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मध्यस्थता समझौते को तुरंत प्रभावी करना चाहिए : SC ने एक साल की देरी से मामला सूचीबद्ध करने पर रजिस्ट्री की खिंचाई की [आर्डर पढ़े]
मध्यस्थता समझौते को तुरंत प्रभावी करना चाहिए : SC ने एक साल की देरी से मामला सूचीबद्ध करने पर रजिस्ट्री की खिंचाई की [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में समझौता होने के 1 साल बाद एक सुलझे हुए मामले को सूचीबद्ध करने के लिए रजिस्ट्री की जमकर खिंचाई की।दरअसल अदालत पिछले साल मध्यस्थता के लिए एक वैवाहिक मामले का उल्लेख कर रही थी। यह समझौता 10 मई, 2018 को दर्ज किया गया था और 1 सप्ताह बाद 16.5.2018 को अदालत ने गर्मियों छुट्टी के बाद मामले को सूचीबद्ध करने के लिए निर्देश जारी किया था।जब सोमवार को कोर्ट में मामला आया तो न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ की पीठ ने केस निपटारे को दर्ज किया और पक्षों को...

बलात्कार के आरोपी का डीएनए परीक्षण निष्पक्ष जाँच का हिस्सा : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
बलात्कार के आरोपी का डीएनए परीक्षण निष्पक्ष जाँच का हिस्सा : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि सीआरपीसी की धारा 53A के तहत किसी आरोपी का डीएनए परीक्षण निष्पक्ष जाँच का हिस्सा है। अदालत ने यह बात एक आरोपी की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए कही। इस याचिका में निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी गई थी जिसने आरोपी के डीएनए परीक्षण के अनुरोध संबंधी आवेदन को ठुकरा दिया था। निचली अदालत ने इस आदेश के ख़िलाफ़ अपील को ठुकराते हुए कहा था कि किसी व्यक्ति को सुनवाई के किसी चरण में इस तरह का आवेदन दायर करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने आगे कहा...

एक कठोर कैदी को सिर्फ सशस्त्र पहरे में ही पैरोल पर रिहा किया जा सकता है : पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट [निर्णय पढ़े]
एक कठोर कैदी को सिर्फ सशस्त्र पहरे में ही पैरोल पर रिहा किया जा सकता है : पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट [निर्णय पढ़े]

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने कहा है कि एक हार्डकोर यानी कठोर कैदी को केवल वर्ष 2013 में संशोधित हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिजनर्स (अस्थायी रिहाई) अधिनियम, 1988 की धारा 5 ए के तहत सशस्त्र पहरे में ही रिहा किया जा सकता है।याचिकाकर्ता काट रहा है आजीवन कारावास की सजापेश मामले में याचिकाकर्ता को भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 201, 302 और 364 ए के तहत दोषी ठहराया गया था जिसे 34 के साथ पढ़ा गया। धारा 201 के तहत 7 साल के सश्रम कारावास और धारा 302 और 364 ए के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। आजीवन...

आपके पास 25 याचिकाएं दायर करने के लिए पैसे है और आर्थिक रूप से कमजारे वर्ग से संबंधित होने का दावा करते हो,बाॅम्बे हाईकोर्ट ने आरटीई के तहत दाखिला पाने की मांग वाली याचिका को किया खारिज [निर्णय पढ़े]
"आपके पास 25 याचिकाएं दायर करने के लिए पैसे है और आर्थिक रूप से कमजारे वर्ग से संबंधित होने का दावा करते हो",बाॅम्बे हाईकोर्ट ने आरटीई के तहत दाखिला पाने की मांग वाली याचिका को किया खारिज [निर्णय पढ़े]

बाॅम्बे हाईकोर्ट ने पिछले दिनों फर्जी याचिकाएं/जनहित याचिकाओं के खिलाफ कठोर कदम उठाते हुए एक सपन श्रीवास्तव की तरफ से दायर याचिका को खारिज कर दिया है। सपन ने मांग की थी कि उसके बेटे को शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत दाखिला दिया जाए। सपन,जिसने खुद माना कि वह अब तक हाईकोर्ट के समक्ष 25 याचिकाएं दायर कर चुका है,जबकि उसने खुद को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से संबंधित बताने का दावा किया।जस्टिस प्रदीप नंदराजोग और जस्टिस एन.एम जामदार की पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि शुरूआत से अब तक कितनी याचिकाएं दायर...

गुजरात हाईकोर्ट ने केंद्र की उस प्रेस विज्ञिप्ति को ठहराया आंशिक तौर पर अवैध,जो थी फाॅर्म जीएसटीआर-3बी की रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि से संबंधित [निर्णय पढ़े]
गुजरात हाईकोर्ट ने केंद्र की उस प्रेस विज्ञिप्ति को ठहराया आंशिक तौर पर अवैध,जो थी फाॅर्म जीएसटीआर-3बी की रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि से संबंधित [निर्णय पढ़े]

फाॅर्म जीएसटीआर-3बी में रिर्टन दाखिल करना केवल एक रोक-अंतर या अंतर को रोकने व्यवस्था है और यह फाॅंर्म जीएसटीआर-3 के बदले में या उसकी तरह दायर किया जाने वाला रिटर्न नहीं है। यह कहते हुए गुजरात हाईकोर्ट ने केंद्र की उस प्रेस विज्ञप्ति को आंशिक तौर पर अवैध करार दिया है,जो 18 अक्टूबर 2018 को जारी की गई थी। इस विज्ञप्ति में कहा गया था कि जुलाई 2017 से मार्च 2018 के दौरान जारी किए गए चालान से संबंधित इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त करने की अंतिम तिथि,फाॅर्म जीएसटीआर-3बी में रिटर्न दाखिल करने की अंतिम...

शादी को टूटने से बचाया नहीं जा सकता, सिर्फ़ इसी आधार पर तलाक़ की अनुमति नहीं दी जा सकती : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
शादी को टूटने से बचाया नहीं जा सकता, सिर्फ़ इसी आधार पर तलाक़ की अनुमति नहीं दी जा सकती : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि शादी को टूटने से बचाया नहीं जा सकता है सिर्फ़ इस वजह से किसी को तलाक़ की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि तलाक़ पर परिस्थिति के रूप में तभी ग़ौर किया जा सकता है जब उससे क्रूरता जुड़ी हो। फ़ैमिली कोर्ट के फ़ैसले को प्रतिवादी ने चुनौती दी थी जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह बात कही। अपीलकर्ता/पत्नी और प्रतिवादी पति की अगस्त 1989 में हिंदू रीति से शादी हुई थी और उनके दो बेटे हैं। वर्ष 2008 से दोनों अलग रह रहे हैं। आपस में विवाद होने के कारण पति ने क्रूरता के...

आरोपी को सुनवाई का अवसर दिए बिना या कोर्ट मित्र (Amicus Curiae) नियुक्त किए बिना,हाईकोर्ट नहीं उलट सकती है दोषमुक्ति को-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
आरोपी को सुनवाई का अवसर दिए बिना या कोर्ट मित्र (Amicus Curiae) नियुक्त किए बिना,हाईकोर्ट नहीं उलट सकती है दोषमुक्ति को-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एक आपराधिक अपील में हाईकोर्ट बिना आरोपी को सुनवाई या उसका पक्ष रखने का मौका दिए या कोर्ट मित्र नियुक्त किए,जो आरोपी के पेश न होने पर उसकी तरफ से जिरह कर सके,दोषमुक्ति या बरी किए जाने के आदेश को उलट नहीं सकती है।जस्टिस आर.भानुमथि और जस्टिस ए.एस बोपन्ना की पीठ ने यह दलीलें समर्थन में पाई कि आरोपी के वकील की अनुपस्थिति में हाईकोर्ट को अपील पर मैरिट या गुणवत्ता के आधार पर निर्णय नहीं लेना चाहिए था।इस मामले में (चरिस्टोफर राज बनाम के.विजयकुमार) ने हाईकोर्ट ने आरोपी के...

असम रायफ़ल्स के सदस्यों के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार उन्मूलन अधिनियम के तहत जनरल असम रायफ़ल्स कोर्ट मामलों की जाँच कर सकता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
असम रायफ़ल्स के सदस्यों के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार उन्मूलन अधिनियम के तहत जनरल असम रायफ़ल्स कोर्ट मामलों की जाँच कर सकता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जनरल असम रायफ़ल्स कोर्ट (जीएआरसी) असम रायफ़ल्स के सदस्यों के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के मामलों की जाँच भ्रष्टाचार उन्मूलन अधिनियम के तहत कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस मामले में गौहाटी हाईकोर्ट के फ़ैसले को ख़ारिज कर दिया जिसमें इस मत के विपरीत फ़ैसला दिया गया था। हाईकोर्ट का कहना था कि पीसी अधिनियम की धारा 4 के तहत भ्रष्टाचार उन्मूलन अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध की सुनवाई सिर्फ़ विशेष जज ही कर सकता है।असम रायफ़ल्स में भ्रष्टाचार को लेकर हुए एक स्टिंग ऑपरेशन का...

वैधानिक प्रावधानों पर ग़ौर किए बिना अपने फ़ैसले की समीक्षा करने वाले हाईकोर्ट के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट ने सही माना; कहा– किसी भी पक्ष को यह नहीं हो कि उसके साथ न्याय नहीं हुआ [निर्णय पढ़े]
वैधानिक प्रावधानों पर ग़ौर किए बिना अपने फ़ैसले की समीक्षा करने वाले हाईकोर्ट के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट ने सही माना; कहा– किसी भी पक्ष को यह नहीं हो कि उसके साथ न्याय नहीं हुआ [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने वैधानिक प्रावधानों पर ग़ौर किए बिना कलकत्ता हाईकोर्ट के एक फ़ैसले की समीक्षा को सही बताया और कहा कि किसी भी पक्ष को यह नहीं लगना चाहिए कि उसके साथ न्याय नहीं हुआ।आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 293 किसी राजस्व या आय कर अथॉरिटी के ख़िलाफ़ किसी भी दीवानी अदालत में मामला दायर करने पर रोक लगाता है। इस प्रावधान पर ग़ौर किए बिना एकल पीठ ने पक्षों को (जिसमें एक पक्ष आय कर अथॉरिटीज़ भी था) को ज़िला अदालत भेज दिया। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस मामले में दीवानी मामला दायर करने की अनुमति दे दी।बाद...

सीआरपीसी की धारा 243 के तहत अगर आवेदन दिया जाता है तो निचली अदालत नोटिस जारी करने के लिए बाध्य है बशर्ते आवेदन से न्याय का उद्देश्य पराजित नहीं होता : दिल्ली हाईकोर्ट
सीआरपीसी की धारा 243 के तहत अगर आवेदन दिया जाता है तो निचली अदालत नोटिस जारी करने के लिए बाध्य है बशर्ते आवेदन से न्याय का उद्देश्य पराजित नहीं होता : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने हाल ही में कहा कि सीआरपीसी की धारा 243 के तहत दाख़िल आवेदन के बारे में निचली अदालत के लिए यह अनिवार्य है कि वह नोटिस जारी करे बशर्ते कि इसका कोई कारण बताया गया हो और कहा गया हो कि आवेदन देने में देरी हुई है या इससे न्याय का उद्देश्य पराजित होता है। यह आदेश निचली अदालत के एक आदेश के ख़िलाफ़ दायर याचिका पर सुनवाई में कहा गया। निचली अदालत ने सीआरपीसी की। धारा 91 और 311 के तहत दस्तावेज़ पेश करने और गवाहों को पेशी के लिए बुलाने की अर्ज़ी ख़ारिज कर दी थी।...

दिल्ली हाईकोर्ट ने ठहराया बिहार सरकार को एक आईएएस अधिकारी के जीवन व स्वतंत्रता को पीड़ित या अत्याचार करने के लिए जिम्मेदार [निर्णय पढ़े]
दिल्ली हाईकोर्ट ने ठहराया बिहार सरकार को एक आईएएस अधिकारी के जीवन व स्वतंत्रता को पीड़ित या अत्याचार करने के लिए जिम्मेदार [निर्णय पढ़े]

दिल्ली हाईकोर्ट बिहार के उस आईएएस अधिकारी के बचाव में आ गया है,जिसे राज्य सरकार ने इसलिए व्यवस्थित रूप से लक्षित किया या निशाना बनाया क्योंकि वह राज्य के परिवहन माफिया के खिलाफ अपनी ईमानदारी का धर्मयुद्ध लड़ रहा था। जस्टिस ज्योति सिंह व जस्टिस विपिन सांघी की पीठ ने राज्य सरकार की इस बात के लिए आलोचना की है कि उसने आईबी द्वारा खराब तरीके से निष्पादित रिपोर्ट के आधार पर अधिकारी को अंतर-कैडर हस्तांतरण या तबादले के तहत हरियाणा जाने से रोक दिया। उसके जीवन व स्वतंत्रता को खतरा होने के बावजूद भी उस पर...

सभी नागरिकों के लिए स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करना है राज्य का संवैधानिक दायित्व-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सभी नागरिकों के लिए स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करना है राज्य का संवैधानिक दायित्व-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

राज्य सरकार का यह संवैधानिक दायित्व है कि वह अपने सभी नागरिकों के लिए स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करे,यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण के उस फैसले को सही बताया है,जिसमें मेघालय राज्य को निर्देश दिया गया था कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समक्ष सौ करोड़ रुपए जमा कराए।एनजीटी ने पाया था कि राज्य अपने यहां हो रही कोयले की अवैध खनन की देखरेख करने के मामले में अपनी ड्यूटी नहीं निभा पाया।हालांकि जस्टिस अशोक भूषण व जस्टिस के.एम जोशेफ की पीठ ने राज्य की अपील को आंशिक तौर पर स्वीकार...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल करते समय अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को किया अधिसूचित [अधिसूचना पढ़े]
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल करते समय अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को किया अधिसूचित [अधिसूचना पढ़े]

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उस प्रक्रिया को अधिसूचित कर दिया है जो राज्य में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल करते समय अपनाई जाएगी।CrPC की धारा 438 उत्तर प्रदेश में 6 जून से हुई लागू दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 438, जिसे आपातकाल के समय उत्तर प्रदेश सरकार ने विलुप्त या खत्म कर दिया था, उसे राज्य सरकार ने 6 जून 2019 से फिर से लागू कर दिया है। अधिसूचना में यह कहा गया है कि अग्रिम जमानत अर्जी के लिए 5 रूपए कोर्ट फीस देनी होगी और जिस व्यक्ति को गिरफ्तारी का डर है, उसका एक हलफनामा भी इसके साथ लगाया...

पिता से मिली वंशागत संपत्ति,बेटों के हाथों में आने पर बन जाती है संयुक्त पारिवारिक संपत्ति-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
पिता से मिली वंशागत संपत्ति,बेटों के हाथों में आने पर बन जाती है संयुक्त पारिवारिक संपत्ति-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया है कि पिता से वंशागत तौर पर मिली संपत्ति बेटों के हाथ में आने के बाद संयुक्त परिवार की संपत्ति बन जाती है।जस्टिस ए.एम खानविलकर और जस्टिस अजय रस्तोगी की पीठ ने यह निर्णय डोडामुनियप्पा (एलआरएस के जरिए) बनाम मुनिस्वामी व अन्य के मामले में दिया है।क्या था मामलाप्रतिवादी मुनिस्वामी व पांच अन्य एक चिकन्ना नामक व्यक्ति के पौत्र है,जिसकी संपत्ति से संबंधित यह मामला है। वर्ष 1980 में इन्होंने केस दायर कर मांग की थी कि उनके पिता ने अपने दो भाईयों के साथ मिलकर एक...

टाइटल या शीर्षक के आधार पर अधिकार या कब्जे के लिए दायर मुकदमें की बाहरी सीमा सिर्फ इसलिए खत्म नहीं हो सकती क्योंकि उसमें घोषणा की राहत भी मांगी गई है-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
टाइटल या शीर्षक के आधार पर अधिकार या कब्जे के लिए दायर मुकदमें की बाहरी सीमा सिर्फ इसलिए खत्म नहीं हो सकती क्योंकि उसमें घोषणा की राहत भी मांगी गई है-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने यह माना है कि अधिकार या कब्जे के लिए दायर एक मुकदमें में केवल इस आधार पर कि डिक्लेरेशन (घोषणा) की भी राहत मांगी गई है, 12 वर्ष की बाहरी सीमा खत्म या लुप्त नहीं हो सकती है।क्या था यह मामला?इस मामले में वादी के पक्ष में एक जमीन के कब्जे की डिक्री देते हुए जमीन पर उसका अधिकार बताया गया था। इस मामले में प्रतिवादियों की आपत्ति थी कि केस में घोषणा या डिक्लरेशन की मांग की गई थी इसलिए केस की सीमा 3 साल थी। इसलिए सूट या केस को सीमा से बाहर दायर किया गया था। निचली अदालत ने इस दलील को...

पक्षकार को बिना उपचार छोड़ा नहीं जा सकता : SC ने HC के बिना प्रावधान देखे दिए गए फैसले पर पुनर्विचार को बरकरार रखा [निर्णय पढ़े]
पक्षकार को बिना उपचार छोड़ा नहीं जा सकता : SC ने HC के बिना प्रावधान देखे दिए गए फैसले पर पुनर्विचार को बरकरार रखा [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए कि किसी भी पक्षकार को उपचार के बिना नहीं छोड़ा जा सकता, कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है जिसमें वैधानिक प्रावधान पर ध्यान दिए बिना दिए गए अपने पहले के फैसले पर पुनर्विचार किया था।क्या था यह मामला?दरअसल आयकर अधिनियम 1961 की धारा 293 राजस्व/आयकर प्राधिकरण के खिलाफ किसी भी दीवानी न्यायालय में मुकदमा दायर करने पर पूरी तरह से रोक लगाती है। इस प्रावधान पर ध्यान दिए बिना एकल पीठ ने पक्षकारों (जिसमें आयकर अधिकारी शामिल हैं) को जिला अदालत में फिर से भेज दिया।...

मानसिक रूप से बीमार महिला से सामूहिक बलात्कार के बाद हत्या : सुप्रीम कोर्ट ने 7 दोषियों की फांसी पर रोक लगाई [आर्डर पढ़े]
मानसिक रूप से बीमार महिला से सामूहिक बलात्कार के बाद हत्या : सुप्रीम कोर्ट ने 7 दोषियों की फांसी पर रोक लगाई [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने रोहतक (हरियाणा) में मानसिक रूप से बीमार महिला से सामूहिक बलात्कार और उसकी हत्या करने वाले 7 दोषियों की फांसी पर रोक लगा दी है।मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने 7 दोषियों द्वारा दायर याचिका की अनुमति दी। आरोपियों की ओर से दी गयी दलीलइस दौरान वरिष्ठ वकील विभा दत्ता मखीजा ने यह दलील दी कि न तो ट्रायल कोर्ट और न ही हाई कोर्ट ने मौत की सजा देने से पहले प्रत्येक अभियुक्त की परिस्थितियों पर विचार किया जिससे उनकी सजा कम हो सके। यह बचन सिंह मामले में संविधान...

कोई उम्मीदवार अगर आरक्षित वर्ग में आयु छूट ले चुका है तो वो सामान्य श्रेणी की सीट पर प्रवेश नहीं ले सकता : SC [निर्णय पढ़े]
कोई उम्मीदवार अगर आरक्षित वर्ग में आयु छूट ले चुका है तो वो सामान्य श्रेणी की सीट पर प्रवेश नहीं ले सकता : SC [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यह कहा है कि कोई उम्मीदवार जो एक आरक्षित वर्ग से संबंधित होने के चलते चयन प्रक्रिया में आयु में छूट का लाभ उठा चुका है तो वो उसके बाद सामान्य श्रेणी की सीट पर प्रवेश नहीं कर सकता।जस्टिस एस. अब्दुल नजीर और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की पीठ ने कहा कि अनुच्छेद 16 (4) किसी राज्य को नियुक्तियों में उन पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने में सक्षम बनाता है जिनका सार्वजनिक रोजगार में अपर्याप्त प्रतिनिधित्व होता है और इसलिए आरक्षित श्रेणियों से संबंधित उम्र में छूट दी गई है तो सामान्य...