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जज क़ानून से ऊपर नहीं, न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, न्यायिक नियुक्त की प्रक्रिया अवश्य ही पारदर्शी होनी चाहिए
जज क़ानून से ऊपर नहीं, न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, न्यायिक नियुक्त की प्रक्रिया अवश्य ही पारदर्शी होनी चाहिए

अपनी अलग लेकिन सहमतिपूर्ण राय में न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने दिल्ली हाईकोर्ट के ख़िलाफ़ इस अपील को ख़ारिज कर दिया कि सीजेआई का ऑफ़िस आरटीआई अधिनियम के तहत आता है। अपने फ़ैसले में उन्होंने कहा कि उच्च न्यायपालिका में जजों का चयन और उनकी नियुक्ति की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। उनके हिसाब से, इससे नियुक्ति की प्रक्रिया में आत्मविश्वास बढ़ेगा और इसमें पारदर्शिता आएगी और न्यायपालिका एवं सरकार में हर स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में उत्तरदायित्व का भाव पैदा होगा। न्यायमूर्ति...

प्रथम दृष्टया पुख्ता सबूत को लेकर आश्वस्त होने पर ही अदालत आरोपी को अदालत में पेशी के लिए बुलाए : इलाहाबाद हाईकोर्ट
प्रथम दृष्टया पुख्ता सबूत को लेकर आश्वस्त होने पर ही अदालत आरोपी को अदालत में पेशी के लिए बुलाए : इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक ताज़ा फैसले में इस बात को दोहराया कि किसी आरोपी को अदालत में बुलाने को लेकर मजिस्ट्रेट के लिए यह जरूरी है कि वह इसके बारे में अपने आश्वस्त होने का उल्लेख करे। अदालत ने यह फैसला आवेदनकर्ता की इस दलील पर दिया कि निचली अदालत ने शिकायतकर्ता और उसके गवाहों के बयानों के आधार पर सिर्फ एक निष्कर्ष रिकॉर्ड किया था कि प्रथम दृष्टया ऐसा करने का आधार है, लेकिन अदालत का यह निष्कर्ष सीआरपीसी की धारा 200 और 202 के तहत शिकायतकर्ता और उसके गवाहों के रिकॉर्ड बयानों पर हुई बहस के बाद...

सुप्रीम कोर्ट बॉम्बे हाईकोर्ट के एक फैसले को नहीं समझ सका कहा, ऐसा आदेश दें, जिसे हम समझ सकें
सुप्रीम कोर्ट बॉम्बे हाईकोर्ट के एक फैसले को नहीं समझ सका कहा, ऐसा आदेश दें, जिसे हम समझ सकें

सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट से 'अनुरोध' करते हुए कहा कि ऐसा आदेश पारित करें, जिसे हम समझ सकें। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश लागू करने वाली विशेष अवकाश याचिका का निपटान किया। न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश अस्पष्ट है। हाईकोर्ट ने जो निर्णय दिया है, उसे हम समझ नहीं पा रहे हैं। पीठ ने आदेश को रद्द कर दिया और मामले को हाईकोर्ट वापस भेज दिया। बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच के द्वारा एक आपराधिक रिट याचिका में पारित एक आदेश के...

ट्रायल शुरू होने के बाद भी मामले में आगे की जांच की जा सकती है, अदालत की मंज़ूरी की आवश्यकता नहीं,  केरल हाईकोर्ट का फैसला
ट्रायल शुरू होने के बाद भी मामले में आगे की जांच की जा सकती है, अदालत की मंज़ूरी की आवश्यकता नहीं, केरल हाईकोर्ट का फैसला

केरल हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि जांच अधिकारी के लिए यह आवश्यक नहीं है कि वह आगे की जांच करने के लिए अदालत से कोई अनुमति ले। न्यायमूर्ति आर नारायण पिशराडी ने यह भी देखा कि मामले का ट्रायल शुरू होने के बाद आगे की जांच करने के लिए जांच अधिकारी की शक्ति पर कोई प्रतिबंध नहीं है। अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173 (8) और राम चौधरी बनाम राज्य AIR 2009 SC 2308 के फैसले का हवाला देते हुए कहा। "अदालत से किसी भी अनुमति के बिना भी, जांच अधिकारी के पास आगे की जांच करने की...

जब खनिज और खनन अधनियम के तहत अपराध को माफ़ कर दिया गया है तो आईपीसी की धारा 379 के तहत अभियोजन नहीं टिकेगा : कर्नाटक हाईकोर्ट
जब खनिज और खनन अधनियम के तहत अपराध को माफ़ कर दिया गया है तो आईपीसी की धारा 379 के तहत अभियोजन नहीं टिकेगा : कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर खनिज और खान (विकास और विनियमन) (एमएमआरडी) अधिनियम के तहत अगर अपराध को जुर्माना वसूलकर माफ़ कर दिया गया है तो आईपीसी की धारा 379 के तहत उसका अभियोजन अदालत में नहीं टिकेगा। न्यायमूर्ति पीबी बजंथ्री ने सुरेश के और फ्रंसिक @मंजुनाथ जोसफ के खिलाफ कदाबा पुलिस थाने में खनिज और खान (विकास और विनियमन) अधिनियम की धारा 4(1) और 21(A) और कर्नाटक गौण खनिज छूट नियम के नियम 31(R), 42 और आईपीसी की धारा 379 के तहत दर्ज एफआईआर को खारिज कर दिया। क्या है मामला याचिकाकर्ता के...

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने जेल में कैदियों का मानवीय जीवन सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किए
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने जेल में कैदियों का मानवीय जीवन सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किए

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने यह सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि जेल ठीक से काम करें और राज्य के जेल में कैदियों को मानवीय जीवन प्रदान किया जाए। अंतरिम आदेश डॉक्टर स्वर्णदीप सिंह द्वारा दायर याचिका पर दिया गया है। डॉक्टर स्वर्णदीप सिंह ने केंद्रीय जेल, लुधियाना की अपनी यात्रा के दौरान जेलों के कामकाज में गंभीर अनियमितताओं की शिकायत की थी। सिंह ने पंजाब राज्य में जेलों के कामकाज की स्वतंत्र जांच करने और जेल के कैदियों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए...

क्या नाजायज़ बच्चा पिता की पैतृक संपत्ति में उत्तराधिकारी बन सकता है? सुप्रीम कोर्ट के सामने फिर आया सवाल
क्या 'नाजायज़' बच्चा पिता की पैतृक संपत्ति में उत्तराधिकारी बन सकता है? सुप्रीम कोर्ट के सामने फिर आया सवाल

क्या एक 'नाजायज' बच्चे को पिता की पैतृक संपत्ति में उत्तराधिकारी बनने का अधिकार है? जितेंद्र कुमार बनाम जसबीर सिंह के मामले में विशेष अवकाश याचिका में यह मुद्दा फिर से सुप्रीम कोर्ट के सामने आया है। इस मामले में, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने दूसरी अपील को खारिज करते हुए, भरत मठ और एक अन्य बनाम आर विजया रेंगनाथन और अन्य, एआईआर 2010 एससी 2685 और जिनिया केओटिन बनाम कुमार सीताराम (2003) 1 एससीसी 730 के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों पर भरोसा किया था और यह माना कि शून्य विवाह से पैदा...

सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश के बावजूद क्यों नहीं रुक रही हैं बोरवेल दुर्घटनाएं, शीर्ष अदालत ने दिए थे ये निर्देश
सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश के बावजूद क्यों नहीं रुक रही हैं बोरवेल दुर्घटनाएं, शीर्ष अदालत ने दिए थे ये निर्देश

बोरवेल दुर्घटना के कारण तमिलनाडु में दो वर्षीय सुजीत विल्सन की दुखद मौत एक आंख खोलने वाली घटना होनी चाहिए। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस तरह की घटनाएं अभी भी जारी हैं, जबकि बोरवेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नौ साल पहले व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए थे। शीर्ष अदालत द्वारा स्वत संज्ञान लिए गए एक मामले में बोरवेल में गिरने और ट्यूबवेल में गिरने के कारण छोटे बच्चों के साथ होने वाली घातक दुर्घटनाओं की रोकथाम के उपायों पर फिर से विचार किया गया था। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस...

क्या मृतक के शरीर में जहर नहीं मिलने पर भी उसे दोषी करार दिया जा सकता है? ऐसे केस की कुछ खास बातें
क्या मृतक के शरीर में जहर नहीं मिलने पर भी उसे दोषी करार दिया जा सकता है? ऐसे केस की कुछ खास बातें

मनु सेबेस्टियनइस आलेख में इस बात पर चर्चा की जा रही है कि जहर देकर मार देने के मामले में सिर्फ परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर कैसे दोषी ठहराया जा सकता है। क्या किसी व्यक्ति को जहर देकर मारने के मामले में सिर्फ परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर दोषी ठहराया जा सकता है जबकि यह पता नहीं है कि जहर कैसे दिया गया? केरल पुलिस के इस आरोप के बाद कि उत्तरी केरल के कूदाथायी गांव की जॉली जोसफ नामक एक महिला ने अपने ही परिवार के छः लोगों की 17 साल की अवधि के दौरान जहर देकर हत्या कर दी, कानूनी क्षेत्र में...

NDPS एक्ट के तहत आरोपी को दोषी करार देने के लिए सिर्फ जांच अधिकारी के सबूतों पर विश्वास करना सही नहीं, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने किया अभियुक्तों को बरी
NDPS एक्ट के तहत आरोपी को दोषी करार देने के लिए सिर्फ जांच अधिकारी के सबूतों पर विश्वास करना सही नहीं, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने किया अभियुक्तों को बरी

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने गुरुवार को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सबस्टेंस एक्ट, 1985 (NDPS Act) के तहत पारित दोषसिद्धि के एक आदेश को पलटते हुए कहा कि स्वतंत्र गवाहों द्वारा कोई पुष्टि नहीं होने के बाद, केवल जांच अधिकारियों के साक्ष्य पर भरोसा करते हुए, जिनके बयान विरोधाभासी थे, आरोपी को दोषी ठहराना अनुचित है। अदालत ने आरोपियों को बरी कर दिया। न्यायमूर्ति अरविंद सिंह चंदेल ने कहा, "उपरोक्त सबूतों की एक मिनट की जांच पर, यह स्पष्ट है कि मामला केवल जांच अधिकारी दीपेश सैनी (PW11) और अन्य...