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विरासत पर आधारित किसी विवादित संपत्ति के दावे का फैसला आपराधिक कार्रवाई से नहीं किया जा सकता, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

LiveLaw News Network
22 Oct 2019 3:39 AM GMT
विरासत पर आधारित किसी विवादित संपत्ति के दावे का फैसला आपराधिक कार्रवाई से नहीं किया जा सकता, सुप्रीम कोर्ट का फैसला
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि विरासत पर आधारित किसी विवादित संपत्ति का दावा केवल एक उचित सिविल (दीवानी) कार्रवाई में ही किया जा सकता है न कि किसी आपराधिक कार्रवाई में।

न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा और न्यायमूर्ति बीआर गवई की पीठ ने एक शिकायत को खारिज कर दिया और कह कि विरासत के संबंध में कोई कानूनी विवाद एक सिविल विवाद है।

यह था मामला

इस मामले (एम श्रीकांत बनाम तेलंगाना राज्य), में आरोपी और शिकायतकर्ता रिश्तेदार थे। शिकायतकर्ता ने संपत्ति के लाभों से वंचित करने के इरादे से आरोपी पर कुछ दस्तावेजों के निष्पादन के बारे में आरोप लगाए थे। उच्च न्यायालय ने, हालांकि कुछ आरोपियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई को रद्द कर दिया, लेकिन इसमें से एक अभियुक्त के संबंध में उसे खारिज करने से इनकार कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

हरियाणा राज्य बनाम भजनलाल का उल्लेख करते हुए, पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपील पर विचार करते हुए कहा कि प्राथमिकी में आरोप या शिकायत कहां है, भले ही उन्हें उनके अंकित मूल्य पर लिया गया हो और उनकी संपूर्णता में स्वीकार किया गया हो, लेकिन प्रथम दृष्टया आरोपियों के खिलाफ मामला नहीं बनता। उच्च न्यायालय की कार्रवाई को रद्द करने में उचित होगा।

अदालत ने कहा,

"हमारे विचार में उठाए गए मुद्दे कानूनी उत्तराधिकारियों के बीच विरासत के संबंध में सिविल विवाद को दर्शाते हैं। हम यह समझने में विफल हैं कि कैसे वसीयत के तहत विरासत के संबंध में विवाद में एक आपराधिक मुकदमेबाजी के तहत निर्णय लिया जा सकता है। हम पाते हैं कि यह एक उपयुक्त सिविल कार्रवाई में ही किया जा सकता है। यही नहीं, शिकायतकर्ता सहित विभिन्न पक्षों द्वारा उस संबंध में दीवानी कार्रवाई पहले से ही शुरू की जाती है।"

अदालत ने आगे कहा कि शिकायत में कथित रूप से धोखाधड़ी किए जाने वाले दस्तावेज मुकदमों में विचार के लिए आएंगे और आपराधिक कार्रवाई के खिलाफ सिविल कार्रवाई में विरोधाभास की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस प्रकार, पीठ ने अपील को मंज़ूर किया और शिकायत को रद्द कर दिया।

अदालत के फैसले की कॉपी डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें


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