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दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 अब तक के सबसे धर्मनिरपेक्ष कानून में से एक : इलाहाबाद हाईकोर्ट
दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 समुदाय केंद्रित या धर्म केंद्रित नहीं है, शायद देश में अब तक के सबसे धर्मनिरपेक्ष अधिनियम में से एक है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी की। न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता में यह प्रावधान लैंगिक न्याय का एहसास कराने के लिए संवैधानिक वादे को पूरा करने का एक उपकरण है। अदालत तलाक के बाद अपनी पत्नी को भरण पोषण की मज़ूरी देने को चुनौती देने वाली पति की याचिका पर विचार कर रही थी। याचिका में...
दिल्ली बार काउंसिल ने विज्ञापन करने के खिलाफ अधिवक्ताओं को चेतावनी दी, दो वकीलों और एक एनजीओ के खिलाफ कार्रवाई
दिल्ली बार काउंसिल ने 24 अक्टूबर को जारी एक सार्वजनिक सूचना में अधिवक्ताओं को उनकी सेवाओं का विज्ञापन करने और काम मांगने का की याचना करने के खिलाफ चेतावनी दी है। उल्लेखनीय रूप से एक वकील को बार काउंसिल ऑफ इंडिया रूल्स के चैप्टर II के तहत सेक्शन IV के क्लॉज 36 के तहत अपने सहयोगियों के प्रति एक कर्तव्य है, जो पेशेवर आचरण और शिष्टाचार के मानकों को निर्धारित करता है, और प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से काम मांगने की याचना या विज्ञापन करने से रोकता है। अधिवक्ता के लिए परिपत्रों, विज्ञापनों, टाउट्स,...
अवैध ढांचों को सिर्फ इसलिए दोबारा बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि उन्हें तोड़ते समय प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ था : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अवैध ढांचों को सिर्फ इसलिए फिर से बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि इन्हें तोड़ते समय प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ था। न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की खंडपीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट की उस 'रेगुलर प्रैक्टिस'को अस्वीकार कर दिया ,जिसमें उन ढांचों के पुनर्निर्माण की अनुमति दे दी जाती थी, जिनको उचित प्रक्रियाओं का पालन किए बिना ही ध्वस्त कर दिया गया था। पीठ ने टिप्पणी की-"हाईकोर्ट स्वयं इस बात से अवगत है कि इनमें से कुछ ढांचों का निर्माण बिना...
जस्टिस बोबडे होंगे देश के अगले मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति ने लगाई मुहर
जस्टिस एस ए बोबडे देश के 47 वें मुख्य न्यायाधीश होंगे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उनकी नियुक्ति के लिए अपनी मुहर लगा दी है। वो 18 नवंबर को पदभार संभालेंगे। इससे पहले 18 अक्टूबर को देश के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को संबोधित पत्र में जस्टिस एस ए बोबडे को अगला मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की थी। मुख्य न्यायाधीश गोगोई इस साल 17 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं और परंपरा के अनुसार यह स्पष्ट है कि जस्टिस बोबड़े इस पद पर नियुक्त होंगे। ...
क्या मजिस्ट्रेट के पास जांच टीम में बदलाव करने के अधिकार हैं? सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया
क्या दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156 (3) के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास जांच टीम में बदलाव करने के आदेश देने का अधिकार क्षेत्र है? सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर दायर एक विशेष अवकाश याचिका पर सुनवाई करेगा। यह था मामलाएक व्यक्ति ने यह प्रार्थना करते हुए गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया कि डूंगरा पुलिस स्टेशन द्वारा वर्तमान में एक अपराध की जांच को सीआईडी क्राइम या किसी ऐसे अधिकारी को स्थानांतरित कर दी जाए जो पुलिस कमिशनर से नीचे की रैंक का न हो। उक्त याचिका का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट...
शिकायत दर्ज करवाने में देरी के एकमात्र आधार पर मामले को खारिज नहीं किया जा सकता, केरल हाईकोर्ट ने आईपीसी 420 के तहत मामले पर सुनाया फैसला
जब शिकायत दर्ज करने के लिए कानून में कोई सीमा निर्धारित नहीं होती है, तो देरी के एकमात्र आधार पर इस कानून के अंतर्गत कोई मामला रद्द नहीं किया जा सकता। केरल हाईकोर्ट ने आईपीसी 420 के एक मामले में फैसला सुनाते हुए यह कहा। इस मामले [सिंधु एस पानिकर बनाम ए .बालाकृष्णन ], में शिकायतकर्ता द्वारा कथित लेनदेन 10.04.2007 को हुआ था। आरोपी द्वारा शिकायतकर्ता को कथित रूप से दिया गया चेक दिनांक 16.05.2007 का था। आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत शिकायत 29.03.2011 को दर्ज की गई थी। ...
क्या मजिस्ट्रेट आरोपी को समन के मामले में रिहा कर सकता है, विशेषकर एनआई की धारा 138 के तहत मामले में? दिल्ली हाईकोर्ट के सामने हैं ये प्रश्न
दिल्ली हाईकोर्ट हाल ही में सीआरपीसी की धारा 395 के तहत समन मामलों में किसी आरोपी को रिहा करने के मजिस्ट्रेट के अधिकार के बारे में गौर करने पर सहमत हो गया है। न्यायमूर्ति मनमोहन और संगीता धींगरा सहगल ने इस मामले में वरिष्ठ वकील एन हरिहरन को अमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। अदालत के समक्ष विचार करने के लिए निम्नलिखित प्रश्न हैं। प्रश्न 1. क्या किसी मजिस्ट्रेट को आम शिकायत विशेषकर एनआई की धारा 138 पर आधारित समन से जुड़े अदालती कार्यवाही वाले मामलों में किसी आरोपी के अदालत में पेश होने पर उसको...
अगर मामले का सीधा असर बोलने की स्वतंत्रता पर है तो मजिस्ट्रेट बिना कुछ सोचे इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने का आदेश नहीं दे सकते : मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने 90 साल के एक तमिल लेखक के राजनारायणन के खिलाफ आपराधिक मामले को निरस्त करते हुए मजिस्ट्रेट से कहा कि वह बिना कुछ सोचे समझे एफआईआर दर्ज करने का आदेश नहीं दें अगर इस मामले का सीधा प्रभाव व्यक्ति के बोलने की आजादी पर होता है। राजनारायणन के खिलाफ आरोप यह था कि उन्होंने अनुसूचित जाति समुदाय का कथित रूप से अपमान किया है। पेरूमल मुरुगन के मामले पर भरोसा जताते हुए हाईकोर्ट ने कहा, "यह सही है कि शिकायत के स्तर पर मजिस्ट्रेट को सिर्फ शिकायत में जो आरोप लगाए गए हैं उस तक ही खुद को...
क्राइम सीन रिकॉर्ड करने के लिए पुलिस कंट्रोल वैन में मोबाइल/आई पैड हों, दिल्ली हाईकोर्ट ने दिए निर्देश
दिल्ली उच्च न्यायालय दिल्ली पुलिस के आयुक्त को निर्देश दिया है कि वे पुलिस कंट्रोल रूम वैन को मोबाइल फोन या आईपैड से लैस करें ताकि उन्हें अपराध की जगह (क्राइम सीन) को कुशलतापूर्वक दर्ज करने में सक्षम बनाया जा सके और जिसे कानूनी सबूत के रूप में अदालत में पेश किया जा सके। यह मानते हुए कि पीसीआर वैन को अपराध स्थल के बारे में किसी भी जानकारी के लिए सबसे पहले प्रतिक्रिया देनी होती है, न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की डिवीजन बेंच ने आयुक्त को पुलिस कर्मियों को उचित प्रशिक्षण...
व्याभिचार के बार-बार आरोप लगाना जीवनसाथी के साथ क्रूरता, उत्तराखंड हाईकोर्ट का फैसला
पारिवारिक न्यायालय, देहरादून द्वारा पारित न्यायिक पृथक्करण के एक फैसले को पलटते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दोहराया कि जीवनसाथी द्वारा लगातार व्याभिचार के आरोप लगाना क्रूरता की श्रेणी में आएगा। यह स्थिति पहले रविन्द्र कौर बनाम मनजीत सिंह (मृत), 2019 SCC ओनली SC 1069 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई थी, जिसमें यह माना गया था कि पति द्वारा पत्नी के खिलाफ नाजायज संबंधों के आरोप लगाना उसके प्रति मानसिक क्रूरता है। यह देखते हुए कि मामले में पति 2006 से अपनी पत्नी के खिलाफ व्याभिचार के आरोप लगा...
अभियुक्त किसी भी समाज में रहने लायक नहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट ने बलात्कार और हत्या के तीन अभियुक्तों की मौत की सजा की पुष्टि की
बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंड पीठ ने अहमदनगर जिले में स्कूल से वापस घर लौट रही 16 साल की लड़की से बलात्कार करने और उसकी हत्या करने के लिए दोषी ठहराए गए तीन लोगों को मौत की सजा की पुष्टि की है। न्यायमूर्ति टी.वी नलवाडे और न्यायमूर्ति केके सोनवणे की खंडपीठ ने मामले के तीनों आरोपियों संतोष लोनकर, मंगेश लोनकर और दत्तात्रय शिंदे की ओर से दायर आपराधिक अपील को खारिज कर दिया। उन्हें यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम की धारा 3,4,5,6 और भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 376 ए, 376 डी और 376 (1)...
चाहे विक्रय विलेख पर राशि कितनी ही दर्ज हो, मारुडु फ्लैट मालिक 25 लाख रुपए के अंतरिम मुआवज़े के हक़दार : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जल्द ही ध्वस्त होने वाले कोच्चि के मारुडु में अपार्टमेंट परिसर का प्रत्येक फ्लैट मालिक 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा प्राप्त करने का हकदार है, चाहे विक्रय विलेख (बिक्री नामा) में कितनी ही राशि का उल्लेख हो। जस्टिस अरुण मिश्रा और रवींद्र भट्ट की खंडपीठ ने इस बात का संज्ञान लिया कि बेंच द्वारा नियुक्त केरल हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस के बालकृष्णन नायर की अध्यक्षता वाली समिति ने बिक्री नामा पर दिखाई गई कीमतों से कम कीमत देने पर विचार करने को कहा। इसके...
डीके शिवकुमार की जमानत को ED ने दी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार को जमानत दिए जाने के दिल्ली हाईकोर्ट फैसले को प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। ईडी ने शिवकुमार की जमानत रद्द करने की गुहार लगाई है। हालांकि कांग्रेसी नेता 23 अक्तूबर को ही जेल से रिहा हो चुके हैं। अपनी याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए ईडी ने कहा है कि हाईकोर्ट का फैसला सही नहीं है क्योंकि डीके शिवकुमार कांग्रेस के दिग्गज नेता हैं और वो गवाहों और सबूतों को प्रभावित कर सकते है। इसलिए उनकी जमानत रद्द की जानी...
J&K हाईकोर्ट ने कहा, भीख मांगने का अपराधीकरण सामाजिक निर्मितियों का परिणाम
एक महत्वपूर्ण फैसले में जम्मू और कश्मीर हाई कोर्ट ने शुक्रवार को भीख मांगने के अपराधीकरण को असंवैधानिक घोषित किया और जम्मू-कश्मीर के भिखारी निवारण अधिनियम, 1960 और जम्मू-कश्मीर भिखारी निवारण नियम, 1964 के प्रावधानों को समाप्त कर दिया। मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की पीठ ने अपने फैसले में कहा, "भीख मांगने का अपराधीकरण गरीबों को अपराधी मान लेने की पूर्वधारणा और आधारहीन रूढ़िबद्धता जैसे सामाजिक निर्मितियों का नतीजा है, जो इस बात को नजरअंदाज करता है कि गरीबों...
NDPS के तहत शिकायतकर्ता और जांच अधिकारी यदि एक ही व्यक्ति है तो क्या निष्प्रभाव हो जाएगा ? संविधान पीठ ने सुनवाई शुरू की
जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस विनीत सरन, जस्टिस एम आर शाह और जस्टिस एस रवींद्र भट की सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने गुरुवार को उस मामले की सुनवाई की जिसमें ये तय करना है कि नारकोटिक्स ड्रग्स और साइकोट्रोपिक पदार्थ अधिनियम (NDPS Act) के तहत जांच अधिकारी और शिकायतकर्ता यदि एक ही व्यक्ति है तो क्या ट्रायल निष्प्रभावी हो जाएगा। यह मामला 16.08.2018 को मोहनलाल बनाम पंजाब राज्य के मामले में दिए गए एक फैसले से उपजा है, जिसमें न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति आर बानुमति और...
जांच के हर पहलू पर मजिस्ट्रेट से आदेश लेने की आवश्यकता नहीं, सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जांच के हर पहलू के लिए मजिस्ट्रेट से आदेश लेने की आवश्यकता नहीं है। इस मामले में सीबीआई झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSP) द्वारा आयोजित संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करने के संबंध में एक प्राथमिकी (एफआईआर) की जांच कर रही थी। न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा कि एक व्यक्ति जो अभियुक्त है, उसके पास जांच के तरीके को चुनौती देने का कोई कारण नहीं है, जब तक कि यह जांच उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता या अधिकारों पर हमला नहीं करती। इसमें कहा गया...
सिब्बल ने कहा, कर्नाटक में जो हुआ वो संवैधानिक पाप था, सुप्रीम कोर्ट ने अयोग्य विधायकों की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा
कर्नाटक विधायकों की अयोग्यता मामले में सुनवाई के अंतिम दिन वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कर्नाटक विधानसभा के पूर्व स्पीकर के लिए बहस की। उन्होंने कहा, "सदन के अंदर जो चल रहा है, वह स्पीकर का व्यवसाय है। अदालत को इस पर ध्यान नहीं देना चाहिए। ... यदि इन विधायकों को अब चुनाव लड़ने की अनुमति दी जाती है तो पूरी कवायद निरर्थक होगी। इसके फिर क्या मायने रह जाएंगे। इसके बाद यह इसी तरह के व्यवहार को प्रोत्साहित करेगा अगर अयोग्य घोषित किए गए लोगों को बाद में नए चुनाव में भाग लेने की अनुमति दी जाए।" ...
अगर पीड़ित के साथ समझौता धमकी और दबाव डालकर किया गया है तो बलात्कार का केस समाप्त नहीं किया जा सकता, पढ़िए सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईएकोर्ट के आदेश को पलट दिया है, जिसमें बलात्कार के मामले को आरोपी और पीड़ित के बीच 'समझौता' दर्ज करके समाप्त कर दिया था। लड़की ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उसके प्रबंधक ने उसके साथ उसकी नग्न तस्वीर प्रकाशित करने की धमकी देकर उसके साथ बलात्कार किया था। आईपीसी की धारा 376, 499 और 506 (2) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोपियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कहा कि इस केस के संबंध में उनके बीच एक लिखित समझौता हुआ। इस पर ध्यान देते हुए, उच्च...
निजी अस्पतालों में मानसिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के एकसमान उपचार के लिए पर्याप्त दिशा-निर्देश : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि निजी अस्पतालों में मानसिक रूप से विकलांग व्यक्तियों को एक समान (बिना भेदभाव) उपचार सुनिश्चित कराने के लिए दिल्ली सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय के पास पर्याप्त दिशा-निर्देश और गाइड लाइन हैं। दिल्ली सरकार द्वारा एक याचिका के संबंध में दायर जवाबी हलफनामे को देखते हुए, न्यायमूर्ति डी.एन पटेल और न्यायमूर्ति हरि शंकर की खंडपीठ ने कहा कि इस मुद्दे से निपटने के लिए पहले से ही दिशा निर्देश दिए जा चुके हैं। ऐसे में अदालत द्वारा इस मामले में और नए निर्देश जारी करने की...
चिदंबरम को जमानत देने पर CBI ने पुनर्विचार याचिका के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया कहा, रिकॉर्ड में खामी
सीबीआई ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को जमानत देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल की।। सीबीआई ने कहा कि 22 अक्टूबर के फैसले के रिकॉर्ड में कुछ त्रुटियां सामने आई हैं। अधिवक्ता रजत नायर के माध्यम से दायर समीक्षा याचिका में कहा गया है, "आदेश के रिकॉर्ड में कुछ त्रुटियां सामने आई हैं, जिससे एसएलपी के परिणाम में परिवर्तन होगा।" सीबीआई ने कहा कि समीक्षा याचिका दायर की गई है क्योंकि 22...




















