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एससी-एसटी अधिनियम में 2018 में हुए संशोधन के बाद भी अग्रिम ज़मानत याचिका पर ग़ौर करने पर कोई रोक नहीं : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
एससी-एसटी अधिनियम में 2018 में हुए संशोधन के बाद भी अग्रिम ज़मानत याचिका पर ग़ौर करने पर कोई रोक नहीं : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि सत्र अदालत और हाईकोर्ट एससी-एसटी अधिनियम में 2018 में संशोधन के बाद भी इस अधिनियम के तहत दायर मुक़दमों में अग्रिम ज़मानत के आवेदन पर ग़ौर कर सकता है। न्यायमूर्ति टीवी नलवाड़े और न्यायमूर्ति मंगेश एस पाटिल की पीठ ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि एफआईआर एससी-एसटी अधिनियम के तहत दायर किया गया है, अधिनियम के तहत अपराध को दंडनीय अपराध के लिए पंजीकृत नहीं किया जा सकता है और इस अधिनयम के तहत अपराध को तभी पंजीकृत किया जा सकता है जब आरोप में इस तरह की बातें हों जिसके आधार पर इस...

उपयुक्त मामलों में अंतरिम निषेधाज्ञा की अनुमति देने पर कोई मनाही नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
उपयुक्त मामलों में अंतरिम निषेधाज्ञा की अनुमति देने पर कोई मनाही नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उपयुक्त मामलों में अंतरिम निषेधाज्ञा की अनुमति की मनाही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने कहा कि अंतरिम निषेधाज्ञा माँगने पर नहीं दी जा सकती है पर अगर पक्षकारों के अधिकारों और उनके हितों की सुरक्षा के लिए ऐसा करने केमज़बूत कारण मौजूद हैं। वर्तमान मामले में अपीलकर्ता को हमदर्द (वक़्फ़) का पासवर्ड और प्रबंधन सौंपने के लिए निषेधाज्ञा जारी करने की अपील की गई है। कोर्ट के समक्ष दलील यह दी गई कि संहिता के आदेश XXXIX के नियम...

अगर मां का जीवन है खतरे में,रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर कर सकता है गर्भपात-बाॅम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
अगर मां का जीवन है खतरे में,रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर कर सकता है गर्भपात-बाॅम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]

बाॅम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को तीन महिलाओं द्वारा दायर तीन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए लैंडमार्क निर्देश जारी किए है।महिलाओं ने अपनी प्रेगनंसी को मेडिकल तौर पर टर्मिनेट करने की अनुमति मांगी थी क्योंकि उनकी प्रेगनंसी बीस सप्ताह से ज्यादा की हो गई थी। जस्टिस ए.एस ओका व जस्टिस एम.एस सोनक की खंडपीठ ने माना कि अगर एक रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर को यह लगता है कि गर्भवती महिला की जान बचाने के लिए गर्भपात किया जाना जरूरी है तो ऐसी स्थिति में वह बिना हाईकोर्ट की अनुमति के भी बीस सप्ताह के ज्यादा की...

भारतीय महिलाएँ किसी को बलात्कार के मामले में झूठा फँसाने की बजाय चुपचाप पीड़ा सह लेंगी : त्रिपुरा हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
भारतीय महिलाएँ किसी को बलात्कार के मामले में झूठा फँसाने की बजाय चुपचाप पीड़ा सह लेंगी : त्रिपुरा हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]

भारतीय संस्कृति जिस तरह की है उसको देखते हुए, यौन हिंसा की शिकार महिला चुपचाप अपनी पीड़ा सह लेगी पर किसी पर झूठा इल्ज़ाम नहीं लगाएगी, यह कहना है त्रिपुरा हाईकोर्ट का। हाईकोर्ट ने एक नाबालिग़ लड़की का यौन उत्पीड़न करने के लिए एक व्यक्ति को सज़ा सुनाई। प्रामाणिक डे को पोकसो अदालत ने पोकसो अधिनियम की धारा 4 और आईपीसी की धारा 363 के तहत दोषी माना। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल ने कहा कि पीड़ित लड़की का बयान पूरी तरह स्पष्ट है और जो घटना हुई उससे उसका बयान पूरी तरह मेल खाता...

जगाने पर माँ की हत्या करने वाले व्यक्ति की मौत की सज़ा को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बदला [निर्णय पढ़े]
जगाने पर माँ की हत्या करने वाले व्यक्ति की मौत की सज़ा को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बदला [निर्णय पढ़े]

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसे व्यक्ति की मौत की सज़ा को बदल दिया जिसने अपनी माँ की हत्या इसलिए कर दी थी क्योंकि उसने उसको जगा दिया था। अभियोजन का मामला यह है कि झुम्मक बाई ने अपने बेटे अशोक को यह कहते हुए उठाया कि उसे इस समय तक नहीं सोना चाहिए था और यह कह कर वह आँगन में चली गई। अशोक, उसका बेटा ,उठा और उसने अपनी माँ को लाठी से मारना शुरू कर दिया। अपने रिश्तेदारों की मौजूदगी में उसने अपनी माँ की हत्या कर दी। निचली अदालत के फ़ैसले को सही ठहराते हुए न्यायमूर्ति अखिल कुमार...

अर्बिट्रेशन एग्रीमेंट में तय की गई प्रक्रिया को देखने के बाद ही कोर्ट नियुक्त कर सकती है स्वतंत्र अर्बिट्रेटर-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
अर्बिट्रेशन एग्रीमेंट में तय की गई प्रक्रिया को देखने के बाद ही कोर्ट नियुक्त कर सकती है स्वतंत्र अर्बिट्रेटर-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हाईकोर्ट जब कभी भी अर्बिट्रेशन एंड कंसीलेशन एक्ट के सेक्शन 11(6) के तहत दायर किसी ऐसी अर्जी पर सुनवाई करे जिसमें स्वतंत्र अर्बिट्रेटर नियुक्त करने की मांग की गई तो सबसे पहले पार्टियों द्वारा आपसी सहमति से बनाए अनुबंध में अर्बिट्रेटर नियुक्त करने के लिए तय किए गए नियम व प्रक्रिया को देखे। मामले में दायर अपील(यूनियन आॅफ इंडिया बनाम परमार कंस्ट्रक्शन कंपनी)में एक मुद्दा यह भी था कि क्या अर्बिट्रेशन एंड कंसीलेशन एक्ट 1996(एक्ट 2015 के संशोधन से पहले) के सेक्शन 11(6) के...

कंप्टीशन आॅफ सीरियस फ्राॅड इंवेस्टिगेशन के लिए कंपनी अधिनियम नहीं निर्धारित करता है कोई समयसीमा-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
कंप्टीशन आॅफ सीरियस फ्राॅड इंवेस्टिगेशन के लिए कंपनी अधिनियम नहीं निर्धारित करता है कोई समयसीमा-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कंपनी अधिनियम 2013 के सेक्शन 212 के सब-सेक्शन(3) के तहत कोई रिपार्ट दायर करने के लिए तय की गई समयसीमा निर्देशिका के तौर पर है,न कि अनिवार्य तौर पर।जस्टिस ए.एम सापरे व जस्टिस यू.यू ललित की खंडपीठ इस मामले में दायर एक अपील पर सुनवाई कर रही थी। इस अपील को सीरियल फ्राॅड इंवेस्टिगेशन आॅफिस ने दिल्ली हाईकोर्ट के एक आदेश के खिलाफ दायर किया था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि जब जांच का समय खत्म हो जाए,उसके बाद गिरफतार करना अवैध है। सेक्शन 212(3) के अनुसार जब किसी कंपनी...

दिल्ली हाईकोर्ट ने पाठ्यपुस्तकों के बारे में SCERT/NCERT/CBSE के सरकुलर को सही ठहराया [निर्णय पढ़े]
दिल्ली हाईकोर्ट ने पाठ्यपुस्तकों के बारे में SCERT/NCERT/CBSE के सरकुलर को सही ठहराया [निर्णय पढ़े]

दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के शिक्षा निदेशक के उस सरकुलर को सही ठहराया जिसमें उन्होंने सभी स्कूलों से SCERT, NCERT और CBSE द्वारा सुझाए गए पुस्तकों के प्रयोग का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति सी हरि शंकर ने कहा कि छात्रों को जो पढ़ाया जाता है उसमें समानता का होना आवश्यक है। कौन सी पुस्तकें पढ़ाई जाती हैं इस बारे में अगर स्कूलों को पूरी छूट दे दी जाए तो एक ही क्लास, एक ही बोर्ड और एक ही विषय पढ़ने वाले और एक हाई तरह की परीक्षा देने वाले छात्रों में शिक्षा और ज्ञान के स्तर में...

अगर संदेह का लाभ देकर किया गया हो बरी,तो इस आधार पर नहीं कह सकते है कि कर्मचारी या उम्मीदवार का आपराधिक रिकार्ड है क्लीयर-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
अगर संदेह का लाभ देकर किया गया हो बरी,तो इस आधार पर नहीं कह सकते है कि कर्मचारी या उम्मीदवार का आपराधिक रिकार्ड है क्लीयर-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

''इस आपराधिक मामले को क्लीयर या पूरी तरह बरी का केस नहीं कहा जा सकता है क्योंकि आरोपी को संदेह का लाभ देकर बरी किया गया था,न कि उसके खिलाफ दायर केस को झूठा पाया गया था।'' सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी कर्मचारी या उम्मीदवार को आपराधिक मामले में संदेह का लाभ देकर बरी किया गया है तो यह नहीं कहा जा सकता है कि उसका आपराधिक रिकार्ड क्लीयर है। क्योंकि उसे संदेह का लाभ देकर बरी किया गया है,न कि उसके खिलाफ दर्ज केस को झूठा पाया गया है। स्क्रीनिंग कमेटी ने बंटी नामक युवक को मध्यप्रदेश पुलिस में...

हमें जाति व्यवस्था को त्याग देना चाहिए : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पुलिस से एफआईआर, मेमो आदि में जाति का उल्लेख नहीं करने को कहा [निर्णय पढ़े]
हमें जाति व्यवस्था को त्याग देना चाहिए : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पुलिस से एफआईआर, मेमो आदि में जाति का उल्लेख नहीं करने को कहा [निर्णय पढ़े]

आपराधिक प्रक्रिया में जाति का उल्लेख करने के औपनिवेशिक परिपाटी पर विराम लागाते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि जाति व्यवस्था बेतुकी है और यह संविधान के ख़िलाफ़ भी है। न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति कुलदीप सिंह की खंडपीठ ने पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश को निर्देश दिया है कि वे सभी जाँच अधिकारियों को निर्देश जारी करें कि वे सीआरपीसी की प्रक्रिया और पंजाब पुलिस नियमों के तहत आरोपियों, पीड़ितों या गवाहियों की जाति का उल्लेख नहीं करें।कोर्ट ने यह निर्देश उस समय दिया जब हत्या...

जिस अपराध में हो उम्रकैद तक की सज़ा ,उस अपराध के आरोपी को नहीं दिया जा सकता है नेकचलनी या प्रोबेशन का लाभ-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
जिस अपराध में हो उम्रकैद तक की सज़ा ,उस अपराध के आरोपी को नहीं दिया जा सकता है नेकचलनी या प्रोबेशन का लाभ-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नेकचलनी या प्रोबेशन का लाभ उस आरोपी को नहीं दिया जा सकता है,जो ऐसे अपराध में दोषी पाया गया हो,जिसमें उम्रकैद तक की सजा हो। जस्टिस एल.नागेश्वर राॅव व जस्टिस एम.आर शाह की खंडपीठ इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर एक अपील पर सुनवाई कर रही थी। इस अपील में प्रोबेशन आॅफ आफेंडर एक्ट के सेक्शन 4 का लाभ देने की मांग करते हुए कहा गया था कि मामले में घटना लगभग साढ़े 23 साल पुरानी है। ऐसे में इस स्टेज पर आरोपी को जेल भेजने से कोई फायदा नहीं होने वाला है। पूर्व में...

राजनीतिक विज्ञापन-बाॅम्बे हाईकोर्ट ने ईसीआई को दिया निर्देश,चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर फलैगड सामग्री को हटाने के लिए तीन घंटे की समय अवधि में ले निर्णय [आर्डर पढ़े]
राजनीतिक विज्ञापन-बाॅम्बे हाईकोर्ट ने ईसीआई को दिया निर्देश,चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर फलैगड सामग्री को हटाने के लिए तीन घंटे की समय अवधि में ले निर्णय [आर्डर पढ़े]

बाॅम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को आईएएमएआई द्वारा बनाए स्वेच्छिक कोड आॅफ एथिक्स,जिनको ईसीआई ने कोर्ट के समक्ष पेश किया था,स्वीकार कर लिया है। इन एथिक्स का आगामी आम चुनाव में अंतरिम व्यवस्था के तौर पर पालन किया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश एन.एच पाटिल व जस्टिस एन.एम जामदर की खंडपीठ इस मामले में एक वकील सागर सूर्यवंशी की तरफ से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उसने सोशल मीडिया पर राजनीतिक विज्ञापनों के रेगुलेशन की मांग की थी,विशेषतौर पर मतदान से 48 घंटे पहले वाले समय में अपलोड किए जाने वाले...

रामाकृष्णा मिशन नहीं है कोई पब्लिक अॅथारिटी या राज्य-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
रामाकृष्णा मिशन नहीं है कोई पब्लिक अॅथारिटी या राज्य-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि एक प्राइवेट बाॅडी या संगठन पर किसी प्रतिमा या स्मारक द्वारा नियंत्रण करने के आधार पर यह निर्णय नहीं लिया जा सकता है कि वह सार्वजनिक काम भी करती है। जस्टिस डी.वाई चंद्राचूड़ व जस्टिस हेंमत गुप्ता की खंडपीठ ने अपने पिछले महीने दिए अपने एक फैसले में कहा कि रामाकृष्णा मिशन व उसके अस्पताल कोई अॅथारिटी नहीं है और संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अॅथारिटी की परिभाषा में नहीं आते हैं। रामाकृष्णा मिशन बनाम कागो कुनया नामक केस में अपना फैसला देते हुए गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा...