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सुप्रीम कोर्ट बॉम्बे हाईकोर्ट के एक फैसले को नहीं समझ सका कहा, ऐसा आदेश दें, जिसे हम समझ सकें

LiveLaw News Network
7 Nov 2019 3:10 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट बॉम्बे हाईकोर्ट के एक फैसले को नहीं समझ सका कहा, ऐसा आदेश दें, जिसे हम समझ सकें
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सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट से 'अनुरोध' करते हुए कहा कि ऐसा आदेश पारित करें, जिसे हम समझ सकें। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश लागू करने वाली विशेष अवकाश याचिका का निपटान किया।

न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश अस्पष्ट है। हाईकोर्ट ने जो निर्णय दिया है, उसे हम समझ नहीं पा रहे हैं। पीठ ने आदेश को रद्द कर दिया और मामले को हाईकोर्ट वापस भेज दिया।

बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच के द्वारा एक आपराधिक रिट याचिका में पारित एक आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी याचिका दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट के उक्त दो पृष्ठबद्ध आदेशों को पढ़ने से इस बात का कोई पता नहीं चलता कि मामला क्या था और अदालत ने क्या निर्णय लिया है।

ऐसा पहले भी हुआ

सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी उच्च न्यायालय के निर्णयों के बारे में भी इसी तरह की टिप्पणी की है। 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा पारित एक फैसले को रद्द कर दिया था, क्योंकि फैसले में इस्तेमाल किए गए अंग्रेजी के शब्द दोषपूर्ण थे।

एक अन्य केस में शीर्ष अदालत ने राजस्थान उच्च न्यायालय के फैसले को रद्द कर दिया था, जिसमें विवाद का तथ्यात्मक विवरण भी नहीं था और न ही पक्षकारों द्वारा दी गई दलीलों पर कुछ कहा गया था। इसके अलावा अदालत ने इससे संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में मुद्दों की जांच भी नहीं की थी।

अदालत ने कहा,

"हाईकोर्ट से कम से कम उम्मीद की जाती है कि आदेश में पार्टियों के बीच मामले में शामिल संक्षिप्त तथ्यों को शामिल किया जाना चाहिए, जिस आधार पर कार्रवाई की जाती है। पार्टियों के पक्ष में कार्रवाई का बचाव करते हुए, पार्टियों की प्रस्तुतियाँ उनके स्टैंड के समर्थन में, कानूनी प्रावधान, यदि कोई हो, तो शामिल किए जाने चाहिए। एक पार्टी के मामले में स्वीकृति या अस्वीकृति के हकदार के रूप में संक्षिप्त कारणभी होने चाहिए।"

आदेश की प्रति डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें



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