके प्रतिष्ठित पत्रकार होने और सामाजिक कार्यकर्ता होने का उसके राशियों के हेरफेर से संबंधित आपराधिक आरोपों से कोई लेना देना नहीं है। ...

विवादित भूमि वक़्फ़ की है कि नहीं इसका निर्णय वक़्फ़ ट्रिब्यूनल ही कर सकता है दीवानी अदालत को इस बारे में कोई अधिकार नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
विवादित भूमि वक़्फ़ की है कि नहीं इसका निर्णय वक़्फ़ ट्रिब्यूनल ही कर सकता है दीवानी अदालत को इस बारे में कोई अधिकार नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर मामले का मुद्दा यह है कि विवादित भूमि वक़्फ़ की परिसंपत्ति है कि नहीं तो फिर इसका निर्णय न्यायाधिकरण करेगा और दीवानी अदालत का इस पर कोई न्यायाधिकार नहीं होगा। न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति केएम जोसफ़ की पीठ ने पंजाब वक़्फ़ बोर्ड की दो अपीलों पर सुनवाई करते हुए यह कहा। इस अपील में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के दो अलग अलग मामलों में दिए गए फ़ैसलों को चुनौती दी गई है। पहले मामले को पंजाब वक़्फ़ बोर्ड ने दीवानी अदालत में दायर किया था जिसमें प्रतिवादियों के...

अगर पत्नी अपने पति के रिश्तेदारों के व्यवहार से ख़ुश नहीं है तो उसका अलग रहना और गुज़ारा ख़र्च माँगना जायज़ है : बॉम्बे हाईकोर्ट
अगर पत्नी अपने पति के रिश्तेदारों के व्यवहार से ख़ुश नहीं है तो उसका अलग रहना और गुज़ारा ख़र्च माँगना जायज़ है : बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर पत्नी पति के मां-बाप के व्यवहार से ख़ुश नहीं है और उनके साथ रहने में असुविधा महसूस कर रही है तो उसका अलग रहना और इस पर आने वाले ख़र्च की माँग करना जायज़ है। न्यायमूर्ति वीके जाधव ने एक पति की उस याचिका को ख़ारिज कर दिया जिसमें उसने फ़ैमिली कोर्ट के फ़ैसले को चुनौती दी थी। फ़ैमिली कोर्ट ने उसकी शादी के अधिकारों की बहाली की माँग संबंधी याचिका ख़ारिज कर दी थी और उसको अपनी पत्नी को गुज़ारा भत्ता देने का आदेश दिया था। पति के वक़ील ने हाईकोर्ट में कहा कि इस मामले...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 23 सालों से जेल में बंद हत्या के आरोपी को अवधि से पहले छोड़े जाने पर राज्य सरकार को ग़ौर करने को कहा [निर्णय पढ़े]
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 23 सालों से जेल में बंद हत्या के आरोपी को अवधि से पहले छोड़े जाने पर राज्य सरकार को ग़ौर करने को कहा [निर्णय पढ़े]

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गत माह हत्या के एक अभियुक्त को राहत दी और कहा जेल में 24 साल बिताने के बाद उसे जेल से समय से पहले रिहा करने पर ग़ौर किया जाएगा।विट्ठल पुंडलिक जेंदगे ने हाईकोर्ट में आपराधिक रिट याचिका दायर कर समय से पहले जेल से रिहा किए जाने की माँग की थी। उसकी याचिका पर न्यायमूर्ति एएस ओक और एएस गड़करी ने ग़ौर किया।अदालत ने 15 मार्च 2010 को पारित सरकार के एक प्रस्ताव का हवाला दिया जिसमें क़ैदियों को मियाद पूरी होने से पहले रिहा किए जाने के बारे में दिशानिर्देश दिए गए हैं। ऐसा सीआरपीसी, 1973...

अवमानना के मामले में कोर्ट को उस आदेश की चारदिवारी में रहना होगा जिसकी अवज्ञा हुई है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
अवमानना के मामले में कोर्ट को उस आदेश की चारदिवारी में रहना होगा जिसकी अवज्ञा हुई है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अवमानना के ख़िलाफ़ अपने न्यायाधिकार का प्रयोग करते हुए कोर्ट को उस आदेश की चारदिवारी में ही रहना है जिसकी 'अवज्ञा' हुई है। न्यायमूर्ति आर बनुमती और न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने Er. K. Arumugam vs. V. Balakrishnan में मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ अपील पर सुनवाई के दौरान यह कहा। आरोप लगाया गया है कि हाईकोर्ट ने जिस आदेश की अवज्ञा हुई उसके बाहर जाकर यह आदेश दिया। बालाकृष्णन ने अपनी याचिका में कहा है कि हाईकोर्ट ने एक आदेश में ज़िला कलक्टर को यह...

P&H High Court Dismisses Protection Plea Of Married Woman Residing With Another Man
सिर्फ़ इसलिए कि ऑपरेशन के बाद घर पहुँचकर मरीज़ की मौत हो गई, ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर को दोषी नहीं माना जा सकता : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में एक सरकारी डॉक्टर के ख़िलाफ़ मामले को यह कहते हुए ख़ारिज कर दिया कि सिर्फ़ इसलिए कि ऑपरेशन के बाद घर पहुँचने पर मरीज़ की मौत हो गई, इसे डॉक्टर की लापरवाही नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति कुलदीप सिंह ने कहा, "डॉक्टर योग्य है और वह एमबीबीएस और एमएस (जनरल सर्जरी) है। यह नहीं कहा गया है कि वह नशे में था और उसने ऐसे उपकरणों का प्रयोग किया जिनसे सर्जरी नहीं की जा सकती है। उसने कई मामलों में सर्जरी किया है… …आईपीसी की धारा 304A, के तहत यह साबित करना ज़रूरी है...

असामान्य बीमारियों के बारे में राष्ट्रीय नीति का कोई अता-पता नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस भेजा
असामान्य बीमारियों के बारे में राष्ट्रीय नीति का कोई अता-पता नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस भेजा

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस भेजकर असामान्य बीमारी के इलाज की राष्ट्रीय नीति, 2017 (National Policy for Treatment of Rare Diseases, 2017) के तहत इस तरह की बीमारियों से ग्रस्त लोगों को वित्तीय मदद के लिए समिति गठित किए जाने और उनके लिए अस्पतालों की पहचान के मुद्दे पर उनका रूख क्या है, यह पूछा है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पीठ ने 'ऑर्गनायज़ेशन ऑफ़ रेयर डिजीज इंडिया (ORDI) नामक एनजीओ की जनहित याचिका पर यह नोटिस...

यौन व्यापार से छुड़ाए गए महिलाओं को किसी मध्यवर्ती क़ैद में तीन सप्ताह से ज़्यादा समय तक नहीं रखा जा सकता : बॉम्बे हाईकोर्ट
यौन व्यापार से छुड़ाए गए महिलाओं को किसी मध्यवर्ती क़ैद में तीन सप्ताह से ज़्यादा समय तक नहीं रखा जा सकता : बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में उन दो महिलाओं को बरी कर दिया जिन्हें कथित रूप से वेश्यावृत्ति के धंधे से मुक्त कराया गया था। कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट द्वारा 21 के दिनों के भीतर इनके पुनर्वास के बारे में कोई आदेश पास नहीं कर पाने के कारण इन्हें तीन सप्ताह से ज़्यादा समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता है। न्यायमूर्ति मृदुला भाटकर ने इमॉरल ट्रैफ़िक (निवारण) अधिनियम (PITA), 1956 की धारा 17(3) के प्रावधान के तहत यह आदेश दिया। इन महिलाओं ने अदालत में याचिका दायर कर उन्हें नवजीवन महिला संस्था...

DJS-2018: दिल्ली हाईकोर्ट ने संशोधित परीक्षा परिणाम जारी किया, अब 111 और उम्मीदवार दे सकेंगे मुख्य परीक्षा
DJS-2018: दिल्ली हाईकोर्ट ने संशोधित परीक्षा परिणाम जारी किया, अब 111 और उम्मीदवार दे सकेंगे मुख्य परीक्षा

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली न्यायिक सेवा की प्रारंभिक परीक्षा का संशोधित परिणाम जारी कर दिया है। 30 जनवरी को हाईकोर्ट के फ़ैसले के बाद ऐसा किया गया है। फ़ैसले में कहा गया था कि दो प्रश्नों को हटा दिया जाए और एक प्रश्न के दो सम्भावित उत्तर कर दिए जाएँ। इससे पहले 17 जनवरी को इसका परीक्षा परिणाम जारी किया गया था जिसमें 564 उम्मीदवारों को सफल घोषित किया गया था। अब जब संशोधित परीक्षा परिणाम जारी किया गया है, अब इस सफल उम्मीदवारों की सूची में 111 लोग और जुड़ गए हैं। इसकी मुख्य परीक्षा 9 और 10 फ़रवरी...