ताज़ा खबरें
आपराधिक मामलों में सजा सुनाते समय लागू परीक्षण की सुप्रीम कोर्ट ने की व्याख्या
सुप्रीम कोर्ट ने किसी आपराधिक मामले में सजा सुनाते समय लागू किए जाने वाले तीन परीक्षणों की संक्षिप्त व्याख्या की है। अदालत ने कहा है कि एक आपराधिक मामले में आरोपी को सजा सुनाते समय अपराध परीक्षण, आपराधिक परीक्षण और तुलनात्मक अनुपात का परीक्षण लागू किया जाना चाहिए।दरअसल न्यायमूर्ति एनवी रमना, न्यायमूर्ति मोहन एम शांतनगौदर और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की पीठ उच्च न्यायालय मध्य प्रदेश (ग्वालियर पीठ ) के उस फैसले पर विचार कर रही थी जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 326 के साथ धारा 34 और आईपीसी की...
गोवा में नए एयरपोर्ट का मामला : मुख्य न्यायाधीश ने दो टूक कहा, नई बेंच के गठन की स्थिति में नहीं
गोवा के मोपा में अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे को लेकर गोवा सरकार की जल्द सुनवाई की अर्जी को देश के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने नकार दिया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि फिलहाल उनके पास किसी नई बेंच के गठन की स्थिति में नहीं है।दरअसल बुधवार को अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने गोवा सरकार की ओर से मुख्य न्यायाधीश के समक्ष कहा था कि इस मामले को किसी अन्य पीठ को सौंपा जाना चाहिए क्योंकि मामले की सुनवाई करने वाली पीठ अन्य मामलों में व्यस्त है। इस पर मुख्य न्यायाधीश गोगोई ने कहा, " हम नई पीठ के गठन की स्थिति...
भूमि अधिग्रहण मामले में जस्टिस अरुण मिश्रा ने सुनवाई से खुद को अलग करने की मांग ठुकराई
भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा एवं पारदर्शिता का अधिकार, सुधार तथा पुनर्वास अधिनियम, 2013 की धारा 24(2) की व्याख्या संबंधित मामलों की सुनवाई के लिए संविधान पीठ की अगुवाई कर रहे जस्टिस अरुण मिश्रा सुनवाई करते रहेंगे। पांच जजों के संविधान पीठ में बुधवार को फैसला सुनाते हुए जस्टिस मिश्रा ने कहा कि वो सुनवाई से अलग नहीं होंगे। मामले से जुडे़ कुछ याचिकाकर्ताओं ने जस्टिस मिश्रा से सुनवाई में शामिल ना होने की मांग की थी। दरअसल सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 16 अक्टूबर को न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा...
मध्यस्थता के फ़ैसले में हस्तक्षेप तभी किया जा सकता है, जब यह साक्ष्य और आम नीति के विपरीत हो : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मध्यस्थता और सुलह अधिनियम की धारा 34 और 37 के तहत किसी मध्यस्थता ट्रिब्यूनल के फ़ैसले में तभी हस्तक्षेप हो सकता है जब जांच ग़लत हो और साक्ष्यों एवं आम नीति के ख़िलाफ़ हो। वर्तमान मामले में मध्यस्थता ट्रिब्यूनल का मत था कि झारखंड सरकार और एचएसएस इंटेग्रेटेड एसडीएन के बीच क़रार को समाप्त करना ग़ैरक़ानूनी था और ऐसा करते हुए उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया जो इस क़रार के तहत ज़रूरी था। ट्रिब्यूनल ने ₹ 2,10,87,304 के दावे के भुगतान की अनुमति दी। सरकार ने धारा 34 के...
सुप्रीम कोर्ट ने बताया, नौकरी से निकाले गए कामगार के विषय में श्रम अदालत की जांच की क्या है सीमा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि श्रम अदालत या ट्रिब्यूनल औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 33(2)(b)के तहत किसी मामले की जांच के दौरान इस अधिनियम की धारा 10(i)(c) और (d) के तहत निर्णय करने के अपने अधिकारों का प्रयोग नहीं कर सकता। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि धारा 33(2)(b) के तहत अपने प्रथम दृष्ट्या विचारों को निर्धारित करने की प्रक्रिया के दौरान वे सज़ा की आनुपातिकता पर भी ग़ौर नहीं कर सकते। अदालत जॉन डिसूज़ा बनाम कर्नाटक एसआरटीसी मामले में किसी कामगार को नौकरी से निकालने...
घरेलू हिंसा की शिकायत की सुनवाई वहां की जा सकती है, जहां पीड़ित महिला रहती है, कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर कोई महिला घरेलू हिंसा की पीड़ित है तो मजिस्ट्रेट को यह अधिकार है कि वह उसके मामले को वहां सुने जहां यह महिला अस्थाई तौर पर रह रही है। यह ज़रूरी नहीं है कि इस मामले की सुनवाई वही अदालत करेगी, जिसके अधिकार क्षेत्र में वह स्थान आता है जहां अपराध हुआ है। न्यायमूर्ति मोहम्मद नवाज ने केवी विजयकुमार की इस बारे में याचिका को खारिज करते हुए कहा, "अधिनयम की धारा 27(1)(a) में कहा गया है कि न्यायिक मजिस्ट्रेट या मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रे, जैसी भी स्थिति हो, पीड़ित स्थाई या...
उड़ीसा के वकीलों की हड़ताल: अदालत की निगरानी के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था का होना जरूरी है : सुप्रीम कोर्ट
उड़ीसा के उन वकीलों के कृत्यों की निंदा करते हुए जो उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अदालत का बहिष्कार कर रहे हैं, उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को इस मामले में उड़ीसा के उच्च न्यायालय की ओर से पेश अधिवक्ता सिबाओ संकर मिश्रा से रिपोर्ट मांगी। वकील के प्रस्तुत करने के आधार पर कि अदालत का काम करना लगभग असंभव हो गया था, जस्टिस एस के कौल और के एम जोसेफ की पीठ ने उन्हें अदालत में पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदमों का पता लगाने के साथ दो दिनों के भीतर रिपोर्ट पेश करने को कहा। अदालत ने कहा, ...
ECI की अयोग्यता हटाने या अवधि कम करने की शक्ति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम , 1951 ( RPA ) की धारा 11 को चुनौती दी गई है। इसे इस आधार पर चुनौती दी गई है कि यह धारा भारतीय निर्वाचन आयोग को बेलगाम शक्तियां प्रदान करती है और ये मनमानी और तर्कहीन है जिससे भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होता है। बीजेपी नेता और दिल्ली में वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि, "जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 11 न केवल स्वच्छ लोकतंत्र के पवित्र सिद्धांत के खिलाफ है, बल्कि ये...
सोशल मीडिया का दुरुपयोग : सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया अकाउंट को आधार से जोड़ने वाली याचिकाएं हाईकोर्ट से अपने पास ट्रांसफर कीं
सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास, बॉम्बे और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालयों में दाखिल उन याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित कर लिया है, जिनमें सोशल मीडिया अकाउंट्स को आधार से लिंक करने की मांग की गई है। जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने केंद्र की उस बात को स्वीकार कर लिया है, जिसमें कहा गया है कि केंद्र इस मामले में नियम तैयार कर रही है और 15 जनवरी 2020 तक इसे तैयार कर लिया जाएगा। अगले साल होगी सुनवाई पीठ ने कहा है कि वो इस मामले की सुनवाई जनवरी 2020 के आखिरी सप्ताह में...
BCCI रिफॉर्म : सुप्रीम ने CoA को कार्यमुक्त किया, बिना अनुमति CoA के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को साफ कर दिया कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड बीसीसीआई) के चुनाव के बाद अब पदाधिकारियों के पद ग्रहण करते ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त कमेटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन ( CoA) का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। जस्टिस एस ए बोबडे और जस्टिस एल नागेश्वर राव की पीठ ने मंगलवार को ये आदेश जारी करते हुए कहा कि नियुक्ति के बाद से अभी तक CoA द्वारा किए गए निर्णयों को लेकर दाखिल शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। पीठ ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बिना ना तो CoA के सदस्यों...
INX मीडिया : सुप्रीम कोर्ट ने पी चिदंबरम को जमानत दी, दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला रद्द, लेकिन अभी बाहर नहीं आ पाएंगे
INX मीडिया मामले में पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेसी नेता पी चिदंबरम को सीबीआई केस में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस आर बानुमति की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए कहा है कि इस दौरान चिदंबरम देश छोड़कर बाहर नहीं जाएंगे और जांच में सहयोग करेंगे। पीठ ने एक लाख के निजी मुचलके और दो श्योरटी पर जमानत दी है। दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला रद्द पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया है। फैसले में कहा कि अगर अन्य केस में जरूरत नहीं...
सजायाफ्ता कैदियों की समय-पूर्व रिहाई के लिए हैबियस कॉरपस याचिका का परीक्षण करने को सुप्रीम कोर्ट तैयार
सुप्रीम कोर्ट इस बात का परीक्षण करने के लिए तैयार है कि क्या किसी सरकारी आदेश / नियमों के संदर्भ में किसी कैदी की समय से पहले रिहाई की मांग वाली हैबियस कॉरपस याचिका सुनवाई योग्य है? एक अन्य मुद्दा जो इस मामले में सुना जाएगा, जिसका शीर्षक गृह सचिव (जेल) बनाम एच नीलोफर निशा है, यह है कि क्या राज्य, अपने दम पर उन कैदियों की रिहाई का प्रावधान कर सकता है, जिन्हें ऐसे मामलों में आजीवन कारावास दिया गया है, जिनमें अपराध की सजा मौत की सजा तक है और कैदी को 14 साल की सजा के बाद रिहा किया जा सकता है? ...
विरासत पर आधारित किसी विवादित संपत्ति के दावे का फैसला आपराधिक कार्रवाई से नहीं किया जा सकता, सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि विरासत पर आधारित किसी विवादित संपत्ति का दावा केवल एक उचित सिविल (दीवानी) कार्रवाई में ही किया जा सकता है न कि किसी आपराधिक कार्रवाई में। न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा और न्यायमूर्ति बीआर गवई की पीठ ने एक शिकायत को खारिज कर दिया और कह कि विरासत के संबंध में कोई कानूनी विवाद एक सिविल विवाद है। यह था मामला इस मामले (एम श्रीकांत बनाम तेलंगाना राज्य), में आरोपी और शिकायतकर्ता रिश्तेदार थे। शिकायतकर्ता ने संपत्ति के लाभों से वंचित करने के इरादे से आरोपी पर कुछ...
किसी व्यक्ति की जाति विवाह के आधार पर नहीं बदली जा सकती, पढ़िए मद्रास हाईकोर्ट का फैसला
मद्रास हाईकोर्ट ने दोहराया है कि किसी व्यक्ति की जाति उसके जन्म के आधार पर निर्धारित होती है और इसे विवाह के आधार पर नहीं बदला जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा, ''...यह उन अभाव, आक्रोश और अपमानों की वास्तविक परीक्षा है, जिनको समुदाय के सदस्य ने झेला है, इसलिए केवल विवाह या धर्म परिवर्तन को उस व्यक्ति के खिलाफ नहीं रखा जा सकता, जो वास्तव में अनुसूचित जाति समुदाय में पैदा हुआ था।'' यह आदेश न्यायमूर्ति एन.आनंद वेंकटेश ने याचिकाकर्ता के.शांथी नामक महिला द्वारा अपने वकील आर. करुणानिधि के माध्यम से...
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में ट्रिपल तलाक़ अधिनियम को चुनौती दी, पढ़िए याचिका
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और बोर्ड की कार्यकारी समिति के सदस्य कमाल फारूकी ने सर्वोच्च न्यायालय में मुस्लिम महिलाओं (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) के अधिनियम, 2019 को चुनौती दी है, जो ट्रिपल तालक को अपराध बनाता है। इस चुनौती में यह कहा गया है कि यह अधिनियम असंवैधानिक है और शादी को टूटने की कगार पर लाता है। अधिवक्ता एमआर शमशाद के माध्यम से दायर याचिका में प्रार्थना की गई है कि इस अधिनियम को भारत के संविधान के 14, 15, 19, 20, 21, 25 और 26 अनुच्छेदों के तहत घोषित किया जाए। ...
सोशल मीडिया के जरिए हेट स्पीच और झूठे समाचारों में वृद्धि हुई, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा
सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि पिछले कुछ वर्षों में इंटरनेट / सोशल मीडिया प्लेटफार्मों का उपयोग करते हुए हेट स्पीच, फर्जी समाचार, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों, अपमानजनक पोस्ट और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में तेजी आई है। केंद्र ने कहा है कि एक तरफ प्रौद्योगिकी ने आर्थिक और सामाजिक विकास किया है तो दूसरी तरफ झूठे समाचारों आदि में भारी वृद्धि हुई है। केंद्र ने ये भी कहा है कि लोकतांत्रिक राजनीति के लिए अकल्पनीय व्यवधान पैदा करने के लिए...
आरे में फिलहाल पेड़ काटने पर रोक रहेगी, सुप्रीम कोर्ट ने कहा मेट्रो का काम जारी रह सकता है
सुप्रीम कोर्ट की स्पेशल बेंच ने सोमवार को मुंबई उपनगर में आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई पर 15 नवंबर तक यथास्थिति का आदेश दिया है लेकिन स्पष्ट किया है कि इस दौरान मेट्रो कार शेड के निर्माण कार्य पर कोई रोक नहीं है। सोमवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने मुंबई मेट्रो और मुंबई निगम से हलफनामा दाखिल करने को कहा है कि प्रोजेक्ट को लेकर कितने पेड़ काटे गए। कितने पौधे लगाए गए, उनमें से कितने बचे और कितने पेड़ ट्रांसप्लांट किए गए। पीठ ने इनकी तस्वीरें भी मांगी हैं।...
आरक्षित सीट : चुनाव की तारीख के 12 महीने में जाति वैधता प्रमाण पत्र दाखिल करें प्रत्याशी, वरना पूर्वव्यापी बर्खास्तगी होगी : बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ ने घोषणा की है कि आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार के लिए अनिवार्य है कि वो चुनाव की तारीख के 12 महीने के भीतर जाति की वैधता प्रमाण पत्र प्रस्तुत करे और यदि कोई इसमें विफल रहता है तो इससे पूर्वव्यापी बर्खास्तगी होगी। औरंगाबाद पीठ में मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंदराजोग, न्यायमूर्ति आरवी घुगे और न्यायमूर्ति आरजी अवाचत ने आरक्षित सीट पर ग्राम पंचायत के लिए उम्मीदवार के चुनाव के संदर्भ में अनंत एच उलाहलकर बनाम मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य मामले में उच्च न्यायालय...
रविदास मंदिर : सुप्रीम कोर्ट ने उसी जगह पर मंदिर बनाने के आदेश दिए, केंद्र का 400 वर्ग मीटर जगह देने का प्रस्ताव मंजूर
दिल्ली के तुगलकाबाद में रविदास मंदिर को ढहाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश जारी करते हुए उसी जगह पर मंदिर बनाने के निर्देश दिए हैं । जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार के उस प्रस्ताव पर मंजूरी दे दी जिसमें 200 वर्ग मीटर की जगह 400 वर्ग मीटर जगह मंदिर के लिए देने की बात कही गई। सोमवार को पारित अपने आदेश में पीठ ने कहा है कि मंदिर के लिए स्थायी निर्माण होगा और केंद्र सरकार निर्माण के लिए 6 हफ्ते में एक समिति का गठन करेगी । पीठ ने स्पष्ट किया है कि मंदिर में और...


















