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मद्रास हाईकोर्ट ने जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज किया
मद्रास हाईकोर्ट ने जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज किया

मद्रास उच्च न्यायालय ने गुरुवार को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली एक याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने 22 अक्टूबर को दलील की स्थिरता पर अपना आदेश सुरक्षित रखा था, जिसमें मांग की गई थी कि अधिनियम को असंवैधानिक और शून्य घोषित किया जाए। जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019, राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों - जम्मू और कश्मीर और लद्दाख में विभाजित करने का प्रावधान करता है। संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जे को केंद्र द्वारा...

अभियुक्त आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत वैध लाइसेंस धारक हो, तभी दी जा सकती है अधिनियम की धारा 7 के तहत सजा : बॉम्बे हाईकोर्ट
अभियुक्त आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत वैध लाइसेंस धारक हो, तभी दी जा सकती है अधिनियम की धारा 7 के तहत सजा : बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने पिछले ही दिनों उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत एक 23 साल पुराने मामले में एक जयेंद्र तलरेजा को दोषी ठहराया गया था। इस मामले में पुलिस ने उसकी दुकान की तलाशी ली थी, जिसमें उसके पास नकली गैस रैगुलेटर पाए गए थे। इसी के परिणामस्वरूप आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 7 रिड विद धारा 3 के तहत उसे दोषी करार दिया गया था। इस मामले में उस पर द्रवित पेट्रोलियम गैस (आपूर्ति और वितरण का विनियमन) आदेश, 1988 के क्लाज के उपखंड (3) के उल्लंघन का मामला बनाया गया था। 4 नवंबर, 1997 को दिए गए...

आवासीय इलाकों के निकट ताड़ी की दुकानें शांति से जीने के अधिकार को प्रभावित करती है: न्यायमित्र ने करेल हाईकोर्ट से कहा
आवासीय इलाकों के निकट ताड़ी की दुकानें शांति से जीने के अधिकार को प्रभावित करती है: न्यायमित्र ने करेल हाईकोर्ट से कहा

केरल हाईकोर्ट के समक्ष एक न्याय मित्र की ओर से सौंपी गयी रिपोर्ट में कहा गया है कि आवासीय इलाकों के निकट ताड़ी की दुकानें चलाने की अनुमति देना लोगों के शांतिपूर्वक जीवन जीने के अधिकार को प्रभावित करता है और फलस्वरूप उनके निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है। न्यायमूर्ति मोहम्मद मुश्ताक़ ने आवासीय इलाके से ताड़ी की दुकानों को हस्तांतरित करने संबंधी विलासिनी की याचिका पर विचार करते हुए वकील अशोक एम किनी और आर टी प्रदीप को यह पता करने के लिए न्यायमित्र नियुक्त किया था कि क्या ताड़ी की दुकानों...

अपील दर्ज करने की सीमा की गणना उस आदेश की प्रमाणित प्रति में दर्ज तस्दीक के आधार पर होनी चाहिए : सुप्रीम कोर्ट
अपील दर्ज करने की सीमा की गणना उस आदेश की प्रमाणित प्रति में दर्ज तस्दीक के आधार पर होनी चाहिए : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल के अपने एक फैसले में विशेष अनुमति याचिका को खारिज करते हुए कहा कि अदालत अपील की सीमा की गणना प्रमाणित प्रति में दर्ज तस्दीक के आधार पर होनी चाहिए। इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक जिला अदालत के फैसले को सही ठहराया था, जिसने एक आवेदन को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि इसमें एक अपील को इस आधार पर खारिज करने की मांग की गई थी कि वह परिसीमन से प्रतिबंधित है। परिसीमन की अवधि की गणना अपील के तहत आदेश की प्रमाणित प्रति में जो तस्दीक थी, उसके आधार पर की गई थी। यह कहा गया कि...

किसी मामले की मीडिया रिपोर्टिंग पर पाबंदी की अपील उसी अदालत में दायर की जा सकती है,  जहां मूल अपील सुनवाई के लिए लंबित है : दिल्ली हाईकोर्ट
किसी मामले की मीडिया रिपोर्टिंग पर पाबंदी की अपील उसी अदालत में दायर की जा सकती है, जहां मूल अपील सुनवाई के लिए लंबित है : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी मामले की मीडिया रिपोर्टिंग पर अगर पाबंदी की मांग की जाती है तो इसके लिए अपील उसी अदालत में दायर की जा सकती है जिस अदालत में मूल अपील सुनवाई के लिए लंबित है, किसी अन्य अदालत में नहीं। वर्तमान मामले में, याचिकाकर्ता ने अदालत से अपनी याचिका के माध्यम से मांग की थी कि वह प्रतिवादी को कार्यस्थल पर उसके यौन उत्पीड़न के बारे में सुनवाई का विवरण इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को देने से मना करे। याचिकाकर्ता ने अपनी दलील में कहा, 1. प्रतिवादी लगातार अपने केस को बेहतर करता...

भावी मुख्य न्यायाधीश बोबडे ने कहा, कॉलेजियम प्रणाली में पर्याप्त पारदर्शिता, सरकार न्यायिक नियुक्तियों में देरी नहीं करती
भावी मुख्य न्यायाधीश बोबडे ने कहा, कॉलेजियम प्रणाली में पर्याप्त पारदर्शिता, सरकार न्यायिक नियुक्तियों में देरी नहीं करती

एनडीटीवी को दिए एक साक्षात्कार में देश के भावी मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एस ए बोबडे ने कहा है कि कॉलेजियम प्रणाली में पर्याप्त पारदर्शिता है। जस्टिस बोबडे ने कॉलेजियम के निर्णयों में अधिक पारदर्शिता की आवश्यकता के बारे में एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि, "मुझे लगता है कि पर्याप्त पारदर्शिता है। अधिकांश समय जब कुछ लोग अधिक पारदर्शिता की मांग करते हैं तो वे इसका कारण जानना चाहते हैं कि किसी का चयन क्यों नहीं किया गया। वे इतने इच्छुक नहीं हैं कि किसी को क्यों चुना गया। वे रुचि रखते हैं कि किसी को...

INX मीडिया केस : दिल्ली हाईकोर्ट ने चिदंबरम को प्रायवेट वार्ड में भर्ती करने के विषय में फैसला लेने के लिए AIIMS में बोर्ड बनाने का निर्देश दिया
INX मीडिया केस : दिल्ली हाईकोर्ट ने चिदंबरम को प्रायवेट वार्ड में भर्ती करने के विषय में फैसला लेने के लिए AIIMS में बोर्ड बनाने का निर्देश दिया

INX मीडिया मामले में मेडिकल ग्राउंड पर अंतरिम जमानत के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम की याचिका पर विचार करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को निर्देश दिया कि एम्स में एक बोर्ड का गठन किया जाना चाहिए और डॉक्टर नागेश्वर रेड्डी इसका एक हिस्सा हों। बोर्ड तब एम्स के निजी वार्ड में चिदंबरम को भर्ती करने पर अपनी रिपोर्ट देगा। अगर बोर्ड सिफारिश करता है, तो चिदंबरम को आगे के उपचार के लिए एम्स में निजी स्टरलाइज़्ड (जीवाणुरहित) वार्ड में भर्ती कर दिया जाएगा। पूर्व वित्त मंत्री ने अंतरिम जमानत...

न्यायालय अवमानना के अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए किए गए निर्माण को गिराने का आदेश दे सकता है, पढ़िए कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला
न्यायालय अवमानना के अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए किए गए निर्माण को गिराने का आदेश दे सकता है, पढ़िए कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि अवमानना के अधिकार का प्रयोग करते हुए अदालत के इस बारे में विशेष आदेश के बावजूद किये गए काम को हटाने का आदेश अदालत दे सकती है। न्यायमूर्ति रवि मलिमथ और जस्टिस एचपी सन्देश की पीठ ने अदालत अवमानना अधिनियम के तहत सुरेश कोठारी को दो माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई और रजिस्ट्री को 2000 रुपये का भुगतान करने को कहा। अदालत ने इसके अलावा आरोपी को इस आदेश की प्रति मिलने के एक महीना के भीतर अवैध निर्माण हटाने को कहा। क्या है मामला किशिन पंजाबी ने 2015 में दीवानी...

निष्पक्ष सुनवाई की अवधारणा में आरोपी, पीड़ित, समाज एवं समुदाय के हितों के बीच संतुलन ज़रूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
निष्पक्ष सुनवाई की अवधारणा में आरोपी, पीड़ित, समाज एवं समुदाय के हितों के बीच संतुलन ज़रूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बार फिर कहा है कि मुकदमा वापस लेने के लिए लिखित अनुमति का अधिकार राज्य सरकार के पास है, साथ ही उसने मुकदमा वापस लेने की अभियोजन पक्ष की अर्जी ठुकराने का आदेश निरस्त कर दिया। हाईकोर्ट ने अभियोजन पक्ष की अर्जी पर फिर से विचार करने का भी ट्रायल कोर्ट को आदेश दिया। न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने इस बाबत राज्य सरकार द्वारा आपराधिक मुकदमे की वापसी (2017) के मामले में हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ द्वारा निर्धारित उस दृष्टिकोण का हवाला दिया जिसमें यह व्यवस्था दी गयी थी कि "निष्पक्ष...

फेसबुक ने दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बैंच में कंटैंट के ग्लोबल ब्लॉकिंग के आदेश खिलाफ अपील दायर की
फेसबुक ने दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बैंच में कंटैंट के ग्लोबल ब्लॉकिंग के आदेश खिलाफ अपील दायर की

सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी फेसबुक ने बुधवार को जस्टिस प्रतिभा सिंह की एकल पीठ द्वारा बाबा रामदेव के मानहानि की सामग्री हटाने के लिए फेसबुक को दिए गए वैश्विक निषेधाज्ञा लागू करने के आदेश के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच में अपील दायर की। न्यायमूर्ति प्रतिभा सिंह की एकल पीठ ने अपने अंतरिम आदेश में कहा था कि जब तक कि अपलोडिंग भारत से होती है या सूचना / डाटा भारत में किसी कंप्यूटर संसाधन पर स्थित है, भारतीय अदालतों का अधिकार होगा कि वे वैश्विक निषेधाज्ञा का आदेश दे सकें। ...

राजस्थान हाईकोर्ट ने पहलू खान, उसके दो बेटों और ड्राइवर के खिलाफ गो तस्करी का केस खारिज किया
राजस्थान हाईकोर्ट ने पहलू खान, उसके दो बेटों और ड्राइवर के खिलाफ गो तस्करी का केस खारिज किया

अप्रैल 2017 में मॉब लिंचिंग का शिकार हुए पहलू खान और उनके दो बेटों और ड्रायवर के खिलाफ गो तस्करी का मामला राजस्थान हाईकोर्ट ने बुधवार को खारिज कर दिया। पहलू खान और उनके बेटों की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने मॉब लिंचिंग के आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करने के साथ-साथ पहलू खान और उनके बेटों और ड्रायवर पर भी गो तस्करी के मामले में केस दर्ज किया था। 2017 में हिंसक भीड़ ने पहलू खान की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। न्यायमूर्ति पंकज भंडारी की एकल पीठ ने राजस्थान गोजातीय पशु...

केंद्र सरकार ने पटना, मेघालय और त्रिपुरा उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीशों के स्थानांतरण की अधिसूचना जारी की
केंद्र सरकार ने पटना, मेघालय और त्रिपुरा उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीशों के स्थानांतरण की अधिसूचना जारी की

केंद्र सरकार ने मद्रास, मध्य प्रदेश और पटना के उच्च न्यायालयों में नए मुख्य न्यायाधीशों के तबादले और नियुक्ति की अधिसूचना जारी की है। बुधवार को जारी अधिसूचनाओं में, केंद्र ने इन नियुक्ति को अधिसूचित किया। पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए पी साही को मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में अधिसूचित किया गया । मेघालय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए के मित्तल को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में अधिसूचित किया गया। त्रिपुरा...

डीके शिवकुमार की पत्नी और मां ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया, ईडी से कोई नया समन नहीं मिला
डीके शिवकुमार की पत्नी और मां ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया, ईडी से कोई नया समन नहीं मिला

कर्नाटक कांग्रेस के नेता डीके शिवकुमार की पत्नी उषा शिवकुमार और मां गोवरमा ने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट को सूचित किया कि उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से कोई ताज़ा समन नहीं मिला है। याचिकाकर्ताओं ने न्यायमूर्ति बृजेश सेठी के समक्ष यह तर्क भी दिया कि संशोधित याचिका को नया समन प्राप्त किए बिना दायर नहीं किया जा सकता। उषा शिवकुमार और गोवरमा ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी द्वारा पूछताछ के लिए उन्हें जारी समन को चुनौती देने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया था, जिसमें डीके शिवकुमार...

घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 20 के तहत कार्रवाई में मजिस्ट्रेट सीआरपीसी की धारा 125 के तहत अधिकार हासिल नहीं कर सकता : सुप्रीम कोर्ट
घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 20 के तहत कार्रवाई में मजिस्ट्रेट सीआरपीसी की धारा 125 के तहत अधिकार हासिल नहीं कर सकता : सुप्रीम कोर्ट

घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत गुजारा राशि की मांग करने वाली याचिका को खारिज करने के बाद क्या कोई मजिस्ट्रेट सीआरपीसी की धारा 125 के तहत अधिकार हासिल करके भरण पोषण की राशि के भुगतान का आदेश दे सकता है? पी राजकुमार बनाम योगा @योगलक्ष्मी मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यही मुद्दा विचारणीय था और अदालत ने इसका फैसला न में दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इस मामले में घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 20 के तहत भरण पोषण की राशि के भुगतान की अपील खारिज कर दी थी। लेकिन इसी मामले में सीआरपीसी की धारा 125 के...

अयोध्या, सबरीमाला, रफाल और अन्य : 8 दिनों में मुख्य न्यायाधीश गोगोई को करने हैं इन बड़े मामलों के फैसले
अयोध्या, सबरीमाला, रफाल और अन्य : 8 दिनों में मुख्य न्यायाधीश गोगोई को करने हैं इन बड़े मामलों के फैसले

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को 17 नवंबर को अपने रिटायरमेंट से पहले बचे आठ दिनों के भीतर छह महत्त्वपूर्ण मामलों में फैसला सुनाना है। सुप्रीम कोर्ट में इस समय दिवाली की छुट्टियां चल रही हैं और छुट्टियों के बाद अब काम 4 नवंबर को शुरू होगा। अयोध्या-बाबरी मस्जिद का मामला इन सभी मामलों में सर्वाधिक चर्चित है अयोध्या-बाबरी मस्जिद का मामला। पांच जजों की संवैधानिक पीठ इस मामले की सुनवाई पूरी कर चुकी है और 16 अक्टूबर को अदालत ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा। इस पीठ की अध्यक्षता...

अभियोजन पक्ष अपराध साबित करने में विफल रहा POCSO कोर्ट ने वालयार बलात्कार और मौत मामले के आरोपियों को बरी किया
'अभियोजन पक्ष अपराध साबित करने में विफल रहा' POCSO कोर्ट ने वालयार बलात्कार और मौत मामले के आरोपियों को बरी किया

दो नाबालिग लड़कियों (जो सगी बहन थीं ) के बलात्कार और उनकी मौत के मामले में सभी चार आरोपियों को बरी करने के बाद केरल के नागरिकों में बड़े पैमाने पर आक्रोश बढ़ रहा है। यह घटना वर्ष 2017 की है, जो केरल के पलक्कड़ जिले के वालयार में हुई थी। बड़ी बहन जो 13 साल की थी, वह 13 जनवरी, 2017 को अपने घर में फांसी पर लटकी पाई गई थी। इस घटना के दो महीने के बाद 9 साल की उसकी छोटी बहन भी 4 मार्च, 2017 को अपने घर में फांसी पर लटकी पाई गई। दोनों अनुसूचित जाति समुदाय की थीं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, दोनों...

हस्ताक्षर की गई कार्बन कॉपी जो मूल दस्तावेज़ की तरह उसी प्रक्रिया से बनाई गई है, साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य : सुप्रीम कोर्ट
हस्ताक्षर की गई कार्बन कॉपी जो मूल दस्तावेज़ की तरह उसी प्रक्रिया से बनाई गई है, साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हस्ताक्षर की गई कार्बन कॉपी जो मूल दस्तावेज़ की तरह उसी प्रक्रिया से बनाई गई है, उसे भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 62 के अनुसार मूल दस्तावेज की तरह साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य किया जाएगा। इस आधार पर न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और अनिरुद्ध बोस की पीठ ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा पारित एक फैसले को पलट दिया, जिसमें हस्ताक्षरित कार्बन कॉपी को मूल दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने से इनकार कर दिया गया था। इस मामले पर नए सिरे से विचार करने के लिए हाईकोर्ट को...

विदेश जाने के लिए पूर्व अनुमति लेने के लिए कोर्ट जाने में असुविधा के आधार पर जमानत शर्तों को हल्का नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट
विदेश जाने के लिए पूर्व अनुमति लेने के लिए कोर्ट जाने में असुविधा के आधार पर जमानत शर्तों को हल्का नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि विदेश यात्रा की अनुमति लेने के लिए अदालत के पास जाने को लेकर महज असुविधा किसी अग्रिम जमानत आदेश में लगाई गई शर्तों को हल्का करने का कारण नहीं हो सकती। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट की पीठ ने पीड़ित के पिता द्वारा पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर एक अपील पर विचार किया, जिसमें आरोपियों द्वारा दायर किए गए आवेदन की अनुमति देकर अग्रिम जमानत के आदेश में शर्तों को हल्का कर दिया गया था। अपने आवेदन में अभियुक्त ने तर्क दिया कि...

याचिका को खारिज करने की अर्जी पर विचार करते हुए वाद के कथन की संपूर्णता को ध्यान में रखना  आवश्यक : सुप्रीम कोर्ट
याचिका को खारिज करने की अर्जी पर विचार करते हुए वाद के कथन की संपूर्णता को ध्यान में रखना आवश्यक : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया है कि किसी भी याचिका को खारिज करने की अर्जी पर विचार करते हुए वाद के कथन की संपूर्णता को ध्यान में रखा जाना आवश्यक है। सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश VII नियम 11 के अनुसार, निम्नलिखित मामलों में एक वाद को खारिज कर दिया जाएगा :- # जहां यह कार्रवाई का कारण नहीं बताया गया है; # जहां राहत का दावा किया गया लेकिन इसका मूल्यांकन नहीं किया गया है और वादी, न्यायालय द्वारा तय किए जाने वाले समय के भीतर मूल्यांकन को सही करने के लिए आवश्यक होने पर, ऐसा करने में विफल रहता...