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ट्रायल शुरू होने के बाद भी मामले में आगे की जांच की जा सकती है, अदालत की मंज़ूरी की आवश्यकता नहीं, केरल हाईकोर्ट का फैसला

LiveLaw News Network
6 Nov 2019 7:57 AM GMT
ट्रायल शुरू होने के बाद भी मामले में आगे की जांच की जा सकती है, अदालत की मंज़ूरी की आवश्यकता नहीं,  केरल हाईकोर्ट का फैसला
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केरल हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि जांच अधिकारी के लिए यह आवश्यक नहीं है कि वह आगे की जांच करने के लिए अदालत से कोई अनुमति ले। न्यायमूर्ति आर नारायण पिशराडी ने यह भी देखा कि मामले का ट्रायल शुरू होने के बाद आगे की जांच करने के लिए जांच अधिकारी की शक्ति पर कोई प्रतिबंध नहीं है।

अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173 (8) और राम चौधरी बनाम राज्य AIR 2009 SC 2308 के फैसले का हवाला देते हुए कहा।

"अदालत से किसी भी अनुमति के बिना भी, जांच अधिकारी के पास आगे की जांच करने की शक्ति है। यह केवल शिष्टाचार का मामला है कि जांच अधिकारी को मामले में आगे की जांच के बारे में अदालत को सूचित करना आवश्यक है ताकि अदालत को मामले की सुनवाई को रोकने और इस तरह की जांच के संबंध में रिपोर्ट का इंतजार करने के लिए सक्षम किया जा सके। "

अदालत ने इस बिंदु में भी कोई दम नहीं पाया कि मामले में कई गवाहों की पहले ही जांच हो चुकी है और मामले की सुनवाई शुरू होने के बाद आगे की जांच नहीं हो सकती। मामले की सुनवाई शुरू होने के बाद आगे की जांच करने के लिए जांच अधिकारी की शक्ति पर कोई प्रतिबंध नहीं है।

अदालत ने यह भी कहा कि, इस मामले में आगे की जांच चार्जशीट दाखिल करने में कुछ प्रक्रियात्मक और तकनीकी अनियमितताओं को ठीक किए जाने का प्रस्ताव था। न्यायमूर्ति पिशराडी ने कहा कि इस तथ्य के लिए कि अदालत के समक्ष पहले से ही दायर चार्जशीट में कुछ प्रक्रियात्मक या तकनीकी अनियमितताओं को ठीक करने के लिए आगे की जांच की जा रही है, इस तरह की जांच को छोड़ने के लिए जांच अधिकारी को निर्देश जारी करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हो सकता।

याचिका को खारिज करते हुए, अदालत ने कहा कि किसी मामले के अभियुक्त को जांच के तरीके या अभियोजन के तरीके के संदर्भ में कोई अधिकार नहीं है।

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