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उत्तरदाता को याचिका की प्रति दे दी गई है तो उसके अधिवक्ता फिर से वह प्रति प्राप्त करने के हकदार नहीं, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने कहा

LiveLaw News Network
2 Nov 2019 3:31 AM GMT
उत्तरदाता को याचिका की प्रति दे दी गई है तो उसके अधिवक्ता फिर से वह प्रति प्राप्त करने के हकदार नहीं, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने कहा
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उत्तरदाताओं का यह कर्तव्य है कि वे अपने वकील को याचिका की प्रति उपलब्ध करवाएं। ऐसे उत्तरदाता अपने वकील को देने के लिए याचिका की अतिरिक्त प्रति प्राप्त करने के लिए आग्रह नहीं कर सकते।

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उत्तरदाता को याचिका (प्लीडिंग) की प्रति दे दी गई है तो उत्तरदाता के अधिवक्ता (एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड) वह प्रति प्राप्त करने के हकदार नहीं होंगे।

एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड वरिंदर कुमार शर्मा ने रजिस्ट्री के समक्ष तर्क दिया था कि सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस के नियमों के अनुसार, स्पेशल लीव पिटीशन में उत्तरदाताओं नोटिस के बाद और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड द्वारा वकालतनाम दाखिल करने के बाद वह याचिकाकर्ता से याचिका की प्रतिलिपि के दो सेट प्राप्त करने का हकदार है, ताकि वह काउंटर हलफनामा दाखिल करने में सक्षम हो सके। ऑर्डर XX नियम 14 में कहा गया था कि प्रत्येक पक्ष, जो मामले में पेश हुआ है, वह अपने उपयोग के लिए रिकॉर्ड की दो प्रतियां प्राप्त करने का हकदार होगा।

लेकिन रजिस्ट्री ने नोट किया कि ऑर्डर XX आपराधिक अपील पर लागू होता है और इस तरह विशेष अवकाश याचिकाओं (सिविल) की कार्यवाही पर लागू नहीं होगा, जो कि सुप्रीम कोर्ट के नियमों, 2013 के ऑर्डर XXI के संदर्भ में संसाधित किया गया है। सभी नोटिस सिविल प्रक्रिया संहिता में दिए गए तरीके से दिए जाएंगे।

रजिस्ट्रार अनिल लक्ष्मण पानसरे ने कहा,

"ऑर्डर XX के नियम 14 में वर्णित 'रिकॉर्ड' शब्द न्यायालय के आदेशों के संदर्भ में तैयार किए गए रिकॉर्ड के संबंध में है। रिकॉर्ड तैयार करने से संबंधित प्रावधानों को ऑर्डर XX नियम 7 से नियम 13 में जगह मिलेगी।


वर्तमान मामले में वकील यह इंगित नहीं कर सकते कि ऑर्डर XX के संदर्भ में रिकॉर्ड तैयार करने का चरण आ गया है। वास्तव में सर्वोच्च न्यायालय के नियमों, 2013 के आदेश XXI में ऐसा कोई चरण नहीं दिया गया है। इसके अभाव में उत्तरदाता को रिकॉर्ड की दो प्रतियों की आपूर्ति करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता है, जैसा कि उत्तरदाताओं के वकील ने तर्क दिया है। इस प्रकार ऑर्डर XX नियम 14 के तहत प्रावधान उत्तरदाताओं के लिए कोई मदद नहीं है।"

यह देखा गया कि इस मामले में एसएलपी की प्रति उत्तरदाताओं को दी गई है और इसलिए इन उत्तरदाताओं को उनके अधिवक्ताओं को याचिका की प्रतिलिपि देना उनका कर्तव्य है।

रजिस्ट्रार ने कहा,


"कुल मिलाकर उत्तरदाताओं की ओर से वकील का आग्रह कि ऑन रिकॉर्ड अधिवक्ता याचिका पूरे सेट की प्रति पाने के हकदार हैं। अधिवक्ता बार-बार यह कह रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट में प्रचलित प्रथा है कि उत्तरदाता को याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील पूरे सेट की प्रति उत्तरदाताओं को देंगे जो उन्हें काउंटर हलफनामा दायर करने में सक्षम बनाएगा।


यदि इस तरह की प्रथा वास्तव में सुप्रीम कोर्ट में प्रचलित है तो पक्षकारों के लिए अधिवक्ता को उक्त प्रथा को जारी रखने के लिए नहीं रोका जाता है, हालांकि न्यायालय से अधिकारपूर्वक ऑर्डर नहीं मांगे जा सकते कि याचिकाकर्ता को अपील करने वाले वकील को प्रति देने के निर्देश दिए जाएं, जब तक कि यह स्पष्ट सामग्री के माध्यम से इंगित नहीं किया जाता है कि उत्तरदाताओं को याचिका की प्रति का पूरा सेट नहीं मिला है। इसलिए, उत्तरदाता द्वारा याचिकाकर्ता को प्रति उपलब्ध करवाने के निर्देश देने का अनुरोध अस्वीकार किया जाता है। "

आदेश की प्रति डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें।



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