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आरे में फिलहाल पेड़ काटने पर रोक रहेगी, सुप्रीम कोर्ट ने कहा मेट्रो का काम जारी रह सकता है

LiveLaw News Network
21 Oct 2019 11:07 AM GMT
आरे में फिलहाल पेड़ काटने पर रोक रहेगी, सुप्रीम कोर्ट ने कहा मेट्रो का काम जारी रह सकता है
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सुप्रीम कोर्ट की स्पेशल बेंच ने सोमवार को मुंबई उपनगर में आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई पर 15 नवंबर तक यथास्थिति का आदेश दिया है लेकिन स्पष्ट किया है कि इस दौरान मेट्रो कार शेड के निर्माण कार्य पर कोई रोक नहीं है।

सोमवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने मुंबई मेट्रो और मुंबई निगम से हलफनामा दाखिल करने को कहा है कि प्रोजेक्ट को लेकर कितने पेड़ काटे गए। कितने पौधे लगाए गए, उनमें से कितने बचे और कितने पेड़ ट्रांसप्लांट किए गए। पीठ ने इनकी तस्वीरें भी मांगी हैं। पीठ ने ये भी बताने को कहा है कि क्या इस क्षेत्र में कोई व्यावसायिक इमारत भी प्रस्तावित है।

"मुंबई के लिए मेट्रो ज़रूरी"

हालांकि इस दौरान मेट्रो की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि याचिकाकर्ता के आरोप गलत हैं कि वहां कोई अन्य निर्माण भी होना है। उन्होंने कहा कि आरे में 2600 पेड़ काटे गए हैं। मेट्रो मुंबई जैसे शहर के लिए जरूरी है। दिल्ली में मेट्रो से 67 लाख लोग चलते हैं जिसकी वजह से सात लाख गाड़ियां सड़कों से कम हो गई हैं।

वहीं महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जो कुछ भी काटना है, काट दिया गया है, आगे और कटाई नहीं होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था स्टेटस

इससे पहले सात अक्टूबर को पेड़ काटने पर रोक लगाते हुए पीठ ने महाराष्ट्र सरकार से कहा था कि अगर कोई एक्टिविस्ट हिरासत में है तो उसे फौरन रिहा किया जाए। पीठ ने सरकार को ये भी बताने को कहा कि उक्त जमीन का स्टेटस क्या है और अब तक लगाए गए पौधों का ब्योरा भी मांगा था।

महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि अब और पेड़ नहीं काटे जाएंगे और दशहरा की छुट्टी के बाद पर्यावरण मामलों की बेंच द्वारा पेड़ों की कटाई की वैधता तय की जा सकती है।

चीफ जस्टिस ने पत्र मिलने के बाद किया था पीठ का गठन

जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ का गठन किया गया जब कानून के छात्रों के एक समूह ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को पत्र लिखकर आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई को रोकने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी।

वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े और गोपाल शंकरनारायणन छात्रों के लिए उपस्थित हुए। उन्होंने प्रस्तुत किया था कि यह मुद्दा कि आरे वन है या नहीं, सर्वोच्च न्यायालय में पहले से लंबित है। एनजीटी इस मुद्दे पर विचार कर रहा है कि क्या क्षेत्र इको सेंसिटिव जोन है। इसलिए अधिकारियों को पेड़ काटने से बचना चाहिए।

दरअसल बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक रूप से कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि याचिकाकर्ता के सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले अधिकारियों ने पेड़ों को काटना शुरू नहीं किया होगा।गौरतलब है कि बॉम्बे हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंदराजोग और जस्टिस भारती डांगरे की पीठ ने गोरेगांव में आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई को चुनौती देने वाली एनजीओ और पर्यावरण एक्टिविस्ट की पांच याचिकाओं को खारिज कर दिया था।

कोर्ट ने कहा था कि शहरी विकास विभाग द्वारा मेट्रो कार शेड (24 अगस्त 2017 और 9 नवंबर 2017 को जारी अधिसूचनाओं के अनुसार) क्षेत्र को आरक्षित करने के फैसले को पिछले मामले में बॉम्बे उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। तब डिवीजन बेंच द्वारा चुनौती पर सुनवाई नहीं की गई थी।

26 अक्टूबर, 2018 को दिए गए अपने फैसले में उस पीठ ने उल्लेख किया था कि यह बताने के लिए कि भूमि एक जंगल थी, रिकॉर्ड पर कुछ भी नहीं था। उस फैसले के खिलाफ याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इसके अलावा एक और मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में लंबित है क्योंकि इस क्षेत्र को वन घोषित करने और 2016 में केंद्रीय वन मंत्रालय के पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ईको सेंसिटिव जोन के लिए इस क्षेत्र को बाहर करने की अधिसूचना को चुनौती दी गई थी।

इसका हवाला देते हुए उच्च न्यायालय ने 4 अक्टूबर के अपने फैसले में कहा कि याचिकाओं पर विचार नहीं किया जा सकता है क्योंकि इस मुद्दे पर पहले से ही एक समन्वय पीठ द्वारा निर्णय ले लिया गया था।

मुंबई रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड के लिए मेट्रो कार शेड के निर्माण के लिए आरे कॉलोनी में 2000 से अधिक पेड़ों को काटने का प्रस्ताव दिया गया था। पर्यावरणविदों के अनुसार आरे कॉलोनी, 1,287 हेक्टेयर में है और संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान से सटकर स्थित है और ये महानगर का एक बड़ा फेफड़ा है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने की थी याचिका खारिज

4 अक्टूबर को बॉम्बे हाईकोर्ट ने ट्री अथॉरिटी के मेट्रो कार शेड प्रोजेक्ट के लिए 2646 पेड़ों को काटने के फैसले को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया था।

याचिका में कहा गया है,

"कार शेड' के लिए 33 हेक्टेयर भूमि लेने की मांग की गई है। यह मीठी नदी के तट पर है जिसमें सहायक नदियां और चैनल हैं जो इसे बहते हैं और नदी में खाली हो जाते हैं। इसकी अनुपस्थिति मुंबई में बाढ़ आ सकती है और यह इसमें 3500 से अधिक पेड़ हैं जिनमें से 2238 को काट दिया जाना प्रस्तावित है। प्रश्न यह है कि प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग के लिए चुने गए स्थल के रूप में एक जंगल, जिसमें 3500 पेड़ हों, नदी के किनारे क्यों होना चाहिए? "


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