मुख्य सुर्खियां
किसी कीट द्वारा प्राकृतिक तौर पर काटने से हुई बीमारी नहीं आती है 'एक्सीडेंट' इंश्योरेंस के तहत-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
-मलेरिया से हुई मौत नहीं है कोई एक्सीडेंट-कोर्ट -बीमाकृत को जो पैसा दे दिया गया है,वह वापिस न ले बीमा कंपनीइंश्योरेंस पाॅलिसी के तहत एक्सीडेंट से हुई मौत शामिल है। इसमें वह घटना शामिल है,जिसका अंदाजा मानवीय जीवन में नहीं है कि वह कब और कैसे हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब एक बीमारी किसी कीट के काटने या वायरस के कारण आई है तो यह एक्सीडेंट की परिभाषा में शामिल नहीं है। परंतु इस मामले के तथ्यों के आधार पर कष्टदायी स्थिति को एक्सीडेंट माना जा सकता है,अगर ऐसा अनपेक्षित व आकस्मिक स्थिति...
राजनीतिक प्रतिद्वंदी है,महज इस आधार पर नहीं दिया जा सकता है दुर्भावपूर्ण होने का तर्क-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ इस आरोप पर राज्य द्वारा लिए गए किसी प्रशासनिक निर्णय में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है क्योंकि वह राजनीतिक प्रतिद्वंदता के चलते दुर्भावपूर्ण भावना से लिया गया है। वर्ष 1980 में तमिलनाडू राज्य ने एग्रीकल्चर होर्टिकल्चर सोसायटी को कुछ जमीन अलाॅट की थी। वर्ष 1989 में राज्य ने इस जमीन को यह कहते हुए वापिस ले लिया कि इस पर स्पोटर्स की सुविधाएं विकसित की जाएगी और ऐसा करते समय होर्टिकल्चर के विकास व पर्यावरण और रिसर्च पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। राज्य के इस आदेश...
एनआई एक्ट 138 के दायर शिकायत का मामला-एग्रीमेंट टू सेल के बदले दिया गया चेक अगर होता है बाउंस तो एनआई एक्ट के दायर शिकायत है सुनवाई योग्य-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
हालांकि यह सत्यापित है कि कुछ बेचने के लिए किए गए अनुबंध के तहत किसी अचल संपत्ति में कोई हित नहीं बनता है,न ही इससे दोनों पक्षों के बीच कोई कानूनी तौर पर लागू किए जाने वाला अनुबंध बनता है। परंतु सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एनआई एक्ट के सेक्शन 138 के तहत दायर वह शिकायत सुनवाई योग्य है,जो एग्रीमेंट टू सेल के बदले दिए गए चेक के बाउंस होने के बाद दायर की गई है। रिपुदमन सिंह बनाम बालकृष्णा मामले में एक दंपत्ति ने आरोपी के साथ कुछ बेचने का एग्रीमेंट किया। आरोपी ने उनको कुछ नकदी दे दी और बाकी पैसे के...
"निर्णीत मामले" का सिद्धांत रिट याचिका पर भी लागू होता है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने फिर कहा है कि "निर्णीत मामले" का सिद्धांत रिट याचिका पर भी लागू होता है। पी बंदोपाध्याय बनाम भारत संघ मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। भारत सरकार की कंपनी ओवरसीज़ कम्यूनिकेशन सर्विसेज़ (ओसीएस) के एक पूर्व कर्मचारी ने यह रिट याचिका दायर की थी जिस पर कोर्ट ने फ़ैसला दिया। हाईकोर्ट ने उसकी याचिका यह कहते हुए ख़ारिज कर दी कि उन्हें भारत सरकार की सेवा के तहत पेंशन पाने का हक़ नहीं है क्योंकि वीएसएनएल में उनको समाहित किए जाने के बाद से...
अपनी पत्नी के साथ अप्राकृतिक सहवास के आरोपी पति का डीएनए टेस्ट कराने के आदेश के ख़िलाफ़ याचिका को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ख़ारिज किया [आर्डर पढ़े]
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जाँच अधिकारी के उस आदेश को सही ठहराया है जिसमें एक आरोपी व्यक्ति के डीएनए टेस्ट का आदेश दिया गया है। इस व्यक्ति की पत्नी ने उस पर उसके साथ अप्राकृतिक सहवास का आरोप लगाया था। इस व्यक्ति ने अदालत में अग्रिम ज़मानत के लिए आवेदन दिया जिसे हाईकोर्ट ने ख़ारिज कर दिया। इसके बाद यह व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट पहुँचा जहाँ से वह गिरफ़्तारी नहीं होने का आदेश प्राप्त करने में सफल रहा पर इसके साथ शर्त यह थी कि वह मामले की जाँच में सहयोग करेगा। इस मामले की जाँच के तहत उसे जाँच अधिकारी...
सुप्रीम कोर्ट ने सरवन भवन के मालिक की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी, सात जुलाई तक सरेंडर करने को कहा [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सरवन भवन के भारत और विदेशों में होटलों की श्रृंखला के मालिक पी. राजगोपाल की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा। राजगोपाल को अपने कर्मचारी संतकुमार की हत्या करने का दोषी ठहराया गया है क्योंकि वह संतकुमार की पत्नी जीवज्योति से शादी करना चाहता था। इस मामले में 7 अन्य की भी सजा की पुष्टि की गई है।जस्टिस एन. वी. रमना, जस्टिस एम. एम. शांतनागौदर और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की 3 जजों की बेंच ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है जिसने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को...
ड्यूटी के दौरान नशे की हालत में रहना गंभीर कदाचार : सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस सिपाही की बर्खास्तगी को बरकरार रखा [निर्णय पढ़े]
"कदाचार के आरोप की गंभीरता और इस तथ्य के संबंध में कि प्रतिवादी पुलिस सेवा का सदस्य था, हमें उच्च न्यायालय द्वारा बर्खास्तगी के आदेश के साथ हस्तक्षेप करने का कोई औचित्य नहीं लगता।”
सेक्शन 138 एनआई एक्ट-अगर शिकायतकर्ता ने आईटी रिटर्न दायर नहीं की है तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसके पास नहीं है आय का कोई स्रोत्र-एमपी हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने चेक बाउंस के एक मामले में कहा है कि अगर शिकायतकर्ता ने इनकम टैक्स रिटर्न दायर नहीं की है,इसका मतलब यह नहीं है कि उसके पास आय का कोई स्रोत्र नहीं है। कोर्ट नेगोटिएबल इंस्टरूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत चेक बाउंस के एक मामले की सुनवाई कर रही थी। शिकायतकर्ता के अनुसार आरोपी ने उससे दस लाख रुपए का लोन लिया था और साथ ही कहा था कि वह इस राशि को छह महीने के अंदर लौटा देगी। इसके बदले आरोपी ने उसको एक चेक दिया था,जो बाउंस हो गया। आरोपी महिला को निचली अदालत ने दोषी करार दिया,बाद...
आरोपी अगर शराब पीकर अदालत में आता है तो इस वजह से उसकी ज़मानत रद्द नहीं की जा सकती : हिमाचल हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने उस सत्र अदालत की खिंचाई की है जिसने एक आरोपी की ज़मानत इसलिए ख़ारिज कर दी क्योंकि उसके मुँह से शराब की गंध आ रही थी। न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान ने इस मामले में जज को कारण बताओ नोटिस जारी किया और कहा कि आरोपी शराब पीकर अदालत आया था यह अपने आप में उसकी ज़मानत को ख़ारिज करने का आधार नहीं हो सकता। सत्र अदालत ने अपने आदेश में ज़मानत ख़ारिज करते हुए कहा था :"इस समय, आरोपी के मुँह से शराब की बदबू आ रही है। आरोपी का सत्र अदालत के समक्ष इस स्थिति में पेश होना ठीक नहीं...
ईवीएम से छेड़छाड़ की संभावना है निराधार व अनुचित-गुजरात हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े ]
मंगलवार को गुजरात हाईकोर्ट ने एक वकील की उस याचिका को खारिज कर दिया है,जिसमें ईवीएम के ठीक से काम न करने व उससे छेड़छाड़ होने की आशंका जताई थी। वकील खेमचंद राजाराम कोसती ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रूल 56(डी)(2) को चुनौती दी थी। इस रूल के तहत रिटर्निंग आफिसर के पास यह अधिकार होता है कि वह उस अजी को खारिज कर दे जिसमें प्रिंटर के ड्राॅप बाक्स में लगी पेपर स्लिप की गणना करने की मांग की गई हो। साथ ही मांग की थी कि ईसीआई को निर्देश दिया जाए कि प्रिंटिड पेपर स्लिप की जरूर गणना की जाए। ...
ओबीसी कोटा बढ़ाने के राज्य सरकार के ओर्डिनेंस पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने लगाई रोक [आर्डर पढ़े]
राज्य सरकार द्वारा ओबीसी कोटा को बढ़ाने के लिए लाए गए एक ओर्डिनेंस पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने वास्तव में रोक लगा दी है। आशिता दूबे की तरफ से दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय द्विवेदी व जस्टिस रवि शंकर झाॅ की बेंच ने अपने अंतरिम आदेश में राज्य सरकार से कहा है कि कालेजों में दाखिले के लिए समय ओबीसी कैटेगरी के लिए 14 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण न दिया जाए। गवर्नर आनंदीबेन पटेल की तरफ से जारी ओर्डिनेंस में सरकारी नौकरी व यूनिवर्सिटी में दाखिलों के लिए ओबीसी कैटगेरी के तहत दिए गए 14 प्रतिशत...
सेक्शन 26 एवीडेंस एक्ट-कार्यकारी मैजिस्ट्रेट के समक्ष दिया गया बयान है स्वीकार योग्य-पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने माना है कि एवीडेंस एक्ट के सेक्शन 26 के तहत प्रयोग किए एक्सप्रेशन मैजिस्ट्रेट शब्द में कार्यकारी मैजिस्ट्रेट भी शामिल है। यह मानते हुए जस्टिस ए.बी चैधरी व जस्टिस सुरेंद्र गुप्ता की खंडपीठ ने गुवहाटी हाईकोर्ट के एक फुल बेंच के फैसले से असहमति जताई है। गुवहाटी हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि एक्सप्रेशन का मतलब सिर्फ ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट से है। एवीडेंस एक्ट के सेक्शन 26 के तहत अगर किसी व्यक्ति ने पुलिस हिरासत के दौरान पुलिस के समक्ष कोई इकबालिया बयान दिया है...
पाॅवर डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी नहीं मांग सकता है दो साल से ज्यादा अवधि का बिजली बिल,बशर्ते दो साल के बिल में एरियर के तौर पर न दिखाई गई हो वह राशि [निर्णय पढ़े]
बाॅम्बे हाईकोर्ट की फुल बेंच ने अपने एक फैसले में कहा है कि पाॅवर डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी दो साल से ज्यादा की अवधि में प्रयोग की गई बिजली का बिल नहीं मांग सकता है,बशर्ते वह राशि दो साल की अवधि के दौरान बिल में एरियर के तौर पर दिखाई गई हो। जस्टिस एस.सी.धर्माधिकारी,जस्टिस भारती डांगरे व जस्टिस ए.एम बदर की बेंच ने यह फैसला दिया है। यह बेंच हाईकोर्ट के एक सिंगल जज द्वारा बड़ी बेंच को रेफर किए गए मामले की सुनवाई कर रही थी। सिंगल जज महाराष्ट्रा स्टेट इलैक्ट्रिसिटी डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी लिमिटेड की तरफ...
जिरह बच्चों का खेल नहीं है, क़ानूनी मदद का अर्थ युवा वकीलों को मंच उपलब्ध कराना नहीं है : गुजरात हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
'क़ानूनी मदद बकवास है', यह कहना था गुजरात हाईकोर्ट का जिसने एक महिला को दोहरे हत्याकांड के लिए मिली मौत की सज़ा को निरस्त करते हुए यह बात कही। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इसके बावजूद कि एफआईआर में इस बात का ज़िक्र किया गया था, आरोपी महिला की मानसिक स्थिति की जाँच नहीं की गई। न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला और न्यायमूर्ति एसी राव की खंडपीठ ने क़ानूनी सहायता मुहैया कराने की बात की गंभीर आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि 19 साल की एक बेसहारा लड़की ग़रीबी के कारण एक अच्छा अनुभवी वक़ील नहीं कर पाई और उसे...
धर्म ग्रंथों का उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा, हमें अपने मां-बाप का आदर, उनकी सेवा और पूजा करनी चाहिए [आर्डर पढ़े]
मां-बाप और वरिष्ठ नागरिक गुज़ारा और कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत गठित न्यायिक अधिकरण ने उसे आदेश दिया था कि वह अपने सौतेली माँ को हर महीने ₹10 हज़ार देगा। इस राशि को बहुत ही भारी बताते हुए पीड़ित व्यक्ति ने हाईकोर्ट में अपील की और कहा कि वह इतनी बड़ी राशि नहीं दे सकता। कोर्ट ने ग़ौर किया कि यह व्यक्ति एक सरकारी शिक्षक के रूप में काम कर रहा है और और इतनी पर्याप्त राशि कमा रहा है कि यह अपने मां-बाप का भरण पोषण ठीक तरीक़े से कर सकता है। कोर्ट ने कहा कि अधिनियम में 'पेरेंट्स' को परिभाषित किया गया...
क्या एक वक़ील अनुचित बात का समर्थन करने के लिए बाध्य है? पटना हाईकोर्ट ने एक आलेख को पढ़ने का सुझाव दिया [आर्डर पढ़े]
क्या कोई वक़ील किसी अनुचित बात का समर्थन करने के लिए बाध्य है? इस बारे में पटना हाईकोर्ट ने एएस कटलर का लिखा एक आलेख पढ़ने का सुझाव दिया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अमरेश्वर प्रताप साही और न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद की पीठ ने सभी के हित में उपरोक्त आलेख को दुबारा पेश किया और इसके माध्यम से वकीलों को मामले के संचालन के दौरान उनके कर्तव्यों और नैतिक आचरणों की याद दिलाई। कोर्ट ने एक पुनरीक्षण याचिका पर ग़ौर कर रहा था जिसमें उसने पाया कि एक नौकरी के लिए दिए गए आवेदन में जो दस्तावेज़ पेश...

![किसी कीट द्वारा प्राकृतिक तौर पर काटने से हुई बीमारी नहीं आती है एक्सीडेंट इंश्योरेंस के तहत-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें] किसी कीट द्वारा प्राकृतिक तौर पर काटने से हुई बीमारी नहीं आती है एक्सीडेंट इंश्योरेंस के तहत-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/03/31/500x300_359544-358918-justice-dy-chandrachud-and-justice-hemant-gupta.jpg)
![राजनीतिक प्रतिद्वंदी है,महज इस आधार पर नहीं दिया जा सकता है दुर्भावपूर्ण होने का तर्क-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] राजनीतिक प्रतिद्वंदी है,महज इस आधार पर नहीं दिया जा सकता है दुर्भावपूर्ण होने का तर्क-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//355938-supreme-court-of-india-min.jpg)
![इंडियन फाॅरेस्ट एक्ट के तहत अधिकृत अधिकारी द्वारा जब्त किए गए वाहन को सीआरपीसी की धारा 451 के तहत नहीं रिलीज कर सकता है मैजिस्ट्रेट [निर्णय पढ़े] इंडियन फाॅरेस्ट एक्ट के तहत अधिकृत अधिकारी द्वारा जब्त किए गए वाहन को सीआरपीसी की धारा 451 के तहत नहीं रिलीज कर सकता है मैजिस्ट्रेट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/02/24/500x300_358572-justice-dy-chnadrachud-and-justice-hemant-gupta.jpg)
![एनआई एक्ट 138 के दायर शिकायत का मामला-एग्रीमेंट टू सेल के बदले दिया गया चेक अगर होता है बाउंस तो एनआई एक्ट के दायर शिकायत है सुनवाई योग्य-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] एनआई एक्ट 138 के दायर शिकायत का मामला-एग्रीमेंट टू सेल के बदले दिया गया चेक अगर होता है बाउंस तो एनआई एक्ट के दायर शिकायत है सुनवाई योग्य-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//356956-cheque-ll-size-min.jpg)
![निर्णीत मामले का सिद्धांत रिट याचिका पर भी लागू होता है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा [निर्णय पढ़े] निर्णीत मामले का सिद्धांत रिट याचिका पर भी लागू होता है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/03/18/500x300_359206-358917-justice-uu-lalit-and-justice-indu-malhotra.jpg)
![अपनी पत्नी के साथ अप्राकृतिक सहवास के आरोपी पति का डीएनए टेस्ट कराने के आदेश के ख़िलाफ़ याचिका को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ख़ारिज किया [आर्डर पढ़े] अपनी पत्नी के साथ अप्राकृतिक सहवास के आरोपी पति का डीएनए टेस्ट कराने के आदेश के ख़िलाफ़ याचिका को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ख़ारिज किया [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/03/30/500x300_359531-dnatest.jpg)
![सुप्रीम कोर्ट ने सरवन भवन के मालिक की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी, सात जुलाई तक सरेंडर करने को कहा [निर्णय पढ़े] सुप्रीम कोर्ट ने सरवन भवन के मालिक की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी, सात जुलाई तक सरेंडर करने को कहा [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/03/30/500x300_359515-359513-saravana-bhavan.jpg)
![किसी खरीदार को कब्जे के लिए अनिश्चितकाल तक इंतजार की जरूरत नहीं : सुप्रीम कोर्ट ने डवलपर को रिफंड के आदेश दिए [आर्डर पढ़े] किसी खरीदार को कब्जे के लिए अनिश्चितकाल तक इंतजार की जरूरत नहीं : सुप्रीम कोर्ट ने डवलपर को रिफंड के आदेश दिए [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/03/29/500x300_359501-realestate.jpg)
![ड्यूटी के दौरान नशे की हालत में रहना गंभीर कदाचार : सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस सिपाही की बर्खास्तगी को बरकरार रखा [निर्णय पढ़े] ड्यूटी के दौरान नशे की हालत में रहना गंभीर कदाचार : सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस सिपाही की बर्खास्तगी को बरकरार रखा [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/03/12/500x300_359062-358834-supreme-court-of-india-2.jpg)
![पुलिस फोर्स में खाली पदों को भरने का मामला-सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट से किया आग्रह स्वत संज्ञान ले मामले में [आर्डर पढ़े] पुलिस फोर्स में खाली पदों को भरने का मामला-सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट से किया आग्रह स्वत संज्ञान ले मामले में [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/03/11/500x300_359009-ranjan-gogoi-justices-deepak-gupta-and-sanjiv-khanna.jpg)
![सेक्शन 138 एनआई एक्ट-अगर शिकायतकर्ता ने आईटी रिटर्न दायर नहीं की है तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसके पास नहीं है आय का कोई स्रोत्र-एमपी हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े] सेक्शन 138 एनआई एक्ट-अगर शिकायतकर्ता ने आईटी रिटर्न दायर नहीं की है तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसके पास नहीं है आय का कोई स्रोत्र-एमपी हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//356387-cheque-bounce-cases.jpg)
![शिकायतकर्ता आदतन दूसरे लोगों को फंसा रही थी, सुप्रीम कोर्ट ने रेप के दोषी को बरी किया [निर्णय पढ़े] शिकायतकर्ता आदतन दूसरे लोगों को फंसा रही थी, सुप्रीम कोर्ट ने रेप के दोषी को बरी किया [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/03/23/500x300_359339-justice-abhay-manohar-sapre-justice-dinesh-maheswari.jpg)
![आरोपी अगर शराब पीकर अदालत में आता है तो इस वजह से उसकी ज़मानत रद्द नहीं की जा सकती : हिमाचल हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े] आरोपी अगर शराब पीकर अदालत में आता है तो इस वजह से उसकी ज़मानत रद्द नहीं की जा सकती : हिमाचल हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//356779-himachal-pradesh-high-court-ll-size-min-1.jpg)
![ईवीएम से छेड़छाड़ की संभावना है निराधार व अनुचित-गुजरात हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े ] ईवीएम से छेड़छाड़ की संभावना है निराधार व अनुचित-गुजरात हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े ]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/03/27/500x300_359412-evm.jpg)
![ओबीसी कोटा बढ़ाने के राज्य सरकार के ओर्डिनेंस पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने लगाई रोक [आर्डर पढ़े] ओबीसी कोटा बढ़ाने के राज्य सरकार के ओर्डिनेंस पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने लगाई रोक [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/03/27/500x300_359406-358096-madhya-pradesh-hc.jpg)
![सेक्शन 26 एवीडेंस एक्ट-कार्यकारी मैजिस्ट्रेट के समक्ष दिया गया बयान है स्वीकार योग्य-पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े] सेक्शन 26 एवीडेंस एक्ट-कार्यकारी मैजिस्ट्रेट के समक्ष दिया गया बयान है स्वीकार योग्य-पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//356885-punjab-and-haryana-high-court.jpg)
![पाॅवर डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी नहीं मांग सकता है दो साल से ज्यादा अवधि का बिजली बिल,बशर्ते दो साल के बिल में एरियर के तौर पर न दिखाई गई हो वह राशि [निर्णय पढ़े] पाॅवर डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी नहीं मांग सकता है दो साल से ज्यादा अवधि का बिजली बिल,बशर्ते दो साल के बिल में एरियर के तौर पर न दिखाई गई हो वह राशि [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/03/24/500x300_359352-359309-advocates.jpg)
![जिरह बच्चों का खेल नहीं है, क़ानूनी मदद का अर्थ युवा वकीलों को मंच उपलब्ध कराना नहीं है : गुजरात हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े] जिरह बच्चों का खेल नहीं है, क़ानूनी मदद का अर्थ युवा वकीलों को मंच उपलब्ध कराना नहीं है : गुजरात हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//356036-gujarat-high-court-min.jpg)
![धर्म ग्रंथों का उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा, हमें अपने मां-बाप का आदर, उनकी सेवा और पूजा करनी चाहिए [आर्डर पढ़े] धर्म ग्रंथों का उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा, हमें अपने मां-बाप का आदर, उनकी सेवा और पूजा करनी चाहिए [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/03/23/500x300_359344-chhattisgarhhc.jpg)
![क्या एक वक़ील अनुचित बात का समर्थन करने के लिए बाध्य है? पटना हाईकोर्ट ने एक आलेख को पढ़ने का सुझाव दिया [आर्डर पढ़े] क्या एक वक़ील अनुचित बात का समर्थन करने के लिए बाध्य है? पटना हाईकोर्ट ने एक आलेख को पढ़ने का सुझाव दिया [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/03/23/500x300_359341-sc-lawyers.jpg)